रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले मामले में EOW की ओर से दो दिन पहले पेश किए गए पूरक चालान में भूपेश कैबिनेट की बैठक का जिक्र है। कैबिनेट में नई लाइसेंस प्रणाली (FL&10A/10B) को फरवरी 2020 में स्वीकृति मिली, फिर आदेश भी जारी किया गया।
इसे लेकर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने कहा कि, शुरू से लेकर अंत तक कांग्रेस सरकार ने सरकारी खजाने में डाका डालने का काम किया है। इससे बड़ा अपराध हिंदुस्तान की राजनीति में कभी नहीं हुआ है।
वहीं, पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे कांग्रेस को बदनाम करने का षड्यंत्र बताया है। उन्होंने कहा कि, भाजपा सरकार में 3 प्रतिशत कमीशन की जांच कौन करेगा। जांच एजेंसी केवल कांग्रेस के लिए है क्या ?
झारखंड की जेल में बंद आरोपी अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया जा रहा है।
रायपुर उत्तर से भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि शराब घोटाले में कांग्रेस के सभी नेता और पूरी कैबिनेट संलिप्त थी। कांग्रेस की नीति सिर्फ भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की रही है। उन्होंने कहा कि शराब नीति में बदलाव कैबिनेट ने ही किया था।
EOW ने शराब घोटाला मामले की जांच तेज कर दी है। झारखंड की जेल में बंद आरोपी अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया जा रहा है। दोनों श्री ओम साईं बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं।
छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले की तरह झारखंड में भी घोटाला हुआ है। इसमें अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा का नाम भी सामने आया। संतोषजनक जवाब नहीं मिले तो 2 महीने पहले झारखंड ACB दोनों को गिरफ्तार कर ले गई थी।
पहले जानिए EOW के चालान में क्या है ?
कैबिनेट में FL-10A/10B लाइसेंस लागू करने मिली थी स्वीकृति
EOW ने अपने चालान में लिखा है कि, 1 अप्रैल 2020 से नई आबकारी नीति लागू की गई। इस नीति का तर्क दिया गया कि दुकानों में कई ब्रांड्स की कमी की शिकायतों को दूर करने के लिए विदेशी शराब के सप्लाई और भंडारण के लिए नई लाइसेंस प्रणाली (FL&10A/10B) लाई जाए।
प्रस्ताव के अनुसार, विदेशी शराब के लाइसेंसधारी (FL-10A/10B) अपने पंजीकृत सप्लायर की मदिरा CSBCL के गोदामों में भंडारित करेंगे। वहीं से CSMCL को सप्लाई करेंगे।
यदि बिक्री न हो, तो CSBCL और CSMCL को शास्ति अधिरोपित करने का अधिकार होगा। इस प्रस्ताव को मंत्री परिषद ने 8 फरवरी 2020 को स्वीकृति दी गई। 11 फरवरी 2020 को आदेश जारी हुआ।
EOW के पूरक चालान में कैबिनेट बैठक का जिक्र।
इससे बड़ा अपराध हिंदुस्तान की राजनीति में कभी नहीं हुआ- रमन
रमन सिंह ने कहा कि, इससे बड़ा अपराध हिंदुस्तान की राजनीति में कभी नहीं हुआ जो छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले के रूप में हुआ है। पैसा आ रहा और दो हिस्सों में बट रहा है। यह बात प्रामाणिकता के साथ है।
उन्होंने कहा कि, राजनीति के क्षेत्र में हम काम करते हैं। बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। लेकिन खुले किताब की तरह करप्शन भी हिम्मत का काम है। ऐसे हिम्मत वाले लोगों को सोचता हूं कि ये लोग बहुत अद्भुत हैं।
3 प्रतिशत कमीशन की जांच कौन करेगा-बैज
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि, EOW-ED कांग्रेस को बदनाम करने और नेताओं को टारगेट करने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्र अपना रही है। हमारे नेताओं को जेल भेज दिया गया है। उसके बाद भी तसल्ली नहीं हुई। फिर से तलाश कर रही है।
बैज ने कहा कि, भाजपा सरकार में 3 प्रतिशत कमीशन की जांच कौन करेगा। एक जग 32 हज़ार में खरीदा जाता है, 1 लाख का टीवी 10 लाख में खरीदा जाता है।
बस्तर ओलिंपिक के नाम पर 1400 का ट्रैकसूट 2500 में खरीदा गया। 100 रुपए की चप्पल 1300 रुपए में खरीदी गई। इन सबकी जांच कौन करेगा। जांच एजेंसी केवल कांग्रेस के लिए है क्या ?
