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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के स्टील से मिजोरम में बना 114-मीटर ऊंचा रेलवे-ब्रिज:देश में दूसरा सबसे ऊंचा, BSP के मटेरियल से बन चुके चिनाब ब्रिज,स्टैच्यू-ऑफ-यूनिटी, INS विक्रांत

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रायपुर/आइजोल,एजेंसी। छत्तीसगढ़ का स्टील दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब रेलवे ब्रिज, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, INS विक्रांत बनाने के बाद मिजोरम की राजधानी आइजोल में नया इतिहास रचा है। भिलाई के BSP से भेजा गया 30-35 हजार टन लोहे से पियर ब्रिज बना है, जो देश का दूसरा सबसे बड़ा ब्रिज है। जिसकी ऊंचाई 114 मीटर है। जबकि चिनाब रेलवे ब्रिज 359 मीटर ऊंचा है।

बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट के तहत ट्रैक, टनल और ब्रिज निर्माण के लिए बिलासपुर जोन के इंजीनियरिंग सपोर्ट, मशीनरी और विशेषज्ञ टीमें भेजी गई थी। इसके साथ ही रेलवे ट्रैक बिछाने में इस्तेमाल होने वाला रेलपांत, गर्डर, लोहा और स्टील मटेरियल भी भेजा गया था।

आजादी के बाद पहली बार मिजोरम की राजधानी आइजोल रेल नेटवर्क से जुड़ी है। आने वाले समय में रेल लाइन म्यांमार बॉर्डर तक जाएगी। इस रेल नेटवर्क से मिजोरम की विकास को नई दिशा मिलेगी। इस पियर ब्रिज को बनाने में 10 साल से अधिक का समय लगा। इसके बनने से अब 7 घंटे का सफर 3 घंटे में पूरा होगा।

रेलवे के मुताबिक बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट की शुरुआत 2014 में की गई थी, तब इसकी लागत 5 हजार 20 करोड़ रुपए थी, लेकिन ब्रिज और 51.38 किलोमीटर लंबी बइरबी-सायरंग रेल लाइन बनाने में 8 हजार 71 करोड़ रुपए लगे।

बताया जा रहा है कि PM नरेंद्र मोदी इसी महीने लोकार्पण कर सकते हैं।

सबसे पहले जानिए एशिया के सबसे बड़े स्टील प्लांट BSP के बारे में

भिलाई स्टील प्लांट एरिया के हिसाब से एशिया का सबसे बड़ा स्टील प्लांट है। प्रोडक्शन के हिसाब से यह सेल का सबसे बड़ा प्लांट है। इसकी स्थापना सोवियत संघ के सहयोग से वर्ष 1955 में हुई थी। भिलाई को स्टील प्लांट के लिए चुनने का मुख्य कारण स्टील निर्माण के लिए आवश्यक कच्चा माल पास के क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध होना था।

भिलाई स्टील प्लांट में आयरन ओर राजहरा माइंस से मंगाया जाता है। यहां से इन माइंस की दूरी लगभग 100 किलोमीटर है। लाइम स्टोन नंदिनी माइंस से लाया जाता है। यहां से इनकी दूरी करीब 25 किलोमीटर है। डोलोमाइट बिलासपुर के हिर्री से मंगाया जाता है। यहां से इसकी दूरी लगभग 140 किलोमीटर है।

भिलाई स्टील प्लांट एरिया के हिसाब से एशिया का सबसे बड़ा स्टील प्लांट है।

भिलाई स्टील प्लांट एरिया के हिसाब से एशिया का सबसे बड़ा स्टील प्लांट है।

बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट में छत्तीसगढ़ का कनेक्शन

भिलाई स्टील प्लांट का लोहा देश के दूसरे सबसे बड़े ब्रिज के निर्माण में इस्तेमाल हुआ है। ब्रिज के साथ-साथ टनल और रेलपांत सहित अन्य जरूरी संरचनाओं के लिए भी सेल की अलग-अलग इकाइयों से स्टील की आपूर्ति की गई। अकेले भिलाई प्लांट से 30 से 35 हजार टन लोहा भेजा गया था।

रेलवे के इस पुल के निर्माण के लिए सेल ने कुल 17 हजार टन स्टील सप्लाई किया, जिसमें प्लेट्स, टीएमटी बार और स्ट्रक्चर शामिल थे। इसमें 7,590 टन टीएमटी उत्पाद, 1,878 टन स्ट्रक्चरल स्टील और 8,505 टन स्टील प्लेट्स के साथ हॉट स्ट्रिप मिल प्रोडक्ट और चेकर्ड प्लेट भी शामिल हैं।

