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छत्तीसगढ़

अमित जोगी बोले- BJP वाले प्रतिमा पॉलिटिक्स मत कीजिए

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एक महीने में प्रतिमा पुर्नस्थापित नहीं हुई, तो क्रेन से सीएम-हाउस लाकर मुख्यमंत्री से कराऊंगा अनावरण

रायपुर,एजेंसी। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में अजीत जोगी की प्रतिमा हटाने के विरोध में जेसीसी-जे के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने रायपुर स्थित अपने आवास में प्रेस कांफ्रेंस की। उन्होंने प्रतिकात्मक विरोध स्वरूप हाइड्रा क्रेन में पोस्टर लगाकर मीडिया से चर्चा की।

अमित जोगी ने कहा कि, मैं भाजपा के सम्माननीय लोगों से भी अपील करता हूं कि ये “प्रतिमा पॉलिटिक्स” मत कीजिए। कुछ मुद्दे पॉलिटिक्स से नहीं एथिक्स से हल किए जाते हैं। अगर जोगी जी की प्रतिमा एक महीने के अंदर ज्योतिपुर चौक पर पुर्नस्थापित नहीं की गई, तो बड़ा आंदोलन होगा।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही क्षेत्र के लोग जोगी जी की उसी प्रतिमा को क्रेन में रायपुर मुख्यमंत्री निवास में लाएंगे और मुख्यमंत्री से आग्रह करेंगे की अब आप प्रतिमा का अनावरण कर दीजिए, क्योंकि आप ही ने तो हम लोगों से कहा था कि, आप गौरेला आएंगे और प्रतिमा का अनावरण करेंगे।

अमित जोगी ने कहा कि एक महीने में अजीत जोगी की प्रतिमा स्थापित नहीं की गई तो इसी क्रेन में अपने पिता की प्रतिमा मुख्यमंत्री निवास में बाहर लाऊंगा और सीएम से लोकापर्ण का आग्रह करुंगा।

अमित जोगी ने कहा कि एक महीने में अजीत जोगी की प्रतिमा स्थापित नहीं की गई तो इसी क्रेन में अपने पिता की प्रतिमा मुख्यमंत्री निवास में बाहर लाऊंगा और सीएम से लोकापर्ण का आग्रह करुंगा।

2 हफ्ते बाद भी एक्शन नहीं लिया गया

अमित जोगी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर क्रेन से लटकते हुए एक CCTV फुटेज का पोस्टर दिखाया। जिसमें दिख रहे क्रेन की ओर इशारा करते हुए अमित जोगी ने बताया कि, इसी क्रेन से मूर्ति उखाड़ा गया। फुटेज में प्रतिमा भी क्रेन के सामने दिख रही है।

अमित ने कहा कि, 25 मई की रात मानसिक दिवालियापन से ग्रसित कुछ लोगों ने पहले शराब पी, फिर ज्योति चौक पर लगे प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री अजित जोगी की प्रतिमा उखाड़कर फेंक दी। 2 हफ्ते होने के बावजूद भी इस मामले में अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया। न जोगी जी की प्रतिमा ज्योतिपुर चौक गौरेला में पुर्नस्थापित हो पाई और न ही दोषी पकड़े गए।

ये अपराधी निडर होकर खुल्ले घूम रहे हैं। पुलिस-प्रशासन को छोड़कर पूरी दुनिया को दिख रहा हैं। पिछले हफ़्ते स्वास्थ्य मंत्री के साथ पेंड्रा गेस्ट हाउस में बैठकर यह अपराधी चाय पी रहे थे।

अमित जोगी बोले- अजीत जोगी की प्रतिमा को उखाड़कर फेंकने वाले दोषियों को सरकार का संरक्षण।

अमित जोगी बोले- अजीत जोगी की प्रतिमा को उखाड़कर फेंकने वाले दोषियों को सरकार का संरक्षण।

मूर्ति हटाने वालों को अमित जोगी ने भेजी किताब

अमित जोगी ने कहा कि, मेरे पिता की मूर्ति को जिन तीन लोगों ने हटाया है। मैं उन्हें माफ करता हूं और उन्हें मैं अजीत जोगी जी की किताब को भेंट करता हूं। अमित जोगी ने कहा कि, गौरेला के चीफ म्युनिसिपल ऑफिसर नारायण साहू, विश्व हिन्दू परिषद के उपाध्यक्ष प्रदीप जायसवाल और जिसने क्रेन में मूर्ति हटाई दीपक शर्मा को किताब भेज रहा हूं।

