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सुधारों की नाव पर सवार भारतीय अर्थव्यवस्था, 2025 में दिखी बेजोड़ मजबूती
नई दिल्ली,एजेंसी। वैश्विक दबाव और सैन्य तनाव के बीच भी भारत की मजबूत आर्थिक उड़ान वर्ष 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक साबित हुई है। वैश्विक चुनौतियों, पश्चिमी सीमा पर सैन्य तनाव और अमरीका द्वारा 50 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाए जाने के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ती नजर आ रही है। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कर सुधारों, सरकार और रिजर्व बैंक के बीच बेहतर तालमेल तथा निरंतर नीतिगत फैसलों के चलते आज भारत के अधिकांश आर्थिक संकेतक सकारात्मक स्थिति में हैं।
8% विकास दर, महंगाई दशक के निचले स्तर पर
बीते दो तिमाहियों में देश की आर्थिक वृद्धि दर औसतन 8 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है, जबकि खुदरा महंगाई दशक के निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। रिजर्व बैंक ने भी इस वर्ष लगातार नीतिगत ब्याज दरों में कटौती कर विकास को गति दी है। डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट के बावजूद चालू खाते का घाटा सीमित है और देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 700 अरब डॉलर के आसपास मजबूत बना हुआ है।
वैश्विक एजैंसियों का भरोसा, भारत की साख में सुधार
वैश्विक रेटिंग एजैंसियों ने भारत की आर्थिक स्थिति को सुधारों की निरंतरता और राजकोषीय-मौद्रिक नीति के बेहतर समन्वय का परिणाम बताया है। इसी के चलते चालू वित्त वर्ष में भारत की विदेशी ऋण साख में सुधार किया गया है। भारत वर्तमान में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही तीसरे स्थान पर पहुंचने की ओर अग्रसर है। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दोनों क्षेत्रों के पी.एम.आई. सूचकांक 50 से ऊपर बने हुए हैं। नवंबर में विनिर्माण पी.एम.आई. 55.7 और सेवा पी.एम.आई. 59.1 दर्ज किया गया।
GST में ऐतिहासिक कटौती से घरेलू मांग को बढ़ावा
सरकार ने घरेलू मांग को बढ़ाने के लिए सितंबर में जी.एस.टी. दरों में ऐतिहासिक कटौती लागू की। जी.एस.टी. परिषद ने 4 स्लैब की जगह 2 स्लैब की व्यवस्था लागू कर 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं को सस्ता किया। जी.एस.टी. सुधारों के बाद खुदरा महंगाई अक्तूबर में 0.25 प्रतिशत और नवंबर में 0.71 प्रतिशत रही, जिससे निवेश और उपभोग मांग को बल मिला। करों में कटौती के चलते सितंबर-अक्तूबर में रिकॉर्ड खरीदारी दर्ज की गई। इसके बावजूद नवंबर में जी.एस.टी. संग्रह बढ़कर 1.70 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया।
12 लाख तक की आय कर मुक्त, मध्यम वर्ग को बड़ी राहत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी बजट में 12 लाख रुपए तक की वार्षिक आय को कर मुक्त कर मध्यम वर्ग को अब तक की सबसे बड़ी राहत दी। नया आयकर अधिनियम संसद से पारित हो चुका है, जो अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसका उद्देश्य कर प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाना है।
निर्यात में मजबूती, सेवाएं बनीं विकास की रीढ़
अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान वस्तु एवं सेवाओं का निर्यात 562 अरब डॉलर तक पहुंच गया। सेवाओं का निर्यात सबसे तेजी से बढ़ा। अप्रैल-सितंबर में 50.36 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया, जो अब तक का सर्वाधिक अर्ध-वार्षिक आंकड़ा है। सरकार ने श्रम कानूनों, बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफ.डी.आई. और परमाणु ऊर्जा में निजी निवेश को अनुमति देकर बड़े संरचनात्मक सुधार किए हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निरंतर सुधारों और मजबूत नीतियों के सहारे अर्थव्यवस्था विकास की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रही है।
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भारत वेंचर्स शिखर सम्मेलन में स्टार्टअप ने पेश किए नए समाधान
जयपुर, एजेंसी। जयपुर में आयोजित भारत वेंचर्स शिखर सम्मेलन में शनिवार को स्टार्टअप ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी, कृत्रिम मेधा, बैंकिंग, वित्त और परिवहन क्षेत्रों में नए समाधान पेश किए। कार्यक्रम में 20 से अधिक स्टार्टअप ने निवेशकों के सामने अपने नवाचार के बारे में बताया। कार्यक्रम में बैंकिंग और वित्त से जुड़े स्टार्टअप ने फिनटेक मंच, डिजिटल भुगतान समाधान, ब्लॉकचेन-आधारित सुरक्षा प्रणालियों और सूक्ष्म वित्त मॉडल पर ध्यान आकर्षित किया। इनका मकसद दक्षता को और अधिक बढ़ाना है।

