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छत्तीसगढ़

रायपुर : उप मुख्यमंत्री अरुण साव नेशनल अर्बन कॉनक्लेव में हुए शामिल

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नई दिल्ली में आयोजित कॉनक्लेव में ‘क्षमता विकास’ सत्र की अध्यक्षता की, कहा शहरी व्यवस्थाओं में सुधार व नवाचार के लिए नगरीय निकायों में समग्र क्षमता विकास जरूरी

केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के दो दिवसीय कॉनक्लेव में बेहतर नागरिक सुविधाओं और टिकाऊ विकास पर हुआ मंथन

देशभर से 2500 से अधिक प्रतिनिधियों ने की भागीदारी, इनमें राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के शहरी विकास मंत्री, नीति निर्माता, शहरी योजनाकार, विशेषज्ञ, निकायों के निर्वाचित पदाधिकारी और अधिकारी शामिल

देशभर से 2500 से अधिक प्रतिनिधियों ने की भागीदारी, इनमें राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के शहरी विकास मंत्री, नीति निर्माता, शहरी योजनाकार, विशेषज्ञ, निकायों के निर्वाचित पदाधिकारी और अधिकारी शामिल
देशभर से 2500 से अधिक प्रतिनिधियों ने की भागीदारी, इनमें राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के शहरी विकास मंत्री, नीति निर्माता, शहरी योजनाकार, विशेषज्ञ, निकायों के निर्वाचित पदाधिकारी और अधिकारी शामिल
देशभर से 2500 से अधिक प्रतिनिधियों ने की भागीदारी, इनमें राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के शहरी विकास मंत्री, नीति निर्माता, शहरी योजनाकार, विशेषज्ञ, निकायों के निर्वाचित पदाधिकारी और अधिकारी शामिल
देशभर से 2500 से अधिक प्रतिनिधियों ने की भागीदारी, इनमें राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के शहरी विकास मंत्री, नीति निर्माता, शहरी योजनाकार, विशेषज्ञ, निकायों के निर्वाचित पदाधिकारी और अधिकारी शामिल
देशभर से 2500 से अधिक प्रतिनिधियों ने की भागीदारी, इनमें राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के शहरी विकास मंत्री, नीति निर्माता, शहरी योजनाकार, विशेषज्ञ, निकायों के निर्वाचित पदाधिकारी और अधिकारी शामिल

रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय नेशनल अर्बन कॉनक्लेव में शामिल हुए। नई दिल्ली के द्वारका स्थित यशोभूमि इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (IICC) में आयोजित इस राष्ट्रीय कॉनक्लेव में देशभर के 2500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के शहरी विकास मंत्रियों, नीति निर्माताओं, शहरी योजनाकारों, विशेषज्ञों, निकायों के निर्वाचित पदाधिकारियों और अधिकारियों ने बेहतर नागरिक सुविधाओं व शहरों के टिकाऊ विकास (Sustainable Development) की नीतियों पर दो दिनों तक मंथन किया।

केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुए राष्ट्रीय शहरी महासम्मेलन (National Urban Conclave) में समग्र शहरी प्रबंधन से जुड़े सात विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कॉनक्लेव में क्षमता विकास विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने इस दौरान अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में नगरीय निकायों द्वारा दी जाने वाली विभिन्न सेवाओं एवं कार्यो का उल्लेख करते हुए निकायों में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पर्याप्त उपलब्धता तथा उनके नियमित क्षमता विकास के लिए जरूरी कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने नगरीय निकायों में विभिन्न सेवाओं एवं कार्यों में संलग्न प्रथम पंक्ति से अंतिम पंक्ति तक के अधिकारियों-कर्मचारियों के समग्र क्षमता विकास की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। 

श्री साव ने बेस्ट प्रेक्टिसेस एवं विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे नवाचारों के अवलोकन तथा कार्मिकों के लिए नियमित प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने जिला, राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यशालाओं के आयोजन तथा क्लास-रूम सेशन्स, ऑनलाइन आदि माध्यमों से नियमित क्षमता विकास पर जोर दिया। श्री साव ने शहरी व्यवस्थाओं में सुधार एवं नवाचार पर आधारित क्षमता विकास सत्र में शहरी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने अधोसंरचना विकास के साथ क्षमता विकास के महत्व और आवश्यकता पर विस्तार से अपनी बात रखी। 

