छत्तीसगढ़
रायपुर की पहली महिला विधायक रजनी ताई नहीं रहीं:94 वर्ष की आयु में निधन,आपातकाल में 3 बेटों की गिरफ्तारी के बावजूद लड़ीं,भूमिगत आंदोलन चलाया
रायपुर,एजेंसी। रायपुर की पहली महिला विधायक रजनी ताई उपासने का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ थीं और घर पर ही उनका इलाज चल रहा था। बुधवार शाम अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। रजनी ताई उपासने के निधन की पुष्टि उनके बेटे सच्चिदानंद उपासने ने की है। पूर्व विधायक के निधन की खबर फैलते ही राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने रजनी ताई को श्रद्धांजलि दी है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अप्रैल 2022 को रजनी ताई उपासने से फोन पर बात की थी। फोन पर पीएम ने उनसे कहा था कि ‘आपने पार्टी के लिए बहुत काम किया है। और जो जिम्मेदारी आपने दी, उसका मैं पालन कर रहा हूं।’

रायपुर की पहली महिला विधायक रजनी ताई उपासने का निधन हो गया है।
पूरे परिवार का RSS से रहा है जुड़ाव
पूर्व विधायक रजनी ताई का जन्म 28 अप्रैल 1933 को महाराष्ट्र के परतवाड़ा में हुआ था। उनका विवाह आकोट के दत्तात्रेय उपासने से हुआ। दत्तात्रेय आर्डिनेंस फैक्ट्री में थे। उनके 4 बेटे हैं। एक बेटे जगदीश उपासने वर्तमान में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि भोपाल में कुलपति हैं।
सच्चिदानंद उपासने भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हैं। गिरिश और हेमंत उपासने एलआईसी में कार्यरत हैं। 1967 में परिवार बालोद से रायपुर आ गया। पूरा परिवार RSS से जुड़ा रहा।
रायपुर की पहली महिला विधायक बनीं
रजनी ताई उपासने ने जनता पार्टी से 1977 में रायपुर विधानसभा से चुनाव जीतकर इतिहास रचा था। वह रायपुर की पहली महिला विधायक बनीं। उस दौर में राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बेहद सीमित थी, ऐसे समय में जनता का भरोसा जीतकर विधानसभा पहुंचना उनके साहस और संघर्ष को दर्शाता है।
अपने कार्यकाल में उन्होंने जनता के हितों को प्राथमिकता दी और रायपुर के विकास के लिए कई पहल की।

पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी के साथ रजनी ताई। (हरी साड़ी में)
सादगी और सेवा भाव से बनाई खास पहचान
सादगी, ईमानदारी और जनता से गहरे जुड़ाव के कारण रजनी ताई को विशेष पहचान मिली। राजनीति के साथ ही वे सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहीं। महिलाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए उन्होंने लगातार काम किया।
उनके निधन पर प्रदेश के नेताओं और सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने कहा कि रजनी ताई का जाना छत्तीसगढ़ की राजनीति और समाज दोनों के लिए अपूरणीय क्षति है।

सीएम साय ने दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रजनीताई को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका निधन हम सबके लिए उनके आत्मीय स्नेह की शीतल छांव की अपूरणीय क्षति है। आपातकाल के दौरान अपने तीन बेटों की मीसा में हुई गिरफ्तारी के बावजूद उन्होंने जिस धैर्य, साहस और मुखरता के साथ उन प्रतिकूल परिस्थितियों का मुकाबला किया, वह एक प्रेरणास्पद अध्याय है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरणसिंह देव ने कहा कि रजनीताई के देहावसान का दुःखद समाचार हृदय को विदीर्ण करने वाला है। भाजपा के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जम्वाल ने रजनीताई के निधन पर कहा कि छत्तीसगढ़ में रजनीताई को महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण के लिए हमेशा याद रखा जाएगा।
भूपेश बघेल ने श्रद्धांजलि अर्पित की-

क्या है भूमिगत आंदोलन
भूमिगत आंदोलन वे गतिविधियां या समूह होते हैं जो गुप्त रूप से कार्य करते हैं, आमतौर पर किसी स्थापित शक्ति या दमनकारी व्यवस्था का विरोध करने के लिए, या अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए।
ये आंदोलन कई प्रकार के हो सकते हैं, जिनमें गुप्त रेडियो स्टेशनों का संचालन, पर्चे बांटना, या भूमिहीन किसानों को जमीन दिलाने जैसे स्वैच्छिक भूमि सुधार प्रयास शामिल हो सकते हैं।
छत्तीसगढ़
भिलाई : लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को और अधिक सुदृढ़, विश्वसनीय और जनोन्मुखी बनाएं- राज्यपाल डेका
छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन प्रादेशिक पत्रकार सम्मेलन और सम्मान समारोह में शामिल हुए राज्यपाल




