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रुपए में गिरावट पर बोलीं वित्त मंत्री- ‘रुपया खुद बनाएगा अपनी राह’, चिंता की जरूरत नहीं

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नई दिल्ली,एजेंसी। भारतीय रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के पास बना हुआ है लेकिन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि मौजूदा मजबूत आर्थिक हालात को देखते हुए रुपए की कमजोरी को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि रुपया अपनी राह खुद बनाएगा और इस विषय पर चर्चा को देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति के संदर्भ में समझना चाहिए।

रुपए में गिरावट के बावजूद अर्थव्यवस्था मजबूत

4 दिसंबर को रुपया डॉलर के मुकाबले ₹90.46 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचा था। विशेषज्ञ इसका कारण भारत–अमेरिका ट्रेड डील में देरी और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी को बता रहे हैं। दिलचस्प है कि यह कमजोरी ऐसे समय में दिखी है जब देश में खुदरा महंगाई रिकॉर्ड लो 0.25% पर है और जीडीपी ग्रोथ 8% से ऊपर बनी हुई है।

सीतारमण ने कहा कि कमजोर रुपए से निर्यातकों को लाभ मिल सकता है लेकिन केवल इसी आधार पर रुपए की गिरावट को ‘फायदेमंद’ बताना सही मूल्यांकन नहीं है। उनके अनुसार, मजबूत विकास दर और स्थिर आर्थिक माहौल रुपए की मौजूदा स्थिति को बेहतर ढंग से समझाते हैं।

वित्त मंत्रालय का रुख

वित्त मंत्रालय का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार आगे भी बनी रहेगी।

  • Q2FY26 में जीडीपी वृद्धि 8.2% के छह-तिमाही उच्च स्तर पर रही।
  • अक्टूबर में खुदरा महंगाई 0.25% तक गिर गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।

सीतारमण ने भरोसा जताया कि FY26 में ग्रोथ 7% या उससे अधिक रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति आज कई बड़े देशों की तुलना में कहीं ज्यादा स्थिर और तेज है, यही वजह है कि रुपए की गिरावट के बावजूद आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है।

टैक्स और जीएसटी सुधारों पर संकेत

वित्त मंत्री ने आयकर कटौती और जीएसटी दरों में सरलीकरण के प्रभाव पर भी बात की। उनके मुताबिक, इनकम टैक्स में बदलावों का असर अगले साल टैक्स कलेक्शन में दिखेगा लेकिन लोगों के खर्च में बढ़ोतरी अभी से दिखाई देने लगी है। जीएसटी सुधार पूरे देश में समान रूप से लागू होते हैं, इसलिए इनके असर को मध्यम अवधि में समझना ज्यादा उचित होगा। कुल मिलाकर सरकार का रुख स्पष्ट है — बुनियादी ढांचे की मजबूती, स्थिर महंगाई और निरंतर आर्थिक सुधारों की बदौलत भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले महीनों में भी मजबूत राह पर बनी रहेगी।

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LPG ग्राहकों के लिए जरूरी अपडेट, 30 जून तक e-KYC नहीं कराई तो रुक जाएगी सब्सिडी

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नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने गैस ग्राहकों को 30 जून तक e-KYC पूरा करने की अपील की है। तय समय सीमा में प्रक्रिया पूरी न करने पर गैस सब्सिडी मिलने में परेशानी आ सकती है। ऐसे में लाखों उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द अपना e-KYC अपडेट कर लेना चाहिए।

सरकार का कहना है कि इस कदम के जरिए गैस सब्सिडी को सही लाभार्थियों तक पहुंचाना और फर्जी कनेक्शनों पर रोक लगाना है। 

क्यों जरूरी है e-KYC?

पिछले कुछ समय से सरकार एलपीजी कनेक्शनों को आधार से लिंक कर रिकॉर्ड को अपडेट करने पर जोर दे रही है। जिन उपभोक्ताओं ने लंबे समय से अपने कनेक्शन की दोबारा वेरिफाई नहीं कराई है, उन्हें e-KYC पूरा करना जरूरी किया गया है।

अगर तय समय सीमा तक यह प्रोसेस पूरी नहीं की जाती है तो गैस सब्सिडी की राशि आपके बैंक खाते में आने में दिक्कत हो सकती है। सरकार का मानना है कि e-KYC के जरिए फर्जी और डुप्लीकेट कनेक्शनों की पहचान करना आसान होगा। इससे सब्सिडी का लाभ केवल पात्र उपभोक्ताओं तक ही पहुंचेगा।