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कॉनक्लेव में केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल को छत्तीसगढ़ के शहरों में स्वच्छता संबंधी कार्यों पर आधारित काफी टेबल बुक भेंटकर  स्वच्छता के क्षेत्र में किए जा रहे विशेष प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने भारत सरकार की अपेक्षाओं के अनुरूप नगरीय प्रबंधन के कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., संचालक रिमिजियुस एक्का, दुर्ग नगर निगम की महापौर श्रीमती अल्का बाघमार, जगदलपुर के महापौर संजय पाण्डेय, राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ शशांक पाण्डेय, दुर्ग नगर निगम के आयुक्त सुमीत अग्रवाल और जगदलपुर नगर निगम के आयुक्त प्रवीण कुमार वर्मा भी कॉनक्लेव में शामिल हुए।

कॉनक्लेव में इन विषयों पर हुआ मंथन, नए कार्यक्रमों की भी लॉन्चिंग

कॉनक्लेव के अलग-अलग सत्रों में विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के शहरी विकास मंत्रियों, नीति निर्माताओं, शहरी योजनाकारों, विशेषज्ञों, निकायों के निर्वाचित पदाधिकारियों और अधिकारियों ने दो दिनों तक सर्कुलर इकोनॉमी, क्षेत्रीय योजना, क्षमता निर्माण, शहरी शासन, हाउसिंग इको-सिस्टम, शहरी आजीविका एवं गरीबी उन्मूलन तथा निर्माण एवं ध्वस्तीकरण अपशिष्ट (Construction & Demolition Waste) प्रबंधन जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया। 

कॉनक्लेव में डंपसाइट रीमेडिएशन एक्सेलरेटर प्रोग्राम (DRAP) का शुभारंभ किया गया। इसके तहत केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा उच्च प्रभाव वाले स्थलों पर केंद्रित डंपसाइट रीमेडिएशन एक्सेलरेटर प्रोग्राम के लिए 8.8 करोड़ मीट्रिक टन लिगेसी अपशिष्ट के निपटान का लक्ष्य तय किया गया है। कॉनक्लेव में स्वच्छ भारत मिशन ज्ञान प्रबंधन इकाई (KMU) के गठन की घोषणा की गई। यह इकाई शहरी स्वच्छता के लिए ज्ञान, सृजन और संस्थागत शिक्षा का राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगी। हुडको (HUDCO) द्वारा विकसित अर्बन इन्वेस्ट विंडो (UWIN) का भी शुभारंभ किया गया। यह मंच शहरी परियोजनाओं में निवेश को प्रोत्साहित करेगा। जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने ‘जल ही जननी’ गीत को भी इस दौरान लॉन्च किया गया।

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कोरबा

न्यू कोरबा अस्पताल में न्यूरो केयर की बड़ी पहल: 30 दिवसीय मेगा न्यूरो कैंप शुरू, 100 से अधिक लोग लाभान्वित

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कोरबा। कोसाबाड़ी स्थित न्यू कोरबा अस्पताल में न्यूरो संबंधी मरीजों के लिए एक बड़ी और राहत भरी पहल शुरू की है। अस्पताल में 30 दिवसीय मेगा न्यूरो कैंप की शुरुआत की गई है, जो 31 जनवरी तक पूरे माह चलेगा। इस कैंप के तहत मरीजों को न्यूरो परामर्श निशुल्क एवं आवश्यक जांच में अधिकतम छूट उपलब्ध कराई जा रही है।
मेगा कैंप में प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. शिवानी प्रगदा एवं न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मनीष गोयल द्वारा प्रतिदिन निशुल्क ओपीडी सुबह 11 से 2 बजे तक व शाम 6 से 8 बजे तक परामर्श दिया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, न्यूरो केयर डिपार्टमेंट में सुविधाओं के विस्तार की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरो फिजियोथैरेपिस्ट, न्यूरोसर्जन के साथ न्यूरो साइकाइट्री की सुविधा भी जोड़ दी गई है, जिससे न्यूरो से संबंधित किसी भी आवश्यकता वाले मरीजों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि अब सभी न्यूरो जांच, परामर्श, फिजियोथेरेपी और सर्जरी की सुविधा एक ही छत के नीचे उपलब्ध है, जो कोरबा जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में न्यूरो बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण मरीज समय पर डॉक्टर तक नहीं पहुंच पाते। अधिकांश मरीज तब अस्पताल आते हैं जब बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है। ऐसे में इस तरह के मेगा कैंप समय पर जांच और उपचार के माध्यम से बीमारी को बढ़ने से रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि ठंड के मौसम में बुजुर्गों में ब्रेन हेमरेज और लकवा (पैरालिसिस) का खतरा अधिक रहता है, जिसके प्रमुख कारण हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ती उम्र और नशे की आदतें हैं। उन्होंने प्राथमिक देखभाल की जानकारी देते हुए कहा कि बेहोश मरीज को खाना या पानी नहीं देना चाहिए और अस्पताल ले जाते समय मरीज को करवट देकर रखना चाहिए। मिर्गी (एपिलेप्सी) को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों पर चिंता जताते हुए डॉक्टरों ने कहा कि यह कोई अभिशाप नहीं, बल्कि एक सामान्य न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। झाड़-फूंक और अंधविश्वास के कारण मरीजों को प्रताड़ित करना गलत है और इससे बीमारी और गंभीर हो सकती है। न्यू कोरबा अस्पताल का यह 30 दिवसीय मेगा न्यूरो कैंप न सिर्फ इलाज बल्कि जनजागरूकता की दिशा में भी एक सराहनीय पहल माना जा रहा है, जिससे जिले के आम लोगों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। पिछले 15 दिनों में 100 से भी अधिक मरीजों ने अपना रजिस्टेशन कराकर निशुल्क ओपीडी परामर्श लिया।

