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छत्तीसगढ़

BSP नेता ने बनाया 4000 करोड़ का ठग-साम्राज्य:रायपुर के 23 लोगों से ठगे 76 लाख, बाइक-बोट-स्कीम में 9 राज्य के 2 लाख लोगों को फंसाया

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ समेत 7 राज्यों के 2 लाख से ज्यादा लोगों से बाइक बोट स्कीम के नाम 4 हजार करोड़ से ज्यादा की ठगी की है। राजनीति की चादर ओढ़कर UP के BSP नेता संजय भाटी ने फ्रॉड नेटवर्क बनाया। इसने रायपुर के 32 से ज्यादा लोगों से करीब 76 लाख रुपए की ठगी की।

संजय भाटी ने कर्णपाल सिंह और राजेश भारद्वाज ​​​​​के साथ ​​मिलकर फ्रॉड का साम्राज्य बनाया। स्कीम इतनी चालाकी से बनाई गई थी कि लोगों को भरोसा हो गया कि वे सिर्फ बाइक खरीदकर उसे किराए में चलवाएंगे और हर महीने लाखों कमाएंगे।

तीनों आरोपियों ने अपने 19 साथियों के साथ मिलकर 2017 में ठगी की। मास्टर माइंड संजय भाटी ठगी करने से पहले इंजीनियर, मोटिवेशनल स्पीकर था। इसके बाद BSP ज्वाइन कर नेता बन गया। रायपुर पुलिस राजस्थान जेल में बंद 3 आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई है।

इस रिपोर्ट में विस्तार से पढ़िए आरोपियों ने किस तरह से ठगी का साम्राज्य फैलाया, इतने दिनों तक रायपुर पुलिस आरोपियों को क्यों कस्टडी में नहीं ले पाई, आरोपियों के कौन से साथी अभी भी रायपुर पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं?

राजस्थान से प्रोडक्शन वारंट में रायपुर लाकर पुलिस ने इन आरोपियों को मीडिया के सामने पेश किया।

राजस्थान से प्रोडक्शन वारंट में रायपुर लाकर पुलिस ने इन आरोपियों को मीडिया के सामने पेश किया।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, अक्टूबर 2018 को रायपुर के सिविल लाइन थाने में बीरगांव निवासी अखिल कुमार बिसोई ने शिकायत दी। उन्होंने बताया कि ओला/उबर की तर्ज पर बाइक बोट स्कीम चलाने का झांसा देकर मेसर्स गर्विट इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड ठगी की।

अखिल कुमार बिसोई ने बताया कि अंतरराज्यीय कंपनी के संचालक संजय भाटी और उनके साथिया ने 26 लाख 70 हजार 300 रुपए की ठगी कर ली। आरोपी अपने वादा अनुसार पैसा नहीं वापस कर रहे और ना ही कोई रिस्पांस दे रहे हैं।

सिविल लाइन पुलिस ने मामले मे जांच शुरू की तो पता चला कि अखिल कुमार बिसोई की तर्ज पर रायपुर के 20 पीड़ितों ने कंपनी डायरेक्टर के कहने पर अपना 73 लाख रुपए इन्वेस्ट कर दिया है। इन सबका पैसा कंपनी के डायरेक्टर हजम कर गए है। पुलिस ने केस दर्ज करके जांच शुरू की, लेकिन पता नहीं चला और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

इन बाइको को खरीदकर किराए में लगाने पर पैसे देने का लालच दिया था आरोपियों ने।

इन बाइको को खरीदकर किराए में लगाने पर पैसे देने का लालच दिया था आरोपियों ने।

पेडिंग केसों पर फटकार के बाद आई रफ्तार

फरवरी 2025 में जब आईजी अमरेश मिश्रा ने लंबित मुकदमों पर फटकार लगानी शुरू की तो सिविल लाइंस थाने में बाइक बोट योजना घोटाले की फाइल फिर से खुल गई। सिविल लाइंस पुलिस ने मामले में आरोपियों की तलाश शुरू की।