भिलाई स्टील प्लांट का लोहा बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट के देश के दूसरे सबसे बड़े ब्रिज के निर्माण में इस्तेमाल हुआ है।

भिलाई स्टील प्लांट का लोहा बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट के देश के दूसरे सबसे बड़े ब्रिज के निर्माण में इस्तेमाल हुआ है।

BSP से 60 टन स्ट्रक्चरल स्टील उपलब्ध कराया गया

ब्रिज निर्माण के लिए भिलाई इस्पात संयंत्र से ही 6,522 टन टीएमटी स्टील, 7,450 टन प्लेट्स और 60 टन स्ट्रक्चरल स्टील उपलब्ध कराया गया। इसके अलावा सेल की अन्य इकाइयां बर्नपुर स्थित इस्को स्टील प्लांट, दुर्गापुर स्टील प्लांट, राउरकेला स्टील प्लांट और बोकारो स्टील लिमिटेड से भी शेष स्टील की आपूर्ति की गई थी।

यह मिजोरम की राजधानी आइजोल के पियर ब्रिज की तस्वीर है।

यह मिजोरम की राजधानी आइजोल के पियर ब्रिज की तस्वीर है।

दुनिया के सबसे ऊंचे ब्रिज पर भी लगा है BSP का लोहा

जम्मू-कश्मीर के चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे पुल पर सेल की इकाई भिलाई स्टील प्लांट का लोहा इस्तेमाल किया गया है। इस ब्रिज के लिए सेल की अलग-अलग इकाइयों से लोहे की आपूर्ति की गई है। इसमें अकेले 12432 टन लोहा भिलाई के प्लांट से भेजा गया था।

रेलवे के इस पुल के निर्माण के लिए सेल ने 16,000 टन लोहे की आपूर्ति की थी, जिसके तहत प्लेट्स, टीएमटी बार और स्ट्रक्चर शामिल हैं। इसमें 6690 टन टीएमटी उत्पाद, 1793 टन स्ट्रक्चरल स्टील और 7511 टन स्टील प्लेट्स सहित हॉट स्ट्रिप मिल प्रोडक्ट और चेकर्ड प्लेट शामिल हैं।

जम्मू-कश्मीर के चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे पुल पर सेल की इकाई भिलाई स्टील प्लांट का लोहा इस्तेमाल।

जम्मू-कश्मीर के चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे पुल पर सेल की इकाई भिलाई स्टील प्लांट का लोहा इस्तेमाल।

भिलाई इस्पात संयंत्र से भेजा गया 5 हजार 922 टन टीएमटी स्टील

पुल के निर्माण के लिए सेल ने भिलाई इस्पात संयंत्र से 5922 टन टीएमटी स्टील, 6454 टन प्लेट्स और 56 टन स्ट्रक्चरल स्टील सहित कुल 12,432 टन इस्पात की आपूर्ति की है। सेल के बर्नपुर स्थित इस्को स्टील प्लांट, दुर्गापुर स्टील प्लांट, राउरकेला स्टील प्लांट और बोकारो स्टील लिमिटेड से शेष लोहे की आपूर्ति की गई थी।

रेलवे के ज्यादातर प्रोजेक्ट में छत्तीसगढ़ का लोहा

बीएसपी के स्टील का इस्तेमाल बांद्रा-वर्ली सी-लिंक, मुंबई में अटल सेतु, अरुणाचल प्रदेश में सेला सुरंग, हिमाचल प्रदेश में अटल सुरंग और राष्ट्रीय महत्व की कई अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के निर्माण में किया गया है।

CPRO बोले- भारतीय रेल के लिए बड़ी उपलब्धि

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के CPRO डॉ. सुस्कर विपुल विलासराव ने बताया कि, ट्रैक-टनल और ब्रिज निर्माण के लिए बिलासपुर जोन के इंजीनियरिंग सपोर्ट, मशीनरी और विशेषज्ञ टीमें भेजी गई थी। रेलवे ट्रैक बिछाने में इस्तेमाल होने वाला रेलपांत, गर्डर, लोहा और स्टील मटेरियल भी छत्तीसगढ़ से ही मिज़ोरम पहुंचाया गया था।

वहीं, असम, पश्चिम बंगाल और मेघालय से भी तकनीकी उपकरण और निर्माण सामग्री लगातार सप्लाई की गई। पहाड़ियों पर बना यह रेल नेटवर्क भारतीय रेल के लिए बड़ी उपलब्धि है।

बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट के तहत बने देश का सबसे ऊंचा दूसरा पुल है। ड्रोन से ली गई तस्वीर।

बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट के तहत बने देश का सबसे ऊंचा दूसरा पुल है। ड्रोन से ली गई तस्वीर।

बइरबी-सायरंग रेलवे के पियर ब्रिज के पहले बने टनल की ड्रोन से ली गई तस्वीर है।

बइरबी-सायरंग रेलवे के पियर ब्रिज के पहले बने टनल की ड्रोन से ली गई तस्वीर है।

ये टनल के अंदर की तस्वीर है, जो ट्रायल के दौरान ली गई थी।

ये टनल के अंदर की तस्वीर है, जो ट्रायल के दौरान ली गई थी।

जानिए बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट के बारे में ?

दरअसल, इस बइरबी-सायरंग प्रोजेक्ट की शुरुआत 29 नवंबर 2014 को हुई थी। सिलचर (असम) से बइरबी तक रेल सेवा पहले से मौजूद थी, लेकिन मिजोरम की राजधानी आइजोल तक पहुंचाने के लिए बइरबी से सायरंग तक नई लाइन बिछाई गई। अंतिम सेक्शन हरतकी-सायरंग को 10 जून 2025 को पूरा किया गया।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि यह पूरी रेल लाइन दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों से गुजरती है। निर्माण के लिए सामान पहुंचाने तक के लिए अलग से 200 किलोमीटर लंबा सड़क नेटवर्क तैयार करना पड़ा।

रेलवे ने बनाई 200 KM सड़क

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के CPRO कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि, यह प्रोजेक्ट बेहद दुर्गम पहाड़ी इलाकों से गुजरता है। लिहाजा, यहां रेल लाइन का काम बहुत ही मुश्किलों भरा रहा है। यहां तक सामान पहुंचाने के लिए रेलवे को 200 किलोमीटर लंबा सड़क नेटवर्क अलग से बनाना पड़ा। लगातार 10 साल की मेहनत के बाद यह सपना साकार हुआ।

पीएम नरेंद्र मोदी जल्द इस ब्रिज का उद्घाटन करेंगे।

पीएम नरेंद्र मोदी जल्द इस ब्रिज का उद्घाटन करेंगे।

जानिए इस रेल परियोजना की खासियत

इस रेल लाइन में 45 टनल, 153 पुल और 114 मीटर ऊंचाई (देश का दूसरा सबसे ऊंचा पियर ब्रिज) तक के मेगा ब्रिज शामिल हैं। इसके लिए 12.8 किलोमीटर लंबा चट्‌टानों को काटकर सुरंग का निर्माण किया गया है। इसमें 1.8 किलोमीटर लंबी सबसे बड़ी सुरंग भी है। इस रेल लाइन पर 31% ट्रैक सुरंगों के भीतर और 23% हिस्सा पुलों में हैं।

7 घंटे का सफर अब 3 घंटे में

पहले सड़क मार्ग से आइजोल से सिलचर जाने में 7 घंटे लगते थे। वहीं रेल नेटवर्क के जरिए यह दूरी सिर्फ 3 घंटे में तय होगी। गुवाहाटी 12 घंटे और दिल्ली करीब 48 घंटे में पहुंचा जा सकेगा। बरसात के दिनों में भूस्खलन से बंद होने वाले रास्तों की तुलना में अब यात्रा कहीं ज्यादा सुरक्षित और आसान होगी।

यह परियोजना न केवल मिजोरम के लिए ऐतिहासिक पल है। बल्कि पूरे पूर्वोत्तर को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कनेक्टिविटी से जोड़ने का मार्ग भी तैयार करेगा। इससे न केवल मिजोरम का देश से संपर्क मज़बूत होगा, बल्कि म्यांमार बॉर्डर तक रेल लाइन ले जाने का रास्ता भी साफ हो जाएगा।

रेलवे के सभी तरह के ट्रायल रन हो चुके हैं पूरे।

रेलवे के सभी तरह के ट्रायल रन हो चुके हैं पूरे।

रेल लाइन म्यांमार बॉर्डर तक ले जाने की योजना

CPRO कपिंजल किशोर शर्मा के अनुसार बइरबी-सायरंग लाइन सिर्फ मिजोरम तक सीमित नहीं रहेगी। रेलवे इस परियोजना को और आगे बढ़ाकर म्यांमार बॉर्डर तक ले जाने की योजना पर काम चल रहा है। बहुत जल्द सर्वे पूरा कर डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) केंद्र को सौंप दी जाएगी।