जिन अपराधियों ने जोगी जी की प्रतिमा को उखाड़ कर फेंका है, मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से माफ करता हूं और उनसे आग्रह करता हूं कि “जोगी जी को पढ़ो” और उन्हें जानो। क्योंकि जो जोगी जी को जानता है, वो जोगी जी को मानता है। अमित ने कहा कि पूरे जीवन, संघर्ष का सैलाब जिनकी “आत्मा” को डिगा नहीं पाया, तुम उनकी “प्रतिमा” को उखाड़ने चले हो।

मुखर्जी की एक नहीं एक लाख मूर्ति लगाए, पर पोर्ते और जोगी का एक-एक मूर्ति भी लगा दें

अमित जोगी ने कहा कि, मैं मुख्यमंत्री और दोनों उप मुख्यमंत्रियों से पूछना चाहता हूं। आप तीनों की निजी भूमि में क्या कोई और आकर प्रतिमा लगा सकता है? किस क़ानून और किस नियम से नगर पालिका गौरेला ने जोगी परिवार के आधिपत्य की भूमि पर जोगी जी की प्रतिमा नहीं लगने दे रहे हैं ?

क्या नगर पालिका गौरेला एक अधिकारी के अहंकार पर चलेगा या संविधान और कानून के आधार पर।हम तो चाहते हैं कि, जोगी जी और मुखर्जी जी दोनों की प्रतिमा लगे, लेकिन उनकी अपनी उपयुक्त जगह पर, वैधानिक ज़मीन पर। आप मुखर्जी जी की एक नहीं एक लाख प्रतिमा लगाइए, लेकिन गौरेला में तो कम से कम पोर्ते और जोगी जी की एक-एक प्रतिमा स्थापित कीजिए।

मूर्ति हटाने वालों को अमित जोगी ने भेजी किताब।

मूर्ति हटाने वालों को अमित जोगी ने भेजी किताब।

ज्योतिपुर चौक की भूमि परिवार के स्वामित्व की

पूर्व विधायक अमित जोगी ने स्पष्ट किया कि, ज्योतिपुर चौक की भूमि उनके परिवार के स्वामित्व में है। यह जमीन 1932 में स्वर्गीय मॅजेस ने खरीदी थी। उन्होंने यहां अकाल राहत के लिए एक कुआं बनवाया था। 2020 में इस भूमि का पावर ऑफ अटॉर्नी अमेरिकी संस्था द्वारा अतुल आर्थर को दिया गया।

सोसाइटी ने जोगी की प्रतिमा स्थापित करने की दी थी अनुमति

2021 में अजीत जोगी के निधन के बाद, अतुल आर्थर और संबंधित सोसाइटी ने इस भूमि पर जोगी की प्रतिमा और उद्यान स्थापित करने की अनुमति दी थी। तत्कालीन विधायक डॉ. रेणु जोगी ने अपनी विधायक निधि से 83.5 लाख रुपए दिए थे। यह राशि चबूतरे पर अजीत जोगी की आदमकद प्रतिमा स्थापना के लिए थी।

गौरेला नगर पालिका को केवल चबूतरा और उद्यान निर्माण की जिम्मेदारी दी गई थी। अमित जोगी ने भाजपा जिला अध्यक्ष के आवेदन को गैरकानूनी बताया है। उन्होंने जिला प्रशासन से अजीत जोगी की प्रतिमा का तत्काल लोकार्पण करने की मांग की है।

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छत्तीसगढ़

जांजगीर-चांपा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जांजगीर-चांपा जिले में 295 करोड़ रुपये से अधिक के 341 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन

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विकास कार्यों से आमजन की सुविधाओं का होगा विस्तार – मुख्यमंत्री साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जांजगीर-चांपा जिले में 295 करोड़ रुपये से अधिक के 341 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन
 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जांजगीर-चांपा जिले में 295 करोड़ रुपये से अधिक के 341 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन

जांजगीर-चांपा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पोंड़ी (राछा) में आयोजित कार्यक्रम में जिलेवासियों को विकास की बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने 295 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के 341 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 70.10 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 159 कार्यों का लोकार्पण तथा 224.90 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 182 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। इन विकास कार्यों के माध्यम से सड़क, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य, नगरीय अधोसंरचना तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार होगा और जिले के समग्र विकास को नई गति मिलेगी। 