इस दौरान पता चला कि बोट कंपनी का मास्टरमाइंड संजय भाटी और उसके साथी करनपाल सिंह और राजेश भारद्वाज राजस्थान की भरतपुर जेल में बंद हैं। इसके बाद प्रोडक्शन वारंट पर सिविल लाइन पुलिस आरोपियों को रायपुर लेकर आए।

इस तरह की स्कीम दिखाकर पीड़ितों को फंसाते थे आरोपी।

इस तरह की स्कीम दिखाकर पीड़ितों को फंसाते थे आरोपी।

इस दौरान आरोपियों को पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया। जांच अधिकारियों का कहना है, कि बाइक बोट घोटाले को अंजाम देने वाले अन्य 19 आरोपियों के नाम का पता चल चुका है। इन आरोपियों की गिरफ्तारी भी जल्द होगी।

7 जून 2019 को आरोपी संजय भाटी ने अपने पार्टनर के साथ कोर्ट में सरेंडर किया था।

7 जून 2019 को आरोपी संजय भाटी ने अपने पार्टनर के साथ कोर्ट में सरेंडर किया था।

लोकसभा प्रभारी रह चुका आरोपी संजय भाटी

बाइक बोट टैक्सी स्कैम का मास्टर माइंड संजय भाटी बहुजन समाज पार्टी का बडा नेता रह चुका है। 2018 में कंपनी के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दिया और पार्टी ज्वाइन की। 2019 में उसे गौतम बुद्धनगर से बहुजन समाज पार्टी ने लोकसभा प्रभारी भी बनाया।

2019 में ED और सीबीआई ने बोट घोटाले केस में कार्रवाई करना शुरू की। संजय भाटी और उसके साथी ने 7 जून 2019 को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। पुलिस ने उसे अपनी कस्टडी में लिया।

इन गाड़ियों को देने का झांसा देकर ठगी की आरोपियों ने।

इन गाड़ियों को देने का झांसा देकर ठगी की आरोपियों ने।

अब जानिए रायपुर के लोगों से कैसे ठगी की गई ?

पीड़ित अखिल कुमार बिसोई ने पुलिस को बताया, कि आरोपी संजय भाटी ने इन्वेस्टमेंट करने पर फ्रेंचाइजी देने और छत्तीसगढ़ हेड बनाने की बात कही थी। उसने पैसा दिया और बाइक बोट पर इनवेस्ट किया था।

इसी तरह प्रार्थी नवीन सिंह, मोहम्मद जावेद, मुकेश टंडन समेत अन्य लोगों ने बताया, कि आरोपी संजय भाटी ने मेसर्स गर्विट इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड की 62100 रुपए की बोट बाइक खरीदने पर उसका हर महीने 4590 रुपए मासिक किराया और 5175 रुपए हर महीने बाइक ऑनर काे देने का आश्वासन दिया था।

कुछ महीने पैसे मिले फिर बंद कर दिया

कंपनी के डायरेक्टर ने ईएमआई खत्म होने के बाद बाइक वापस खरीदने का भरोसा दिया था। इस पर विश्वास करके उन्होंने बचाई हुई रकम निवेश कर दी। पैसे लेने के बाद कंपनी के डायरेक्टर ने चार से छह महीने तक पैसे दिए और फिर पैसे देना बंद कर दिया।

जब उन्होंने उससे संपर्क करने की कोशिश की तो नंबर बंद मिला। पीड़ित जब नोएडा मुख्यालय गए तो पता चला कि कंपनी बंद हो चुकी है और डायरेक्टर फरार हो चुका है।

2010 में कंपनी रजिस्टर्ड की, 2029 में स्कीम लॉन्च की

पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया, कि उसने 2010 में मेसर्स गर्विट इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड कंपनी शुरू की थी। इस दौरान कंपनी में संजय भाटी के अलावा पत्नी दिप्ती बहुल और भाई सचिन डायरेक्टर थे। 2019 में संजय ने कंपनी का डायरेक्टर कर्णपाल सिंह और राजेश भारद्वाज को बनाया।

