Connect with us

देश

उत्तराखंड के वैज्ञानिकों ने 1980 की थ्योरी प्रूव की:अंतरिक्ष में 2 ब्लैक होल्स को एक तस्वीर में कैद किया, रूसी सैटेलाइट की मदद ली

Published

on

नैनीताल,एजेंसी। उत्तराखंड के नैनीताल स्थित आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (ARIES) के वैज्ञानिक डॉ. आलोक भी उस टीम में शामिल थे जिसने अंतरिक्ष में दो ब्लैकहोल्स को एक दूसरे की परिक्रमा करते हुए देखा।

टीम ने इस दृश्य की एक तस्वीर भी ली, जिसके कारण इस अद्भुत घटना को पहली बार पूरी दुनिया ने अपनी आंखों से देखा।

डॉ आलोक ने बताया कि कैसे उनकी टीम ने इस पूरे मिशन को सक्सेस बनाया, और आखिर उस चीज को कैसा देखा गया जो हमसे 5 अरब प्रकाश वर्ष दूर है।

बता दें कि फिनलैंड के तुर्कू विश्वविद्यालय के खगोलशास्त्री मौरी वाल्टोनन के नेतृत्व में इस खोज को 9 अक्टूबर को द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित किया गया था। इस पूरी टीम में भारत सहित 10 देशों के 32 वैज्ञानिक शामिल थे, और ARIES के वैज्ञानिक डॉ. आलोक ने इस प्रोजेक्ट में अहम भूमिका निभाई थी।

पहले वो तस्वीर देखिए और समझिए ये क्यों ऐतिहासिक है….

तस्वीर में दो ब्लैक होल एक दूसरे के सामने नजर आ रहे हैं।

तस्वीर में दो ब्लैक होल एक दूसरे के सामने नजर आ रहे हैं।

12 साल में एक दूसरे का चक्कर लगाते हैं वैज्ञानिक डॉ. आलोक बताते हैं कि उनकी इस रिसर्च को समझने से पहले OJ 287 के बारे में जान लेना बेहतर होगा, वो कहते हैं-

देखिए पहले समझिए OJ 287 एक क्वासर है, यानी यह किसी गैलेक्सी का बेहद चमकीला और सक्रिय केंद्र है। इसमें एक सुपरमैसिव ब्लैक होल है, जो हमारे सूर्य से अरबों गुना बड़ा है। हमारी टीम ने पाया कि यह केवल एक ब्लैक होल नहीं, बल्कि दो ब्लैक होल का सिस्टम है, जो लगभग 12 साल में एक-दूसरे का चक्कर लगाते हैं।

उन्होंने आगे कहा, “1980 में भी खगोलविदों को पता था कि दो ब्लैक एक साथ दिखते हैं, हालांकि, वो सब थ्योरी में था। लेकिन अब पहली बार हमने दो ब्लैक होल को तस्वीरों में एक साथ देखा, यानी की प्रैक्टिकली इस तथ्य को हमने साबित किया। ये एक-दूसरे के चारों ओर घूम रहे हैं।

रूस की सैटेलाइट की मदद से मिली तस्वीर

डॉ. आलोक कहते हैं, “ ये इमेज रूस के RadioAstron (Spektr-R) सैटेलाइट की और पृथ्वी आधारित दूरबीनों के एक साथ प्रयोग से ली गई है। जब ये तस्वीर ले गई तब RadioAstron टेलिस्कोप धरती से लगभग 1,90,000 किलोमीटर दूर था, यानी लगभग आधा चंद्रमा की कक्षा जितनी दूरी पर। इससे टेलिस्कोप की रिजोल्यूशन कई गुना बढ़ गई और हम दोनों ब्लैक होल को अलग-अलग देख पाए। यह रिजोल्यूशन करीब 12 माइक्रो-आर्क सेकंड था, जो खगोल विज्ञान में अब तक का रिकॉर्ड है।”

छोटे ब्लैक होल की जेट को ट्रैक करना थी जिम्मेदारी

डॉ. आलोक के अनुसार, इस खोज में उनके साथ ARIES नैनीताल के वैज्ञानिक शुभम किशोर के साथ ही टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), मुंबई के ए. गोपकुमार भी शामिल थे। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों में फिनलैंड, पोलैंड, अमेरिका, जापान और अन्य देशों के वैज्ञानिक शामिल थे। वह बताते हैं-

हमारी जिम्मेदारी थी डेटा का विश्लेषण और छोटे ब्लैक होल की जेट का ट्रैक रखना। यह अनुभव नैनीताल में हमारे लिए गर्व का पल था।

