नई दिल्ली,एजेंसी। मेक्सिको की फातिमा बोश फर्नांडेज ने मिस यूनिवर्स 2025 का खिताब हासिल कर लिया है। फातिमा बोश 25 साल की हैं। भारत की तरफ से गईं मणिका विश्वकर्मा टॉप-30 में पहुंचीं, लेकिन टॉप- 12 में जगह नहीं बना सकीं।
4 राउंड के बाद टॉप-5 में थाइलैंड की प्रवीनार सिंह, फिलीपींस की आतिसा मनालो, वेनेजुएला की स्टेफनी अबसाली, मेक्सिको की फातिमा बोश फर्नांडेस और आइवरी कोस्ट की ओलिविया यासे ने जगह बनाई थी। इसके बाद मेक्सिको की फातिमा बोश को विनर घोषित किया गया।
फातिमा बोश को मिस यूनिवर्स 2024 विक्टोरिया थेलविग ने क्राउन पहनाया।
मिस यूनिवर्स 2025 में थाइलैंड की कंटेस्टेंट प्रवीनार सिंह ने दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि वेनेजुएला की स्टेफनी अबसाली तीसरे नंबर पर रहीं। फिलीपींस की आतिसा मनालो चौथे और आइवरी कोस्ट की ओलिविया यासे पांचवें स्थान पर रहीं।
मिस यूनिवर्स की फर्स्ट रनर-अप थाइलैंड की प्रवीनार सिंह बनीं। वे भारतीय मूल की हैं।
सेकेंड रनर-अप वेनेजुएला की स्टेफनी अबसाली रहीं।
बचपन में डिस्लेक्सिया की वजह से स्कूल में बुली होती थीं
एक इंटरव्यू में फातिमा बोश फर्नांडीज ने बताया कि उनका बचपन बहुत मुश्किल में गुजरा। वह बचपन में डिस्लेक्सिया और ADHD से जूझ रही थीं, जिसकी वजह से उन्हें पढ़ने-लिखने में परेशानी होती थी। उन्हें पढ़ाई के लिए स्पेशल अटेंशन की जरूरत थी, लेकिन उन्हें स्कूल में बुलिंग का सामना करना पड़ा।
इस सवाल का जवाब देकर मिस यूनिवर्स बनीं फातिमा बोश
टॉप-5 कंटेस्टेंट्स के बीच क्वेश्चन-आंसर राउंड हुआ। इसमें मेक्सिको की फातिमा बोश से पूछा गया- “आपके नजरिए से साल 2025 में एक महिला होने की क्या चुनौतियां हैं और दुनियाभर की महिलाओं के लिए एक सुरक्षित स्थान बनाने के लिए आप मिस यूनिवर्स के खिताब का उपयोग कैसे करेंगी?”
जवाब में फातिमा बोश ने कहा-
एक महिला और मिस यूनिवर्स के रूप में, मैं अपनी आवाज और अपनी शक्ति को दूसरों की सेवा में लगाऊंगी, क्योंकि आज के समय में हम यहां बोलने, बदलाव लाने और हर चीज को साफ नजरिए से देखने के लिए हैं। हम महिलाएं हैं और जो बहादुर महिलाएं आगे बढ़कर खड़ी होती हैं, वही इतिहास बनाती हैं।
मिस यूनिवर्स 2025 की टॉप-5 कंटेस्टेंट्स।
मिस यूनिवर्स 2025 में फातिमा बोश के साथ हुआ था विवाद
4 नवंबर 2025 को सैश सेरेमनी के दौरान मिस यूनिवर्स थाइलैंड के डायरेक्टर नवात इतसराग्रिसिल ने मिस मेक्सिको फातिमा बॉश को प्रमोशनल इवेंट्स में हिस्सा न लेने पर डंबहेड (बेवकूफ) कहा था। जब मिस मेक्सिको ने विरोध किया तो नवात ने सिक्योरिटी बुलाकर उन्हें हॉल से बाहर करना चाहा। ये देखकर वहां मौजूद सभी कंटेस्टेंट्स सेरेमनी से निकलने लगीं, जिनमें मिस यूनिवर्स 2024 विक्टोरिया थेलविग भी शामिल थीं।
सैश सेरेमनी से वॉकआउट करती हुईं कंटेस्टेंट्स।
नवात बार-बार कंटेस्टेंट्स को धमकाते रहे कि अगर उन्होंने वॉक आउट किया, तो परिणाम भुगतने होंगे, लेकिन सभी कंटेस्टेंट्स ने स्वाभिमान के लिए सेरेमनी छोड़ दी। सेरेमनी से निकलकर फातिमा ने कहा कि यह उनके आत्मसम्मान और गरिमा का मामला है। उन्होंने कहा-
मैं थाइलैंड का सम्मान करती हूं, मुझे आप सभी से प्यार है, मुझे लगता है कि आप सब बेहतरीन हैं, लेकिन जो डायरेक्टर ने किया वो सम्मानजनक नहीं था। उन्होंने मुझे मूर्ख कहा क्योंकि उन्हें ऑर्गनाइजेशन से दिक्कत थी। लेकिन मुझे लगता है ये ठीक नहीं है। मैं यहां हूं और सब कर रही हूं। मैं अपना बेस्ट देने की कोशिश कर रही हूं और दयालु रहने की भी, लेकिन उन्होंने मुझे चुप करवा दिया। मैं चाहती हूं कि दुनिया इसे देखे, क्योंकि हम सशक्त महिलाएं हैं और ये प्लेटफॉर्म हमारी आवाज के लिए है और कोई हमारी आवाज नहीं दबा सकता। और कोई मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकता। मैं कहना चाहती हूं कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि आपका सपना बड़ा है या आपके पास क्राउन है, अगर ये आपकी गरिमा से खिलाफ है तो आपको चले जाना चाहिए।
