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छत्तीसगढ़

रायगढ़ में ट्रेलर ने बाइक सवार को मारी टक्कर, मौत

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सिर पर गंभीर चोट लगने से नाबालिग की गई जान, दूसरे से मांगी थी बाइक

रायगढ़,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में ट्रेलर ने बाइक सवार नाबालिग को जबरदस्त टक्कर मार दी। जिससे उसके सिर पर गंभीर चोट लगने से मौके पर मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजवा दिया है। मामला खरसिया चौकी क्षेत्र का है।

जानकारी के मुताबिक, चपले निवासी उदय बैरागी (17) रविवार को घर से पैदल निकलकर गांव के पोल्ट्री फॉर्म के पास किसी काम से गया था। कुछ देर बाद वो महेश पटेल की बाइक मांगकर चलाते हुए घर की ओर आ रहा था। इसी दौरान नंदेली रोड चपले के बायंग चौक के पास तेज रफ्तार ट्रेलर ने उसे टक्कर मार दी।

खरसिया चौकी क्षेत्र के चपले रोड पर हुआ सड़क हादसा।

खरसिया चौकी क्षेत्र के चपले रोड पर हुआ सड़क हादसा।

पुलिस को दी गई सूचना

घटना के बाद आसपास के लोगों की काफी भीड़ इकट्ठा हो गई। मामले की सूचना उदय के परिजन और पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा।

आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज

घटना के बाद उदय के बड़े भाई गितेश कुमार बैरागी ने खरसिया चौकी पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ 112-MOT, 183(1)- MOT, 106(1)- BNS के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूलों में रोजाना गायत्री, भोजन और दूसरे मंत्रों का पाठ अनिवार्य किया, कांग्रेस ने जताई आपत्ति

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे 2026-27 शैक्षणिक सत्र से रोजाना सांस्कृतिक, शैक्षिक व मूल्यों पर आधारित गतिविधियां आयोजित करें। अधिकारियों ने बताया कि इसमें इनमें राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ-साथ गायत्री, दीप, भोजन और अन्य मंत्रों का पाठ भी शामिल होगा। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद छात्रों के बौद्धिक विकास को बढ़ावा देना और उन्हें भारतीय संस्कृति व परंपराओं से परिचित कराना है।

इस कदम की विपक्षी दल कांग्रेस ने आलोचना की है और भाजपा सरकार पर स्कूलों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एजेंडा थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से 12 जून को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी आदेश के अनुसार स्कूल अब दिन में तीन अलग-अलग समय पर अनिवार्य गतिविधियां आयोजित करेंगे। उन्होंने कहा कि नए निर्देश के तहत, सुबह प्रार्थना में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और महान हस्तियों की जीवनियों का पाठ शामिल होगा।

अधिकारी ने बताया कि मध्याह्न भोजन के दौरान छात्र सामूहिक रूप से भोजन मंत्र का पाठ करेंगे, जबकि शाम को स्कूल की छुट्टी के दौरान राज्य गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का पाठ किया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि इस पहल का मकसद छात्रों में देशभक्ति, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना है, साथ ही भारतीय परंपराओं और राष्ट्रीय आदर्शों के साथ उनके जुड़ाव को मजबूत करना है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे और तय निर्देश का उल्लंघन करने वाले स्कूल प्रबंधन या प्राचार्य के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।

कांग्रेस ने साधा निधाना

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने शैक्षणिक संस्थान में धार्मिक मंत्रों का पाठ अनिवार्य करने की ज़रूरत पर सवाल उठाया।शुक्ला ने कहा, “राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और राज्य गीत का पाठ करना उचित है। लेकिन गायत्री मंत्र, दीप मंत्र, सरस्वती मंत्र और भोजन मंत्र को अनिवार्य क्यों किया गया है? सरकार स्कूलों को सरस्वती शिशु मंदिरों में बदलने के लिए दृढ़ संकल्पित दिखती है। सरकारी स्कूलों में आरएसएस का एजेंडा थोपना गलत है।”

उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में सभी धर्मों, जातियों और समुदायों के छात्र पढ़ते हैं और कुछ खास धार्मिक मंत्रों का पाठ अनिवार्य करने से दूसरे धर्मों के लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।शुक्ला ने कहा, “भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और हमारा संविधान सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की गारंटी देता है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा किसी खास धर्म पर आधारित नहीं होनी चाहिए।”

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छत्तीसगढ़

जगदलपुर : बस्तर में पुनर्वास की नई मिसाल:पुनर्वासित नक्सलियों के लिए  निःशुल्क रिवर्स वासेक्टॉमी कैंप, 73 सफल सर्जरी

