छत्तीसगढ़
नोट बरामद होने से दोषी नहीं ठहराया जा सकता:हाईकोर्ट बोला- मर्जी से रिश्वत लेना साबित होना जरूरी, भ्रष्टाचार केस में पकड़े गया कर्मचारी बरी
बिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल नोट बरामद होने के आधार पर किसी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। बल्कि, यह साबित करना भी जरूरी है कि उसने रिश्वत अपनी मर्जी से ली थी।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने रिश्वतखोरी के आरोप में पकड़े गए आदिम जाति कल्याण विभाग में पदस्थ रहे कर्मचारी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। एसीबी ने उसके पास से रिश्वत के 8 हजार रुपए बरामद किया था, जिस पर उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था। मामला गरियाबंद जिले का है।
जानिए क्या है पूरा मामला
मदनपुर के गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल में पदस्थ टीचर बैजनाथ नेताम ने एसीबी से शिकायत की थी। जिसमें बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के आदिम जाति कल्याण शाखा के मंडल संयोजक लवन सिंह चुरेंद्र ने हॉस्टल के छात्रों की स्कॉलरशिप सैंक्शन करने के लिए 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार दो हजार रुपए तत्काल दे दिए थे। बाकी 8 हजार रुपए बाद में देने का वादा किया था। उसे रंगे हाथ पकड़वाने के लिए नेताम ने 22 जनवरी 2013 को एसीबी रायपुर में शिकायत की थी। जिस पर एसीबी ने ट्रैप टीम बनाई और 1 फरवरी को आरोपी के पास से 8 हजार रुपए बरामद किए।
एसीबी ने पैसे जब्त कर आरोपी के हाथ धुलवाए, तब गुलाबी रंग निकला था। नोट बरामद होने, बातचीत की रिकॉर्डिंग और शिकायतकर्ता की बातों को पंचनामा में दर्ज किया गया।
एसीबी कोर्ट ने सुनाई दो साल की सजा
एसीबी ने जांच पूरी होने के बाद विशेष न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। फिर एसीबी की विशेष कोर्ट में ट्रायल हुआ। सुनवाई के बाद कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत आरोपी को दो साल और धारा 13 (1)(डी) 13(2) के तहत दो साल की सजा सुनाई थी। दोनों सजाएं साथ चलनी थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपी कर्मचारी ने हाईकोर्ट में अपील की थी।
खुद गबन का आरोपी है शिकायतकर्ता
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया कि शिकायत करने वाला खुद भ्रष्टाचार के मामले में संदेह के घेरे में था। रिश्वतखोरी के आरोप में पकड़े गए चुरेंद्र ने पूर्व में शिकायतकर्ता के खिलाफ जांच रिपोर्ट दी थी, जिसमें शिकायतकर्ता पर जुलाई 2011 से गैरहाजिर छात्रों को उपस्थित बताकर 50 हजार 700 की छात्रवृत्ति हड़पने का आरोप लगाया गया था। सहायक आयुक्त ने उसे नोटिस भी जारी किया था, लेकिन उसने राशि जमा नहीं की।
आरोपी को मिला संदेह का लाभ, पैसे मांगने के सबूत नहीं
हाईकोर्ट को बताया गया कि आरोपी को स्कॉलरशिप स्वीकृत करने का अधिकार नहीं था। विकासखंड शिक्षा अधिकारी को इस कार्य के लिए अधिकृत किया गया था। इसके साथ ही रिकॉर्डेड बातचीत में रिश्वत मांगने के संबंध में स्पष्ट बात नहीं मिली और ना ही शिकायतकर्ता के आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत मिले।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को बरी कर दिया है। हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि यह मामला दुश्मनी और झूठे केस में फंसाने का भी हो सकता है।
छत्तीसगढ़
सुकमा : मरीज को मिला समय पर उपचार, सुकमा के चिकित्सकों की टीम ने दिखाई तत्परता
जिला अस्पताल में मौत के मुंह से लौटाई महिला की सांसें
सुकमा। सुकमा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा की तत्परता और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है। सिविल सर्जन डॉ. एमआर कश्यप से प्राप्त जानकारी के अनुसार छिंदगढ़ विकासखंड के कुन्ना निवासी 38 वर्षीय श्रीमती पाली कवासी को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल सुकमा में भर्ती कराया गया।

देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण स्थिति अत्यंत जोखिमपूर्ण थी और तत्काल सर्जरी आवश्यक हो गई। अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुजा ने बिना समय गंवाए तुरंत एलएससीएस (सीजर) ऑपरेशन कर मरीज का उपचार प्रारंभ किया। हालांकि ऑपरेशन के दौरान मृत बच्चा पैदा होने से महिला की स्थिति और अधिक जटिल हो गई।
महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और रेफर करने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान महिला का श्वास बंद सा हो गया, साथ ही नाड़ी और हृदय की धड़कन भी थम सी गई। ऐसे संकट की घड़ी में जिला अस्पताल की मेडिकल टीम ने त्वरित निर्णय लेते हुए महिला को दो बार सीपीआर दिया और तत्काल वार्ड में शिफ्ट कर आधुनिक वेंटीलेटर की सहायता से उपचार शुरू किया गया। इसके बाद महिला को दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया।
डॉक्टरों की सतर्कता और उपलब्ध संसाधनों के कारण महिला की जान बचा ली गई। आज श्रीमती पाली कवासी पूरी तरह स्वस्थ हैं और जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ के प्रयासों की सराहना कर रही हैं।

छत्तीसगढ़
जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के मातृत्व वन में किया सीता अशोक के पौधे का रोपण
जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने सर्किट हाउस जशपुर के मातृत्व वन में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत सीता अशोक के पौधे का रोपण कर पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर कलेक्टर रोहित व्यास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार और वनमंडला अधिकारी शशि कुमार और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस मातृत्व वन में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मातृत्व वन में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया है। इस पहल ने अभियान को भावनात्मक और सामाजिक रूप से विशेष महत्व प्रदान किया है।
राज्यपाल रमेन डेका ने इस अवसर पर कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहल न केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करेंगी।
मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीता अशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाले समय में औषधीय एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल ‘हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता’ के संदेश को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

छत्तीसगढ़
जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के केरेगांव होम-स्टे का किया अवलोकन

जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर प्रवास के दौरान शनिवार को जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल देशदेखा के समीप स्थित केरेगांव में विकसित होम-स्टे का अवलोकन किया। इस दौरान वे स्थानीय आदिवासी संस्कृति, जनजीवन और पारंपरिक आतिथ्य परंपरा से रूबरू हुए। होम-स्टे प्रवास के दौरान उन्होंने देशदेखा समूह की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार किए गए व्यंजनों का स्वाद चखा। राज्यपाल श्री डेका ने ग्रामीण परिवेश में विकसित होम-स्टे को प्रेरणादायक कदम बताया और कहा कि यह प्रयास न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाते हैं।
इस दौरान स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने ‘जसक्राफ्ट’ ब्रांड के तहत छिंद एवं कांसा से निर्मित पारंपरिक आभूषण माला एवं झुमके राज्यपाल को भेंट किए। राज्यपाल श्री डेका ने स्थानीय महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल कौशल विकास, रोजगार सृजन तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगी।

इस दौरान ‘देशदेखा क्लाइंबिंग कम्पनी’ के सदस्यों ने भी राज्यपाल से भेंट की। उन्होंने क्षेत्र में एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि यहां नियमित रूप से रॉक क्लाइंबिंग जैसे खेलों का आयोजन किया जाता है। राज्यपाल ने अधिकारियों को ऐसे खेलों को निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन देने को कहा, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और अधिक से अधिक युवा इन गतिविधियों की ओर आकर्षित हों। इस दौरान कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार,वनमंडलाधिकारी शशि कुमार सहित अन्य अधिकारीगण एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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