सेरेमनी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और प्रतियोगिता में कंटेस्टेंट्स के साथ हो रहे दुर्व्यवहार पर सवाल खड़े किए जाने लगे। विवाद बढ़ने के बाद मिस यूनिवर्स के को-फाउंडर राउल रोचा ने एक वीडियो जारी कर नवात की हरकत की कड़ी आलोचना की और सेरेमनी को रोकने का आदेश दिया। उन्होंने नवात को आधिकारिक गतिविधियों से बाहर करने की भी घोषणा की।
विवाद के बाद नवात ने वेलकमिंग सेरेमनी के दौरान सभी कंटेस्टेंट्स से आधिकारिक तौर पर माफी मांगी और सफाई में कहा कि उन्होंने डंब शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है।
भारत की मणिका विश्वकर्मा टॉप- 30 तक पहुंचीं
मिस यूनिवर्स 2025 फिनाले की शुरुआत सभी कंटेस्टेंट्स के इंट्रोडक्शन से हुई। मणिका विश्वकर्मा ने व्हाइट ड्रेस में इंट्रोक्शन देते हुए रैंप वॉक की।
इसके बाद उन्हें टॉप- 30 कंटेस्टेंट्स में चुना गया। टॉप-30 की अनाउंसमेंट होने के बाद स्विमसूट राउंड हुआ, जिसमें मणिका विश्वकर्मा ने व्हाइट स्विमसूट पहना था।
इस राउंड के बाद टॉप-12 को शॉर्टलिस्ट किया गया, जिसमें मणिका जगह नहीं बना सकीं।
अयोध्या, एजेंसी।‘चंपत राय बेदाग और निष्कलंक हैं। यह मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूं। उनका भोलापन उनके लिए मुसीबत बन गया। उन्होंने सब पर विश्वास करके गलती की। लोगों की पहचान करने में उनसे चूक हुई।’
‘ट्रस्ट के दायित्व निभाने में कुछ कमियां रही हैं। अगर कोई कमी नहीं होती तो चोरी कैसे हो सकती थी? जहां कमी रही है, वहां सुधार किया जाएगा। चोरी करने वालों को सजा जरूर मिलनी चाहिए।’
ये बातें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए महासचिव गोविंद देव गिरि महाराज ने कहीं।
श्रीहरिकोटा, एजेंसी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गुरुवार देर रात 2:55 बजे EOS-05 इमेजिंग सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसे श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया।
EOS-05 करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में रहकर तस्वीरें लेगा। ऐसा करने वाला भारत का यह पहला सैटेलाइट है। इससे पहले भारत के सभी इमेजिंग सैटेलाइट निचली कक्षा में थे।
EOS-05 भारत और आसपास के बड़े इलाकों की लगातार तस्वीरें भेज सकेगा। इससे पाकिस्तान-चीन सीमा समेत संवेदनशील और रणनीतिक इलाकों पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
सैटेलाइट का इस्तेमाल बाढ़, चक्रवात और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी के लिए भी किया जाएगा। इससे आपदा की स्थिति का जल्दी पता लगाने और समय पर चेतावनी देने में मदद मिलेगी।
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि संगठन का इस साल छह और मिशन लॉन्च करने का लक्ष्य है। करीब आठ महीने बाद ISRO का यह पहला लॉन्च है। इससे पहले जनवरी 2026 और मार्च 2025 में उसके दो मिशन सफल नहीं हो पाए थे।
सैटेलाइट EOS-05 को GSLV-F17 रॉकेट से लॉन्च किया गया।
GSLV-F17 श्रीहरिकोटा के लॉन्चपैड तक ले जाया गया।
ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा EOS-05
GSLV-F17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल कार्यक्रम की 19वीं उड़ान थी। EOS-05 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सेकेंड पैड से लॉन्च किया।
EOS-05 लॉन्च के करीब 18 मिनट बाद सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा दिया गया। इसके बाद सैटेलाइट को 36000km पर मौजूद अपनी अंतिम कक्षा तक पहुंचना है।
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में क्या फायदा है?
