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छत्तीसगढ़

रायपुर के सीनियर रेलवे अधिकारियों पर FIR:13 साल पुराने केस में जांच करेगी सीबीआई, गलत जानकारी देने पर दर्ज हुआ मुकदमा

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रायपुर,एजेंसी। रायपुर रेल मंडल के सीनियर अधिकारी के खिलाफ सीआईडी में FIR दर्ज हुई है। यह एफआईआर एडवोकेट आनंद कुमार शर्मा ने दर्ज कराई है। जानकारी के मुताबिक मामला दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे रायपुर मंडल के सीनियर डीसीएम अवधेश कुमार त्रिवेदी और अन्य से जुड़ा है।

शिकायतकर्ता आनंद कुमार शर्मा ने अपनी एफआईआर में आरोप लगाया है कि उन्होंने रायपुर आरक्षण केंद्र में पदस्थ कॉमर्शियल स्टाफ कल्पना स्वामी से संबंधित जानकारी आरटीआई के जरिए मांगी थी। लेकिन उन्हें जो जानकारी उपलब्ध कराई गई, वह कथित रूप से गलत थी।

इसी को आधार बनाकर उन्होंने सीआईडी में शिकायत दर्ज कराई। यह एफआईआर ओडिशा के कटक में धारा 173(1) बीएनएसएस-2023 के तहत दर्ज की गई है। अब मामले की जांच सीआईडी कर रही है।

सीआईडी भुवनेश्वर कार्यालय (फाइल फोटो)

सीआईडी भुवनेश्वर कार्यालय (फाइल फोटो)

सीनियर डीसीएम अवधेश कुमार त्रिवेदी ने क्या कहा

इस पूरे घटनाक्रम पर सीनियर डीसीएम अवधेश कुमार त्रिवेदी ने कहा कि उन्हें भी इस एफआईआर की जानकारी मिली है। फिलहाल उन्होंने कोई आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार किया और कहा कि वे लीगल एक्सपर्ट से राय लेने के बाद ही आगे का कदम तय करेंगे।

अफसरों की भूमिका पर सवाल

मामला सामने आने के बाद रेलवे मंडल में चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है आरटीआई से जुड़ा यह विवाद आगे गंभीर रूप ले सकता है।

वहीं, शिकायतकर्ता एडवोकेट आनंद शर्मा का कहना है कि उन्होंने सूचना का अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी थी, लेकिन गलत सूचना दिए जाने पर उन्हें कानूनी कदम उठाना पड़ा।

सीआईडी अब इस पूरे मामले की जांच करेगी कि सूचना गलत तरीके से क्यों दी गई और इसमें किन अधिकारियों की भूमिका रही।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने निकली छत्तीसगढ़ की बेटी, मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएं

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रायपुर/जांजगीर-चांपा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जांजगीर-चांपा जिले की युवा पर्वतारोही सुश्री अमिता श्रीवास को उनके आगामी माउंट एवरेस्ट अभियान के लिए शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में पर्वतारोही सुश्री अमिता श्रीवास से मुलाकात के दौरान कहा कि आगामी 9 अप्रैल को सुश्री अमिता विश्व की सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के संकल्प के साथ काठमांडू के लिए रवाना हो रही हैं। यह केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि की यात्रा नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की आकांक्षाओं, साहस और आत्मविश्वास की ऊंची उड़ान है।

उन्होंने कहा कि अमिता का यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि संकल्प अटल हो, तो कोई भी ऊंचाई असंभव नहीं रहती। प्रदेश की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और परिश्रम से नए मानक स्थापित कर रही हैं और छत्तीसगढ़ को नई पहचान दे रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अमिता श्रीवास ने वर्ष 2021 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर माउंट किलिमंजारो को फतह कर पहले ही अपनी क्षमता और दृढ़ता का परिचय दिया है। उनका यह सतत प्रयास न केवल उपलब्धि है, बल्कि प्रदेश की युवा पीढ़ी, विशेषकर बेटियों के लिए एक जीवंत प्रेरणा है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अमिता अपने इस साहसिक अभियान में सफलता प्राप्त कर विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर देश का तिरंगा फहराएंगी और छत्तीसगढ़ सहित पूरे राष्ट्र का गौरव बढ़ाएंगी।

मुख्यमंत्री ने सुश्री अमिता श्रीवास को इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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छत्तीसगढ़

अमित जोगी की सजा पर सिंहदेव का बयान:कहा- तकनीकी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में अपील, 20 अप्रैल को होगी सुनवाई

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मुंगेली,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में जेसीसीजे प्रमुख अमित जोगी को बिलासपुर हाईकोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद अब इस पर पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव का बयान सामने आया है। मुंगेली के लोरमी में एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे सिंहदेव ने कहा कि अमित जोगी ने बिलासपुर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है।

सिंहदेव ने बताया कि उन्होंने सुना है कि यह अपील किसी तकनीकी आधार पर की गई है। उन्होंने कहा कि यह देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस बात को स्वीकार कर राहत देगा या नहीं, यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ही पता चलेगा।

