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छत्तीसगढ़

SIR प्रक्रिया…निगरानी-समिति में शामिल सदस्यों को कांग्रेस दे रही प्रशिक्षण:मतदाताओं का वोटर लिस्ट से नाम नहीं कटे, इसलिए एजेंट-ऑब्जर्वर बनाए, ऑनलाइन-ऑफलाइन ट्रेनिंग

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने बड़ी रणनीति तय की है। पार्टी ने फैसला लिया है कि प्रदेश के हर विधानसभा और ब्लॉक स्तर पर निगरानी टीम बनाई जाएगी, ताकि किसी भी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से न कटे।

कांग्रेस ने एसआईआर निगरानी समिति का गठन किया है। समिति के संयोजक मोहन मरकाम है और इस संबंध में वो बैठक ले चुके हैं। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुई समन्वय समिति की बैठक में कांग्रेस नेताओं और निगरानी समिति के सदस्यों ने बूथवार गहन मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया गया है।

समिति के सदस्यों और निगरानी दल में शामिल पदाधिकारी-कार्यकर्ताओं को दिक्कत न हो, इसलिए कांग्रेस नेताओं ने प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। जिले स्तर में ऑफलाइन-ऑनलाइन पैटर्न पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

SIR निगरानी समिति में कांग्रेस के 14 नेता शामिल है।

SIR निगरानी समिति में कांग्रेस के 14 नेता शामिल है।

बीएलओ-प्रभारी नियुक्त

बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक विधानसभा में कांग्रेस अपने BLO और प्रभारी नियुक्त करेगी, जिन्हें ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही 2003 और 2024 की मतदाता सूची का मिलान कराने की भी मांग की गई है, ताकि गलत तरीके से कटे नामों की पहचान की जा सके।

कांग्रेस का प्रतिनिधि मंडल चुनाव आयोग से मिला।

कांग्रेस का प्रतिनिधि मंडल चुनाव आयोग से मिला।

वोटर लिस्ट में फोटो गायब

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि “4 नवंबर से BLO को घर-घर जाना था, लेकिन कई क्षेत्रों में काम अधूरा है। आयोग चुप है और यह नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन है।” वहीं समिति में शामिल कुछ सदस्यों ने कहा, कि वोटर लिस्ट में फोटो गायब हैं और कोड बदले गए हैं। कांग्रेस इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।”

चुनाव आयोग से चर्चा करते हुए प्रतिनिधि मंडल।

चुनाव आयोग से चर्चा करते हुए प्रतिनिधि मंडल।

इस रणनीति के तहत SIR के लिए एक्टिव है कांग्रेस

  • हर ब्लॉक और विधानसभा में निगरानी टीम बनेगी।
  • BLO और प्रभारी की ऑनलाइन ट्रेनिंग शुरू होगी।
  • पुराने रिकॉर्ड से मतदाता सूची का मिलान कराया जाएगा।
  • चुनाव आयोग से पारदर्शिता और सुधार की मांग जारी रहेगी।
कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला।

कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला।

पढ़ें कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष ने क्या कहा?

कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने दैनिक भास्कर से चर्चा के दौरान कहा कि, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान किसी मतदाता का नाम न कटे, इसलिए निगरानी समिति में शामिल सबको प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एजेंट-ऑब्जर्वर को अलर्ट रहने के लिए कहा है।

एसआईआर की डेट बढ़ाने की मांग

छत्तीसगढ़ में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR-2026) प्रक्रिया की अवधि बढ़ाने कांग्रेस ने मांग की है। बुधवार को कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात कर तीन महीने की समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया।

प्रतिनिधिमंडल में मोहन मरकाम, ताम्रध्वज साहू, धनेंद्र साहू और राघवेंद्र सिंह शामिल थे। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में BLO को भारी दिक्कतें हो रही हैं, क्योंकि खेती-किसानी के कारण अधिकांश ग्रामीण घरों से बाहर हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर एक महीने की अवधि बढ़ाने पर चर्चा का आश्वासन दिया है।

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छत्तीसगढ़

महासमुन्द : बारनावापारा अभयाण्य में “बर्ड सर्वे 2026” का आयोजन,200 से अधिक पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज

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देश के 11 राज्यों के प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा,अभयारण्य क्षेत्र में जैव विविधता का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, बर्डिंग कल्चर एवं इको पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

महासमुन्द। बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में 16 से 18 जनवरी 2026 तक “बर्ड सर्वे 2026” का आयोजन किया गया। सर्वे के दौरान पक्षियों की अच्छी विविधता देखने को मिली। अब तक प्राप्त डेटा के अनुसार इस सर्वे में लगभग 202 पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है।

इस सर्वे में देश के 11 राज्यों महाराष्ट्र, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान, केरल एवं कर्नाटक से आए 70 प्रतिभागियों, 12 वॉलंटियर्स, विशेषज्ञों एवं फोटोग्राफर्स सहित लगभग 100 लोगों की सहभागिता रही।यह बर्ड सर्वे केवल बारनवापारा अभ्यारण्य तक सीमित न होकर उसके आसपास से जुड़े कोठारी, सोनाखान एवं देवपुर परिक्षेत्रों में भी किया जा रहा है। सर्वे के दौरान प्रतिभागियों द्वारा संग्रहित पक्षी आंकड़े वैश्विक डाटाबेस का हिस्सा बनेंगे।अभयारण्य क्षेत्र में जैव विविधता का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, बर्डिंग कल्चर एवं इको पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक होग़ा। सर्वे में प्रमुख विशेषज्ञों  में डॉ. हकीमुद्दीन एफ. सैफी, डॉ. जागेश्वर वर्मा,  मोहित साहू एवं सोनू अरोरा की सहभागिता रही।

