कोरबा
पुरानी पेंशन स्कीम बिजली कंपनी में लागू नहीं, आंदोलन का प्रस्ताव पारित
कोरबा।पुरानी पेंशन स्कीम राज्य बिजली कंपनी में अब तक लागू नहीं की गई है, जबकि छत्तीसगढ़ की पिछली सरकार की कैबिनेट ने अनुमोदन और राज्य शासन के वित्त व ऊर्जा विभाग की सहमति के बाद स्वीकृति संबंधी आदेश भी जारी हुआ। बिजली कंपनी में पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल करने वित्तीय आंकलन जुटाने के बाद पूर्व में राज्य शासन को भेजा था। बावजूद इसके पुरानी पेंशन स्कीम को अधर में अटकाने से छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी संघ-महासंघ ने अपने अधिवेशन में आंदोलन का प्रस्ताव पारित किया है।
राज्य शासन ने अगस्त 2025 से भर्ती होने वाले शासकीय कर्मचारियों के लिए नवीन पेंशन योजना (एनपीएस) व एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) का विकल्प देगी। इसकी अधिसूचना भी प्रकाशित की है। मगर पुरानी पेंशन स्कीम का विकल्प नहीं दिया है। दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की पिछली सरकार ने सरकारी विभागों में पुरानी पेंशन स्कीम को लागू कर चयन का विकल्प दिया।
महासंघ का दावा है कि सरकारी विभागों के लगभग 3 लाख कर्मियों ने पुरानी पेंशन स्कीम को ही चुना, जो कुल कर्मियों की संख्या के हिसाब से करीब 98 फीसदी है। दूसरी ओर पिछली सरकार के समय स्वीकृति संबंधी आदेश जारी होने के बाद पावर कंपनी में पुरानी पेंशन स्कीम को लागू नहीं किया जा सका है। इस कारण साल 2004 के बाद भर्ती लगभग 8 हजार अधिकारी-कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम का चुनाव करने विकल्प नहीं मिला है।
प्रांतीय अधिवेशन में लंबित मांगों पर चर्चा की महासंघ का प्रांतीय अधिवेशन रविवार को एचटीपीपी कोरबा पश्चिम के श्रम कल्याण केन्द्र में आयोजित की गई। इसमें लंबित मांगों पर चर्चा की गई। साथ ही महासंघ का दो साल के लिए नई कार्यकारिणी समिति का गठन कर अधिवेशन में पदाधिकारियों के नाम की घोषणा की गई। तकनीकी पदों पर काम करने वाले कर्मियों को टेक्निकल भत्ता, संविदा कर्मियों के नियमितीकरण की मांग के लंबित मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद अधिवेशन में सर्वसम्मति से आंदोलन का निर्णय लिया है।

कोरबा
कोरबा पहुंचने पर राष्ट्रीय वितरक महामंच के सदस्यों का हुआ स्वागत
कोरबा। छत्तीसगढ़ राज्य अधिवेशन में भाग लेने आई राष्ट्रीय वितरक महामंच के सदस्यों का ऊर्जा नगरी कोरबा पहुंचने पर छत्तीसगढ़ अखबार वितरक संघ के सदस्यों ने कोरबा रेलवे स्टेशन पर फूलमाला पहनाकर स्वागत किया गया। राष्ट्रीय वितरक महामंच के अध्यक्ष रामरक्षा सिंह के नेतृत्व में कोरबा पहुंचे देश के अलग अलग प्रांतों के सदस्य दल में राष्ट्रीय वितरक महामंच के संरक्षक पंकज भट्ट चंडीगढ़, महासचिव राकेश सैनी मथुरा उत्तर प्रदेश, कोषाध्यक्ष यदुनाथ मंडल,उपाध्यक्ष अंकुर मंडल, साहुल सिंह अध्यक्ष समाचार पत्र विक्रेता समाज सेवक समिति धनबाद झारखंड, विमलेश कुमार, विनोद कुमार ठाकुर कार्यकारणी सदस्य गया जिला बिहार एवं राष्ट्रीय वितरक महामंच के वरिष्ठ मार्गदर्शक मंडल सदस्य भागवत नारायण चौरसिया चंदौली जिला उत्तर प्रदेश शामिल रहे ।


कोरबा
सर्वेश्वर एनीकट के गेट की सॉफ्ट रॉड काटकर ले गए, पानी खाली
कोरबा। निगम की पेयजल योजना के लिए हसदेव नदी पर बने सर्वेश्वर एनीकट के गेट का सॉफ्ट रॉड को चोरों ने काटकर पार कर दिया। इसकी वजह से एनीकट का पानी बहने से आधा हिस्सा खाली हो गया। सिंचाई विभाग ने शुक्रवार को इसकी मरम्मत कराई। इसके बाद बैराज से पानी छोड़ा गया।
एनीकट में 105 गेट लगे हैं। इनमें से 12 गेट के सॉफ्ट रॉड को चोरों ने पार कर दिया। यह गेट को खोलने और बंद करने का काम आता है। जांजगीर-चांपा जिले में कुदरी बैराज को भरने पानी की डिमांड आई। इसके लिए एनीकट के गेट को खोलना था। जब सिंचाई विभाग ईएडंम के अधिकारी पहुंचे तो पता चला कि रॉड चोरी हो गया है।