2-3 ट्रेनें चलाने का है प्रस्ताव, राजधानी-वंदेभारत की भी उम्मीद

रेलवे प्रशासन ने शुरुआत में यहां 2 से 3 ट्रेनें चलाने की योजना बनाई है। इसमें गुवाहाटी और दिल्ली तक की ट्रेनें प्राथमिकता पर हैं। मिजोरम सरकार ने उम्मीद जताई है कि आगे राजधानी एक्सप्रेस और वंदे भारत जैसी ट्रेनें भी यहां तक पहुंचेंगी, जिससे लोगों का यहां पहुंचना आसान होगा।

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कोरबा

SECL गेवरा में सदस्यता सत्यापन के दौरान शराब वितरण पर बवंडर, दो यूनियनों में विवाद, सीआईएसएफ की सुरक्षा व्यवस्था व प्रबंधन की खामोशी पर उठे गंभीर सवाल

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​कोरबा/गेवरा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की गेवरा परियोजना अंतर्गत एक्स-वर्कशॉप गेट के पास गत 12 सितंबर 2026 को सदस्यता सत्यापन (यूनियन वेरिफिकेशन) के दौरान एक बेहद आपत्तिजनक व शर्मनाक मामला सामने आया है सत्यापन स्थल पर कर्मचारियों को खुलेआम शराब व अन्य नशीले पदार्थ बांटे जाने को लेकर दो श्रमिक संगठनों के बीच तीखी झड़प और भारी विवाद की स्थिति निर्मित हो गई ।

​सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरा घटनाक्रम एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के वरिष्ठ प्रबंधक (मानव संसाधन) नेताम साहब की प्रत्यक्ष मौजूदगी में घटित हुआ लेकिन इसके बावजूद स्थिति पर अंकुश लगाने या दोषियों पर रोक लगाने का कोई प्रयास नहीं किया गया ।

​सीआईएसएफ बैरियर की सख्त सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल

​गेवरा खदान के सीआईएसएफ (CISF) बैरियर को अत्यंत संवेदनशील व हाई-सिक्योरिटी ज़ोन माना जाता है यहाँ बिना कड़े चेकिंग गेट पास सर में हेलमेट और वाहनों की सघन तलाशी के ना तो कोई व्यक्ति अंदर प्रवेश कर सकता है और ना ही खदान क्षेत्र से कोई सामान बाहर ले जाया जा सकता है ऐसे अति-सुरक्षित क्षेत्र के भीतर भारी मात्रा में नशीले पदार्थ और शराब कैसे पहुँचे?


​क्या सीआईएसएफ बैरियर की चेकिंग केवल आम कर्मचारियों और खदान मजदूरों के लिए है? ​क्या जानबूझकर शराब और नशीली सामग्रियों को अंदर जाने की छूट दी गई? यह पूरे सुरक्षा तंत्र की भारी लापरवाही और मिलीभगत की ओर इशारा करता है जो जांच का एक बेहद गंभीर विषय है ।

​प्रबंधन को खुला चैलेंज, उच्चाधिकारियों की चुप्पी संदिग्ध

​विवाद के दौरान एक यूनियन नेता द्वारा सरेआम चिल्ला-चिल्लाकर प्रबंधन को चुनौती दी गई कि मैं नशीले पदार्थ और दारू बाँटूंगा जिसे जो करना है कर ले l

​सार्वजनिक रूप से प्रबंधन को इस प्रकार खुला चैलेंज दिए जाने और औद्योगिक परिसर की मर्यादा तार-तार होने के बावजूद एसईसीएल का उच्च प्रबंधन पूरी तरह खामोश बैठा हुआ है घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी ना तो शराब बांटने वाले असामाजिक तत्वों पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई और ना ही मौके पर मौजूद जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कोई जांच बिठाई गई ।

​प्रमुख मांगें

  1. ​उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच:- सीआईएसएफ बैरियर के भीतर नशीली सामग्रियां पहुँचने के मामले की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी सुरक्षा कर्मियों पर कार्रवाई हो ।
  2. ​जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरे:- घटना स्थल पर मूकदर्शक बने रहे वरिष्ठ मानव संसाधन प्रबंधक एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएं ।
  3. ​माहौल खराब करने वालों पर सख्त कार्रवाई:- अनुशासनहीनता फैलाने और शराब बांटकर औद्योगिक शांति भंग करने वाले नेताओं/संगठनों पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए ।