भिलाई। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि लोकतंत्र में व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बाद पत्रकारिता को चतुर्थ स्तंभ माना गया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक मिशन और साधना है। समाज का दर्पण कहलाने वाली पत्रकारिता ने सदैव जनता और सत्ता के बीच संपर्क-सेतु की भूमिका निभाई है और लोगों को जागरूक किया है। इसलिए इसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है।
राज्यपाल श्री डेका आज भिलाई सेक्टर 4 स्थित एस.एन.जी. ऑडिटोरियम में आयोजित छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के प्रादेशिक पत्रकार सम्मेलन और सम्मान समारोह को मुख्य अतिथि की आंसदी से सम्बोधित कर रहे थे। इससे पूर्व उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को सम्मानित किया। राज्यपाल श्री डेका ने इस अवसर पर महिला पत्रकारों को उनकी उत्कृष्ट लेखनी के लिए सम्मानित किया, जिसमें शगुफ्ता शीरीन, अनुभूति भाखरे, कोमल धनेसर, साक्षी सोनी शामिल है। इसी प्रकार समाज सेवी महिलाओं साधना चतुर्वेदी, अंजना श्रीवास्तव, लता बौद्ध, दीप्ति सिंग, सुनीता जैन को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

राज्यपाल श्री डेका ने वर्तमान चुनौतियों का जिक्र करते हुए अवगत कराया कि आज पत्रकारिता एक कठिन दौर से गुजर रही है। सोशल मीडिया के विस्फोट ने सूचना के प्रवाह को लोकतांत्रिक तो बनाया है, लेकिन साथ ही विश्वास का गंभीर संकट भी खड़ा किया है। फेसबुक, व्हाट्सएप और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर हर व्यक्ति ‘पत्रकार‘ बन चुका है और सत्यापन से पहले ही समाचार वायरल हो जाते हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि ‘फेक न्यूज‘ और ‘डीपफेक‘ ने सच और झूठ के बीच की रेखा धुंधली कर दी है। इन सबके बीच आज भी प्रिंट मीडिया ने अपनी विश्वसनीयता को कायम रखा है। राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि इन चुनौतियों का सामना करने के लिए पत्रकारिता को अपने मूल आदर्शों की ओर लौटना होगा।
एक स्वस्थ पत्रकारिता ही एक स्वस्थ लोकतंत्र की नींव है। उन्होंने इस चौथे स्तंभ को और अधिक सुदृढ़, विश्वसनीय और जनोन्मुखी बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष ईश्वर दुबे, सचिव सतीश बौद्ध एवं अन्य पदाधिकारी और राजाराम त्रिपाठी, प्रो. संजय त्रिवेदी, वरिष्ठ पत्रकार गिरीश पंकज सहित बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के पत्रकार उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़
कोरिया : जल संरक्षण का कोरिया मॉडल बना राष्ट्रीय उदाहरण- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की सराहना
कोरिया मॉडल की देशभर में गुंज- प्रधानमंत्री ने बताया जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का प्रेरक उदाहरण
कोरिया का प्रयास बना राष्ट्रीय उदाहरण: जल संरक्षण को जनभागीदारी से सशक्त करना हमारा संकल्प- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

कोरिया। कोरिया जिले में जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए “कैच द रेन” तथा राज्य शासन के मोर गाव मोर पानी महा अभियान अभियान के अंतर्गत में “आवा पानी झोंकी” अभियान संचालित किया गया। इस पहल ने जल संरक्षण को केवल एक सरकारी योजना से आगे बढ़ाकर व्यापक जनभागीदारी पर आधारित आंदोलन बना दिया है।

इस अभिनव प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान तब मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में कोरिया मॉडल की सराहना की और इसे जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बताया।
इसके अतिरिक्त, केंद्रीय स्तर पर भी इस मॉडल को सराहना प्राप्त हुई है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल द्वारा भी कोरिया मॉडल को अन्य राज्यों में लागू किए जाने योग्य पहल के रूप में उल्लेखित किया गया, जिससे इसकी उपयोगिता और विस्तार की संभावनाएँ स्पष्ट होती हैं।