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट पृथ्वी से करीब 35,786 किमी ऊपर की कक्षा है। इसमें सैटेलाइट पृथ्वी का एक चक्कर करीब 24 घंटे में पूरा करता है। यानी उसकी गति पृथ्वी के घूमने के साथ बनी रहती है।
वहीं, LEO (लो-अर्थ ऑर्बिट) पृथ्वी के काफी करीब होती है और आमतौर पर 2,000 किमी से कम ऊंचाई पर होती है। यहां सैटेलाइट बहुत तेजी से पृथ्वी का चक्कर लगाता है, इसलिए वह किसी एक इलाके के ऊपर थोड़े समय के लिए ही रहता है।
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट का फायदा यह है कि सैटेलाइट भारत और आसपास के बड़े इलाके पर लगातार नजर रख सकता है। इसकी तस्वीरों और डेटा से चक्रवात, भारी बारिश, बाढ़ और जंगल की आग जैसे खतरों की पहचान, निगरानी और नुकसान का आकलन तेजी से किया जा सकेगा।
दो खास कैमरों से बड़े इलाके की निगरानी
EOS-05 में दो मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजर यानी ऐसे कैमरे लगे हैं, जो धरती की तस्वीरें अलग-अलग तरह की प्रकाश तरंगों में लेते हैं।
इससे सामान्य तस्वीर के अलावा जमीन, पेड़-पौधों, पानी और पर्यावरण में हो रहे बदलावों की जानकारी मिल सकती है। इनमें से एक इमेजर की रिजॉल्यूशन 42 मीटर प्रति पिक्सल है, यानी तस्वीर का एक पिक्सल जमीन के करीब 42×42 मीटर हिस्से की जानकारी देता है।
EOS-05 की खासियत बहुत छोटी चीजों की बारीक तस्वीर लेना नहीं, बल्कि करीब 36 हजार किमी की ऊंचाई से बड़े इलाके की बार-बार तस्वीरें लेना है।
2021 में GISAT-1 मिशन हुआ था फेल
अगस्त 2021 में इसरो ने जीएसएलवी-एफ10 से GISAT-1 लॉन्च करने की कोशिश की थी। क्रायोजेनिक स्टेज में रॉकेट को समस्या आने के बाद मिशन फेल हो गया था। इसके चलते सैटेलाइट ऑर्बिट तक नहीं पहुंच पाया।
GISAT-1 को जियोस्टेशनरी ऑर्बिट से भारतीय उपमहाद्वीप की करीब-करीब रियल टाइम इमेजिंग के लिए तैयार किया गया था।
ISRO के पिछले 2 लॉन्च फेल हुए
PSLV-C62- 12 जनवरी 2026 को यह रॉकेट रक्षा DRDO के ‘अन्वेषा’ उपग्रह और 15 अन्य उपग्रहों को ले जा रहा था, लेकिन तीसरे चरण में बेकाबू होने के कारण मिशन फेल हो गया।
PSLV-C61-18 मई 2025 को इस मिशन का उद्देश्य अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-09 को कक्षा में स्थापित करना था, लेकिन तीसरे चरण में कंबशन चैंबर प्रेशर अचानक गिरने से मिशन असफल रहा।
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62 12 जनवरी को 10.18 बजे लॉन्च हुआ था।
श्रीनगर, एजेंसी। श्रीनगर एयरपोर्ट पर इंडिगो का विमान 6E 225 (VT-NOG) पार्किंग के दौरान खंभे से टकरा गया। फ्लाइट शुक्रवार सुबह नवी मुंबई से श्रीनगर पहुंची थी। घटना करीब सुबह 9 बजे बे नंबर-6 पर विमान को पार्क करते समय हुई। विमान में सवार सभी 200 यात्री और क्रू मेंबर सुरक्षित हैं। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