ऐसे करें घर बैठे e-KYC

गैस कंपनियों ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए ऑनलाइन e-KYC प्रक्रिया उपलब्ध कराई है। उपभोक्ता संबंधित गैस कंपनी के ऐप या वेबसाइट पर जाकर लॉग इन कर सकते हैं। इसके बाद e-KYC या Re-KYC के ऑप्शन पर जाना होगा। इसके बाद मोबाइल कैमरे की मदद से फेस वेरिफिकेशन किया जाएगा। जानकारी का सत्यापित होते ही प्रक्रिया पूरी हो जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में किसी कागजी दस्तावेज की जरूरत नहीं पड़ती और कुछ ही मिनटों में काम पूरा हो सकता है।

ऑफलाइन भी कर सकते हैं अपडेट

जो लोग ऑनलाइन प्रोसेस पूरी नहीं कर सकते, वे नजदीकी गैस एजेंसी या डिस्ट्रीब्यूटर के कार्यालय में जाकर e-KYC करा सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड की कॉपी, गैस कनेक्शन से जुड़े दस्तावेज और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर साथ ले जाना होगा।

एजेंसी में पहचान वेरिफाई के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया जा सकता है। फिंगरप्रिंट या अन्य जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद e-KYC तुरंत अपडेट कर दी जाएगी। इससे आपका गैस कनेक्शन सक्रिय रहेगा और भविष्य में सब्सिडी मिलने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

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कोरबा

वेदांता ने रचा इतिहास; बीएसई और एनएसई पर चार स्वतंत्र कंपनियों की लिस्टिंग

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‘एल्युमिनियम, ऑयल एवं गैस, पावर और आयरन एवं स्टील क्षेत्रों में एक साथ सबसे अधिक स्टॉक एक्सचेंज लिस्टिंग का ऐतिहासिक रिकॉर्ड’

मुंबई/बालकोनगर। वेदांता समूह ने आज भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी चार नव-डिमर्ज्ड कंपनियों को बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) और एनएसई (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) पर लिस्ट किया। इस ऐतिहासिक लिस्टिंग के साथ रणनीतिक धातुओं, क्रिटिकल मिनरल्स, एल्युमिनियम, ऑयल एवं गैस, पावर तथा आयरन एवं स्टील क्षेत्रों में केंद्रित, विश्वस्तरीय व्यवसायों का एक मजबूत पोर्टफोलियो तैयार हुआ है। ये व्यवसाय भारत की दीर्घकालिक औद्योगिक, अवसंरचनात्मक और आत्मनिर्भरता संबंधी महत्वाकांक्षाओं के केंद्र में हैं।

वेदांता एल्युमिनियम, वेदांता ऑयल एंड गैस, वेदांता आयरन एंड स्टील और वेदांता पावर की लिस्टिंग भविष्य के लिए तैयार उस परिवर्तनकारी रणनीति का परिणाम है, जिसका उद्देश्य वैल्यू अनलॉक करना, व्यवसायों पर फोकस बढ़ाना और भारत को वैश्विक आर्थिक एवं विनिर्माण शक्ति बनाने की दिशा में सेक्टर-लीडर कंपनियां तैयार करना है। ये नव-सूचीबद्ध कंपनियां आज से समूह की प्रमुख सूचीबद्ध इकाई वेदांता लिमिटेड के साथ बीएसई और एनएसई पर ट्रेडिंग शुरू करेंगी। वेदांता लिमिटेड की आधारशिला हिंदुस्तान जिंक तथा क्रिटिकल मिनरल्स व्यवसायों के वैश्विक महत्व वाले पोर्टफोलियो पर आधारित है।