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पुनर्वासित नक्सलियों के लिए  निःशुल्क रिवर्स वासेक्टॉमी कैंप, 73 सफल सर्जरी

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में, विशेष रूप से जगदलपुर के महारानी अस्पताल में, मुख्यधारा में लौटे (पुनर्वासित) माओवादियों के लिए मुफ्त रिवर्स वासेक्टॉमी (रिवर्स नसबंदी) शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन जटिल सर्जिकल शिविरों का उद्देश्य उन पूर्व नक्सलियों को माता-पिता बनने का अवसर प्रदान करना है, जिन्हें प्रतिबंधित संगठनों द्वारा जबरन नसबंदी (नसबंदी शिविरों) के लिए मजबूर किया गया था।

पुनर्वासित नक्सलियों के लिए  निःशुल्क रिवर्स वासेक्टॉमी कैंप, 73 सफल सर्जरी

    बस्तर संभाग में मुख्यधारा में लौट रहे पुनर्वासित नक्सलियों को सामान्य और खुशहाल पारिवारिक जीवन प्रदान करने की दिशा में जिला प्रशासन और बस्तर पुलिस ने एक ऐतिहासिक एवं मानवीय पहल की है। जगदलपुर के ऐतिहासिक महारानी अस्पताल में पुनर्वासित लाभार्थियों के लिए विशेष निःशुल्क रिवर्स वासेक्टॉमी (रीकैनालाइजेशन) सर्जिकल कैंप का सफल आयोजन किया गया।  यह शिविर बस्तर जिला प्रशासन, बस्तर पुलिस और यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (वेस्ट जोन) के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया, जिसमें देश के प्रतिष्ठित यूरोलॉजिस्ट एवं माइक्रोसर्जरी विशेषज्ञों ने अपनी सेवाएं दीं।

73 सफल सर्जरी, पुनर्वास को मिली नई दिशा

    यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. राजेश कुकरेजा ने बताया कि इस मानवीय अभियान के प्रथम चरण में 33 तथा द्वितीय चरण में 40 सफल सर्जरी की गईं। इस प्रकार दो चरणों में कुल 73 सफल रिवर्स वासेक्टॉमी ऑपरेशन संपन्न हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह अत्यंत जटिल माइक्रोसर्जरी है, जिसकी सफलता दर सामान्यतः सीमित होती है। ऐसे में बस्तर जैसे सुदूर क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर सफल ऑपरेशन चिकित्सा सेवा और मानवीय संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

देशभर के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दी सेवाएं

    शिविर में इंदौर से डॉ. राजेश कुकरेजा, मुंबई से डॉ. निनाद तांबोली एवं डॉ. पार्थ मानेक, पुणे से डॉ. सागर भालेराव एवं डॉ. राहुल पाटिल, नांदेड़ से डॉ. अभिषेक भालेराव और रायपुर से डॉ. राहुल कपूर और डॉ. घनश्याम हटवार सहित कई विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्वैच्छिक सेवाएं प्रदान कीं।

पहले भी मिली सफलता, गूंजी हैं किलकारियां
 
    बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने कहा कि इस प्रकार के प्रयासों से पहले भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और कई आत्मसमर्पित परिवारों के घरों में बच्चों की किलकारियां गूंज चुकी हैं। उन्होंने इसे पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

दो माह की बच्ची का पिता बना पूर्व नक्सली

    बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने एक प्रेरणादायक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि हाल ही में एक पुनर्वासित नक्सली, जिसकी पहले रिवर्स वासेक्टॉमी की गई थी, वह वर्तमान में दो माह की बच्ची का पिता बना है। उन्होंने कहा कि यह इस पूरी मुहिम की सबसे बड़ी सफलता और मानवीय पुनर्वास का जीवंत प्रमाण है। पहले ऐसी जटिल सर्जरी के लिए मरीजों को महानगरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब बस्तर के महारानी अस्पताल में ही यह सुविधा उपलब्ध होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।

विशेषज्ञों और कर्मचारियों का हुआ सम्मान

    कैंप के सफल आयोजन पर महारानी अस्पताल प्रबंधन एवं बस्तर पुलिस द्वारा सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों को बस्तर की कला एवं संस्कृति से जुड़े स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं शिविर में योगदान देने वाले अस्पताल कर्मियों और जमीनी कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया।