कंपनी का डायरेक्टर बदलने के बाद 2019 में बाइक बोट स्कीम लॉन्च की। स्कीम लॉन्च करने के बाद अलग-अलग राज्यों में इसका प्रचार प्रसार किया और घोटाला किया।

नोएडा स्थित मेसर्स गर्विट इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड का कार्यालय।

नोएडा स्थित मेसर्स गर्विट इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड का कार्यालय।

2020 से ED कर रही जांच

बाेट बाइक घोटाला केस 2020 में ED के हेंडओवर किया था। ED की जांच में सामने आया, कि मेसर्स गर्विट इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड के डायरेक्टर ने देश भर में 1 लाख 75 हजार से ज्यादा लोगों को चूना लगाया और 4 हजार करोड़ से ज्यादा का घोटाला किया है।

ED के अफसरों ने मेसर्स गर्विट इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टरों की कई संपत्तियों को सीज भी किया है। ED की जांच के दौरान कंपनी से सपा सरकार के नेताओं का नाम भी जुड़ा था। कंपनी के तार हवाला से भी जुड़े हैं।

इन राज्यों में भी आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज

सिविल लाइन पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कंपनी के डायरेक्टरों के खिलाफ उत्तरप्रदेश मे 150, राजस्थान में 50, मध्यप्रदेश में 06, गुजरात, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, नागपुर महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश एवं अन्य राज्यों मे केस दर्ज हैं।

पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि मास्टरमाइंड संजय भाटी के विरूद्ध 1500 से अधिक चेक बाउंस के केस हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तरप्रदेश में दर्ज है। पुलिस की पूछताछ में आरोपी संजय भाटी ने इस प्रोजेक्ट में 2800 करोड़ रुपए से अधिक की रिकवरी जांच एजेंसियों द्वारा करने की बात स्वीकारी है।

जानिए इस केस में अब तक क्या-क्या हुआ

  • कुल 26 आरोपी गिरफ्तार, 15 पर गैंगस्टर की कार्रवाई
  • ईडी ने 216 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी अटैच की
  • हर एजेंसी का घोटाले की रकम का अलग अनुमान
  • दिल्ली पुलिस इस घोटाले को 42 हजार करोड़ का मानती है
  • EOW मेरठ की जांच में शुरुआत में यह घोटाला 3500 करोड़ का था
  • EOW मेरठ की की जांच में 5000 करोड़ का घोटाला
  • CBI ने FIR में घोटाला 15 हजार करोड़ का घोटाला बताया।
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छत्तीसगढ़

रायपुर : फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल डेका

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फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल श्री डेका
फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल श्री डेका
फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल श्री डेका

रायपुर। फिल्में और डॉक्युमेंट्री केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सकारात्मक संदेश देने का एक प्रभावी साधन हैं। राज्यपाल रमेन डेका ने आज राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के सम्मान समारोह में उक्त बातें कही। यह कार्यक्रम रायपुर के एक निजी होटल में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम और संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।

          राज्यपाल ने कहा कि आदिम युग से ही मनुष्य विभिन्न माध्यमों से अपने विचार और संदेश व्यक्त करता रहा है। समय के साथ नाटक, रेडियो, टेलीविजन और अब डिजिटल माध्यमों ने इस भूमिका को और व्यापक बनाया है। उन्होंने कहा कि पहले सिनेमा का मूल उद्देश्य केवल धन अर्जित करना नहीं था, बल्कि समाज को संदेश देना और जागरूक करना था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी भारतीय सिनेमा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

          राज्यपाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध उल्लेखनीय सफलता मिली है। फिल्म निर्माताओं को चाहिए कि अब वे बस्तर की समृद्ध संस्कृति से  देश और दुनिया  को परिचित कराएं। इससे क्षेत्र की सकारात्मक छवि को मजबूती मिलेगी।

          राज्यपाल ने सद्गति, चरणदास चोर और देवदास जैसी फिल्मों और नाटकों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और जागरूकता लाने वाली फिल्मों की आज भी उतनी ही आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और पर्व-त्योहारों जैसे हमारे धरोहर को स्थायी रूप से संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम डॉक्यूमेंट्री फिल्में हैं। उन्होंने कलाकारों से लोककला, लोकगीत, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। 