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कोरबा

सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य आयोजन

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220 मातृशक्तियों की सहभागिता, नन्हे भैया-बहनों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया पारिवारिक संस्कारों का संदेश
कोरबा। सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी, कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य, सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्राचार्य राजकुमार देवांगन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में दीपक सोनी (कोरबा विभाग समन्वयक) एवं संजय कुमार देवांगन (प्रधानाचार्य, पूर्व माध्यमिक) उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत विद्यालय परिवार द्वारा पारंपरिक रीति से किया गया।


अपने संबोधन में अतिथियों ने मातृशक्ति की भूमिका को बाल संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में माता का योगदान सबसे निर्णायक होता है। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे भैया-बहनों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बच्चों ने आकर्षक नृत्य, गीत एवं लघु प्रस्तुतियों के माध्यम से पारिवारिक वातावरण, नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं संस्कारों का संदेश दिया। बच्चों की सहज एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित माताओं एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।


कार्यक्रम में कुल 220 मातृशक्तियों की गरिमामयी सहभागिता रही, जिससे मातृसंगोष्ठी अत्यंत सफल रही। माताओं ने विद्यालय की शिक्षण पद्धति, संस्कार आधारित शिक्षा एवं गतिविधियों की सराहना की। शिशु नगरी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय की 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं एवं सहयोगी संस्थाओं की जीवंत प्रदर्शनी लगाई गई। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास, कौशल निर्माण, संस्कार शिक्षा एवं व्यवहारिक ज्ञान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। अभिभावक बंधुओं के सहयोग से आनंद मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्राथमिक विभाग के भैया-बहनों ने विभिन्न खेलों, गतिविधियों एवं मनोरंजन कार्यक्रमों में भाग लेकर भरपूर आनंद उठाया। आनंद मेला बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।


कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रधानाचार्य पंकज तिवारी ने सभी अतिथियों, मातृशक्तियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यालय एवं परिवार के बीच सहयोग और विश्वास और अधिक मजबूत होता है। उप-प्रधानाचार्य श्रीमती सीमा त्रिपाठी सहित समस्त आचार्य परिवार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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कोरबा

बॉयोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर संजय सुमन ने कमाए साल में 3.20 लाख

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कोरबा। विकासखंड करतला के ग्राम बड़मार निवासी संजय सुमन ने मछली पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत नवीन बॉयोफ्लॉक तकनीक अपनाकर उन्होंने कम भूमि में अधिक उत्पादन कर उल्लेखनीय आय अर्जित की है।
संजय सुमन ने अपनी 25 डिसमिल भूमि पर बॉयोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया। इस तकनीक में तालाब में लाइनर बिछाकर पानी भरा जाता है और तेजी से बढ़ने वाली उन्नत प्रजाति की मछलियों का पालन किया जाता है। इसकी विशेषता है कि वर्ष में दो बार उत्पादन लेकर अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।
सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत उन्हें 8.40 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। पिछले वर्ष संजय सुमन ने बॉयोफ्लॉक तालाब से 6 मैट्रिक टन मछली उत्पादन किया, जिसे बेचकर 07 लाख 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। उत्पादन लागत निकालने के बाद उन्हें 03 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
सफलता से उत्साहित संजय सुमन इस वर्ष अपने कार्य का विस्तार कर उत्पादन एवं आय को दुगुना करने की योजना बना रहे हैं। बॉयोफ्लॉक तकनीक की खासियत यह है कि कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव होता है, जिससे किसानों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
संजय सुमन की यह कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

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