पृष्ठभूमि
कोरिया जिले में लगभग 1370 मिमी वार्षिक वर्षा होने के बावजूद भू-आकृतिक परिस्थितियों के कारण जल का तीव्र बहाव होता था, जिससे भूजल पुनर्भरण सीमित था।
कोरिया मॉडल: जन आंदोलन की अवधारणा
“जल संचय जन भागीदारी अभियान” के अंतर्गत लागू 5% मॉडल के तहत किसानों ने अपनी भूमि का 5% भाग छोटी सीढ़ीदार जल संरचनाओं के लिए समर्पित किया साथ ही सोखता गड्ढे और मनरेगा के अंतर्गत संरचनाएं बनाईं गईं।
सामुदायिक एवं वैज्ञानिक समन्वय
महिलाओं ने नीर नायिका, युवाओं ने जल दूत के रूप में भूमिका निभाई और ग्राम सभाओं के माध्यम से विकेंद्रीकृत योजना को सशक्त बनाया। इससे समुदाय स्वयं कार्यान्वयनकर्ता बना।
2025 की उपलब्धियाँ (जल पुनर्भरण)
जिले में कुल लगभग 2.8 MCM (28 लाख घन मीटर) जल का भूजल में पुनर्भरण हुआ। यह जल मात्रा लगभग 230–235 (12000 m³/ तालाब) बड़े तालाबों के बराबर और 1800 से अधिक (1500 m³/ डबरी) डबरियों के बराबर है। (गणनाएं मानक वैज्ञानिक मानकों एवं सावधानीपूर्वक किए गए आकलन पर आधारित हैं।)
भूजल स्तर में सुधार
CGWB की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में कोरिया जिले के भूजल स्तर में 5.41 मीटर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो इस मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
2026 में प्रगति
20,612 से अधिक जल संरक्षण कार्य पूर्ण/प्रगति पर हैं जिनके अंतर्गत 17,229 सामुदायिक कार्य तथा 3,383 मनरेगा आधारित संरचनाएँ शामिल हैं।
कलेक्टर का वक्तव्य
जिला कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा—
“कोरिया मॉडल की सफलता का मूल आधार जनभागीदारी है। जब समाज स्वयं जल संरक्षण का संकल्प लेता है, तो परिणाम स्थायी और व्यापक होते हैं। हमारा प्रयास है कि हर बूंद को संजोकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।”
कोरिया मॉडल यह प्रमाणित करता है कि जब जनभागीदारी, वैज्ञानिक योजना, शासन और प्रशासनिक नेतृत्व एक साथ कार्य करते हैं, तो जल संरक्षण को एक स्थायी जन आंदोलन में परिवर्तित किया जा सकता है— और यही मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनाए जाने की दिशा में अग्रसर है।

कोरबा
कोरबा पहुंचने पर राष्ट्रीय वितरक महामंच के सदस्यों का हुआ स्वागत
कोरबा। छत्तीसगढ़ राज्य अधिवेशन में भाग लेने आई राष्ट्रीय वितरक महामंच के सदस्यों का ऊर्जा नगरी कोरबा पहुंचने पर छत्तीसगढ़ अखबार वितरक संघ के सदस्यों ने कोरबा रेलवे स्टेशन पर फूलमाला पहनाकर स्वागत किया गया। राष्ट्रीय वितरक महामंच के अध्यक्ष रामरक्षा सिंह के नेतृत्व में कोरबा पहुंचे देश के अलग अलग प्रांतों के सदस्य दल में राष्ट्रीय वितरक महामंच के संरक्षक पंकज भट्ट चंडीगढ़, महासचिव राकेश सैनी मथुरा उत्तर प्रदेश, कोषाध्यक्ष यदुनाथ मंडल,उपाध्यक्ष अंकुर मंडल, साहुल सिंह अध्यक्ष समाचार पत्र विक्रेता समाज सेवक समिति धनबाद झारखंड, विमलेश कुमार, विनोद कुमार ठाकुर कार्यकारणी सदस्य गया जिला बिहार एवं राष्ट्रीय वितरक महामंच के वरिष्ठ मार्गदर्शक मंडल सदस्य भागवत नारायण चौरसिया चंदौली जिला उत्तर प्रदेश शामिल रहे ।


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