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बिहार में दो चरणों में होंगे विधानसभा चुनाव, EC ने किया तारीखों का ऐलान
नई दिल्ली,एजेंसी। बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रेंस कॉन्फ्रेस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने तारीखों की घोषणा की है। राज्य में दो चरणों में चुनाव होंगे। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर और दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा। वहीं मतगणना 14 नवंबर को होगी।
22 नवंबर को समाप्त होगा विधानसभा का कार्यकाल
बिहार में 243 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें से 2 अनुसूचित जनजातियों के लिए और 38 अनुसूचित अनुसूचित जाति। बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर, 2025 को समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग ने पहली बार बूथ-स्तरीय अधिकारियों को प्रशिक्षित किया। SIR 24 जून, 2025 को शुरू किया गया था और समय सीमा तक पूरा हो गया। सुचारू मतदान प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए “किसी भी मतदान केंद्र पर 1,200 से ज़्यादा मतदाता नहीं होंगे।
पहली बार बिहार में दो चरण में होगी वोटिंग
पहली बार बिहार में दो चरण में वोटिंग होगी। 2005 से 2020 तक तीन चरण से कम में कभी वोटिंग नहीं हुई। 2010 में तो छह चरण में वोटिंग हुई थी।
एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला
वर्तमान में, एनडीए के पास 131 सीटें हैं (भाजपा 80, जेडी(यू) 45, हम (एस) 4 और 2 निर्दलीय), जबकि महागठबंधन के पास 111 सीटें हैं (राजद 77, कांग्रेस 19, सीपीआई(एमएल) 11, सीपीआई(एम) 2, सीपीआई 2)। आगामी चुनावों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ एनडीए और राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला होने की उम्मीद है।
NDIA गठबंधन में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय!
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता एवं गठबंधन की समन्वय समिति के प्रमुख तेजस्वी यादव के आवास पर देर शाम तक चली इस बहुदलीय बैठक में कांग्रेस, वाम दलों और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) समेत सभी घटक दलों के नेता शामिल हुए। बैठक के बाद विकासशील इंसान पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने संवाददाताओं से कहा, “सभी बातें तय हो चुकी हैं, लेकिन फिलहाल मैं विवरण नहीं बता सकता। 7 अक्टूबर हम संवाददाता सम्मेलन में पूरी जानकारी साझा करेंगे।”
बता दें कि पार्टी ने 2020 के चुनावों में 110 सीट पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 75 पर जीत हासिल की थी, और अन्य दलों के दलबदल और उपचुनावों में जीत के कारण पिछले कुछ वर्षों में इसकी ताकत बढ़ी है।
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RBI के VRR नीलामी में बैंकों की मांग सुस्त, अधिशेष नकदी घटने के बावजूद उत्साह नहीं
नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एक लाख करोड़ रुपए की तीन दिन की ‘परिवर्ती दर रेपो’ (वीआरआर) नीलामी को शुक्रवार को बैंकों की सुस्त प्रतिक्रिया मिली जो अल्पकालिक धन की सीमित आवश्यकता का संकेत देती है। केंद्रीय बैंक को वीआरआर नीलामी में बैंकों से एक लाख करोड़ रुपए की अधिसूचित राशि के मुकाबले 16,750 करोड़ रुपए की बोलियां प्राप्त हुईं। आरबीआई ने नीलामी में पूरी राशि को 5.26 प्रतिशत की ‘कट-ऑफ’ और भारित औसत दर पर स्वीकार कर लिया।

बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति अधिशेष में बनी रही, हालांकि इसका स्तर अपेक्षाकृत कम रहा। आरबीआई के पास उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 18 जून तक प्रणाली में नकदी अधिशेष करीब 19,163.11 करोड़ रुपए रहा। पिछले दिन की तुलना में नकदी की स्थिति में मामूली सुधार हुआ लेकिन यह अब भी कम स्तर पर बनी रही, जो बैंकिंग प्रणाली में अपेक्षाकृत सख्त परिस्थितियों को दर्शाती है। वीआरआर नीलामी में कम भागीदारी यह संकेत देती है कि आरबीआई द्वारा परिवर्तनीय दर रेपो परिचालन के माध्यम से नकदी समर्थन दिए जाने के बावजूद बैंकों में अल्पकालिक धन की मांग सीमित रही।
