विदेश
ट्रम्प बोले- हमने भारत-रूस को चीन के हाथों खो दिया:उनका भविष्य अच्छा हो, कल कोर्ट में भारत पर टैरिफ लगाने को जरूरी बताया था
वॉशिंगटन,एजेंसी। डीसी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने आशंका जताई है कि रूस और भारत अब चीन के पाले में जा चुके हैं। उन्होंने शुक्रवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा- “ऐसा लगता है कि हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। उम्मीद है उनका भविष्य अच्छा होगा।”
वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ट्रम्प के इस पोस्ट पर कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया है।
भारत पर 50% टैरिफ लगाने के बाद से दोनों देशों के बीच संबंध खराब हो गए हैं। भारत समेत बाकी देशों पर हाई टैरिफ लगाने के मामला की सुनवाई US कोर्ट में चल रही है।
ट्रम्प ने गुरुवार को कोर्ट में भारत पर टैरिफ लगाने को जरूरी बताया था। उन्होंने कहा था कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका को बहुत ज्यादा आर्थिक नुकसान होगा।

ट्रम्प ने अपनी पोस्ट के साथ एक तस्वीर भी शेयर की है, जिसमें मोदी, पुतिन और जिनपिंग एक साथ नजर आ रहे हैं। यह फोटो सितंबर 2017 में चीन के शियामेन में हुए ब्रिक्स समिट की है।
ट्रम्प बोले- यूक्रेन जंग खत्म करने के लिए भारत पर टैरिफ लगाया
ट्रम्प ने इससे पहले 4 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में एक अपील दायर की थी। इसमें उन्होंने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें कहा गया था कि ट्रम्प विदेशी सामान पर भारी टैरिफ नहीं लगा सकते।
ट्रम्प ने कहा था कि भारत पर लगाए गए टैरिफ रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए बहुत जरूरी हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए टैरिफ लगाया गया, ताकि युद्ध खत्म करने में मदद मिले।
ट्रम्प ने कहा कि निचली अदालत का फैसला उनकी पिछले 5 महीनों की व्यापारिक बातचीत को मुश्किल में डाल सकता है। इससे यूरोपीय यूनियन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ हुए समझौते खतरे में पड़ सकते हैं।
वहीं, छोटे कारोबारियों के वकील जेफ्री श्वाब ने कहा कि ट्रम्प के ये टैरिफ छोटे व्यवसायों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वे जल्दी फैसले की उम्मीद कर रहे हैं।
US अपील कोर्ट ने ट्रम्प के टैरिफ को गैर कानूनी बताया था
इससे पहले अमेरिका की एक अपील कोर्ट ने ट्रम्प के ज्यादातर टैरिफ को गैरकानूनी बताया था। कोर्ट ने कहा था कि ट्रम्प ने इन टैरिफ को लागू करने के लिए जिस कानून का सहारा लिया, वह उन्हें यह अधिकार नहीं देता।
कोर्ट ने कहा कि ट्रम्प के पास हर आयात पर टैरिफ लगाने की असीमित शक्ति नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने इस फैसले को अक्टूबर तक लागू करने से रोक दिया, ताकि ट्रम्प सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें।
निचली अदालत ने 7-4 के फैसले में कहा था कि 1977 का इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) ट्रम्प को इतने बड़े टैरिफ लगाने की इजाजत नहीं देता।
ट्रम्प ने कहा- भारत टैरिफ लगाकर अमेरिका को मार रहा
ट्रम्प ने बुधवार (3 सितंबर) को कहा कि भारत टैरिफ लगाकर हमें (अमेरिका) मार रहा है। उन्होंने द स्कॉट जेनिंग्स रेडियो शो में बात करते हुए कहा कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश अपने ऊंचे टैरिफ से अमेरिका को मार रहे हैं।
ट्रम्प ने कहा- मैं टैरिफ को दुनिया में सबसे बेहतर समझता हूं। भारत दुनिया में सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाला देश था, लेकिन अब उन्होंने मुझे जीरो टैरिफ का ऑफर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका ने भारत पर टैरिफ नहीं लगाए होते, तो भारत ऐसा ऑफर कभी नहीं देता। ट्रम्प ने टैरिफ को अमेरिका की आर्थिक ताकत के लिए जरूरी बताया और कहा कि टैरिफ के बिना वे यह ऑफर नहीं देते। इससे हम आर्थिक रूप से मजबूत होंगे।
ट्रम्प ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाया
ट्रम्प ने 30 जुलाई को भारत पर 25% टैरिफ का ऐलान किया था। यह 7 अगस्त को लागू हुआ था। इससे एक दिन पहले यानी 6 अगस्त को उन्होंने रूसी तेल खरीदने की वजह से भारत पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया था, जो 27 अगस्त से लागू हुआ।
ट्रम्प का कहना था कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर खुले मार्केट में बेच रहा है। इससे पुतिन को यूक्रेन के खिलाफ जंग जारी रखने में मदद मिल रही है।
ट्रम्प का दावा- भारत 0% टैरिफ करने को तैयार
ट्रम्प ने यह भी साफ कर दिया कि वे भारत पर लगाए गए टैरिफ कम करने के बारे में नहीं सोच रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत के साथ अमेरिका के रिश्ते बहुत अच्छे हैं।
ट्रम्प ने पहले भारत के निर्यात पर 25% शुल्क लगाया था, लेकिन इसे बढ़ाकर 50% कर दिया गया। इसका असर अमेरिका को भेजे जाने वाले भारत के 55% से ज्यादा सामान पर पड़ा।
सोमवार को सोशल मीडिया पर ट्रम्प ने लिखा था कि भारत ने अपने टैरिफ घटाने की पेशकश की है, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि यह कब हुआ और क्या अमेरिका भारत के साथ व्यापार वार्ता फिर से शुरू करेगा। उन्होंने बस इतना कहा, “अब देर हो चुकी है। उन्हें यह सालों पहले करना चाहिए था।”