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधिविधान से पूजा-अर्चना कर विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया तथा बटन दबाकर पूर्ण हो चुके कार्यों का लोकार्पण कर उन्हें जनता को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज का दिन जांजगीर-चांपा जिले के लिए ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि जांजगीर चांपा जिले को लगभग 295 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात मिल रही है, जिससे क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा और जनजीवन अधिक सुगम बनेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र के संतुलित एवं समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। सड़क, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य और अधोसंरचना से जुड़े कार्यों के माध्यम से लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से जिले में विकास की नई संभावनाएं सृजित होंगी तथा आमजन को सीधे लाभ मिलेगा।

’विभिन्न विभागों के कार्य शामिल’

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा लोकार्पित 159 कार्यों में जल संसाधन, वन, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, सीजीएमएससी, नगरीय प्रशासन तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्य शामिल हैं। वहीं भूमिपूजन के 182 कार्यों में जल संसाधन विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, लोक निर्माण विभाग, सीजीएमएससी, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल, नगरीय प्रशासन तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के महत्वपूर्ण विकास कार्य शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्य केवल निर्माण नहीं होते, बल्कि वे लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनते हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है और इसी सोच के साथ प्रदेश में विकास एवं जनकल्याण के कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े तथा छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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कोरबा

15 जून को छोटे खातेदारों को रोजगार ,पुनर्वास एवं भू विस्थापितों की समस्याओं को लेकर जन आक्रोश रैली के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव करेगी किसान सभा,

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भू विस्थापितों की रैली में शामिल होंगे लोकसभा सांसद अमराराम

आंदोलन को सफल बनाने के लिए पोस्टर के साथ गांव-गांव माइक प्रचार ,बैठक के साथ घर-घर पर्चे वितरण कर भू विस्थापितों को किया जा रहा एकजुट

आंदोलन में कोरबा के चारों परियोजना के साथ रायगढ़ और सरगुजा संभाग के भी भू विस्थापित होंगे शामिल

कोरबा। छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेतृत्व में छोटे खातेदारों को रोजगार देने,भूविस्थापितों के लंबित रोजगार प्रकरणों के निराकरण,पूर्व में अधिग्रहित जमीन की वापसी,पट्टा,आंशिक अधिग्रहण पर रोक लगाने,पेयजल की व्यवस्था करने,बसावट एवं खनन प्रभावित गांवों की अन्य समस्याओं को लेकर 15 जून को जन आक्रोश रैली निकालकर कलेक्ट्रेट घेराव की घोषणा की है किसान सभा द्वारा शुरू किया गया आंदोलन भू विस्थापितों का जन सैलाब बनकर कोरबा की सड़कों पर दिखने वाला है कई भू विस्थापित संगठन इस घेराव में शामिल हो रहे है। जिला प्रशासन से भी कई बार हस्तक्षेप कर समस्याओं के समाधान की मांग की गई लेकिन प्रशासन ने समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया इस लिए विस्थापितों ने किसान सभा के नेतृत्व में अब आर पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांव गांव में बैठक कर पर्चे वितरण के साथ भू विस्थापितों को एकजुट भी किया जा रहा है और किसान सभा ने आंदोलन को सफल बनाने के लिए पोस्टर,पर्चे के साथ गांव गांव माइक प्रचार कर भू विस्थापितों को संगठित करने का काम कर रही है। कलेक्ट्रेट घेराव और जन आक्रोश रैली को लेकर भू विस्थापित संगठनों के साथ आम जनता का व्यापक जन समर्थन मिल रहा है।

जन आक्रोश रैली और कलेक्ट्रेट घेराव से पहले घंटाघर में सभा आयोजित होगी जिसे प्रमुख रूप से माकपा के लोकसभा सांसद और किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कामरेड अमराराम,किसान सभा के राष्ट्रीय नेता अवधेश कुमार, आदिवासी एकता महासभा के प्रदेश अध्यक्ष और सचिव सुरेंद्र लाल सिंह एवं बाल सिंह सहित किसान सभा के प्रदेश के नेता और भू विस्थापित संगठनों के नेता संबोधित करेंगे।