    कार्यक्रम के अंत में सीएमएचओ डॉ. संजय बसाक तथा सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद ने सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रशासनिक अधिकारियों, पैरामेडिकल स्टाफ और पुलिस विभाग का आभार व्यक्त किया। यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया ने भी बस्तर पुलिस और जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पुनर्वास पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे अभियानों में सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। यह पहल केवल चिकित्सा सेवा नहीं, बल्कि हिंसा से प्रभावित जीवन में नई उम्मीद, परिवार जीवन और भविष्य लौटाने का एक संवेदनशील प्रयास बनकर उभरी है।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर चमका छत्तीसगढ़ की संस्कृति

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इंडिया टुडे टूरिज्म समिट एंड अवॉर्ड्स 2026 में मिला ‘कल्चरल टूरिज्म विनर’ अवार्ड

गोवा में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने किया सम्मानित, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने ग्रहण किया अवॉर्ड

लोक संस्कृति, जनजातीय विरासत और पर्यटन नवाचारों को मिली राष्ट्रीय पहचान

पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर चमका छत्तीसगढ़ की संस्कृति

रायपुर। छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन क्षमता का परचम लहराया है। गोवा में आयोजित प्रतिष्ठित ’‘इंडिया टुडे टूरिज्म समिट एंड अवॉर्ड्स-2026’’ में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड को ’‘कल्चरल टूरिज्म विनर’’ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अद्वितीय जनजातीय परंपराओं, स्थानीय लोककला और पर्यटन विकास के क्षेत्र में किए गए नवाचारों को मिली राष्ट्रीय मान्यता है। केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने यह सम्मान प्रदान किया, जिसे राज्य की ओर से पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने ग्रहण किया। इस अवसर पर गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत सहित बिहार, तेलंगाना, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और गोवा के पर्यटन मंत्री तथा देशभर के पर्यटन विशेषज्ञ और उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे।

जीवंत संस्कृति और जनजातीय विरासत से बनी छत्तीसगढ़ की पहचान

         यह सम्मान छत्तीसगढ़ द्वारा अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, कला, हस्तशिल्प, लोक उत्सवों और सांस्कृतिक धरोहरों को पर्यटन विकास से जोड़ने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण सफलता है। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ ने सांस्कृतिक पर्यटन को राज्य की पर्यटन नीति के केंद्र में रखकर जिस तरह योजनाबद्ध ढंग से कार्य किया है, उसने देशभर का ध्यान आकर्षित किया है। यही कारण है कि आज छत्तीसगढ़ केवल प्राकृतिक सौंदर्य और जलप्रपातों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी जीवंत संस्कृति और जनजातीय विरासत के लिए भी तेजी से पहचान बना रहा है।

छत्तीसगढ़ का पर्यटन मॉडल चर्चा का केंद्र रहा

          समिट के दौरान आयोजित विशेष पैनल चर्चा ’‘हिडन इंडिया हाउ इमर्जिंग डेस्टिनेशंस आर ड्राइविंग डोमेस्टिक टूरिज्म ग्रोथ’’ में भी छत्तीसगढ़ का पर्यटन मॉडल चर्चा का केंद्र रहा। इस सत्र में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा, पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने राज्य की पर्यटन उपलब्धियों, नवाचारों, निवेश संभावनाओं और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से विचार रखे। पैनल चर्चा में बताया गया कि किस प्रकार छत्तीसगढ़ ने स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए पर्यटन को सांस्कृतिक संरक्षण और आर्थिक विकास का माध्यम बनाया है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि

          पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने अवॉर्ड प्राप्त करने के बाद कहा कि यह सम्मान पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य की लोक संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, कला, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल पर्यटन स्थलों का विकास करना ही नहीं, बल्कि पर्यटन को स्थानीय लोगों की आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनाना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत सहित पूरी टीम का योगदान

          श्री अग्रवाल ने कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की पूरी टीम, पर्यटन उद्योग से जुड़े हितधारकों, कलाकारों, शिल्पकारों और स्थानीय समुदायों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। मैं इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर सभी प्रदेशवासियों, पर्यटन विभाग तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की पूरी टीम को हार्दिक बधाई देता हूं। यह सम्मान हमें पर्यटन विकास के क्षेत्र में और अधिक उत्साह तथा प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगा।

