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विदेश

PM मोदी से मुलाकात का असर: यूक्रेन पर बदले पुतिन के सुर, बोले-‘शांति को तैयार हूं…रूस आ जाओ जेलेंस्की’

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बीजिंग,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया मुलाकात का असर अब अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति पर साफ दिखने लगा है। मॉस्को में हुई इस बैठक में पीएम मोदी ने यूक्रेन युद्ध को खत्म करने और शांति बहाल करने पर जोर दिया था। इसी कड़ी में अब पुतिन ने संकेत दिए हैं कि यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी पर आम सहमति बनाना संभव है हालांकि रूस NATO की सदस्यता के मुद्दे पर किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा।

पुतिन का बयान-शांति का रास्ता खुला, लेकिन …
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने बीजिंग में स्लोवाक प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ बातचीत के दौरान कहा- “अगर संघर्ष समाप्त हो जाए तो यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के विकल्प मौजूद हैं। मुझे लगता है कि यहाँ आम सहमति बनाने का अवसर है।” उन्होंने यह भी कहा कि रूस को यूरोपीय संघ (EU) में यूक्रेन की संभावित सदस्यता पर कोई आपत्ति नहीं है  लेकिन यदि कीव NATO में शामिल होता है तो यह रूस के लिए अस्वीकार्य होगा। पुतिन ने यह भी याद दिलाया कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  के साथ अलास्का में हुई मुलाकात के दौरान भी यह मुद्दा उठाया गया था।

जेलेंस्की का पलटवार-बिना सुरक्षा गारंटी समझौता नहीं
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की  ने स्पष्ट किया है कि युद्ध का कोई भी समाधान तब तक संभव नहीं जब तक यूक्रेन को ठोस सुरक्षा गारंटी नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि इसमें NATO जैसी सुरक्षा मदद भी शामिल होनी चाहिए। जेलेंस्की ने बताया कि  यूक्रेन और उसके सहयोगी देशों ने पुतिन के साथ संभावित समझौते को टिकाऊ बनाने के लिए काम तेज कर दिया है। 

NATO का सख्त रुख 
नाटो महासचिव मार्क रूटे  ने यूक्रेन की सुरक्षा को लेकर बयान देते हुए कहा”शांति बनाए रखने के लिए केवल बाहरी आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। इसके लिए यूक्रेन को अपनी मजबूत सशस्त्र सेनाओं की जरूरत है और साथ ही सहयोगियों की ओर से सुरक्षा गारंटी भी मिलनी चाहिए।” रूटे के इस बयान से साफ है कि NATO अब भी यूक्रेन को सैन्य सहयोग देने के पक्ष में है, ताकि रूस की आक्रामकता को रोका जा सके।

भारत की मध्यस्थता की अहमियत
विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी-पुतिन मुलाकात ने इस बहस को नई दिशा दी है। मोदी ने पुतिन से सीधे तौर पर कहा था कि युद्ध किसी का भला नहीं करता और शांति ही सबसे अच्छा रास्ता है। अब पुतिन का यह नरम बयान बताता है कि भारत की कूटनीतिक कोशिशें धीरे-धीरे असर डाल रही हैं।हालांकि, NATO सदस्यता को लेकर रूस की सख्ती और जेलेंस्की की कठोर शर्तें दिखाती हैं कि **यूक्रेन संकट का समाधान अभी आसान नहीं है। लेकिन इतना तय है कि भारत की सक्रिय भागीदारी और पुतिन के नए संकेतों ने शांति वार्ता के लिए एक नई उम्मीद जरूर जगा दी है।

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विदेश

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोला, कमर्शियल जहाज गुजर सकेंगे

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लेबनान में सीजफायर के बाद फैसला, ट्रम्प बोले- शुक्रिया, लेकिन ईरान की नाकाबंदी जारी रहेगी

तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। ईरान ने सीजफायर के दौरान होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खोल दिया है। विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने X पर पोस्ट कर बताया कि सभी कमर्शियल जहाजों को गुजरने की इजाजत होगी। यह फैसला लेबनान में सीजफायर के बाद लिया गया है।