जनआक्रोश रैली और कोरबा कलेक्टर घेराव लोकसभा के सांसद अमराराम के नेतृत्व में होगा

कलेक्ट्रेट घेराव को सफल बनाने के लिए गांव गांव में नुक्कड़ सभा,घर घर पर्चे वितरण एवं भू विस्थापितों को एकजुट करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है आंदोलन में कोरबा जिले के कोरबा,दीपका,गेवरा,कुसमुंडा के साथ रायगढ़ और सरगुजा संभाग के भी प्रभावित शामिल होंगे।

किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि एसईसीएल के कुसमुंडा,गेवरा,दीपका,कोरबा सभी क्षेत्रों में छोटे खातेदारों को रोजगार देने,भू विस्थापितों के लंबित रोजगार,जमीन वापसी,पट्टा,बसावट एवं प्रभावित गांव की मूलभुत समस्याओं के निराकार के लिए जिला प्रशासन और एसईसीएल के अधिकारियों द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है जिससे भू विस्थापितों के सब्र का बांध टूट चुका है। 15 जून को कोरबा की सड़को पर भू विस्थापितों। का आक्रोश जन सैलाब के रूप में दिखने वाला है। प्रबंधन और प्रशासन पहले एकजुट था अब सभी क्षेत्रों के भू विस्थापित अपने अधिकार को लेने के लिए एकजुट हो रहे है। किसानों की जमीन का अधिग्रहण जिला प्रशासन द्वारा किया जाता है और उद्योगों को जमीन नियमों के पालन के तहत सौंपा जाता है लेकिन उद्योग जमीन तो ले लेती है लेकिन विस्थापित जमीन अधिग्रहण के बाद रोजगार और पुनर्वास के लिए भटकते हैं जिला प्रशासन को जमीन अधिग्रण के साथ विस्थापित किसानों के अधिकार को दिलाने के लिए भी सामने आना होगा।

किसान सभा नेता जवाहर सिंह कंवर, दीपक साहू,जय कौशिक,पवन यादव यादव,अमरजीत कंवर आदि ने भू-विस्थापितों की समस्याओं के लिए जिला प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन दोनों को ही जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि कुसमुंडा में जमीन के बदले रोजगार की मांग को लेकर 1685 दिनों से धरना प्रदर्शन चल रहा है और समस्याओं की ओर कई बार प्रशासन और प्रबंधन का ध्यान आकर्षित किया गया है, लेकिन भू-विस्थापितों की समस्याओं के निराकरण के प्रति कोई भी गंभीर नहीं है।

भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के अध्यक्ष रेशम यादव, सचिव दामोदर श्याम ने कहा कि जिनकी जमीन एसईसीएल ने ली है, उन्हें बिना किसी शर्त के रोजगार दिया जाये क्योंकि जमीन ही उनके जीने का एकमात्र सहारा थी जबरन नए नए नियम बनाना बंद किया जाए । छोटे बड़े खातेदार के नाम पर किसानों को बांटने का काम बंद किया जाए। 15 जून को चारों क्षेत्र से पूरे परिवार सहित हजारों भू-विस्थापित कलेक्ट्रेट घेराव में शामिल होंगे।
कलेक्ट्रेट घेराव में कई भू विस्थापित संगठन शामिल होंगे।


प्रमुख मांगे´

1) छोटे खातेदार के नाम पर भू विस्थापितों के रोके गए रोजगार में तत्काल रोजगार दो ।एसईसीएल में जिन किसानों की जमीन अधिग्रहण की गई है और की जा रही है हर खाते में स्थायी रोजगार प्रदान किया जाये।

2) बांगों बांध के जलाशय के ठेका प्रणाली समाप्त किया जाए।और विस्थापित आदिवासी एवं स्थानीय मछुवारा समितियों को मछली पकड़ने का अधिकार दिया जाए।

3) वन टाइम सेटलमेंट कर रोजगार के पुराने लंबित मामलो का जल्द से जल्द निराकरण किया जाये | अर्जन के बाद जन्म वाले प्रकरण और एक खाता एक रोजगार नियम के विरुद्ध अलग अलग खाता का सयोंजन के कारण रोजगार से वंचितों को रोजगार प्रदान किया जाये |

4) बसावट के नाम पर 3 लाख और 15 लाख रुपए के नाम से भेदभाव बंद किया जाए और सभी क्षेत्रों के भू विस्थापितों को एक समान बसावट की 15 लाख राशि दी जाए।