इसके बाद मरम्मत का काम शुरू हुआ। हालांकि नगर में पानी आपूर्ति पर असर नहीं पड़ा। 500 मीटर ऊपर ही इंटेकवेल बना हुआ है। यहां से पंप के माध्यम से पानी को कोहड़िया वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट भेजा जाता है। गेट की मरम्मत के बाद दर्री बैराज का एक गेट खोलकर 2500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके पहले पंप हाउस क्षेत्र में नहर में बने लोहे के पुल को चोरों ने पार कर दिया था। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया था। यही नहीं, पहले इंटेकवेल के गेट को चोरों ने पार किया था। चोरों के दुस्साहस पुलिस के लिए चुनौती बन गई है। अभी इस मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है।
^एनीकट गेट की मरम्मत करा ली है। अभी बैराज के एक गेट से नदी में पानी छोड़ रहे हैं। एनीकट को भरने भी पानी दिया जाएगा। इसकी सूचना पुलिस को दी जाएगी। -पीके टोप्पो, एसडीओ, हसदेव दर्री बैराज

कोरबा
धीरेंद्र शास्त्री बोले- हालेलुया वालों की ठठरी मारी जाएगी:खुद को बताया छत्तीसगढ़ का भांजा, कहा- राह भटके लोगों की घर वापसी कराएंगे
कोरबा। छत्तीसगढ़ में धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 का मसीही समाज ने विरोध किया है। समाज इस कानून के खिलाफ अलग-अलग तरीकों से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहा है। इस बीच कोरबा पहुंचे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धर्मांतरण पर बड़ा बयान दिया है।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि यहां आसपास हालेलुया वाले भी रहते हैं, उनकी भी ठठरी मारी जाएगी। अब यह खेल नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि जो लोग राह भटक गए हैं, उनकी घर वापसी कराई जाएगी। इसके अलावा उन्होंने खुद को छत्तीसगढ़ का भांचा बताया।

धीरेंद्र शास्त्री ने जो लोग राह भटक गए हैं, उनकी घर वापसी कराई जाएगी।
धीरेंद्र शास्त्री ने और क्या कुछ कहा ?
दरअसल, कोरबा के ढपढप में 5 दिवसीय हनुमंत कथा का आयोजन किया गया है। पहले दिन यानी शनिवार को पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं को कथा सुनाई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान उन्होंने धर्मांतरण पर तीखा प्रहार किया।
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय मिशनरियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि हालेलुया की ठठरी मारी जाएगी। अब हिंदुओं का धर्मांतरण नहीं होगा। हम कोरबा, रायगढ़, जशपुर और बिलासपुर के हिंदूओं से प्रार्थना करते हैं जिन-जिन लोगों को घर वापसी करनी है, यही सही मौका है।
इसके अलावा उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर कोरबा के लोग कोयला देना बंद कर दें, तो मध्य प्रदेश में बिजली नहीं जलेगी, वहां अंधेरा छा जाएगा।

कथा के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
धीरेंद्र शास्त्री बोले- मैं छत्तीसगढ़ का भांचा
भावुक अंदाज में धीरेंद्र शास्त्री ने खुद को छत्तीसगढ़ का भांचा बताया। उन्होंने कहा कि यह माता कौशल्या की धरती है, मैं यहां का भांचा हूं, यहां मेरा पूरा अधिकार है।
विधेयक में क्या है ?
दरअसल, छत्तीसगढ़ के नए धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक में अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने के मामलों में दोषी पाए जाने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए जुर्माना लगाया जाएगा।
अगर पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से हो, तो सजा बढ़ाकर 10 से 20 साल तक की जेल और न्यूनतम 10 लाख जुर्माना देना होगा। वहीं, सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास होगी। कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माना लगेगा।
गृहमंत्री विजय शर्मा की ओर से पेश किया गया यह नया विधेयक साल 1968 के पुराने कानून की जगह लेगा, जिसे सरकार ने वर्तमान तकनीक और सामाजिक परिस्थितियों के लिहाज से नाकाफी माना है। सरकार के अनुसार इस बिल का मकसद बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में को धर्म स्वातंत्र्य विधेयक- 2026 पास हो गया है।
दोबारा धर्म परिवर्तन कराने वालों को आजीवन कारावास
धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 के तहत अगर कोई व्यक्ति एक बार धर्म परिवर्तन करवाते हुए पकड़ा जा चुका है और सजा काट चुका है। अगर वह दोबारा किसी व्यक्ति के अवैध धर्मांतरण के मामले में दोषी बनता है, तो उसे आजीवन कारावास के लिए दंडित किया जाएगा, लेकिन न्यायालय किन्हीं भी पर्याप्त या विशेष कारणों से कारावास की अवधि को कम कर सकेगा।

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