​यदि एसईसीएल प्रबंधन इस गंभीर मामले पर तत्काल कठोर कदम नहीं उठाता है तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि खदान क्षेत्र में इस प्रकार की अवैध गतिविधियों को प्रबंधन का मौन संरक्षण प्राप्त है ।

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कोरबा

ACB समूह और SECL में करोड़ों के कोयला घोटाले की CBI व SIT जांच की मांग, बिलासपुर मुख्यालय पर भारतीय जनाधिकार पार्टी का विशाल प्रदर्शन

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बिलासपुर/कोरबा। भारतीय जनाधिकार पार्टी (छत्तीसगढ़) के तत्वावधान में 23 सितंबर बुधवार को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड SECL मुख्यालय बिलासपुर के समक्ष एक विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित कर ज्ञापन सौंपा गया यह प्रदर्शन ACB समूह की विभिन्न कोल वाशरियों दीपका गेवरा कुसमुंडा चाकाबुड़ा रतिजा रेंकी बिंझारी तथा संबद्ध ताप विद्युत परियोजनाओं कोयला परिवहन एवं रेलवे साइडिंग में वर्ष 1999 से जारी कथित व्यापक वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं की बहु-विभागीय जांच की मांग को लेकर किया गया ।

धरना-प्रदर्शन की प्रमुख मांगें

  1. CBI एवं उच्चस्तरीय SIT जांच:- 1999 से वर्तमान तक के उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर वित्तीय व डिजिटल फोरेंसिक ऑडिट तथा भौतिक सत्यापन कराया जाए ।
  2. कोयला अफरा-तफरी की निष्पक्ष जांच:- स्वीकृत क्षमता और वास्तविक उत्पादन/प्रसंस्करण का वर्षवार मिलान हो प्रतिवर्ष 1 करोड़ टन से अधिक कच्चे व रिजेक्ट कोयले के परिवहन के स्रोत वाशरी प्रसंस्करण एवं वास्तविक उपयोग का वैज्ञानिक हिसाब निकाला जाए ।
  3. पर्यावरण व पेसा (PESA) कानून का पालन:- दीपका के 10 किमी दायरे में वायु जल भूजल कृषि व जनस्वास्थ्य पर स्वतंत्र वैज्ञानिक सर्वे हो ग्रामसभा की वास्तविक सहमति तथा वनाधिकारों के अनधिकृत उपयोग की जांच हो ।
  4. ईंधन व कर छूट का मिलान:- वर्ष 2015 से औद्योगिक डीजल/बायोडीजल की खरीद और ACB ग्रुप को मिली कर छूट/सरकारी प्रोत्साहनों का वर्षवार परीक्षण किया जाए ।
  5. डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित हों:- तौल कांटा सर्वर GPS Fastag ANPR CCTV RFID CEMS तथा ERP/SAP डेटा को तत्काल सुरक्षित करने के निर्देश दिए जाएं ।
  6. श्रमिक अधिकार व अधिकारियों की जवाबदेही:- न्यूनतम मजदूरी EPF ESIC सुरक्षा मानकों की जांच हो तथा निरीक्षण में लापरवाही बरतने वाले नियामक अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो ।

प्रमुख वक्ताओं के विचार

पार्टी के प्रदेश संयोजक दीपक दुबे ने कहां कि यह अरबों-खरबों रुपये के रिजेक्ट कोल और उच्च गुणवत्ता के कोयले की अफरा-तफरी का गंभीर मामला है जब कोल लेवी मामले में वरिष्ठ अधिकारी व कारोबारी जेल में हैं तो 6.5 लाख टन अवैध कोयला पकड़े जाने के बावजूद इस वाशरी संचालक पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? कोल लेवी की अवैध वसूली 25 रुपये से बढ़कर 50 रुपये प्रति टन हो चुकी है जिसके लिए SECL के जिम्मेदार अधिकारी सीधे दोषी हैं ।

युवा मोर्चा के प्रदेश संयोजक संजय रत्नाकर ने बताया कि कोरबा में पेसा (PESA) एक्ट लागू होने के बावजूद सैकड़ों एकड़ जंगल की जमीन कंपनियों के नाम कैसे दर्ज हो गई इसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए ।

वही पार्टी के पदाधिकारी कमल किशोर साव ने कहा वर्ष 2015 से कंपनियों को मिली टैक्स छूट और बायोडीजल के संदिग्ध उपयोग की निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है ।

