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Gold Silver Price: Venezuela Crisis से सोने-चांदी के दामों में जबरदस्त बढ़ोतरी, एक्सपर्ट्स ने बताया इतने हो जाएंगे रेट
मुंबई, एजेंसी। अमेरिका द्वारा शनिवार को वेनेजुएला पर किए गए सैन्य हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी को हिरासत में लिए जाने की खबर के बाद वैश्विक बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। इस घटनाक्रम का सीधा असर कीमती धातुओं पर देखने को मिला है। सोमवार, 5 जनवरी को सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। भू-राजनीतिक तनाव के माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं, जिससे सोना और चांदी की मांग बढ़ जाती है। इसी कारण भारत के वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमतों में 2,400 रुपये से अधिक और चांदी के दाम में 13,500 रुपये से ज्यादा का उछाल देखा गया।
MCX पर सोने की कीमतों में तेज उछाल
एमसीएक्स पर सुबह 9 बजकर 40 मिनट पर सोना 1,142 रुपये की तेजी के साथ 1,36,903 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान सोने की कीमतों में कुल 2,439 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई और भाव 1,38,200 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। सोने की शुरुआत आज 1,36,300 रुपये पर हुई थी, जबकि शुक्रवार को यह 1,35,761 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। फिलहाल सोना अपने लाइफटाइम हाई 1,40,465 रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे कारोबार कर रहा है।
चांदी के दामों में भी भारी तेजी
चांदी की कीमतों में भी जोरदार उछाल देखने को मिला। सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर चांदी 6,178 रुपये की तेजी के साथ 2,42,494 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।
बाजार खुलते ही कुछ ही सेकंड में चांदी 13,584 रुपये की छलांग लगाकर 2,49,900 रुपये प्रति किलोग्राम के दिन के उच्च स्तर पर पहुंच गई। यह स्तर इसके लाइफटाइम हाई 2,54,174 रुपये प्रति किलोग्राम से कुछ नीचे है। आज चांदी 2,44,000 रुपये पर खुली थी, जबकि शुक्रवार को इसका बंद भाव 2,36,316 रुपये प्रति किलोग्राम था।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी तेजी
विदेशी बाजारों में भी सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती देखने को मिली। कॉमेक्स पर गोल्ड फ्यूचर 82.40 डॉलर की बढ़त के साथ 4,412 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया। वहीं गोल्ड स्पॉट 68 डॉलर की तेजी के साथ 4,400.17 डॉलर प्रति औंस पर रहा। चांदी की बात करें तो कॉमेक्स पर सिल्वर फ्यूचर करीब 6 फीसदी की तेजी के साथ 75.08 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जबकि सिल्वर स्पॉट 3.44 फीसदी की बढ़त के साथ 75.32 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
आगे और बढ़ सकते हैं दाम
बाजार जानकारों का मानना है कि वेनेजुएला संकट सोने और चांदी की कीमतों के लिए एक नया ट्रिगर साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.75 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर सकती है। फिलहाल दोनों धातुएं अपने लाइफटाइम हाई से नीचे कारोबार कर रही हैं, लेकिन अगले कुछ घंटों या मंगलवार को नए रिकॉर्ड बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
कीमतों में तेजी के अन्य कारण
वेनेजुएला संकट के अलावा रूस-यूक्रेन शांति वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीदें और खुदरा निवेशकों की बढ़ती मांग भी सोने और चांदी की कीमतों को समर्थन दे रही हैं। निवेशकों की नजर इस सप्ताह जारी होने वाले प्रमुख अमेरिकी मैक्रो इकोनॉमिक आंकड़ों पर भी बनी हुई है, जिनमें आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग डेटा, एडीपी रोजगार आंकड़े, जोल्ट्स जॉब ओपनिंग्स और नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट शामिल हैं। इन आंकड़ों से अमेरिकी ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर संकेत मिल सकते हैं।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के जंगलों से मिलेगी राजस्थान को बिजली:90 लाख टन कोयले की कमी दूर होगी, ये जयपुर को डेढ़ साल रोशन करने जितना