रिसर्च के आर्टिकल में छपा एक चित्र। जो इस पूरी घटना को बता रहा है।

रिसर्च के आर्टिकल में छपा एक चित्र। जो इस पूरी घटना को बता रहा है।

समय के विपरीत दिशा में घूम रहा था

डॉ. आलोक बताते हैं, “जब हमने इस सिस्टम की तस्वीर देखी, तो हमें तुरंत संकेत मिल गया कि यही वही दृश्य है जिस पर हमारी टीम और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों ने दशकों से काम किया था। मुख्य संकेत था दो अलग-अलग जेट्स का पैटर्न। बड़ा ब्लैक होल अपनी डिस्क से जेट छोड़ रहा था और छोटा ब्लैक होल, जो उसके चारों ओर घड़ी के विपरीत दिशा में घूम रहा है, उसकी जेट लगातार अपनी दिशा बदल रही थी।

हमारी टीम ने 2014 में गणना की थी कि दोनों ब्लैक होल उस समय किस जगह पर होंगे, और तस्वीर में जेट के शुरुआती दो हिस्से बिल्कुल उसी जगह पर थे। यही पुष्टि करता है कि हमने वास्तव में एक बाइनरी ब्लैक होल सिस्टम का प्रत्यक्ष अवलोकन किया है।”

भविष्य में आने वाली खतरों से आगाह किया जा सकता है

वैज्ञानिक ने आगे बताया कि ब्लैक होल पर इस तरह के अध्ययन से अंतरिक्ष में होने वाली खतरनाक घटनाओं को समझने का मौका मिलता है। जैसे गुरुत्वीय तरंगें- ये ब्रह्मांड में बहुत बड़ी और शक्तिशाली चीजों से आती हैं। अगर हम इनके बारे में सही जानकारी रखते हैं, तो भविष्य में किसी बड़े धमाके या खतरनाक घटना की चेतावनी पहले से मिल सकती है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

देश

माल्या बोले- ब्रिटेन छोड़ने पर रोक, भारत कैसे लौटूं:सोचता हूं कॉकरोच बन जाऊं, 10 साल से लंदन में, बैंकों के करीब रू.9,000 करोड़ के कर्जदार

Published

on

लंदन/नई दिल्ली, एजेंसी। लंदन में रह रहे कारोबारी विजय माल्या ने बुधवार देर रात फिर भारत सरकार पर अन्याय करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में चल रही कानूनी प्रक्रिया के कारण वे भारत नहीं लौट पा रहे हैं।

माल्या ने दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में माना है कि उनकी रू.14,000 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति से बैंकों को वसूली हुई है। यह रकम उन बैंकों को लौटाई गई, जिनका पैसा किंगफिशर एयरलाइंस के कर्ज के रूप में बकाया था।

विजय माल्या पर किंगफिशर एयरलाइंस के लिए SBI समेत कई बैंकों से करीब रू.9,000 करोड़ का कर्ज लेने और उसे नहीं चुकाने का आरोप है।

बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने और CBI-ED की जांच के बीच 2 मार्च 2016 यानी 10 साल 6 महीने पहले पहले वे माल्या भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए। बाद में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया गया था।

माल्या का दावा- ED ने बैंकों को 14 हजार करोड़ लौटाए

माल्या ने बुधवार देर रात भी X पर कई पोस्ट किए। इनमें उन्होंने हाल के कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों का जिक्र किया और कहा कि उनके साथ अब भी अन्याय हो रहा है।

विजय ने एक पोस्ट में यह भी कहा, “मेरे साथ हो रहे अन्याय को देखते हुए मुझे लगता है कि मुझे कॉकरोच बन जाना चाहिए। शायद कॉकरोच बनकर बेहतर जिंदगी जी सकूं। मैं भगोड़ा नहीं हूं। ब्रिटेन की कानूनी प्रक्रिया ने मुझे भारत लौटने से रोक रखा है।”

माल्या ने ED की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल बताए गए हलफनामे का एक हिस्सा साझा किया। उन्होंने दावा किया कि उसमें उनसे 14,131.60 करोड़ रुपए की वसूली का जिक्र है।

उन्होंने लिखा, “बॉम्बे हाईकोर्ट में ED की ओर से दाखिल हलफनामा। पैराग्राफ 7 में तय कर्ज है और पैराग्राफ 17 में 2021 में वसूल किए गए 14,131.60 करोड़ रुपए दिखाए गए हैं।”