धरना प्रदर्शन को INTUC के राष्ट्रीय अध्यक्ष रजनीश सेठ तथा आम आदमी पार्टी के प्रदेश सचिव डॉ. सुनील राज किरण ने भी अपना समर्थन दिया उन्होंने भूविस्थापित किसानों को समुचित मुआवजा व रोजगार देने कागजों पर चल रहे विकास कार्यों तथा SECL के CSR मद की निष्पक्ष जांच की मांग की ।

आगामी चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा

यदि राज्य सरकार CBI और SIT द्वारा त्वरित कार्रवाई नहीं की जाती है तो पार्टी द्वारा निम्नलिखित आंदोलन किए जाएंगे:-

2 अक्टूबर 2026 कलेक्टर कार्यालय (कोरबा) के समक्ष 24 घंटे की गांधीवादी न्याय भूख हड़ताल
22 अक्टूबर 2026 SECL मुख्यालय बिलासपुर के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना
1 नवंबर 2026 केंद्रीय कोयला मंत्री के आवास हैदराबाद तेलंगाना के समक्ष प्रदर्शन

कार्यक्रम में भारतीय जनाधिकार पार्टी के शैलेंद्र कुमार गोपाल विन्देश सिंह राठौर कमल किशोर साव दिनेश यादव संजय रत्नाकर हेमंत पैगवार मो. असद खान (छात्र संघ) अशफाक खान (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) होरी दास महंत (चिकित्सा प्रकोष्ठ) मीडिया प्रभारी कृष्णा टंडन संजय सिंह संतोष अनंत संतोष यादव हेमंत पटेल जितेंद्र कुमार आशीष तिवारी मारुति कुमार पप्पू सरदार देवेंद्र सिंह सत्य प्रकाश किरारी ताम्रध्वज सूर्यवंशी जमीर कुरैशी संजू टंडन सुनील टंडन बजरंग रत्नाकर कलाराम साहू संतोष कुर्रे अखिलेश सिंग किशन कुमार सहित काफी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे l

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कोरबा

सेवा संकल्प अभियान के तहत निकला “शिक्षा रथ”, ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर किया सहयोग

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कापी-किताब, पेंसिल, पेन, स्कूली बैग सहित 1622 सामग्री व 7320 रु नगद दान, शिक्षा के प्रति जताई प्रतिबद्धता

कोरबा/रामपुर। विकासखंड करतला के जोन रामपुर में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत “सेवा – मेरा योगदान” कार्यक्रम के तहत आज शिक्षा रथ निकाला गया। जोन प्रभारी लतीफ खान अंसारी के नेतृत्व में निकला यह शिक्षा रथ पूरे रामपुर क्षेत्र की बस्ती में भ्रमण कर लोगों को जरूरतमंद एवं वंचित छात्र-छात्राओं की शिक्षा में सहयोग के लिए प्रेरित करता रहा।

शिक्षा विभाग की इस पहल का उद्देश्य ऐसे बच्चों तक शैक्षणिक सामग्री पहुंचाना है, जो आर्थिक अथवा अन्य कारणों से आवश्यक शिक्षण सामग्री से वंचित रह जाते हैं।

शिक्षा रथ के गांव में पहुंचने पर ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला। ग्रामवासियों ने स्वेच्छा से आगे आकर अभियान में अपना अमूल्य योगदान दिया।

आज दिनांक तक प्राप्त कुल सहयोग:
कॉपी 497, पेन 818, पेंसिल 173, स्कूली बैग 2, रबर 14, कटर 30, स्केच पेन 16 पैकेट, कंपास बॉक्स 6, बेल्ट 3, पेंसिल बैग 2, पानी बोतल 2, पहाड़ा बुक 30, कलर पेंसिल 8 पैकेट सहित कुल 1622 शैक्षणिक सामग्री एवं 7320 रुपये नगद राशि प्राप्त हुई।

इस अवसर पर जोन प्रभारी लतीफ खान अंसारी ने कहा कि “शिक्षा केवल व्यक्ति के विकास का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला है। समाज के सक्षम लोगों द्वारा जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में सहयोग करना एक महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व है।”

उन्होंने ग्रामीणों द्वारा दिए गए उत्साहपूर्ण सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। प्राप्त समस्त सामग्री व राशि जरूरतमंद व वंचित छात्र-छात्राओं तक पहुंचाकर उनके अध्ययन में सहायता प्रदान की जाएगी।

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