          राज्यपाल ने कहा कि मोबाइल की बढ़ती लत आज गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। बच्चे खेल के मैदानों से दूर हो रहे हैं और उनकी रचनात्मकता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कलाकारों  से आग्रह किया कि वे नई पीढ़ी को कला, संगीत, नाटक और नृत्य जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए आगे आएं। इस अवसर पर राज्यपाल ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त डॉक्युमेंट्री फिल्मों छत्तीसगढ़ के भीम दाऊ चिंताराम, हैप्पी बर्थडे और स्क्रीन के निर्माता-निर्देशकों को सम्मानित किया।

          कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन संस्कृति विभाग के संचालक संजय कन्नौजे ने दिया। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। आभार प्रदर्शन प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक मनोज वर्मा ने किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, विभिन्न डॉक्युमेंट्री फिल्मों के निर्माता-निर्देशक कलाकार एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : स्ट्रीट वेंडर्स के सपनों को मिली नई उड़ान

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छत्तीसगढ़ में 1.12 लाख से अधिक वेंडर्स को मिला आर्थिक संबल

 रायपुर। कभी सड़क किनारे ठेला लगाकर सब्जियां बेचने वाले, चाय-नाश्ते की छोटी दुकान चलाने वाले या फिर फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वाले लाखों स्ट्रीट वेंडर (रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों) के लिए पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी। बैंक ऋण तक पहुंच नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय सीमित था। लेकिन प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना ने इन छोटे उद्यमियों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिखी है।

    छत्तीसगढ़ में इस योजना के माध्यम से अब तक 1 लाख 12 हजार 36 से अधिक स्ट्रीट वेंडर (पथ विक्रेताओं) को 256 करोड़ 94 लाख रुपये से अधिक की ऋण सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। योजना ने न केवल उनके कारोबार को मजबूती दी है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका का नया अवसर भी प्रदान किया है। 

    कोविड-19 महामारी के दौरान आजीविका पर पड़े गंभीर प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले स्ट्रीट वेंडर को बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने व्यवसाय को फिर से शुरू कर सकें और उसका विस्तार कर सकें। योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की गारंटी की आवश्यकता नहीं होती। समय पर ऋण चुकाने वाले हितग्राहियों को अगले चरण में अधिक राशि का ऋण प्राप्त करने का अवसर मिलता है। 

    योजना के तहत लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से ऋण उपलब्ध कराया जाता है। प्रथम चरण में 10,000 रूपए तक का ऋण, द्वितीय चरण में 20,000 रूपए तक का ऋण तथा तृतीय चरण में 50,000 रूपए तक का ऋण दिया जाता है। अर्थात इस योजना के अंतर्गत न्यूनतम 10 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 50 हजार रुपये तक की कार्यशील पूंजी ऋण सहायता प्राप्त की जा सकती है। समय पर पुनर्भुगतान करने वाले हितग्राही ही अगले चरण के लिए पात्र बनते हैं। 

    पीएम स्वनिधि योजना का लाभ उन छोटे कारोबारियों को मिलता है जो सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर वस्तुएं एवं सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इनमें सब्जी एवं फल विक्रेता, चाय, नाश्ता एवं फास्ट फूड विक्रेता, पान दुकान संचालक, कपड़ा एवं रेडीमेड वस्त्र विक्रेता, जूता-चप्पल विक्रेता, किताब एवं स्टेशनरी विक्रेता, फूल एवं पूजा सामग्री विक्रेता, मोबाइल एक्सेसरीज विक्रेता, नाई, मोची, लॉन्ड्री जैसी सेवाएं देने वाले स्वरोजगारी, जैसे अनेक छोटे व्यवसाय शामिल हैं।
 