लिस्टिंग समारोह को संबोधित करते हुए वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा:
“आज वेदांता के लिए एक ऐतिहासिक दिन है और मेरे लिए भावनात्मक रूप से भी बेहद खास है। 24 वर्ष पहले वेदांता लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी थी और आगे चलकर एफटीएसई-100 कंपनी का दर्जा हासिल किया। उस दिन बोया गया बीज आज एक विशाल बरगद के पेड़ में बदल चुका है और उसके संरक्षण में विकसित हुए पौधे अब प्रमुख क्षेत्रों में दिग्गज बनने तथा भारत की तेज़ आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए तैयार हैं। अभूतपूर्व विकास का अगला अध्याय अब मुंबई में शुरू हो रहा है, जो वह शहर है जहां मेरी कारोबारी यात्रा की शुरुआत हुई थी।
हमारी पूरी यात्रा के दौरान शेयरधारकों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता सर्वोच्च रही है। पिछले पांच वर्षों में हमने 300 प्रतिशत से अधिक का कुल शेयरधारक प्रतिफल दिया है, जो निफ्टी के रिटर्न से लगभग पांच गुना अधिक है। इसके साथ ही हमने 70 प्रतिशत से अधिक का संचयी डिविडेंड यील्ड भी प्रदान किया है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और एनर्जी ट्रांजिशन से संचालित भविष्य की अर्थव्यवस्था में मिनरल्स, मेटल्स और ऊर्जा की मांग अत्यधिक बढ़ने वाली है। वर्तमान में भारत अपनी आवश्यकताओं का लगभग 50 प्रतिशत आयात करता है, जबकि भविष्य में हमें आत्मनिर्भर बनना होगा। आज सूचीबद्ध हुई कंपनियां इन महत्वपूर्ण कच्चे माल की मांग और आपूर्ति के बीच मौजूद बड़े अंतर को कम करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
इन कंपनियों का निर्माण आने वाली पीढ़ियों तक राष्ट्र की सेवा करने, शेयरधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करने, भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए किया गया है। हालांकि, वेदांता की विकास यात्रा का अगला अध्याय केवल हम अकेले नहीं लिख सकते। इसके लिए हमारे शेयरधारकों का विश्वास, सरकार का सहयोग और 1.5 अरब भारतीयों की आकांक्षाओं तथा सहभागिता की आवश्यकता होगी। भारत जैसा कोई देश नहीं है। और यह भारत का समय है।”

भारत के औद्योगिक भविष्य का नया अध्याय
यह लिस्टिंग ऐसे समय में हुई है जब भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में उभर रहा है। आधुनिक अर्थव्यवस्था को गति देने वाली आवश्यक सामग्रियों, जिनमें ऑयल एवं गैस, सोना, चांदी, जिंक, एल्युमिनियम, आयरन एवं स्टील, कॉपर और कोयला शामिल हैं, की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, क्योंकि भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
ऐसे परिदृश्य में वेदांता के व्यवसाय हमारे समय के सबसे बड़े औद्योगिक विकास अवसरों के केंद्र में स्थित हैं। सामूहिक रूप से ये भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अवसंरचना निर्माण, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटलीकरण, एआई-आधारित विकास, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन टेक्नोलॉजी, एनर्जी ट्रांजिशन और दीर्घकालिक राष्ट्रीय विकास की महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देंगे।

वेदांता एल्युमिनियम (बीएसई: 544780 एवं एनएसई: वीएएमएल), वैश्विक एल्युमिनियम चैंपियन बनने की ओर
वेदांता एल्युमिनियम भारत के सबसे बड़े एल्युमिनियम उत्पादक और चीन के बाहर दुनिया के तीसरे सबसे बड़े उत्पादक के रूप में अपनी स्वतंत्र यात्रा शुरू कर रहा है। इसका आधार ओडिशा के झारसुगुड़ा स्थित दुनिया का सबसे बड़ा एल्युमिनियम स्मेल्टर है। बालको में मात्र 1 लाख टन उत्पादन से शुरू हुई यात्रा आज 30 लाख टन प्रतिवर्ष क्षमता तक पहुंच चुकी है, जिससे वेदांता दुनिया के सबसे बड़े और सबसे कम लागत वाले एल्युमिनियम उत्पादकों में शामिल हो गया है। कंपनी अगले तीन वर्षों में अपनी क्षमता को बढ़ाकर 60 लाख टन प्रतिवर्ष करने की योजना बना रही है और उसका लक्ष्य दुनिया का सबसे बड़ा तथा सबसे कम लागत वाला पूर्णतः एकीकृत एल्युमिनियम उत्पादक बनना है। प्राथमिक धातु उत्पादन से आगे बढ़ते हुए, वेदांता एल्युमिनियम हजारों डाउनस्ट्रीम उद्योगों और विनिर्माण इकाइयों के विकास को भी प्रोत्साहित करेगा, जिससे भारत के व्यापक औद्योगिकीकरण एजेंडे को मजबूती मिलेगी।