जयपुर/सरगुजा, एजेंसी। राजस्थान में बिजली की बढ़ती मांग और कोयले की कमी के बीच राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) को छत्तीसगढ़ (सरगुजा) के हसदेव-अरण्य क्षेत्र में स्थित केंते एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल ब्लॉक के लिए केंद्र सरकार से वन भूमि उपयोग की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है।

इससे राजस्थान के छबड़ा (बारां) और सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट्स के लिए कोयले की आपूर्ति बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति की सिफारिश के बाद यह मंजूरी दी गई है।
परियोजना के तहत करीब 1743 हेक्टेयर वन भूमि को खनन (माइनिंग) के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। आसान भाषा में समझें तो यह क्षेत्र 80 से 200 बड़े क्रिकेट स्टेडियमों के बराबर माना जा सकता है।
इस कोयला खदान से अगले 33 से 36 साल तक करीब 90 लाख टन कोयला निकाला जा सकेगा। इसे छह चरणों में विकसित किया जाएगा।
जयपुर की 14-17 महीने की बिजली जरूरत के बराबर है यह कोयला
केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक से निकलने वाला कोयला राजस्थान के अपने बिजली संयंत्रों (पावर प्लांट) में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे छबड़ा और सूरतगढ़ जैसे बड़े थर्मल पावर प्लांटों को कोयले की बेहतर और नियमित आपूर्ति मिल सकेगी।
आसान भाषा में समझें तो यह मात्रा जयपुर शहर की करीब 14 से 17 महीने की औसत बिजली जरूरत के बराबर मानी जा सकती है। हालांकि, इस कोयले से बनने वाली बिजली सीधे सिर्फ जयपुर को नहीं मिलेगी। यह बिजली राजस्थान के पूरे पावर ग्रिड का हिस्सा होगी।
यदि कोयले की सप्लाई लगातार बनी रहती है, तो बिजलीघर पूरी क्षमता से काम कर सकेंगे और बिजली उत्पादन में स्थिरता आएगी। इसका फायदा आम उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है।

छत्तीसगढ़ का हसदेव-अरण्य क्षेत्र, जहां कोल ब्लॉक के लिए मंजूरी मिली है।
हर साल 24.05 मिलियन टन कोयले की आवश्यकता
राजस्थान में बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट पर निर्भर है। खासतौर पर छबड़ा और सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट राज्य की बिजली व्यवस्था के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
इन बिजली संयंत्रों को पूरी क्षमता से चलाने के लिए हर साल करीब 24.05 मिलियन टन कोयले की आवश्यकता होती है। मौजूदा कोयला स्रोतों से इतनी आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। इसके कारण हर साल करीब 90 लाख टन कोयले की कमी बनी हुई थी।
इसी कमी को पूरा करने और भविष्य में बिजली उत्पादन को सुरक्षित रखने के लिए राजस्थान को नए कोयला ब्लॉक की जरूरत पड़ी। केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक शुरू होने के बाद राज्य के बिजलीघरों को लंबे समय तक कोयले की नियमित आपूर्ति मिल सकेगी। इससे दूसरे राज्यों या खुले बाजार से महंगा कोयला खरीदने पर निर्भरता भी कम होगी और बिजली उत्पादन अधिक स्थिर हो सकेगा।
जंगल पर बड़ा असर पड़ेगा
केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य क्षेत्र में स्थित है। यह क्षेत्र घने साल जंगलों और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। परियोजना के लिए कुल 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग खनन के लिए किया जाएगा। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इस परियोजना से जंगल पर बड़ा असर पड़ेगा। हजारों पेड़ काटे जाएंगे।
हाथियों और वन्यजीवों के क्षेत्र में होगा खनन