’‘कल्चरल टूरिज्म विनर’’ अवार्ड राज्य की बढ़ती पर्यटन पहचान का प्रतीक

        ’इंडिया टुडे टूरिज्म समिट एंड अवॉर्ड्स’ देश के सबसे प्रतिष्ठित पर्यटन आयोजनों में से एक है। इस मंच पर पर्यटन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्यों, संस्थानों और पर्यटन परियोजनाओं को सम्मानित किया जाता है। साथ ही, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को पर्यटन विकास की चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार-विमर्श का अवसर भी मिलता है। ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर छत्तीसगढ़ को ’‘कल्चरल टूरिज्म विनर’’ के रूप में सम्मानित किया जाना राज्य की बढ़ती पर्यटन पहचान का प्रतीक है।

छत्तीसगढ़ ने सांस्कृतिक पर्यटन का विकसित किया विशिष्ट मॉडल 

         छत्तीसगढ़ ने सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में जो विशिष्ट मॉडल विकसित किया है, वह देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। बस्तर की जनजातीय संस्कृति, सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहर, भोरमदेव मंदिर समूह, चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे विश्वस्तरीय प्राकृतिक पर्यटन स्थल, पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक संगीत और लोक नृत्य राज्य की पर्यटन पहचान को विशिष्ट बनाते हैं। इन सभी को योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन परिपथों से जोड़कर राज्य ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने कलाकारों, शिल्पकारों और जनजातीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने का कार्य

          छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और जनजातीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में भी लगातार कार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार पर्यटन स्थलों पर बेहतर सुविधाओं के विकास, डिजिटल प्रचार-प्रसार, सामुदायिक पर्यटन और सांस्कृतिक आयोजनों के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। इसका सकारात्मक परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने लगा है।

छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण भूमिका

         इस उपलब्धि पर पर्यटन विभाग, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड, पर्यटन उद्योग से जुड़े हितधारकों तथा प्रदेशवासियों में हर्ष का वातावरण है। यह सम्मान राज्य में पर्यटन निवेश, पर्यटकों की संख्या और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देगा। साथ ही, छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अग्रणी सांस्कृतिक पर्यटन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी

        राष्ट्रीय मंच पर मिला यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि, पर्यटन संभावनाओं और दूरदर्शी पर्यटन नीति की बड़ी स्वीकृति है। यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में राज्य को भारत के अग्रणी सांस्कृतिक पर्यटन गंतव्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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रायगढ़ में ट्रेलर ने बाइक सवार को मारी टक्कर, मौत

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कटघोरा

टोल प्लाजा की अव्यवस्था के खिलाफ युवा कांग्रेस का प्रदर्शन, स्थानीय वाहनों को टोल मुक्त करने की मांग

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संवाददाता साबीर अंसारी

कोरबा। जिले में संचालित राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) के टोल प्लाजा को लेकर बढ़ते जनाक्रोश के बीच युवा कांग्रेस ने स्थानीय नागरिकों और CG-12 पासिंग घरेलू वाहनों को टोल शुल्क से मुक्त करने की मांग उठाई है। युवा कांग्रेस जिला महासचिव मधुसूदन दास के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने NHAI अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए टोल प्लाजा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। साथ ही मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी गई।

ज्ञापन में कहा गया कि चोटिया, मदनपुर, बगदेवा और कोथारी टोल प्लाजा में स्थानीय लोगों से बार-बार टोल वसूला जा रहा है, जिससे किसानों, व्यापारियों और रोजाना आवागमन करने वाले आम नागरिकों को आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। युवा कांग्रेस ने मांग की कि CG-12 पासिंग घरेलू वाहनों और स्थानीय निवासियों को टोल शुल्क से पूर्णतः मुक्त किया जाए।

युवा कांग्रेस ने आरोप लगाया कि टोल प्लाजा पर यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार, अभद्र भाषा का प्रयोग और मनमानी आम बात हो गई है। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं के लिए टोल प्रबंधन की लापरवाही को जिम्मेदार बताते हुए संबंधित टोल कंपनी और प्रबंधक के खिलाफ अपराध दर्ज करने की मांग भी की गई।

मधुसूदन दास ने कहा कि वाहन खरीदते समय सरकार रोड टैक्स लेती है, इसके बावजूद घरेलू उपयोग के वाहनों से बार-बार टोल वसूली उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि टोल प्लाजा पर सड़क प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टोल कर्मचारियों की मिलीभगत से ओवरलोड राखड़ वाहनों का अवैध संचालन हो रहा है तथा टोल के आसपास अवैध पार्किंग के कारण यातायात बाधित होने के साथ सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ रहा है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

इस दौरान एनएसयूआई जिलाध्यक्ष मनमोहन राठौर और दीपक वर्मा ने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो युवा कांग्रेस सड़क पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेगी, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।