भाजपा सरकार पर भी क्यों नहीं हो रही
बैज ने जांच एजेंसियों को घेरते हुए कहा कि, कांग्रेस के लिए एक तरफा कार्रवाई क्यों हो रही है। भाजपा सरकार में हो रही गड़बड़ियों पर एजेंसी जांच क्यों नहीं कर रही है। ऐसा दोहरा चरित्र नहीं चलेगा।
कांग्रेस पर एक तरफा कार्रवाई नहीं चलेगी। हम गलत नहीं है कार्रवाई से नहीं डरेंगे। लेकिन भाजपा सरकार में गड़बड़ी हो रही है, तो उसकी भी जांच होनी चाहिए। चूहा और बिल्ली का खेल नहीं चलेगा।
चालान में EOW ने शराब घोटाले के पैटर्न का उल्लेख किया है।
विजय भाटिया को 14 करोड़, संजय-मनीष-अभिषेक को 11 करोड़ मिले
बता दें कि, EOW ने मंगलवार को रायपुर के विशेष कोर्ट में 6वां चालान पेश किया। चालान के अनुसार ओम साई बेवरेज से जुड़े विजय कुमार भाटिया को 14 करोड़ मिले हैं। विजय भाटिया ने अलग-अलग अकाउंट और डमी डायरेक्टरों के जरिए रुपए निकाले।
EOW की जांच के मुताबिक नेक्सजेन पावर इंजिटेक से जुड़े संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा और अभिषेक सिंह को 11 करोड़ मिले। FL-10 A/B लाइसेंस व्यवस्था लागू कर सिंडिकेट ने घोटाला किया था। इस अभियोग पत्र में EOW ने कांग्रेस सरकार में घोटाला होने और घोटाले के पैटर्न का उल्लेख किया है।
FL-10 लाइसेंस क्या है ?
FL-10 का फुल फॉर्म है, फॉरेन लिकर-10। इस लाइसेंस को छत्तीसगढ़ में विदेशी शराब की खरीदी के लिए राज्य सरकार ने ही जारी किया था। जिन कंपनियों को ये लाइसेंस मिला है, वे मैन्युफैक्चरर्स यानी निर्माताओं से शराब लेकर सरकार को सप्लाई करते थे। इन्हें थर्ड पार्टी भी कह सकते हैं।
खरीदी के अलावा भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन का काम भी इसी लाइसेंस के तहत मिलता है। हालांकि, इन कंपनियों ने भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन का काम नहीं किया। इसे बेवरेज कॉर्पोरेशन को ही दिया गया था। इस लाइसेंस में भी A और B कैटेगरी के लाइसेंस धारक होते थे।
FL-10 A इस कैटेगरी के लाइसेंस-धारक देश के किसी भी राज्य के निर्माताओं से इंडियन मेड विदेशी शराब लेकर विभाग को बेच सकते हैं।
FL-10 B राज्य के शराब निर्माताओं से विदेशी ब्रांड की शराब लेकर विभाग को बेच सकते हैं।
सिंडिकेट बनाकर किया गया घोटाला
EOW के अफसरों ने न्यायालय को बताया कि, जांच में सामने आया कि तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी, निरंजन दास, अनवर ढेबर, विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह ने मिलकर सिंडिकेट बनाया और शराब घोटाला किया।
इस सिंडिकेट के नियंत्रण में शासकीय शराब दुकानों में सप्लाई पर कमीशन, डिस्टलरी से अतिरिक्त शराब निर्माण कर अवैध बिक्री और विदेशी शराब की सप्लाई पर भी अवैध वसूली की व्यवस्था बनाई गई थी।
सरकार को 248 करोड़ का नुकसान हुआ
EOW के जांच अधिकारियों के अनुसार, साल 2020-21 में नई आबकारी नीति लागू कर विदेशी शराब सप्लाई का ठेका तीन प्राइवेट कंपनियों को दिया गया।
इनमें ओम साई ब्रेवरेज प्रा.लि., नेक्सजेन पावर इंजिटेक प्रा.लि. और दिशिता वेंचर्स प्रा.लि. शामिल थीं। EOW का कहना है कि इन कंपनियों को लाइसेंस देने से सरकार को करीब 248 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
संजय, मनीष और अभिषेक को मिले 11 करोड़
ओम साई ब्रेवरेज से जुड़े विजय कुमार भाटिया को छुपा लाभार्थी बताया गया है। जिसने अलग-अलग खातों और डमी डायरेक्टरों के जरिए करोड़ों रुपए निकाले। वहीं, नेक्सजेन पावर इंजिटेक से संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा और अभिषेक सिंह को 11 करोड़ मिले।