उन्होंने बताया कि जहाज एक सुरक्षित रास्ते से गुजरेंगे, जिसे ईरान के पोर्ट्स और मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन ने पहले से तय कर रखा है, ताकि सफर के दौरान कोई खतरा न हो। अराघची ने कहा कि इस दौरान जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी, ताकि समुद्री व्यापार प्रभावित न हो।

इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर ईरान को शुक्रिया कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही होर्मजु स्ट्रेट खुल गया है लेकिन ईरान पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी और यह सिर्फ ईरान पर लागू होगी।

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बिज़नस

आर्थिक स्थिति के सामान्य होने में अधिक समय लग सकता है: मुख्य आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्वरन

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वाशिंगटन,एजेंसी। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्वरन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर तेल की बढ़ती कीमतों के प्रभाव के बारे में बुधवार को चेताया और कहा कि स्थिति के सामान्य होने में अधिक समय लग सकता है। नागेश्वरन ने यहां ‘यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम’ द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक संघर्ष का प्रभाव चार व्यापक क्षेत्रों में महसूस किया जा सकता है – ऊर्जा की उच्च कीमतें, अन्य वस्तुओं की आपूर्ति में व्यवधान, रसद और बीमा लागत में वृद्धि तथा आपूर्ति प्रवाह में गिरावट। 

नागेश्वरन ने यूएस-इंडिया इकोनॉमिक फोरम 2026 को संबोधित करते हुए कहा, ”इसलिए मुझे लगता है कि हमें संघर्ष की समाप्ति और आर्थिक गतिविधियों की सामान्य बहाली के लिए अधिक धैर्य रखने की आवश्यकता है।” उन्होंने कहा कि संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितता के व्यापक दायरे को समझना आवश्यक है, विशेष रूप से दक्षिण एशिया में और सामान्य तौर पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में। नागेश्वरन ने कहा, ”यह केवल तेल की कीमत का मामला नहीं है… यह उन वस्तुओं के बारे में है जो मायने रखती हैं।” 

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बिज़नस

IEA प्रमुख की चेतावनी, यूरोप के पास बचा सिर्फ 6 हफ्ते का ईंधन, फ्लाइट्स पर खतरा

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पेरिस, एजेंसी। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के प्रमुख फातिह बिरोल ने बृहस्पतिवार को कहा कि यूरोप के पास ”संभवत: करीब छह हफ्ते का विमान ईंधन ही बचा है” और यदि ईरान युद्ध के कारण तेल आपूर्ति बाधित रहती है तो जल्द ही उड़ानें रद्द हो सकती हैं। आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) के साथ साक्षात्कार में पश्चिम संकट के वैश्विक प्रभावों की गंभीर स्थिति बयां करते हुए इसे ”अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट” करार दिया। 

होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये तेल, गैस एवं अन्य महत्वपूर्ण आपूर्ति के बाधित होने से यह ऊर्जा संकट” उत्पन्न हुआ है। उन्होंने कहा, ”पहले ‘डायर (भयानक) स्ट्रेट्स’ नाम का एक समूह था। अब यह सचमुच एक ‘डायर स्ट्रेट’ बन गया है और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा। यह जितना लंबा चलेगा, वैश्विक आर्थिक वृद्धि और महंगाई के लिए उतना ही खराब होगा।” 

महंगा हो सकता है तेल-गैस

बिरोल ने कहा कि इसका प्रभाव “पेट्रोल (गैसोलीन) की ऊंची कीमतें, गैस की बढ़ती कीमतें और बिजली की महंगी दरों” के रूप में दिखाई देगा जबकि दुनिया के कुछ हिस्से दूसरों की तुलना में अधिक प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा, ”सबसे ज्यादा असर एशियाई देशों पर पड़ेगा” जो पश्चिम एशिया से ऊर्जा पर निर्भर हैं जिनमें जापान, दक्षिण कोरिया, भारत, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश शामिल हैं।

बिरोल ने कहा, ”इसके बाद इसका प्रभाव यूरोप और अमेरिका पर पड़ेगा।” उन्होंने आगाह किया कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा नहीं खुलता है, तो ‘जल्द ही हम यह खबर सुन सकते हैं कि विमान ईंधन की कमी के कारण एक शहर से दूसरे शहर के लिए उड़ानें रद्द की जा सकती हैं।’

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