विदेश
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोला, कमर्शियल जहाज गुजर सकेंगे
लेबनान में सीजफायर के बाद फैसला, ट्रम्प बोले- शुक्रिया, लेकिन ईरान की नाकाबंदी जारी रहेगी
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। ईरान ने सीजफायर के दौरान होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खोल दिया है। विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने X पर पोस्ट कर बताया कि सभी कमर्शियल जहाजों को गुजरने की इजाजत होगी। यह फैसला लेबनान में सीजफायर के बाद लिया गया है।

उन्होंने बताया कि जहाज एक सुरक्षित रास्ते से गुजरेंगे, जिसे ईरान के पोर्ट्स और मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन ने पहले से तय कर रखा है, ताकि सफर के दौरान कोई खतरा न हो। अराघची ने कहा कि इस दौरान जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी, ताकि समुद्री व्यापार प्रभावित न हो।
इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर ईरान को शुक्रिया कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही होर्मजु स्ट्रेट खुल गया है लेकिन ईरान पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी और यह सिर्फ ईरान पर लागू होगी।

बिज़नस
आर्थिक स्थिति के सामान्य होने में अधिक समय लग सकता है: मुख्य आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्वरन
वाशिंगटन,एजेंसी। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्वरन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर तेल की बढ़ती कीमतों के प्रभाव के बारे में बुधवार को चेताया और कहा कि स्थिति के सामान्य होने में अधिक समय लग सकता है। नागेश्वरन ने यहां ‘यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम’ द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक संघर्ष का प्रभाव चार व्यापक क्षेत्रों में महसूस किया जा सकता है – ऊर्जा की उच्च कीमतें, अन्य वस्तुओं की आपूर्ति में व्यवधान, रसद और बीमा लागत में वृद्धि तथा आपूर्ति प्रवाह में गिरावट।

नागेश्वरन ने यूएस-इंडिया इकोनॉमिक फोरम 2026 को संबोधित करते हुए कहा, ”इसलिए मुझे लगता है कि हमें संघर्ष की समाप्ति और आर्थिक गतिविधियों की सामान्य बहाली के लिए अधिक धैर्य रखने की आवश्यकता है।” उन्होंने कहा कि संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितता के व्यापक दायरे को समझना आवश्यक है, विशेष रूप से दक्षिण एशिया में और सामान्य तौर पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में। नागेश्वरन ने कहा, ”यह केवल तेल की कीमत का मामला नहीं है… यह उन वस्तुओं के बारे में है जो मायने रखती हैं।”

बिज़नस
IEA प्रमुख की चेतावनी, यूरोप के पास बचा सिर्फ 6 हफ्ते का ईंधन, फ्लाइट्स पर खतरा
पेरिस, एजेंसी। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के प्रमुख फातिह बिरोल ने बृहस्पतिवार को कहा कि यूरोप के पास ”संभवत: करीब छह हफ्ते का विमान ईंधन ही बचा है” और यदि ईरान युद्ध के कारण तेल आपूर्ति बाधित रहती है तो जल्द ही उड़ानें रद्द हो सकती हैं। आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) के साथ साक्षात्कार में पश्चिम संकट के वैश्विक प्रभावों की गंभीर स्थिति बयां करते हुए इसे ”अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट” करार दिया।

होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये तेल, गैस एवं अन्य महत्वपूर्ण आपूर्ति के बाधित होने से यह ऊर्जा संकट” उत्पन्न हुआ है। उन्होंने कहा, ”पहले ‘डायर (भयानक) स्ट्रेट्स’ नाम का एक समूह था। अब यह सचमुच एक ‘डायर स्ट्रेट’ बन गया है और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा। यह जितना लंबा चलेगा, वैश्विक आर्थिक वृद्धि और महंगाई के लिए उतना ही खराब होगा।”
महंगा हो सकता है तेल-गैस
बिरोल ने कहा कि इसका प्रभाव “पेट्रोल (गैसोलीन) की ऊंची कीमतें, गैस की बढ़ती कीमतें और बिजली की महंगी दरों” के रूप में दिखाई देगा जबकि दुनिया के कुछ हिस्से दूसरों की तुलना में अधिक प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा, ”सबसे ज्यादा असर एशियाई देशों पर पड़ेगा” जो पश्चिम एशिया से ऊर्जा पर निर्भर हैं जिनमें जापान, दक्षिण कोरिया, भारत, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश शामिल हैं।
बिरोल ने कहा, ”इसके बाद इसका प्रभाव यूरोप और अमेरिका पर पड़ेगा।” उन्होंने आगाह किया कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा नहीं खुलता है, तो ‘जल्द ही हम यह खबर सुन सकते हैं कि विमान ईंधन की कमी के कारण एक शहर से दूसरे शहर के लिए उड़ानें रद्द की जा सकती हैं।’

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