हसदेव-अरण्य क्षेत्र केवल जंगल नहीं बल्कि वन्यजीवों का महत्वपूर्ण इलाका है। केंते एक्सटेंशन क्षेत्र के आसपास हाथी, तेंदुआ, स्लॉथ भालू, चीतल, लकड़बग्घा, सियार और पैंगोलिन जैसी प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह क्षेत्र लेमरू हाथी रिजर्व के करीब 3.625 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यही वजह है कि परियोजना में वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए विशेष योजना लागू करने की शर्त रखी गई है।
राजस्थान की बिजली कंपनी पर आएगा आर्थिक भार
केंते एक्सटेंशन परियोजना से केवल कोयला नहीं मिलेगा, बल्कि इसके साथ कई आर्थिक जिम्मेदारियां भी RVUNL पर आएंगी। वन भूमि डायवर्जन के बदले कंपनी को नियमों के अनुसार नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) का भुगतान करना होगा। यह राशि वन क्षेत्र की श्रेणी और सरकार द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार तय होगी। इसके अलावा वन भूमि के बदले 636.557 हेक्टेयर क्षेत्र में जितने जंगल का उपयोग बदलेगा, उसकी भरपाई के लिए नए वन विकसित करने की जिम्मेदारी भी राजस्थान की कंपनी की होगी।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए परियोजना में करीब 16.73 करोड़ रुपए का Wildlife Mitigation Plan लागू करना होगा। खनन से मिट्टी के कटाव और जल स्रोतों पर असर कम करने के लिए करीब 15.01 करोड़ रुपए के Soil and Moisture Conservation Plan का भी प्रावधान किया गया है।
मंजूरी मिली है, लेकिन कई शर्तों के साथ
केंते एक्सटेंशन को मिली मंजूरी अभी अंतिम खनन अनुमति नहीं है। यह स्टेज-1 सैद्धांतिक वन मंजूरी है, जिसमें कई शर्तें तय की गई हैं। खनन को दो चरणों में करने की योजना है। पहले चरण में करीब 1001.95 हेक्टेयर वन भूमि पर खनन किया जाएगा।
यह अवधि अधिकतम 15 साल तक होगी। इसके बाद दूसरे चरण में शेष 740.65 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन तभी आगे बढ़ेगा, जब पहले चरण में पर्यावरणीय शर्तों, जैव विविधता प्रबंधन की स्थिति संतोषजनक होगी। RVUNL को प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, वन विभाग की औपचारिकताएं और अन्य पर्यावरणीय शर्तें तय समय में पूरी करनी होंगी।
कोयला निकालना ही नहीं, राजस्थान तक पहुंचाना भी चुनौती
खदान शुरू होने के बाद सिर्फ कोयला निकालना ही पर्याप्त नहीं होगा। उसे राजस्थान के बिजली संयंत्रों तक पहुंचाने के लिए परिवहन व्यवस्था, वॉशरी, रेलवे कनेक्टिविटी और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा। इस पूरी प्रक्रिया में पर्यावरणीय मंजूरियां और अतिरिक्त खर्च भी जुड़े होंगे।
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सरकार का बड़ा फैसला: 16 कॉम्बिनेशन दवाओं पर लगा तुरंत बैन
नई दिल्ली, एजेंसी। देश में लोगों की सेहत की सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने पूरे भारत में 16 फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के बनाने, बेचने, बांटने और सप्लाई करने पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है।
यह कड़ा फैसला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940’ की धारा 26A के तहत एक नोटिफिकेशन जारी करके लिया गया है। एक्सपर्ट्स की जांच में सामने आया है कि इन दवाओं को मिलाकर बेचना वैज्ञानिक और मेडिकल तौर पर सही नहीं था। यह कदम एक वैज्ञानिक समीक्षा के बाद उठाया गया है।

क्यों लगाया गया इन दवाओं पर बैन?
क्या होती हैं FDC दवाएं? FDC (Fixed-Dose Combination) दवाएं वे होती हैं, जिनमें दो या दो से ज्यादा दवाओं के एक्टिव साल्ट (सामाग्री) को एक निश्चित मात्रा में मिलाकर एक ही दवा (जैसे एक टैबलेट या सिरप) के रूप में तैयार किया जाता है।
बैन की वजह: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ‘ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड’ ने एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी। जांच में पाया गया कि इन 16 कॉम्बिनेशन दवाओं को एक साथ मिलाकर देने का कोई मेडिकल आधार नहीं था। सरकार के मुताबिक, इन दवाओं के फायदे से ज्यादा इनके नुकसान या जोखिम होने की आशंका थी, इसलिए इन्हें ‘असुरक्षित और अतार्किक’ माना गया।
कौन-कौन सी दवाओं पर लगी है रोक?