माल्या ने कहा, “पांच साल बाद भी मुझे ऐसा व्यक्ति बताया जा रहा है, जिसने बैंकों को धोखा दिया। मुझे गलत तरीके से भगोड़ा बताया गया है।” उन्होंने वसूली का लेखा-जोखा दिखाने वाली एक टेबल भी शेयर की।

उन्होंने लिखा, “जो लोग निष्पक्ष और सही हिसाब-किताब पर भरोसा करते हैं, वे यह तालिका देखें। क्या मीडिया की ओर से मुझे इस तरह निशाना बनाया जाना और किसी पत्रकार की स्क्रिप्ट की शुरुआत में ही मुझे धोखेबाज कहना सही है? यह पूछना शुरू क्यों नहीं किया जाता कि मुझे मेरा रिफंड कब मिलेगा।”

मार्च 2016 में देश छोड़कर गए थे, 2019 में भगोड़ा घोषित

माल्या मार्च 2016 में यूके चले गए थे। इसके बाद साल 2019 में अधिकारियों ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) के तहत उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया था।

इस कानून के तहत प्राधिकारियों को संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार मिला है। भारत सरकार लगातार यूके से उनके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है।

क्या है भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम

भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) कानून उन आर्थिक अपराधियों पर नकेल कसने के लिए बनाया गया है जो भारतीय अदालतों की कार्रवाई और गिरफ्तारी से बचने के लिए देश छोड़कर भाग जाते हैं।

इस कानून के तहत अदालतों को मामले की सुनवाई पूरी होने से पहले ही आरोपी की देश और विदेश में मौजूद संपत्तियों को अटैच यानी जब्त करने और उन्हें नीलाम/बेचकर बैंकों का बकाया वसूलने का अधिकार मिलता है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फरवरी में दी थी अंतिम मोहलत

इस साल फरवरी में बॉम्बे हाईकोर्ट ने विजय माल्या को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि जानबूझकर अदालती कार्यवाही से बचने वाला व्यक्ति न्यायसंगत राहत की मांग नहीं कर सकता।

कोर्ट ने माल्या से कहा था कि यह आखिरी मौका है, वे बताएं कि भारत लौटना चाहते हैं या नहीं। माल्या ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून और उन्हें भगोड़ा घोषित किए जाने को चुनौती दी है।

Continue Reading

देश

भारत ने नेपाल के लिए 8वीं राहत खेप भेजी:35 टन राहत सामग्री काठमांडू पहुंची, बाढ़ में अब तक 1367 शव बरामद

Published

on

काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद भारत ने 35 टन राहत और बचाव सामग्री की 8वीं खेप भेजी। भारतीय वायुसेना का विमान बुधवार को काठमांडू पहुंचा। इसके साथ भारत अब तक 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री भेज चुका है।

खेप में टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, दवाएं और रेस्क्यू उपकरण शामिल हैं। भारत ने राहत अभियान 26 अगस्त को शुरू किया था।

नेपाल पुलिस के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 1367 शव बरामद हुए हैं। 102 शवों की पहचान हो चुकी है। पहचान के लिए DNA सैंपल जुटाए जा रहे हैं और भारत समेत कई देशों के फोरेंसिक विशेषज्ञ मदद कर रहे हैं।

नेपाल त्रासदी से जुड़ी तस्वीरें…

नेपाल के नुवाकोट जिले के देवीघाट में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के बाद कीचड़ से दबे मकान।

नेपाल के नुवाकोट जिले के देवीघाट में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के बाद कीचड़ से दबे मकान।

हादसे में जान गंवाने वाले रिश्तेदार की फोटो देखते परिजन। ये तस्वीरें मार्चुरी के बाहर लगाई गई हैं।

हादसे में जान गंवाने वाले रिश्तेदार की फोटो देखते परिजन। ये तस्वीरें मार्चुरी के बाहर लगाई गई हैं।

चिलिमे टनल में 105 मीटर तक पहुंची नेपाली-भारतीय सेना की टीम

रसुवा जिले के चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में नेपाली और भारतीय सेना की टीम मिलकर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। टीम अब तक सर्विस टनल के अंदर करीब 105 मीटर तक पहुंच गई है।

प्रोजेक्ट तक जाने वाली सड़क से मलबा हटाने का काम भी चल रहा है। प्रभावित इलाके के दोनों तरफ आने-जाने के लिए रोप लाइन लगा दी गई है।

बाढ़ आने के दिन ही नेपाली सेना की टीम मौके पर पहुंच गई थी। टीम ने पहले इलाके का जायजा लिया और फिर टनल के मुहाने से मिट्टी और मलबा हटाकर अंदर गई। यहां से दो लोगों के शव बरामद किए गए।