घटना के बाद यात्रियों और क्रू को मैनुअल एयरक्राफ्ट सीढ़ियों की मदद से विमान से सुरक्षित उतारा गया। हादसे की वजह का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। फिलहाल श्रीनगर एयरपोर्ट का संचालन सामान्य है और सभी फ्लाइट्स निर्धारित समय के अनुसार चल रही हैं।
विमान जिस खंभे से टकराया, वह विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS) का हिस्सा है। यह सिस्टम विमान को पार्किंग बे में सही जगह लाने और सुरक्षित तरीके से पार्क कराने में मदद करता है।
घटना से जुड़ी तस्वीरें…
खंभे से टकराने के कारण प्लेन की नोज यानी अगला हिस्सा टूट गया।
विमान की नोज यानी आगे का हिस्सा करीब एक फुट तक अंदर चला गया।
पोल से विमान के टकराने की संभावित वजहें…
विमान का अलाइनमेंट थोड़ा बिगड़ना- पार्किंग के दौरान विमान निर्धारित सेंटरलाइन से हट गया हो।
संकेत को सही तरह से फॉलो न कर पाना- VDGS के डिस्प्ले/लाइट के संकेत में भ्रम या मानवीय गलती।
पायलट की विजिबिलिटी कम होना- बारिश, धुंध, रात या किसी अन्य वजह से पोल/मार्किंग स्पष्ट न दिखना।
VDGS में तकनीकी खराबी- सिस्टम गलत दूरी या दिशा दिखा रहा हो।
विमान की गति या ब्रेकिंग में मामूली गड़बड़ी- पार्किंग में विमान को रोकते समय ब्रेक नहीं लग पाना।
VDGS विमान को पार्क करने में मदद करता है
विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS) एयरपोर्ट के पार्किंग बे में लगा होता है। यह पायलट को विमान को सही सेंटरलाइन पर रखते हुए तय जगह पर रोकने में मदद करता है। डिस्प्ले के जरिए विमान की दिशा, सेंटरलाइन से उसकी स्थिति और रुकने की जगह के संकेत मिलते हैं।
आधुनिक VDGS विमान का प्रकार पहचानने के साथ यह भी बता सकता है कि पार्किंग पोजिशन तक कितनी दूरी बाकी है और विमान किस गति से आगे बढ़ रहा है। सेंसर विमान की स्थिति का पता लगाते हैं और उसी के आधार पर डिस्प्ले पर निर्देश दिए जाते हैं।
विमान के आगे का कवर रडार को सुरक्षित रखता है
विमान के सबसे आगे लगे बाहरी कवर को रेडोम कहते हैं। इसके पीछे आमतौर पर वेदर रडार होता है, जो उड़ान के दौरान बारिश, तूफान और खराब मौसम का पता लगाने में मदद करता है। रेडोम रडार को सुरक्षित रखता है, लेकिन रेडियो तरंगों को आसानी से आने-जाने देता है।
विमान की नोज और उसके आसपास पिटोट ट्यूब, एंगल ऑफ अटैक सेंसर, टेम्परेचर सेंसर और एंटीना जैसे उपकरण भी लगे होते हैं। इनमें से कई विमान की बाहरी सतह पर होते हैं।
टक्कर में रेडोम या वेदर रडार के अलावा सेंसर भी डैमेज हो सकते हैं। इससे विमान की गति, ऊंचाई या हवा से जुड़ी जानकारी प्रभावित हो सकती है। इसलिए नोज पर टक्कर के बाद विमान को उड़ाने से पहले उसकी पूरी जांच जरूरी होती है।