ज्ञापन सौंपने के दौरान असंगठित कांग्रेस जिलाध्यक्ष बबलू मारवा, जिला सचिव धनंजय राठौर, अदनान मेमन, प्रमोद काकरे, यशवर्धन, साहिल सहित युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा

बाँकीमोंगरा का सुलभ शौचालय बदहाल, नगर पालिका की अनदेखी से मंडरा रहा हादसे का खतरा,,,देखे पूरी खबर

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संवाददाता साबीर अंसारी

जर्जर छत से गिर रहा मलबा, शराबियों का अड्डा बना परिसर, रोजाना सैकड़ों लोगों की जान जोखिम में

बाँकीमोंगरा। नगर के मुख्य बाजार स्थित सार्वजनिक सुलभ शौचालय अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। वर्षों से मरम्मत और रखरखाव के अभाव में भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। छत से लगातार प्लास्टर और कंक्रीट के टुकड़े गिर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार नगर पालिका प्रशासन अब भी मौन है। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

मुख्य बाजार, सब्जी मंडी और आसपास के व्यापारिक क्षेत्र के बीच स्थित यह सुलभ शौचालय प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की जरूरत पूरी करता है। दुकानदार, ग्राहक, महिलाएं, बुजुर्ग और राहगीर रोज इसका उपयोग करते हैं, लेकिन सुविधा देने वाला यह भवन अब खतरे का पर्याय बन गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, रात होते ही यह परिसर शराबियों और असामाजिक तत्वों का ठिकाना बन जाता है। परिसर में शराब की खाली बोतलें और गंदगी आम बात हो गई है। इससे महिलाओं और आम नागरिकों को असुरक्षा का एहसास होता है, वहीं स्वच्छता व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई है।

व्यापारियों का कहना है कि कई बार नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों को इस जर्जर भवन की जानकारी दी गई, लेकिन अब तक न मरम्मत हुई और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम किए गए। छत से गिरते मलबे के बीच लोग मजबूरी में शौचालय का उपयोग कर रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस भवन की मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं कराया गया और कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की होगी।

जनता पूछ रही है…

आखिर नगर पालिका इस जर्जर भवन की सुध कब लेगी?

क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी?

विकास के दावों के बीच सार्वजनिक सुविधाओं की यह बदहाली आखिर कब तक?

क्या नगर पालिका लोगों की सुरक्षा से ज्यादा किसी दुर्घटना का इंतजार कर रही है?

अब देखना यह है कि नगर पालिका परिषद बाँकीमोंगरा इस गंभीर समस्या पर तत्काल कार्रवाई करती है या फिर यह जर्जर भवन किसी बड़ी अनहोनी का कारण बनने के बाद ही जिम्मेदारों की नींद टूटेगी।

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नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा

धूल प्रदूषण और जल संकट पर फूटा जनआक्रोश, 4 घंटे तक ठप रहा बांकीमोंगरा-कोरबा मार्ग,,देखे पूरी खबर

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संवाददाता साबीर अंसारी

बांकीमोंगरा :– क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मूलभूत समस्याओं को लेकर सोमवार को पंखा दफाई और सूराकछार के रहवासियों का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया। स्थानीय पार्षद प्रेम कुमार के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने बांकीमोंगरा-कोरबा मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर प्रशासन और संबंधित विभागों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि रेलवे साइडिंग से लगातार उड़ रही कोयले की धूल ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। वहीं इस वर्ष खोलार नदी में स्टॉप डेम का निर्माण नहीं होने से क्षेत्र में जल संकट गहराने की आशंका भी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि धूल प्रदूषण और पानी की समस्या पर कई बार शिकायत की गई, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने गंभीरता नहीं दिखाई।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें

खोलार नदी में तत्काल स्टॉप डेम का निर्माण कर जल संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

रेलवे साइडिंग से उड़ने वाली धूल एवं डस्ट प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए।

मुख्य मार्ग पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराया जाए।

रेलवे के क्षतिग्रस्त हाइट कंट्रोलर की जल्द मरम्मत कराई जाए।

सुबह लगभग 9 बजे शुरू हुआ चक्का जाम दोपहर 1 बजे तक जारी रहा। करीब चार घंटे तक मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित रहा, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सूचना मिलने पर दर्री तहसीलदार, बांकीमोंगरा थाना प्रभारी, रेलवे और एसईसीएल के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर उनकी मांगों पर 17 जून तक कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन समाप्त कर दिया।

स्थानीय नागरिकों ने साफ कहा है कि यदि तय समयसीमा के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो इससे भी बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी।

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