वेदांता ऑयल एंड गैस (बीएसई: 382914 एवं एनएसई: वीओजीएल), भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती
वेदांता ऑयल एंड गैस भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की ऑयल एवं गैस उत्पादक कंपनी और देश के सबसे रणनीतिक ऊर्जा व्यवसायों में से एक के रूप में बाजार में प्रवेश कर रही है।
आने वाले दशक में भारत में हाइड्रोकार्बन की मांग दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने की संभावना है। ऐसे में कंपनी देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आयात निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में है। ऋण-मुक्त बैलेंस शीट के साथ विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रही कंपनी वित्तीय मजबूती, परिचालन क्षमता और संसाधन संभावनाओं का अनूठा संयोजन प्रस्तुत करती है। वेदांता अगले तीन से पांच वर्षों में लगभग 5 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश कर उत्पादन को बढ़ाकर 5 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचाने की योजना बना रही है।
इसके विकास पोर्टफोलियो में टाइट ऑयल, शेल गैस, शैलो-वॉटर एवं डीप-वॉटर एसेट्स, सैटेलाइट फील्ड्स तथा असम और पूर्वोत्तर भारत में महत्वपूर्ण एकरेज शामिल हैं। विविध संसाधन आधार और उन्नत वैश्विक तकनीकों तक पहुंच के कारण कंपनी भारत की भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए तैयार है।

वेदांता आयरन एंड स्टील (बीएसई: 544784 एवं एनएसई: वीआईएसएल), भारत के अवसंरचना विकास की मजबूत नींव

वेदांता आयरन एंड स्टील एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण, संसाधन-सुरक्षित और ऋण-मुक्त व्यवसाय है, जो भारत की अवसंरचना और विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप है।
वर्तमान में लगभग 40 लाख टन वार्षिक स्टील उत्पादन करने वाली कंपनी ने क्षमता को बढ़ाकर 1.5 करोड़ टन प्रतिवर्ष तक पहुंचाने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है।
कंपनी को तीन महत्वपूर्ण इनपुट्स की उपलब्धता के रूप में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्राप्त है, गोवा, ओडिशा और कर्नाटक में लगभग 4 अरब टन आयरन ओर संसाधन, लगभग 800 केटीपीए मेटलर्जिकल कोक तथा गैस पाइपलाइन अवसंरचना तक सीधी पहुंच। ये एकीकृत क्षमताएं कंपनी को भारत में तेजी से बढ़ती स्टील मांग का लाभ उठाने के लिए मजबूत स्थिति प्रदान करती हैं। व्यवसाय का फोकस ग्रीन स्टील, इलेक्ट्रिकल स्टील और स्पेशियलिटी स्टील जैसे उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों पर रहेगा।

वेदांता पावर (बीएसई: 544781 एवं एनएसई: वीईडी पावर), भारत की अगली औद्योगिक क्रांति को ऊर्जा
वेदांता पावर को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था भारत की स्थिर बेसलोड बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित किया जा रहा है।
भारत की बिजली मांग अगले दशक में लगभग 240 गीगावाट से बढ़कर 460 गीगावाट से अधिक होने का अनुमान है। ऐसे में कंपनी देश की विकास महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देने के बड़े अवसर देख रही है। 4.2 गीगावाट परिचालन क्षमता, दीर्घकालिक पावर परचेज एग्रीमेंट्स और सुरक्षित कोल माइंस के आधार पर वेदांता पावर पहले से ही भारत की पांचवीं सबसे बड़ी थर्मल पावर उत्पादक कंपनी है। कंपनी की योजना क्षमता को बढ़ाकर 20 गीगावाट तक पहुंचाने और देश की अग्रणी पावर कंपनियों में शामिल होने की है।
विस्तार का अधिकांश हिस्सा ब्राउनफील्ड एक्सपैंशन के माध्यम से होगा। कंपनी का मानना है कि आने वाले दशकों तक भारत के ऊर्जा मिश्रण में कोयले की महत्वपूर्ण भूमिका बनी रहेगी, जो नवीकरणीय एवं स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के साथ सह-अस्तित्व में रहेगा। साथ ही, कंपनी न्यूक्लियर एनर्जी के अवसरों का भी मूल्यांकन कर रही है, जिसे वह स्वच्छ, विश्वसनीय और 24×7 बिजली स्रोत तथा भारत के एनर्जी ट्रांजिशन का प्रमुख सक्षमकर्ता मानती है।