रेस्क्यू ऑपरेशन को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए मौके पर मौजूद एक्सकेवेटर के साथ बॉबकैट एक्सकेवेटर भी लगातार मलबा हटाने और खुदाई में लगाया गया है।

नेपाल में रेस्क्यू से जुड़ी तस्वीरें…

नेपाल बाढ़ में AI से शवों की पहचान की कोशिश

नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ के बाद लापता लोगों और अज्ञात शवों की पहचान के लिए FaceTagr AI तकनीक की मदद ली जा रही है। यह तस्वीरों और वीडियो में चेहरों का मिलान कर लापता लोगों से संभावित मैच तलाशती है।

FaceTagr हजारों रिकॉर्ड में से 5-10 संभावित मैच सामने लाता है। परिवार इन मैचों को देख सकते हैं, जबकि अंतिम पहचान नेपाल पुलिस या संबंधित सरकारी एजेंसियां करती हैं।

FaceTagr से जुड़े समीर पंथी के मुताबिक, अब तक करीब 500 लापता लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। सिस्टम ने करीब 90 शवों की पहचान में मदद की है। हालांकि, यह नेपाल पुलिस के कुल आधिकारिक पहचान आंकड़े से अलग है।

रेस्क्यू और फोरेंसिक मदद के लिए 54 विशेषज्ञ नेपाल भेजे

भारत ने राहत सामग्री के साथ 54 विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा है। इनमें टनल रेस्क्यू और फोरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हैं।

विशेष रेस्क्यू टीम नेपाली सेना के साथ चिलिमे और लांगटांग में अभियान चला रही है, जबकि फोरेंसिक विशेषज्ञ काठमांडू की दो लैब में DNA जांच में मदद कर रहे हैं।

भारत ने इसके लिए DNA किट, रिऐजेंट और प्रोफाइलिंग उपकरण भी उपलब्ध कराए हैं।

Continue Reading

देश

मुंबई-गोवा हाईवे में देरी पर गडकरी बोले- शर्म आती है:उद्धाटन में नहीं जाऊंगा, 2016 में कम्पलीट होना था, अब तक 94% काम हुआ

Published

on

पणजी, एजेंसी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, ‘मुझे मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण में हो रही देरी को लेकर शर्मिंदगी महसूस होती है। ये काम 2016 तक पूरा होना था, लेकिन 15 साल में सिर्फ 94% ही पूरा हुआ है।’

गडकरी ने यह बात बुधवार को पणजी में छह लेन वाले एलिवेटेड रोड कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में कही। उन्होंने कहा, ‘हाईवे का काम पूरा होने के बाद मैं इसके उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल नहीं होऊंगा। मैं ऐसे ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने का रिकॉर्ड बनाना चाहता हूं।’

गडकरी ने इस साल 22 जुलाई को राज्यसभा में बताया था कि पिछले 3 साल में नेशनल हाईवे निर्माण में खराब गुणवत्ता वाले काम के लिए 103 ठेकेदार और कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया और उन पर जुर्माना लगाया गया।

मुंबई-गोवा हाईवे: 15 साल से काम चल रहा, कई जगह गड्ढे

मुंबई-गोवा हाईवे का चौड़ीकरण का काम 2011 में शुरू हुआ था। इसके बाद भी यह अब तक पूरा नहीं हुआ है। 440 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में काम पूरा होने के बावजूद कई जगह सड़क पर गड्ढे, पानी भरने, मरम्मत और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।

हाईवे पर मई में खारपाड़ा टोल प्लाजा पर टोल लेना शुरू किया गया था। इसके बावजूद परियोजना के कुछ हिस्सों में काम और सुधार जारी है। हाईवे पर बंदरों के लिए 2021 में बनाया गया एक ओवरपास भी ढह चुका है, जिससे सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं।

हाईवे का काम 2016 तक पूरा होना था

मुंबई-गोवा हाईवे का काम पहले 2016 तक पूरा किया जाना था। जमीन अधिग्रहण, निर्माण से पहले की मंजूरियों और ठेकेदारों से जुड़ी समस्याओं के कारण काम में लगातार देरी हुई।

2024 में केंद्र सरकार ने भी संसद में बताया था कि जमीन अधिग्रहण और कुछ ठेकेदारों की आर्थिक दिक्कतों के कारण परियोजना में देरी हुई।

यह हाईवे मुंबई को कोंकण के रास्ते गोवा से जोड़ता है। इसका महाराष्ट्र वाला हिस्सा करीब 460 किलोमीटर है। परियोजना का यह मार्ग पर्यटन और स्थानीय कारोबार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677