परिवहन क्षेत्र पर केंद्रित स्टार्टअप ने विद्युत गतिशीलता, कृत्रिम मेधा आधारित यातायात प्रबंधन और हरित परिवहन में नवाचार के बारे में बताया, जिन्हें भविष्य-उन्मुख शहरी ढांचे के लिए अहम माना जा रहा है। भारत वेंचर शिखर सम्मेलन के दौरान फेडरेशन ऑफ यूनिकॉर्न इनोवेटिव स्टार्टअप्स एंड इंडस्ट्रीज (एफयूआईएसआई) के पदाधिकारियों का स्थापना समारोह भी हुआ, जिसमें शोधकर्ताओं, नवप्रवर्तकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
पोद्दार समूह और एफयूआईएसआई के चेयरमैन आनंद पोद्दार ने कहा कि संस्था का लक्ष्य 10,000 स्टार्टअप को सलाह, अनुदान और ज्ञान-साझाकरण पहलों के माध्यम से सहयोग देना है। संगठन का ध्यान नवीकरणीय ऊर्जा, मीडिया तकनीक, हरित अर्थव्यवस्था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों पर है। भारत वेंचर के चेयरमैन डॉ. संजय खंडेलवाल ने कहा, ”स्टार्टअप भारत की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख इंजन है। एफयूआईएसआई के माध्यम से निवेश, मार्गदर्शन और तकनीकी समर्थन देकर युवाओं के विचारों को वास्तविकता में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।”
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‘भारतीय हवाई या जमीनी रास्ते से ईरान की न करें यात्रा…’ विदेश मंत्रालय ने जारी की नई एडवाइजरी
तेहरान/नई दिल्ली, एजेंसी। क्षेत्रीय तनाव और अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए एक नई और सख्त एडवाइजरी जारी की है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों को स्पष्ट रूप से ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी है।

हवाई और जमीनी यात्रा पर रोक
दूतावास द्वारा जारी बयान के अनुसार, हालांकि भारत और ईरान के बीच कुछ सीमित उड़ानें फिर से शुरू होने की खबरें हैं, लेकिन नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे हवाई या जमीनी मार्ग से ईरान की यात्रा न करें। दूतावास ने चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय तनाव के कारण हवाई क्षेत्र (Airspace) पर प्रतिबंध और परिचालन संबंधी अनिश्चितताएं अभी भी बनी हुई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हो रही हैं।
ईरान में मौजूद भारतीयों के लिए निर्देश
जो भारतीय नागरिक वर्तमान में ईरान में हैं, उन्हें दूतावास ने सख्त निर्देश दिए हैं कि वे दूतावास के साथ समन्वय करते हुए निर्धारित जमीनी सीमा मार्गों (land border routes) के माध्यम से देश छोड़ दें। सरकार ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे मार्गदर्शन और सहायता के लिए दूतावास के निरंतर संपर्क में रहें।
वर्तमान स्थिति
ईरान ने हाल ही में इमाम खुमैनी और मेहराबाद जैसे अपने प्रमुख हवाई अड्डों को फिर से खोलना शुरू किया है और मशहद हवाई अड्डे से भी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की अनुमति दी गई है। हालांकि, यह स्थिति 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद पैदा हुए क्षेत्रीय संघर्ष के कारण अस्थिर बनी हुई है। भले ही वर्तमान में एक नाजुक संघर्ष विराम (ceasefire) है, लेकिन यात्रा और सुरक्षा स्थितियों को लेकर अभी भी गहरा संशय बना हुआ है।
मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर किसी भी सहायता या आपात स्थिति के लिए, भारतीय दूतावास ने निम्नलिखित मोबाइल नंबर साझा किए हैं, जिन पर भारतीय नागरिक संपर्क कर सकते हैं:
- +989128109115
- +989128109109
- +989128109102
- +989932179359
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जुलाई में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जाएंगे PM मोदी, मेलबर्न में भारतीय समुदाय को करेंगे संबोधित
नई दिल्ली,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस साल जुलाई में ऑस्ट्रेलिया की आधिकारिक यात्रा पर जा सकते हैं। शुक्रवार को राजनयिक सूत्रों और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। पीएम मोदी का यह दौरा उनके क्षेत्रीय प्रवास का हिस्सा होगा, जिसमें वे इंडोनेशिया और न्यूजीलैंड की यात्रा भी करेंगे।

