देश
सोना-चांदी नहीं, यह मेटल बनेगा ‘धन का बादशाह’! आने वाले दशक में बदल जाएगा खेल
मुंबई, एजेंसी। सोने-चांदी में इस साल तेज बढ़त देखने को मिली है और निवेशकों में इन दोनों धातुओं को लेकर उत्साह भी काफी बढ़ा है। कई लोग इन्हें सुरक्षित और भविष्य के लिए बेहतर निवेश मान रहे हैं। हालांकि, एक मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि असली भविष्य सोना या चांदी नहीं, बल्कि तांबा (Copper) है। उनके अनुसार आने वाले 5-10 वर्षों में तांबा संपत्ति बढ़ाने के सबसे बड़े अवसरों में से एक बन सकता है।
सीनियर मार्केट एनालिस्ट सुजय यू (Sujay U) ने लिंक्डइन पर लिखा कि भारतीय निवेशक सोने में तो दिलचस्पी दिखा रहे हैं लेकिन वे उस धातु को नज़रअंदाज कर रहे हैं जो दुनिया की बदलती अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनने जा रही है। उनका कहना है कि तांबा हर आधुनिक तकनीक और हर नई ऊर्जा प्रणाली का केंद्र बन चुका है।
बढ़ने वाली है तांबे की मांग
तांबा इलेक्ट्रिक वाहनों, सोलर पैनलों, चार्जिंग स्टेशनों, पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क और डेटा सेंटरों में मुख्य घटक के रूप में उपयोग होता है। दुनिया ग्रीन और इलेक्ट्रिक ऊर्जा की तरफ बढ़ रही है, इसलिए आने वाले समय में तांबे की मांग तेजी से बढ़ने वाली है।
इसके विपरीत, तांबा उत्पादन में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। कई प्रमुख खदानों में समस्याएं आई हैं और नई खदानें शुरू करने में 10 से 15 साल तक का समय लग जाता है। इससे सप्लाई की कमी बढ़ रही है। मॉर्गन स्टेनली ने अनुमान लगाया है कि 2026 में तांबे की बाजार में पिछले 22 सालों की सबसे बड़ी कमी देखी जाएगी। यह कमी 5.90 लाख टन तक पहुंच सकती है। वहीं साल 2029 तक यह कमी बढ़कर 1.1 मिलियन टन तक हो जाने की आशंका है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि दुनिया भर में तांबे का उत्पादन साल 2020 के बाद पहली बार कम होने वाला है।
सप्लाई कम तो बढ़ गई कीमत
सप्लाई कम और मांग ज्यादा रहने से कीमतों में उछाल की संभावना है। गोल्डमैन सैक्स और सिटी बैंक जैसे बड़े वैश्विक संस्थान अनुमान लगा रहे हैं कि आने वाले वर्षों में तांबे की कीमत 11,000 से 14,000 डॉलर प्रति टन तक जा सकती है, जो वर्तमान स्तर से काफी अधिक है।
सुजय के शब्दों में, सोना लॉकर में पड़ा रहता है, जबकि तांबा भविष्य की मशीनें चलाता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ लंबे समय के निवेश में तांबे को लेकर अधिक उत्साहित हैं। उनका मानना है कि AI, इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार तांबे की मांग को लगातार बढ़ाता रहेगा। इसलिए, यह संभावना है कि आने वाले दशक में तांबा निवेशकों के लिए बड़े रिटर्न का अवसर बन सकता है।
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चांदी लाइफ टाइम हाई से रू.2.10 लाख सस्ती- सोना रू.53,700 सस्ता…
मुंबई, एजेंसी। सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। बीते हफ्ते सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में काफी उथल-पुथल देखने को मिली। जिसका असर कमोडिटी मार्केट (MCX) और घरेलू बाजार दोनों जगह पर दिखा। सोना-चांदी अपने ऑल-टाइम हाई से काफी नीचे गिर गए। आइए जानते हैं कि इस गिरावट के बाद अब 10 ग्राम सोने और 1 किलोग्राम चांदी का नया प्राइस क्या है।