आरबीआई अल्पकालिक नकदी प्रबंधन और ओवरनाइट दरों को नीतिगत दर गलियारे के अनुरूप बनाए रखने के लिए वीआरआर नीलामियां आयोजित करता है। यह वीआरआर की व्यवस्था के तहत बैंकों को अलग-अलग ब्याज दरों पर बोली के जरिये पैसा उधार देता है। नकदी दबाव को कम करने और ओवरनाइट मनी मार्केट दरों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्रीय बैंक ने पिछले कुछ दिनों में विभिन्न अवधियों की वीआरआर नीलामी के जरिए करीब 1.89 लाख करोड़ रुपए की अस्थायी नकदी डाली है।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, इसमें 18 जून को दो नीलामियों के जरिये 72,300 करोड़ रुपए, 16 जून को सात दिन की वीआरआर नीलामी के जरिए 89,440 करोड़ रुपए और 15 जून को ओवरनाइट नीलामी के जरिये डाले गए 28,220 करोड़ रुपए शामिल हैं।
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IT सेक्टर में हाहाकार, धड़ाम हुए भारतीय Stocks
मुंबई, एजेंसी। भारतीय शेयर बाजार में आज बड़ी गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी बाजार में एक्सेंचर (Accenture) के रेवेन्यू अनुमान घटाने और उसका शेयर 19% टूटने के बाद घरेलू आईटी शेयरों में दबाव देखने को मिला। इसके चलते Nifty IT इंडेक्स करीब 6% तक गिर गया। वहीं, दिग्गज कंपनी इंफोसिस (Infosys) का शेयर 8.3% और टीसीएस (TCS) 6.5% से ज्यादा टूट गया। एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, विप्रो और अन्य आईटी स्टॉक्स भी 4% से 7% तक टूट गए। इससे निवेशकों की वेल्थ में 1.35 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि Accenture की कमजोर टिप्पणी ने वैश्विक स्तर पर आईटी सेवाओं की मांग में सुस्ती की आशंका को बढ़ा दिया है। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियों की बड़ी कमाई उत्तरी अमेरिका से आती है, इसलिए इस सेक्टर पर सीधा असर पड़ा है।
यह गिरावट सिर्फ शेयर बाजार के आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आईटी और टेक सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के बीच नौकरी सुरक्षा, वेतन वृद्धि और बोनस को लेकर चिंता भी बढ़ गई है। भारत के आईटी सेक्टर में 50 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं।
प्रमुख कंपनियों का हाल
- इन्फोसिस लिमिटेड: 8.3% गिरकर रू.1,033.9 के निचले स्तर पर आ गया।
- एम्फैसिस लिमिटेड: इसमें 7.99% की भारी गिरावट आई और यह रू.2,150 पर ट्रेड कर रहा है।
- टेक महिंद्रा: कंपनी का शेयर 7.16% टूटकर रू.1,344 पर पहुंच गया।
- परसिस्टेंट सिस्टम्स: करीब 6.85% की कमजोरी के साथ रू.4,602 पर आ गया।
- टीसीएस (TCS): देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी भी नहीं बच सकी और 6.51% फिसलकर रू.2,059.9 पर आ गई।
- एचसीएल टेक्नोलॉजीज: शेयर 6.06% की गिरावट के साथ रू.1,091.4 पर आ गया।
- कोफोर्ज लिमिटेड: इसमें 5.75% की कमी देखी गई और यह रू.1,397.8 पर आ गया।
- विप्रो लिमिटेड: विप्रो का शेयर 4.35% टूटकर रू.174.89 पर कारोबार कर रहा है।
- ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज: यह शेयर भी 2.89% गिरकर रू.9,127.5 पर आ गया।
देश
स्विस बैंकों में जमा भारतीय धन 2025 में 8% गिरकर 36,793 करोड़ रुपए पर
स्विट्ज़रलैंड, एजेंसी। स्विस बैंकों में जमा भारतीय धन वर्ष 2025 में 8 प्रतिशत से अधिक घटकर 3.25 अरब स्विस फ्रैंक (करीब 36,793 करोड़ रुपए) रह गया। यह गिरावट स्थानीय शाखाओं और अन्य बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों के माध्यम से रखी गई राशि में कमी के कारण हुई। स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक स्विस नेशनल बैंक (SNB) की तरफ से बृहस्पतिवार को जारी वार्षिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।