    छत्तीसगढ़ में योजना का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और धमतरी जैसे जिलों में हजारों पथ विक्रेताओं को ऋण सहायता प्रदान की गई है। राज्य स्तर पर 267.22 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि के विरुद्ध 256.94 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया जा चुका है, जिससे 1.12 लाख से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। 

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि पीएम स्वनिधि योजना केवल ऋण वितरण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह छोटे उद्यमियों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का एक व्यापक अभियान है। इससे स्ट्रीट वेंडर्स की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, उनकी आय में वृद्धि हो रही है और वे अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर पा रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों में हजारों पथ विक्रेता इस योजना के सहारे अपने कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना वास्तव में उन मेहनतकश हाथों को आर्थिक संबल देने का माध्यम बनी है, जो अपने परिश्रम से शहरों की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं।

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के 250 MBBS सीटों पर लगा ब्रेक:5 नए सरकारी मेडिकल-कॉलेजों को NMC की मंजूरी नहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी की कमी बनी बड़ी वजह

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से मान्यता नहीं मिली है। आयोग ने सभी कॉलेजों के आवेदन रिजेक्ट कर दिए हैं। इससे इस साल एमबीबीएस की 250 नई सीटें शुरू नहीं हो पाएंगी।

ये मेडिकल कॉलेज कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़, दंतेवाड़ा और कुनकुरी में प्रस्तावित हैं। हर कॉलेज में 50-50 एमबीबीएस सीटों का प्रस्ताव था।

छात्रों को मिलता बड़ा फायदा

अगर इन कॉलेजों को मंजूरी मिल जाती तो प्रदेश में एमबीबीएस की 250 सीटें बढ़ जातीं। इससे नीट यूजी में प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा कुछ कम होती और कटऑफ पर भी असर पड़ सकता था।

फिलहाल छत्तीसगढ़ के 10 सरकारी और 5 निजी मेडिकल कॉलेजों में कुल 2330 एमबीबीएस सीटें हैं।

शिक्षा विभाग की तैयारी पर उठे सवाल

जानकारी के मुताबिक, नए मेडिकल कॉलेजों में जरूरी तैयारियां पूरी नहीं हो सकीं। कई जगह न पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर है, न फैकल्टी और न ही जरूरी मेडिकल सुविधाएं। इससे NMC के तय मानकों पर कॉलेज खरे नहीं उतर पाए।

बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने फिलहाल सिर्फ डीन और अस्पताल अधीक्षक की प्रभार नियुक्तियां की हैं। नियमित फैकल्टी की भर्ती नहीं हुई।

जिला अस्पतालों के कुछ डॉक्टरों को असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर रेजिडेंट के तौर पर पदस्थ करने के आदेश जरूर दिए गए, लेकिन यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी गई।

प्रमोशन नहीं होने से भी बढ़ी परेशानी

प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में काम कर रहे कई डॉक्टर लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। करीब 296 डॉक्टर प्रमोशन के पात्र बताए जा रहे हैं, जबकि 73 असिस्टेंट प्रोफेसरों का प्रोबेशन पीरियड भी पूरा नहीं किया गया है।

अगर समय पर प्रमोशन होते तो नए कॉलेजों के लिए प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर उपलब्ध हो सकते थे, जिससे मान्यता मिलने की संभावना बढ़ जाती।

अधिकारियों का ओवर कॉन्फिडेंस पड़ा भारी

चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भरोसा था कि सरकारी मेडिकल कॉलेज होने के कारण मान्यता मिल जाएगी। लेकिन NMC साल 2023 से तय पैरामीटर के आधार पर ही मंजूरी दे रहा है। इसी वजह से इस बार सभी कॉलेजों के आवेदन खारिज हो गए।

एफिलिएशन सर्टिफिकेट तक नहीं भेजा गया

जानकारी यह भी सामने आई है कि जिन पांच कॉलेजों के आवेदन रिजेक्ट हुए, उनमें से दो-तीन कॉलेजों ने हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी का एफिलिएशन सर्टिफिकेट तक आवेदन के साथ संलग्न नहीं किया। जबकि इस दस्तावेज के बिना मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं किया जा सकता।

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