राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने किया उद्घाटन, ध्यानचंद की स्मृति में युवाओं को खेलों से जोड़े जाने का आह्वान
कोरबा। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर कोरबा के प्रेक्षागृह इंदिरा स्टेडियम में शनिवार को सांसद खेल महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया और खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि खेल जीवन का अनुशासन और राष्ट्र की ऊर्जा का प्रतीक है।
राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह
सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय खेल दिवस हमारे लिए केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि प्रेरणा और संकल्प का अवसर है। आज पूरा देश हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को नमन कर रहा है, जिन्होंने अपनी अद्वितीय प्रतिभा और खेल कौशल से भारत को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अनुशासन, परिश्रम और संकल्प से दिखा दिया कि खेल केवल जीत-हार का नाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कला है। उन्होंने कहा कि ध्यानचंद जी ने ओलंपिक में तिरंगे को ऊँचाई तक पहुँचाकर भारत की पहचान को अमर कर दिया। उनका जीवन हम सबके लिए त्याग, संघर्ष और अनुशासन का पाठ है। सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए फिट इंडिया और खेलो इंडिया जैसे अभियान युवाओं में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार कर रहे हैं। कोरबा के युवा खिलाड़ियों में अपार प्रतिभा है और सही अवसर मिलने पर वे प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश का नाम रोशन करेंगे।
🎙️ कलेक्टर अजीत बसंत
कोरबा कलेक्टर अजीत बसंत ने कहा कि मेजर ध्यानचंद का जीवन हर खिलाड़ी के लिए आदर्श है। उन्होंने अपने खेल के माध्यम से दिखाया कि परिश्रम और अनुशासन से ही सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। ध्यानचंद ने न केवल भारत को तीन ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलाए, बल्कि पूरी दुनिया को यह एहसास कराया कि भारत खेलों में कितनी महान प्रतिभा रखता है। कलेक्टर ने युवाओं से अपील की कि वे खेलों को जीवन का हिस्सा बनाएं और समाज व राष्ट्र के उत्थान में योगदान दें।
भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने कहा कि खेल युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में ले जाते हैं और समाज में भाईचारे की भावना का निर्माण करते हैं। मेजर ध्यानचंद जैसे महान व्यक्तित्व की स्मृति हमें यह सिखाती है कि कठिनाइयों के बीच भी हौसला और अनुशासन बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सांसद खेल महोत्सव जैसे आयोजन कोरबा की धरती पर नई प्रतिभाओं को पहचान और अवसर देने का एक सशक्त मंच है। भाजपा सरकार खिलाड़ियों को निरंतर प्रोत्साहित करने और सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित है।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग अधिकारी दीनू पटेल ने कहा कि खेल व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और बौद्धिक रूप से मजबूत बनाते हैं और ध्यानचंद का जीवन इस बात का उदाहरण है। पटेल ने कहा कि ध्यानचंद ने जिस तरह अपने खेल से पूरी दुनिया में भारत का नाम रौशन किया, वैसे ही कोरबा के युवा भी खेल जगत में प्रदेश और देश को गौरवान्वित करेंगे।
मंच पर उपस्थित अतिथियों में राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह, कलेक्टर अजीत बसंत, जिला पंचायत सीईओ दिनेश नाग,निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय,जिला क्रीड़ा अधिकारी के एल टंडन एवं खेल एवं युवा कल्याण विभाग अधिकारी दीनू पटेल,भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी, नगर निगम की महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह,पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. राजीव सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता हितानंद अग्रवाल, मंडल अध्यक्ष राजेश राठौर एवं योगेश मिश्रा, पार्षद युगल केवट, अजय विश्वकर्मा, नवदीप नंदा, अनिल वस्त्रकर, अजय चंद्रा, भरत सोनी, दीपक यादव, मंडल मंत्री विजय गुप्ता, सह-मीडिया प्रभारी पवन सिन्हा, विशेष रूप से मौजूद रहे।
यह महोत्सव 29 से 31 अगस्त 2025 तक चलेगा, जिसमें कबड्डी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स और अन्य खेलों की प्रतियोगिताएँ होंगी। जिला प्रशासन एवं खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने बताया कि विजेताओं को सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि कोरबा की धरती से नई खेल प्रतिभाएँ उभरकर प्रदेश और देश का नाम रोशन करें।
विकसित भारत-जी राम जी के तहत रू1.32 करोड़ से अधिक के कार्य स्वीकृत
जल संरक्षण एवं संवर्धन के साथ ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार, 180 से अधिक ग्राम पंचायतों में हो रहा निर्माण
मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत जल सरंक्षण एवं संवर्धन सम्बंधी संरचनाओं को प्राथमिकता
कोरबा, 26 अक्टूबर 2026। जिले में गिरते भूजल स्तर को बढ़ाने तथा वर्षा जल के संरक्षण और पुनर्भरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के तहत 234 बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट का निर्माण कराया जा रहा है। इन कार्यों के लिए कुल 1 करोड़ 32 लाख 97 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन संरचनाओं के निर्माण से जहां ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं, वहीं भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देकर जल संकट की चुनौती से निपटने में भी मदद मिलेगी।
कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में जिले में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान के तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा जल स्रोतों के संरक्षण के लिए विभिन्न संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है।
बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने में मिलेगी मदद
बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट ऐसी संरचना है, जिसके माध्यम से वर्षा जल को रेत एवं अन्य फिल्टर सामग्री की सहायता से छानकर जमीन के भीतर पहुंचाया जाता है। इससे भूजल पुनर्भरण में मदद मिलती है तथा बोरवेल और आसपास के जलस्रोतों के जलस्तर को बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। ग्राम पंचायतों, शासकीय भवनों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक भवनों में ऐसी संरचनाएं जल संरक्षण की दृष्टि से उपयोगी हैं।
पांचों विकासखंडों में हो रहा निर्माण
जिले की 180 से अधिक ग्राम पंचायतों में मांग एवं आवश्यकता के अनुसार सामुदायिक बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट का निर्माण कराया जा रहा है। विकासखंडवार स्थिति के अनुसार करतला में 64, कटघोरा में 30, कोरबा में 66, पाली में 13 तथा पोड़ी उपरोड़ा में 61 रिचार्ज पिट बनाए जा रहे हैं।
इन संरचनाओं से विशेषकर उन ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण को प्रोत्साहन मिलेगा, जहां जलस्तर में गिरावट की समस्या है। वर्षा जल का बेहतर उपयोग होने से जल उपलब्धता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।
विकसित भारत- जी राम जी से जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन के इन प्रयासों के माध्यम से रोजगार सृजन के साथ जल सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भविष्य के लिए भी जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।
कोरबा। प्रेस क्लब के सदस्य एवं दैनिक तरूण छत्तीसगढ़ के संपादक सुभाष अग्रवाल के अनुज भ्राता (छोटे भाई) शहर के प्रतिष्ठित नागरिक एवं होटल रिलैक्स इन के संचालक सतीश अग्रवाल पिता स्वर्गीय ओमप्रकाश अग्रवाल का आज सोमवार दिनांक 26/10/2026 की देर शाम 7.30 बजे निधन हो गया। वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्कार कल मंगलवार दिनांक 27/10/2026 को सुबह 11 बजे स्थानीय मोती सागर पारा मुक्तिधाम में संपन्न होगा। इससे पूर्व अग्रोहा मार्ग स्थित उनके निवास से अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। उनके निधन पर कोरबा प्रेस क्लब परिवार ने शोक व्यक्त किया है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में परम शांति प्रदान करे एवं शोकाकुल परिवार को यह असह्य दुःख सहन करने की शक्ति दे।
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा वन मंडल के करतला रेंज में 9 हाथियों का झुंड घूम रहा है। झुंड में नन्हे हाथी के जन्म की खुशी में रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई और उसका नाम ‘काशी’ रखा।
कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया। इसमें रामभाठा, लबेद, पाहराभांठा, काशीपानी, छातापाठ, जामपानी और छुईडुंगा गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।
मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद ग्रामीणों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। ग्रामीणों ने हाथी के बच्चे के स्वस्थ जीवन की कामना की।
बेबी एलिफेंट का नाम ‘काशी’ रखा गया है।
छठी कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया।
रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई।
जिले में 48 हाथियों की मौजूदगी
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 9 हाथियों का झुंड फिलहाल काशीपानी के जंगल में घूम रहा है। इसके अलावा कुदमुरा रेंज में 32 हाथी और चचिया क्षेत्र में 7 हाथी मौजूद हैं। हाल के दिनों में हाथियों ने 17 किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है।
20 साल से जंगल में आ रहे हाथी
ग्रामीणों ने बताया कि करीब 20 साल से हाथी इस जंगल में आते हैं। वे लंबे समय तक यहां रुकने के बाद वापस चले जाते हैं। यह हाथियों का पुराना कॉरिडोर है।
SDO मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों से हाथियों से छेड़छाड़ नहीं करने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फसल नुकसान के मामलों में नियमानुसार मुआवजा दिया जाता है। जनहानि रोकने के लिए सतर्क रहना जरूरी है।
साल 2000 में पहली बार आए थे हाथी
जिले में साल 2000 में पहली बार कुदमुरा रेंज के आमटिकरा गांव में हाथी आए थे। इसके बाद धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ती गई। कई बार जिले में हाथियों की संख्या 150 तक पहुंच चुकी है।
धिनारा गांव से शुरू हुई छठी मनाने की परंपरा
बेबी एलिफेंट की छठी मनाने की परंपरा धिनारा गांव से शुरू हुई थी। ग्रामीण अब हाथियों को लेकर जागरूक हो रहे हैं। पहले जहां हाथियों को भगवान मानकर पूजा की जाती थी, वहीं अब ग्रामीण सुरक्षित दूरी बनाए रखने पर जोर देते हैं।