इन आंकड़ों के मुताबिक, कुल जमा राशि में गिरावट आने के बावजूद व्यक्तिगत और संस्थागत ग्राहकों के खातों में जमा धन 50 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 52.4 करोड़ स्विस फ्रैंक (करीब 6,000 करोड़ रुपए) हो गया। हालांकि, कुल राशि में इन जमाओं की हिस्सेदारी लगभग 16 प्रतिशत ही रही। कुल धनराशि का बड़ा हिस्सा ‘बैंकों को देय राशि’ के रूप में रहा, जो अन्य बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के जरिये रखी गई थी। यह राशि पिछले साल करीब 15 प्रतिशत घटकर 2.6 अरब स्विस फ्रैंक रही।

2021 में जमा था सबसे ज्यादा पैसा
इससे पहले वर्ष 2024 में स्विस बैंकों में जमा कुल भारतीय धन तिगुना होकर 3.5 अरब स्विस फ्रैंक हो गया था, जो 2021 के बाद का उच्चतम स्तर था। वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 14 साल के उच्चतम स्तर 3.83 अरब स्विस फ्रैंक पर था। ये बैंकों की तरफ से स्विस नेशनल बैंक को दी गई सूचनाओं पर आधारित आंकड़े हैं। ये स्विट्जरलैंड में भारतीयों के पास मौजूद कथित काले धन की बहुचर्चित मात्रा को नहीं दर्शाते हैं। इन आंकड़ों में वह धन भी शामिल नहीं होता जो भारतीयों, प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) या अन्य लोगों द्वारा स्विस बैंकों में तीसरे देशों की इकाइयों के नाम पर रखा गया हो।
घटती-बढ़ती रही है भारतीयों की रकम
एसएनबी के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 के अंत में मौजूद कुल 325.05 करोड़ स्विस फ्रैंक की देनदारियों में से 52.4 करोड़ स्विस फ्रैंक ग्राहक जमा, 2.6 अरब स्विस फ्रैंक अन्य बैंकों के जरिये, 1.86 करोड़ स्विस फ्रैंक विश्वस्त संस्था या ट्रस्ट के जरिये और 10.57 करोड़ स्विस फ्रैंक बॉन्ड एवं प्रतिभूतियों जैसे अन्य वित्तीय साधनों के रूप में थे। एसएनबी के आंकड़ों के अनुसार, स्विस बैंकों में भारतीयों की कुल जमा राशि वर्ष 2006 में करीब 6.5 अरब स्विस फ्रैंक के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। इसके बाद इसमें अधिकांश समय गिरावट का रुख रहा। हालांकि 2011, 2013, 2017, 2020, 2021, 2022, 2023 और 2024 जैसे कुछ वर्षों में इसमें वृद्धि दर्ज की गई।
SNB ने कहा कालाधन नहीं है ये पैसा
एसएनबी ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े बैंकों द्वारा रिपोर्ट की गई कुल देनदारियों को दर्शाते हैं और इन्हें स्विस बैंकों में कथित काले धन का प्रत्यक्ष संकेतक नहीं माना जा सकता। साथ ही, इनमें तीसरे देशों की इकाइयों के नाम पर रखे गए धन को शामिल नहीं किया जाता। अंतरराष्ट्रीय निपटान बैंक (बीआईएस) के ‘लोकेशनल बैंकिंग स्टैटिस्टिक्स’ के मुताबिक, स्विस बैंकों में भारतीय व्यक्तियों के जमा धन में 2025 के दौरान 20 प्रतिशत बढ़कर 8.97 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 780 करोड़ रुपए) हो गया।
स्विट्जरलैंड और भारत के बीच 2018 से कर मामलों में स्वत: सूचना आदान-प्रदान व्यवस्था लागू है, जिसके तहत स्विस वित्तीय संस्थानों में खाताधारकों से जुड़ी विस्तृत जानकारी हर साल भारतीय कर अधिकारियों के साथ साझा की जाती है। वैश्विक स्तर पर स्विस बैंकों में विदेशी ग्राहकों की कुल जमा राशि 2025 में करीब आठ प्रतिशत घटकर 1.05 लाख करोड़ स्विस फ्रैंक रही।
देशवार आंकड़ों में स्विस बैंकों में मौजूद विदेशी ग्राहकों के धन के मामले में ब्रिटेन 192 अरब स्विस फ्रैंक के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि अमेरिका (75 अरब स्विस फ्रैंक) और फ्रांस (63 अरब स्विस फ्रैंक) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। हालांकि, भारत वर्ष 2024 के 48वें स्थान से सुधरकर 2025 में 46वें स्थान पर पहुंच गया। पाकिस्तान की जमा राशि 27.2 करोड़ स्विस फ्रैंक से घटकर 25.7 करोड़ स्विस फ्रैंक रह गई, जबकि बांग्लादेश की जमा राशि 43 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी के साथ 84.2 करोड़ स्विस फ्रैंक पहुंच गई। रैंकिंग में बांग्लादेश 81वें स्थान पर रहा जबकि पाकिस्तान 108वें स्थान पर है।
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