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राम मंदिर की रेकी, खालिस्तानी कनेक्शन और साजिश की सुई- ‘भगवा’ झंडे वाली गाड़ी से आया था दुसाद, कोर्ट ने नहीं दी जमानत!

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अयोध्या,एजेंसी। अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान संदिग्ध गतिविधियों में पकड़े गए शंकरलाल दुसाद को कोर्ट से जमानत नहीं मिली है। आरोपी शंकरलाल राजस्थान के सीकर जिले का रहने वाला है और उस पर मंदिर परिसर की रेकी (जासूसी) करने, विदेशी कट्टरपंथियों से संपर्क रखने और खालिस्तान समर्थकों से जुड़े होने के गंभीर आरोप हैं।

क्या हुआ था 22 जनवरी को?
22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला की मूर्ति स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक कार्यक्रम हो रहा था। इसी दिन आरोपी शंकरलाल दुसाद, सफेद स्कॉर्पियो गाड़ी (HR 51 BX 3753) से अपने साथियों के साथ अयोध्या पहुंचा। उसके साथ अजीत शर्मा और प्रदीप पूनिया नाम के दो और लोग भी थे। भगवा झंडा लगी गाड़ी में बैठकर वह मंदिर परिसर और आसपास की गतिविधियों की चुपचाप निगरानी कर रहा था। ATS को उस पर शक हुआ और उसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया।

FIR और ATS की कार्रवाई
19 जनवरी 2024 को इस मामले में ATS गोमतीनगर थाने में FIR दर्ज की गई। जांच में पता चला कि यह सिर्फ साधारण जासूसी नहीं थी – यह मामला सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा था।

खालिस्तानी लिंक और विदेशी कनेक्शन
पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ कि शंकरलाल दुसाद का खालिस्तानी विचारधारा से जुड़ाव था। वह विदेश में बैठे खालिस्तान समर्थकों, जैसे कि लखविंदर सिंह लांडा और गुरपतवंत सिंह पन्नू से लगातार संपर्क में था। उसे सोशल मीडिया और कॉल्स के जरिए संपर्क में रखा गया था। गुरपतवंत सिंह पन्नू ने उसे मंदिर की रेकी करने और नक्शा भेजने का निर्देश भी दिया था।

कोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत?
लखनऊ की ATS स्पेशल कोर्ट ने दुसाद की जमानत याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने माना कि आरोपी की गतिविधियां गंभीर प्रकृति की हैं। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। अभी आरोपी को रिहा करना समाज और देश के लिए खतरा हो सकता है। इसलिए कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।

ATS की सतर्कता से टली बड़ी साजिश
राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का दिन धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण था। लाखों श्रद्धालु अयोध्या में मौजूद थे। ऐसे समय में किसी संदिग्ध व्यक्ति का मंदिर परिसर में घूमना गंभीर खतरे की ओर इशारा करता है। ATS की सतर्क निगरानी और तेज कार्रवाई से एक संभावित साजिश को समय रहते विफल कर दिया गया।

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बुनियादी उद्योगों का उत्पादन मार्च में 0.4% घटा, पांच माह की पहली गिरावट

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नई दिल्ली,एजेंसी। कोयला, कच्चे तेल, उर्वरक और बिजली के उत्पादन में गिरावट के कारण मार्च में आठ बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। पांच माह में बुनियादी उद्योगों का उत्पादन पहली बार घटा है। फरवरी, 2026 में, आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 2.8 प्रतिशत बढ़ा था। 

वित्त वर्ष 2025-26 में बुनियादी उद्योगों की उत्पादन वृद्धि दर घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई। वित्त वर्ष 2024-25 में बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 4.5 प्रतिशत बढ़ा था।  

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बिंदी-तिलक विवाद में Lenskart को झटका, डूबे 4500 करोड़!