गौरतलब है कि रामावतार जग्गी हत्याकांड में बिलासपुर हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में शामिल होने का आरोप हो, तो किसी एक आरोपी के साथ जानबूझकर अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जब सभी आरोपियों के खिलाफ एक जैसे सबूत हों, तो किसी एक को बरी कर देना और बाकी को उन्हीं सबूतों के आधार पर दोषी ठहराना सही नहीं है, जब तक कि उसे छोड़ने का कोई ठोस और अलग कारण साबित न हो। यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की स्पेशल डिविजनल बेंच ने सुनाया था।

अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 1000 रुपए जुर्माने की सजा दी गई है। जुर्माना न देने पर उन्हें 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट से अमित जोगी को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और इसकी अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

जोगी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दो आदेशों को चुनौती दी गई है। पहला, वह आदेश जिसमें सीबीआई को अपील करने की अनुमति दी गई थी, और दूसरा, हाईकोर्ट का वह फैसला जिसमें उन्हें हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों मामलों को एक साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

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छत्तीसगढ़

महिला आयोग ने BSP मैनेजमेंट को लगाई फटकार:कर्मचारी के 2 महिलाओं से अवैध संबंध,पत्नी-बच्चों को नहीं दे रहा भरण-पोषण, पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की सिफारिश

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने सोमवार को महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तरीय 390वीं और रायपुर जिले की 179वीं जनसुनवाई आयोजित की गई, जिसमें कई गंभीर मामलों पर विस्तृत सुनवाई हुई।

आरोप लगा कि, BSP अपने पुरुष कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय मामलों की लिपापोती करता है। इस पर महिला आयोग ने BSP के शीर्ष अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।

BSP को आयोग की कड़ी फटकार

भिलाई स्टील प्लांट (BSP) से जुड़े मामले में आयोग ने कड़ी नाराजगी जताई। आरोप है कि, एक कर्मचारी दो महिलाओं से अवैध संबंध रखते हुए पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण नहीं दे रहा, लेकिन BSP प्रबंधन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

आयोग ने कहा कि, सुनवाई के दौरान BSP अधिकारी भरण-पोषण दिलाने का आश्वासन देते हैं, लेकिन बाद में मामले को दबा दिया जाता है। BSP की ओर से यह तर्क दिया गया कि, कर्मचारी ने लिखित में मना कर दिया है, इसलिए वेतन से राशि नहीं दी जा सकती। इस पर आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ बताया।

आयोग ने स्पष्ट किया कि इस तरह का रवैया यह संदेश देता है कि BSP में कार्यरत कर्मचारी अपनी पत्नी-बच्चों को छोड़ सकते हैं और संस्थान कोई कार्रवाई नहीं करेगा। इस पर आयोग ने BSP के शीर्ष अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।

पति-पत्नी विवाद में महिला को FIR की सलाह

एक केस में महिला अपने ससुराल में रहना चाहती है, लेकिन पति और ससुराल पक्ष उसे साथ रखने को तैयार नहीं है। आरोप है कि महिला पर दबाव बनाकर स्टाम्प पेपर पर लिखकर तलाक का दावा किया गया, जिसे आयोग ने अमान्य बताया।

साथ ही, महिला को न तो भरण-पोषण दिया जा रहा है और न ही उसका स्त्रीधन लौटाया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह वैधानिक तलाक नहीं है और महिला चाहें तो सभी के खिलाफ FIR दर्ज करा सकती है।

बेटियों को मिलेगा संपत्ति में हक

दूसरे मामले में महिला ने अपने दिवंगत पति की संयुक्त संपत्ति में अपनी दो बेटियों के हिस्से की मांग की। देवर ने बेटियों का हक स्वीकार किया। आयोग ने निर्देश दिया कि, महिला तुरंत संपत्ति पर कब्जा ले और तहसील में नामांतरण कराए। प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग को सूचना देने को कहा गया।

भारत माला मुआवजा विवाद में खाते पर रोक की सिफारिश

एक अन्य केस में भारत माला परियोजना के तहत करीब 2.5 एकड़ जमीन का 1.64 करोड़ रुपए मुआवजा अनावेदक के खाते में जमा है। महिला ने इसमें अपने हिस्से की मांग की।

आयोग ने कलेक्टर दुर्ग को पत्र लिखकर बैंक ऑफ बड़ौदा, गंजपारा शाखा में संबंधित खाते के लेनदेन पर रोक लगाने की अनुशंसा की, ताकि सुलह प्रक्रिया पूरी हो सके। अगली सुनवाई में सभी पक्षों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।

पुलिस पर गंभीर आरोप, जांच के आदेश

कबीरधाम जिले के पिपरिया थाना से जुड़े मामले में पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगे। शिकायत के अनुसार, एक आरक्षक और उसकी पत्नी (महिला आरक्षक) ने फर्जी FIR दर्ज कराकर पड़ोसी महिला, उसकी बहू और 4 माह के बच्चे को दो महीने तक जेल में डलवा दिया। आयोग ने पाया कि पुलिस अधिकारियों ने अपने ही विभाग के कर्मचारी के पक्ष में कार्रवाई की और पीड़ितों की शिकायत दर्ज नहीं की।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण, शंकर नगर को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं और एक महीने के भीतर रिपोर्ट मांगी है। साथ ही DGP को भी पुलिसकर्मियों के खिलाफ पद के दुरुपयोग पर कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।

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