दौरे का संभावित कार्यक्रम
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी सबसे पहले इंडोनेशिया जाएंगे। 7 और 8 जुलाई को वे न्यूजीलैंड के दौरे पर रहेंगे। इसके बाद 9 और 10 जुलाई को दो दिवसीय यात्रा के लिए प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया पहुँचेंगे।
मेलबर्न में होगा भव्य ‘प्रवासी कार्यक्रम’
इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय समुदाय (Diaspora) के साथ होने वाला सार्वजनिक कार्यक्रम होगा। सूत्रों के मुताबिक, सिडनी के बजाय इस बार मेलबर्न को एक बड़े सामुदायिक जमावड़े के लिए चुना गया है। अधिकारियों ने मेलबर्न में दो बड़े इनडोर स्टेडियमों का निरीक्षण किया है, जिनकी क्षमता 14,000 से 35,000 के बीच है। जुलाई में ऑस्ट्रेलिया की ठंड और बारिश को देखते हुए इनडोर वेन्यू (छत वाले स्टेडियम) को प्राथमिकता दी जा रही है।

सिडनी में होगी आधिकारिक द्विपक्षीय वार्ता
जहाँ एक ओर मेलबर्न में मेगा कम्युनिटी इवेंट होगा, वहीं दूसरी ओर ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बनीस का कार्यालय सिडनी में पीएम मोदी की मेजबानी के लिए उत्सुक है। यहाँ दोनों देशों के बीच व्यापारिक, आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को लेकर उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें होने की संभावना है।
व्यापारिक संगठनों में मची होड़
प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान कई बड़े बिजनेस इवेंट्स के लिए भी होड़ मची है। ऑस्ट्रेलिया इंडिया बिजनेस काउंसिल (AIBC) अपनी 40वीं वर्षगांठ मना रहा है और वे पीएम मोदी की मेजबानी करना चाहते हैं। साथ ही ‘ऑस्ट्रेलिया-इंडिया सीईओ फोरम’ भी एक हाई-प्रोफाइल मीटिंग की रेस में है। हालांकि, माना जा रहा है कि आधिकारिक तौर पर केवल एक ही संगठन को कार्यक्रम की अनुमति मिलेगी।

भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में बढ़ती गर्मजोशी
इससे पहले पीएम मोदी मई 2023 में सिडनी गए थे, जहाँ उन्होंने ‘क्वाड’ सम्मेलन में हिस्सा लिया था। उस यात्रा के दौरान ब्रिस्बेन में नए भारतीय वाणिज्य दूतावास और बेंगलुरु में ऑस्ट्रेलियाई वाणिज्य दूतावास खोलने जैसी महत्वपूर्ण घोषणाएं हुई थीं। एबीसी (ABC) के विदेश मामलों के संवाददाता स्टीफन डज़ेडज़िक ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि यह दौरा तय होता है, तो यह ऑस्ट्रेलिया के लिए कूटनीतिक रूप से एक बड़ा साल होगा, जिसमें कारने, वॉन डेर लेयेन और ताकाइची के बाद अब मोदी भी शिरकत करेंगे।
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