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मुंबई, एजेंसी। देश की बड़ी आईवियर ​कंपनी में से एक Lenskart को बिंदी, तिलक से जुड़ा विवाद काफी महंगा पड़ गया। सोमवार को कंपनी के शेयर में बड़ी गिरावट आई है, जिससे इसकी मार्केट वैल्यूएशन में करीब 4,500 करोड़ रुपए की कमी आ गई।

विवाद की वजह कंपनी की एक पुरानी इंटरनल ग्रूमिंग पॉलिसी बनी, जो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इस पॉलिसी में कथित तौर पर कर्मचारियों को बिंदी, तिलक जैसे कुछ धार्मिक प्रतीकों को पहनने से रोकने की बात कही गई थी। इसके बाद ऑनलाइन विरोध तेज हो गया और कंपनी के बहिष्कार की मांग भी उठने लगी।

शेयर में गिरावट

BSE पर कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर करीब 5% तक गिरकर 508.70 रुपए के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी आई और यह 533.70 रुपए के आसपास बंद हुआ।

गिरावट के दौरान कंपनी की वैल्यूएशन घटकर लगभग 88,331 करोड़ रुपए रह गई, जो पहले करीब 92,872 करोड़ रुपए थी यानी एक ही सत्र में करीब 4,540 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। बाद में आंशिक सुधार के साथ वैल्यूएशन में कुछ बढ़त भी दर्ज की गई।

कंपनि ने दी थी सफाई

इस विवाद पर कंपनी के फाउंडर Peyush Bansal ने सफाई देते हुए कहा कि वायरल डॉक्यूमेंट पुराना है और मौजूदा पॉलिसी को नहीं दर्शाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी में किसी भी धार्मिक पहनावे या प्रतीकों पर कोई प्रतिबंध नहीं है और इस गलतफहमी के लिए माफी भी मांगी।

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बंगाल की पहचान बचाने की लड़ाई है यह विधानसभा चुनाव, PM मोदी का बड़ा दावा

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झाड़ग्राम, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को राज्य की पहचान बचाने की लड़ाई बताते हुए राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर मूल निवासियों के बजाय ‘घुसपैठियों’ के पक्ष में राजनीति करने का आरोप रविवार को लगाया। मोदी ने आदिवासी बहुल झाड़ग्राम जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ”घुसपैठियों के लिए घुसपैठियों की सरकार’ बनाना चाहती है और मतदाताओं से इसे सत्ता से हटाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, ”यह चुनाव इस भूमि की समृद्ध विरासत को बचाने के लिए है। यह बंगाल की पहचान को बचाने के लिए है। आज बंगाल को अपनी पहचान खोने का डर है।” उन्होंने आरोप लगाया, “तृणमूल जिस रास्ते पर चल रही है वह बहुत खतरनाक है। तृणमूल कांग्रेस ‘घुसपैठियों के लिए घुसपैठियों की और सरकार बनाना चाहती है। एक ऐसी सरकार जो बंगाल की जनता के धर्म, भाषा और रीति-रिवाजों की रक्षा करने के बजाय केवल घुसपैठियों के धर्म, भाषा और रीति-रिवाजों की रक्षा करेगी।”

मोदी ने दावा किया कि ऐसी सरकार के लिए सबसे बड़ी बाधा पश्चिम बंगाल के आम लोग होंगे। उन्होंने कहा, ”तृणमूल कांग्रेस की घुसपैठियों वाली सरकार के लिए, अगर कोई शत्रु है, तो वे यहीं बैठे भाई-बहन होंगे, जो घुसपैठियों के शत्रु होंगे।” प्रधानमंत्री ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ असंतोष राज्य के सभी समुदायों और क्षेत्रों में फैल गया है। उन्होंने कहा, “इसलिए, बंगाल के हर समुदाय, हर वर्ग, हर क्षेत्र ने इस बार ठान लिया है और तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से हटाने का संकल्प लिया है।”

मोदी ने तृणमूल कांग्रेस पर जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करने और भ्रष्टाचार व जबरन वसूली की व्यवस्था चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया, “अगर किसी को घर बनाना है, तो उसे तृणमूल कांग्रेस के सिंडिकेट पर निर्भर रहना पड़ता है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद और विधायक आपकी समस्याओं की परवाह नहीं करते। वे अपनी जेबें भरने में व्यस्त हैं।”

प्रधानमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस नेता राज्य के कई हिस्सों में आदिवासियों की जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया, “आदिवासियों की हजारों एकड़ जमीन पर तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने कब्जा कर लिया है।” पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा। झाड़ग्राम में 23 अप्रैल को मतदान होगा।

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