5) शासन की योजनाओं से प्राप्त पट्टों एवं शासकीय और वन भूमि पर बने मकानों का मुआवजा एवं सौ प्रतिशत सोलिशियम और बसाहट की पात्रता का लाभ दिया जाये ।

6) पुराने अर्जित भूमि को मूल खातेदारों को वापस करायी जाये | अधिग्रहण के बाद जिन जमीनों पर 40 सालों में भी कोल इंडिया ने भौतिक कब्जा नहीं किया है और जिन जमीनों पर किसान ही पीढ़ियों से काबिज हैं उन्हें किसानों के नाम वापस किया जाए।

7)अर्जित गाँव से विस्थापन से पूर्व उनके पुनर्वास स्थल की सर्वसुविधायुक्त व्यवस्था किया जाये |

8) एसईसीएल में आऊट सोर्सिंग से होने वाले कार्यों में भू विस्थापितों एवं प्रभावित गांव के बेरोजगारों को 100% रोजगार में रखा जाये।

9) प्रभावित एवं पुनर्वास गांव की महिलाओं को स्वरोजगार योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाये।

10) पुनर्वास गांव में कबीज भू विस्थापित परिवार को पूर्ण काबिज भूमि का पट्टा दिया जाये।

11) डिप्लेयरिंग प्रभावित गांव सुराकछार बस्ती में किसानों को हुये नुकसान का क्षतिपूर्ति मुआवजा प्रदान किया जाये।

12) पूर्व में विस्थापित ग्रामों के भू विस्थापित जिन्हें बसावट नहीं दिया गया है उन्हें बसावट प्रदान किया जाए।

13) डंपिंग की मिट्टी को वापस खोदे गए खदान में भरा जाए इस डंपिंग के मिट्टी का प्रयोग दूसरे कार्यों में ना किया जाए।

14) एसईसीएल कुसमुंडा द्वारा गेवरा का अधिग्रहण 2018 में हो चुका है लेकिन अभी तक वहां पर किसानों को मुआवजा,रोजगार आदि की सुविधा नहीं दी गई है उन्हें तत्काल रोजगार मुआवजा दिया जाए नहीं तो पूर्व में जारी अधिग्रहण रद्द किया जाए।

15) खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था किया जाए।
16) आंशिक अधिग्रहण पर रोक लगाई जाए।

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कोरबा

जिला पंचायत कोरबा की सामान्य सभा का हुआ आयोजन:जनप्रतिनिधियों ने जनहित के मुद्दे उठाए

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बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति की हुई समीक्षा

कोरबा। जिला पंचायत कोरबा के सभाकक्ष में शुक्रवार को जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ.पवन कुमार सिंह ने की। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दिनेश कुमार नाग सहित जिला पंचायत सदस्यगण एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

सामान्य सभा की बैठक में शिक्षा, सहकारिता, उद्योग विभाग तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से संबंधित कार्यों एवं प्रगति की समीक्षा की गई। जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न विकास कार्यों तथा जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के सुझाव दिए।

बैठक के दौरान जिला पंचायत सदस्यों ने कृषि क्षेत्र से जुड़े विषयों पर विशेष चर्चा करते हुए लघु एवं सीमांत किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने तथा आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए जिले में खाद, उर्वरकों के पर्याप्त भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

जिला स्तरीय अधिकारियों ने बैठक में अपने-अपने विभागों द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं, उनकी प्रगति तथा हितग्राहियों को मिल रहे लाभों की जानकारी प्रस्तुत की। अध्यक्ष डॉ.पवन कुमार सिंह ने विभागीय अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती निकिता मुकेश जायसवाल, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रेणुका राठिया, श्रीमती शांति मरावी, श्रीमती अनंत सुष्मिता कमलेश, श्रीमती सावित्री अजय कंवर, श्रीमती सुषमा रवि रजक, विनोद कुमार यादव (अधिवक्ता), श्रीमती माया रूपेश कंवर, कौशल नेटी, विद्वान सिंह मरकाम, उपसंचालक पंचायत मिथलेश किसान, जिला पंचायत के लेखाधिकारी राजेंद्र यादव, सहायक परियोजना अधिकारी श्रीमती अमिता साहू सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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