वेदांता लिमिटेड: भारत का क्रिटिकल मिनरल्स चैंपियन

नई सूचीबद्ध कंपनियों के साथ-साथ वेदांता लिमिटेड समूह की प्रमुख सूचीबद्ध इकाई बनी रहेगी और भारत के सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन तथा क्रिटिकल मिनरल्स व्यवसायों में से एक होगी।
विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक और तीसरी सबसे बड़ी सिल्वर उत्पादक कंपनी हिंदुस्तान जिंक इसकी आधारशिला है। इसके अतिरिक्त कंपनी के पास जिंक, सिल्वर, कॉपर, निकेल, फेरो अलॉयज तथा अन्य रणनीतिक खनिजों का वैश्विक महत्व वाला पोर्टफोलियो है। हिंदुस्तान जिंक के माध्यम से कंपनी भारत की कृषि महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देने के लिए 15 लाख टन क्षमता का फर्टिलाइज़र प्लांट भी विकसित कर रही है। वेदांता लिमिटेड भारत की एकमात्र निकेल उत्पादक कंपनी है और ऊर्जा परिवर्तन तकनीकों तथा एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए निकेल उत्पादन को बढ़ाकर 60,000 टन प्रतिवर्ष करने की योजना बना रही है। कंपनी के कॉपर व्यवसाय घरेलू आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, जबकि फैकोर भारत का सबसे बड़ा स्पेशल-ग्रेड फेरो क्रोम उत्पादक बनने की दिशा में अग्रसर है तथा कुछ मैंगनीज सेगमेंट्स में जल्द ही देश की एकमात्र निजी क्षेत्र की उत्पादक कंपनी बन जाएगी।
ये सभी व्यवसाय मिलकर वेदांता लिमिटेड को भारत की दीर्घकालिक क्रिटिकल मिनरल्स रणनीति, औद्योगिक आत्मनिर्भरता और भविष्य के विनिर्माण विकास के केंद्र में स्थापित करते हैं।

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सेबी ने अनधिकृत मंचों पर गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों की खरीद-बिक्री को लेकर किया आगाह

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक मंचों या वेबसाइट के जरिये गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक हिस्सेदारी वाली कंपनियों के शेयरों की खरीद-बिक्री को लेकर निवेशकों को बुधवार को आगाह किया। सेबी ने कहा कि ऐसे मंच न तो मान्यता प्राप्त हैं और न ही नियामक के अधीन आते हैं। बाजार नियामक ने बताया कि उसे कुछ ऐसे ऑनलाइन मंचों का पता चला है जो गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक हिस्सेदारी वाली कंपनियों की प्रतिभूतियों में लेनदेन की सुविधा दे रहे हैं, जिससे निवेशकों को बड़ा जोखिम हो सकता है। 

सेबी ने बयान में दिसंबर, 2024 और अगस्त, 2016 में जारी अपनी पुरानी चेतावनियों को दोहराते हुए कहा कि ऐसे मंच पर लेनदेन करना या संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी साझा करना सुरक्षित नहीं है। नियामक ने यह भी बताया कि उसने पहले भी ऑनलाइन ‘ट्रेडिंग’ मंच, फैंटेसी गेम्स और गैर-सूचीबद्ध ऋण प्रतिभूतियों से जुड़े मंच को लेकर आगाह किया है। सेबी ने कहा, ”निवेशकों को एक बार फिर आगाह किया जाता है कि वे ऐसे किसी भी इलेक्ट्रॉनिक मंच पर लेनदेन या ‘ट्रेडिंग’ न करें और न ही अपनी निजी जानकारी साझा करें, क्योंकि ये मंच सेबी द्वारा अधिकृत या मान्यता प्राप्त नहीं हैं।” 

बाजार नियामक ने स्पष्ट किया कि केवल मान्यता प्राप्त शेयर बाजार ही प्रतिभूतियों में कोष जुटाने और ट्रेडिंग के लिए अधिकृत हैं। इनकी सूची सेबी की वेबसाइट पर उपलब्ध है। सेबी ने यह भी कहा कि ऐसे अनधिकृत मंच पर निवेश करने वाले निवेशकों को औपचारिक बाजार की सुरक्षा सुविधाएं नहीं मिलतीं। इनमें सेबी और शेयर बाजारों के तहत निवेशक सुरक्षा, शिकायत निवारण तंत्र और ऑनलाइन विवाद समाधान प्रणाली शामिल हैं। सेबी ने निवेशकों से अपील की कि वे किसी भी निवेश से पहले मंच की वैधता की जांच अवश्य करें। 

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