सर्वे के आकर्षण बने प्रमुख प्रजातियां-इस सर्वे में विशेष रूप से कुछ प्रजातियाँ प्रतिभागियों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहीं, जिनमें बार-हेडेड गूज उल्लेखनीय रही, जो प्रायः मध्य एशिया के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्रजनन करती है तथा सर्दियों में भारत सहित दक्षिण एशिया के जलाशयों और खेतों में देखी जाती है। इसी प्रकार आर्द्र घासभूमि, धान के खेतों, दलदली क्षेत्रों एवं नदी किनारे पाए जाने वाले ग्रे-हेडेड लैपविंग, शिकारी पक्षी प्रजाति पेरेग्रिन फाल्कन, ब्लू-कैप्ड रॉक थ्रश, यूरेशियन स्पैरोहॉक,वन पारिस्थितिकी में बीज प्रसार के लिए महत्वपूर्ण माना जाने वाला ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन पिजन का अवलोकन भी आकर्षण का केंद्र बना।

बर्ड सर्वे के सबंध में वनमण्डलाधिकारी गणवीर धम्मशील  ने बताया कि बारनवापारा सेंट्रल छत्तीसगढ़ की जैव विविधता का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ मिश्रित एवं साल वनों के साथ विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिक परिदृश्य मौजूद हैं। इस सर्वे से प्राप्त डेटा आगे चलकर अभयारण्य में आवश्यक प्रबंधन कार्ययोजनाओं की पहचान में सहायक होगा, खासतौर पर उन पक्षी प्रजातियों के संरक्षण कार्य में जिनकी संख्या में गिरावट देखी जा रही है।

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छत्तीसगढ़

वीबी-जी राम जी योजना से करमरी में आत्मनिर्भरता को मिली नई दिशा

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डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को मिल रहा बढ़ावा

मोहला-मानपुर-अम्बागढ़। आदिवासी बहुल एवं कृषि आधारित आजीविका वाले मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले की ग्राम पंचायत करमरी में वीबी-जी राम जी (विकसित भारत ग्राम गारंटी) योजना के अंतर्गत आज जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और विकासोन्मुख नारों के साथ योजना का स्वागत किया। ग्रामीणों द्वारा मानव श्रृंखला बनाकर “आत्मनिर्भर गांव-विकसित भारत” का संदेश भी दिया गया। 

कार्यक्रम के अंतर्गत कन्वर्जेंस आधारित आजीविका डबरी जैसे कृषि, मछली तालाब निर्माण कार्यों का अवलोकन किया गया। ये कार्य कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, सीआरईडीए एवं वन विभाग के आपसी समन्वय से तैयार कार्य योजना के अनुसार संचालित किए जा रहे हैं। इन आजीविका डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे आदिवासी एवं सीमांत किसानों को स्थायी आजीविका, खाद्य सुरक्षा और अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध होंगे।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह ने ग्रामीणों को संबोधित किया। उन्होंने वीबी-जी राम जी योजना के उद्देश्यों, स्थानीय रोजगार सृजन और कन्वर्जेंस मॉडल की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर सक्रिय सहभागिता, पारदर्शिता और सामुदायिक स्वामित्व के बिना किसी भी योजना की सफलता संभव नहीं है, और  वीबी-जीराम जी इन मूल सिद्धांतों पर आधारित है।

कार्यक्रम के दौरान हितग्राही विनोद कुमार एवं दलपत साई मेहरू राम को मछली जाल का वितरण किया गया। इससे मछली पालन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीणों में स्वरोजगार के प्रति उत्साह बढ़ेगा। हितग्राहियों ने बताया कि योजना से प्राप्त सहयोग के माध्यम से वे मछली पालन के साथ-साथ दलहन-तिलहन की खेती भी करेंगे, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि होगी और परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनेगी।ग्रामीणों ने वीबी-जीराम जी योजना को आदिवासी बहुल, कृषि-आधारित जिले के लिए सर्वांगीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। गांव आत्मनिर्भर होंगे, तभी भारत विकसित बनेगा के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

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खेल

केंद्रीय खेल मंत्री से मिले ओलिंपिक संघ के सचिव सिसोदिया:40वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन छत्तीसगढ़ में किए जाने का किया आग्रह

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ ओलिंपिक एसोसिएशन के महासचिव डॉ. विक्रम सिंह सिसोदिया ने नई दिल्ली में केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के आयोजन के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया।

बैठक में डॉ. सिसोदिया ने छत्तीसगढ़ में चल रही खेल गतिविधियों की विस्तृत जानकारी साझा की। सिसोदिया ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, जो छत्तीसगढ़ ओलिंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं, लगातार खेल अधोसंरचना और खिलाड़ियों के विकास के लिए प्रयासरत हैं।

महासचिव ने केंद्रीय खेल मंत्री से आग्रह किया कि मेघालय में प्रस्तावित 39वें राष्ट्रीय खेलों के बाद 40वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन फरवरी 2028 में छत्तीसगढ़ को सौंपा जाए। इससे राज्य के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलने के साथ-साथ खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर मंच मिलेगा।

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