कोरबा। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कुणाल दुदावत ने विकासखंड कटघोरा अंतर्गत संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, छुरीकला में विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय की व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं से संबंधित प्राप्त गंभीर शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को प्रकरण की निष्पक्ष एवं तथयपरक जांच कर एक सप्ताह के भीतर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्राचार्य को हटाने बच्चों ने विधायक पटेल और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन के काफिले का कर दिया था घेराव
गठित जांच समिति में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कोरबा, तहसीलदार कटघोरा, सहायक लेखा अधिकारी तथा कनिष्ठ लेखा अधिकारी (कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास, कोरबा) को सदस्य बनाया गया है। समिति विद्यालय में उपलब्ध व्यवस्थाओं, विद्यार्थियों को प्रदत्त सुविधाओं तथा शिकायतों से जुड़े सभी बिंदुओं की विस्तृत जांच करेगी। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों के हितों एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। शिकायतों की निष्पक्ष जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
कोरबा। कोरबा जिले में एक जून से 28 जुलाई तक कुल 528.2 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई। अधीक्षक भू-अभिलेख से मिली जानकारी के अनुसार उक्त अवधि में जिले की तहसील कोरबा में 546.1 मिलीमीटर, अजगरबहार 372.8, भैंसमा, 478.4, करतला 471.1, बरपाली 567.5, कटघोरा 540.9 दीपका 572.5, दर्री 661.3, पाली 581.4, हरदीबाजार 429.4, पोंड़ी-उपरोड़ा 577.6, और पसान तहसील में 539.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
खनिज विभाग कोरबा की लगातार कार्यवाही से खनिज माफियाओं में मचा हड़कंप
कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश तथा उप संचालक, खनि प्रशासन के मार्गदर्शन में जिले में अवैध उत्खनन परिवहन व भण्डारण पर प्रतिबंध लगाने के लिए लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत गठित खनिज उड़़नदस्ता दलों द्वारा जिले के कई स्थानों पर छापा मारकर सघन जांच की गई। जिस दौरान सीतामढ़ी में रेत का अवैध परिवहन कर रहे 2 ट्रेक्टर, बरमपुर में रेत का अवैध परिवहन कर रहे 1 टीपर, राताखार में गिट्टी का अवैध परिवहन कर रहे 2 हाइवा व रेत का अवैध परिवहन कर रहे 1 टीपर, कुसमुंडा में ईंट का अवैध परिवहन कर रहे 2 ट्रेक्टर तथा कटघोरा में रेत का अवैध परिवहन कर रहे 1 ट्रेक्टर सहित कुल 9 वाहनों पर कार्यवाही करते हुए जब्त कर सिटी कोतवाली थाना, सर्वमंगला पुलिस चौकी, कुसमुंडा थाना, दर्री थाना व खनिज जांच चौकी, कटघोरा की अभिरक्षा में सुरक्षार्थ रखा गया है।
खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन तथा भण्डारण पर प्रतिबंध सुनिश्चित करना, अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा शासकीय राजस्व की हानि को रोकना है। नियमों का उल्लघंन करने, अवैध उत्खनन एवं परिवहन तथा भण्डारण में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध खान और खनिज ( विकास और विनियमन) अधिनियम 1957, छत्तीसगढ़़ गौण खनिज नियम 2015 और अन्य वैधानिक प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जा रही है। विभाग ने चेतावनी दी है कि अवैध खनन, परिवहन और भण्डारण के विरुद्ध सघन अभियान लगातार जारी रहेगा तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।