चांदी का भाव: ऑल-टाइम हाई से रू.2.10 लाख से ज्यादा की बड़ी गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ गिरावट दर्ज की गई है। चांदी का भाव अब अपने All Time High से केवल आधा रह गया है। जनवरी महीने की बात करें तो चांदी ने इतिहास रचते हुए रू.4,57,328 प्रति किलोग्राम का स्तर छुआ था। लेकिन अब यह अपने इस All Time High से रू.2,10,724 प्रति किलो सस्ती हो चुकी है। दरअसल, 5 जून को चांदी का भाव रू.2,48,537 पर था, जो बीते शुक्रवार को रू.2,46,604 प्रति किलो पर बंद हुआ। यानी एक हफ्ते में यह 1,933 रुपए सस्ती हुई।
कैलकुलेशन
रू.4,57,328 – रू.2,46,604 = रू.2,10,724 सस्ता
सोने लाइफ टाइम हाई से रू.53,700 सस्ता
5 जून को 24 कैरेट सोना रू.1,55,594 प्रति 10 ग्राम पर था, जो शुक्रवार को बंद होते-होते रू.1,50,675 पर आ गया। यानी सिर्फ 5 दिनों में सोना रू.4,919 सस्ता हो गया।
लाइफ टाइम हाई की बात करें तो जनवरी में सोने ने रू.2,04,375 प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड हाई बनाया था, जिससे यह अब रू.53,700 कम कीमत पर मिल रहा है। दरअसल, जून महीने में भी सोने की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है। 29 मई को MCX पर सोना 1,60,911 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जबकि 12 जून तक इसका भाव घटकर 1,50,675 रुपये रह गया। यानी महज 10 कारोबारी दिनों में सोने की कीमत में 10,236 रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी दर्ज की गई है।
कैलकुलेशन
रू.2,04,375 – रू.1,50,675 = रू.53,700 सस्ता
घरेलू बाजार में क्या हैं दाम?
IBJA के मुताबिक, 5 जून को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,54,238 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। वहीं, शुक्रवार को कारोबार बंद होने तक इसका भाव घटकर 1,47,800 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। इस तरह एक सप्ताह के भीतर सोना 6,438 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया।
चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। 5 जून को चांदी का भाव 2,56,908 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो अब घटकर 2,42,295 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया है। यानी एक सप्ताह में चांदी की कीमत 14,513 रुपये प्रति किलो कम हुई है।
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Citroen Cars Discount : कार खरीदने का शानदार मौका! Citroen ने इन गाड़ियों पर किया डिस्काउंट का ऐलान
मुंबई, एजेंसी। Citroen ने अपने ग्राहकों के लिए चुनिंगा गाड़ियों पर डिस्काउंट का ऐलान किया है। ये डिस्काउंट मॉडल के आधार पर दिए जाएंगे और ग्राहक इसका फायदा 30 जून तक उठा सकते हैं। डिटेल में जानते हैं इन डिस्काउंट के बारे में-

Citroen Basalt
Basalt कूप-SUV पर इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। इसमें 82hp, 115Nm वाला 1.2-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड (NA) पेट्रोल इंजन या 110hp, 190Nm वाला 1.2-लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन मिलता है। NA इंजन के साथ 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन मिलता है, जबकि टर्बो-पेट्रोल इंजन 6-स्पीड मैनुअल या 6-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ आता है। ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ, टर्बो-पेट्रोल इंजन 205Nm का ज़्यादा टॉर्क देता है। मार्केट में इसकी कीमत 8.55 लाख रुपये से 13.75 लाख रुपये की के बीच है।

Citroen Aircross
Citroen Aircross पर कंपनी इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट दे रही है। अपने सेगमेंट में यह एकमात्र 7 सीटर एसयूवी है। इसकी कीमत 8.89 लाख रुपये से 13.99 लाख रुपये तक जाती है।
Citroen C3
Citroen C3 की खरीदी करने पर आप 1.1 लाख रुपए तक की बचत कर सकते हैं। इसकी कीमत 4.99 लाख रुपये से 9.60 लाख रुपये के बीच की है।
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Tata के iPhone प्लांट पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का आरोप, बंद हो सकती है फैक्ट्री
मुंबई, एजेंसी। भारत में iPhone निर्माण से जुड़े एक प्रमुख संयंत्र को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। तमिलनाडु के होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के प्लांट पर आसपास की कृषि भूमि और भूजल को प्रदूषित करने के आरोप लगे हैं। मामले की जांच के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी से जवाब मांगा है और संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर फैक्ट्री बंद करने तक की चेतावनी दी है।
यह प्लांट Apple के iPhone के लिए बैक पैनल और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण करता है। पिछले कई महीनों से प्लांट के आसपास के किसानों ने शिकायत की थी कि फैक्ट्री से निकलने वाला अपशिष्ट जल के कारण उनकी खेती और जल स्रोत को प्रभावित कर रहा है। किसानों की शिकायत के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच शुरू की और अब मामला गंभीर रूप ले चुका है।

जांच के दौरान बोर्ड ने नोटिस में कहा कि फैक्ट्री परिसर के एक तालाब से निकला पानी आसपास के कृषि क्षेत्रों तक पहुंचा, जिससे भूजल प्रदूषण की आशंका पैदा हुई। बोर्ड ने यह भी आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 में जारी निर्देशों के बावजूद कंपनी ने जरूरी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए। इसी वजह से मई में जारी नोटिस में पूछा गया कि आखिर क्यों न यूनिट की बिजली आपूर्ति काट दी जाए और संचालन बंद कर दिया जाए। यह चेतावनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।
टाटा ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसने एक मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशाला द्वारा कराई गई जांच में संयंत्र को सभी पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप पाया गया है। कंपनी ने दावा किया है कि वह पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों को अपना जवाब सौंप चुकी है।
पर्यावरण और उद्योग के बीच संतुलन की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एक तरफ भारत वैश्विक कंपनियों के लिए उत्पादन केंद्र बनने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय समुदायों और किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब सभी की नजर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच होने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
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