बैन की गई दवाएं अलग-अलग बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होती थीं, जिनमें एंटीबायोटिक, दर्द निवारक, पेट दर्द और स्किनकेयर (त्वचा) की दवाएं शामिल हैं:
1. पेट दर्द, दर्द और ऐंठन की दवाएं:
एसिटाइल सैलिसिलिक एसिड + एथोहेप्टाज़ीन
डाइसाइक्लोमाइन + पैरासिटामोल + क्लिडिनियम ब्रोमाइड
डाइसाइक्लोमाइन + पैरासिटामोल + क्लिडिनियम ब्रोमाइड + क्लोरडायज़ेपॉक्साइड
पैरासिटामोल + लिग्नोकेन
2. डायबिटीज की दवा:
ग्लिक्लाज़ाइड + क्रोमियम पिकोलिनेट
3. एंटीबायोटिक दवाओं के कॉम्बिनेशन:
एमोक्सिसिलिन + सेराटियोपेप्टिडेज़
एमोक्सिसिलिन + सेराटियोपेप्टिडेज़ + लैक्टोबैसिलस स्पोरोजेन्स
एमोक्सिसिलिन + क्लोक्सासिलिन + लैक्टिक एसिड बैसिलस + सेराटियोपेप्टिडेज़
सेफैड्रोक्सिल + प्रोबेनेसिड
सेफुरोक्सिम + सेराटियोपेप्टिडेज़
4. स्किनकेयर और क्रीम :
ऐसी क्रीम या लोशन जिनमे एलोवेरा (Aloe extract) के साथ नीचे दिए गए तत्वों को मिलाया गया था, उन पर भी रोक लगा दी गई है जैसे कि… Vitamin E, Jojoba oil, Orange oil, Wheat germ oil, Tea tree oil, Allantoin, D-Panthenol का कॉम्बिनेशन।
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PM मोदी ने ओडिशा को दी बड़ी सौगात, ₹47,000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स किए लॉन्च
मयूरभंज,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मयूरभंज में ‘विकास की धारा, पूरा ओडिशा’ (विकास रा धारा, ओडिशा सारा) नाम के एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित किया। यह कार्यक्रम ओडिशा में BJP सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ शामिल हुए। इस मौके पर PM मोदी ने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को उनके जन्मदिन पर बधाई देते हुए कहा, “ओडिशा की बेटी आज देश में इतने ऊंचे पद पर पहुंची हैं और हम सभी का मार्गदर्शन कर रही हैं। यह हम सभी के लिए बहुत गर्व की बात है। राष्ट्रपति का व्यक्तित्व, उनका उदार और दयालु स्वभाव, और देश व समाज की सेवा के प्रति उनका अटूट समर्पण – इन सबने न केवल मयूरभंज की, बल्कि पूरे ओडिशा राज्य की पहचान को मजबूत किया है।” PM ने आगे कहा, “आज एक बहुत शुभ क्षण है क्योंकि आज राष्ट्रपति जी का जन्मदिन है, और मुझे आज उनके गांव जाने और उन्हें शुभकामनाएं देने का मौका मिला। आज मैं राष्ट्रपति जी के साथ पहाड़पुर भी गया था।”प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि पहाड़पुर गांव का तेजी से विकास करके उसे “सोलर विलेज” बनाया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इलाके के हर घर में सौर ऊर्जा की सुविधा हो। इस पहल की तुलना कोणार्क सूर्य मंदिर की विरासत से करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि पहाड़पुर नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) के केंद्र के रूप में वैश्विक मानचित्र पर अपनी एक अलग पहचान बनाने जा रहा है।
PM मोदी ने कहा, “अब पहाड़पुर को तेजी से सोलर विलेज के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसका मतलब है कि यहां हर घर तक सौर ऊर्जा पहुंचाई जाएगी। जिस तरह ओडिशा के कोणार्क सूर्य मंदिर की एक खास पहचान है, उसी तरह पहाड़पुर भी सोलर विलेज के तौर पर अपनी पहचान बनाएगा।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार ओडिशा के प्राकृतिक संसाधनों को आर्थिक “संभावनाओं” में बदलने पर ध्यान केंद्रित कर रही है और राज्य में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने ‘उत्कर्ष ओडिशा’ अभियान जैसी पहलों की सफलता का भी जिक्र किया, जिसने राज्य में वैश्विक और घरेलू निवेशकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाई है। पीएम मोदी ने कहा, “हमारी सरकार ओडिशा के संसाधनों को ओडिशा की संभावनाओं में बदल रही है। ओडिशा में बड़े निवेश आ रहे हैं, यहाँ नए उद्योग लगाए जा रहे हैं और इस मकसद से ‘उत्कर्ष ओडिशा’ जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं।”पीएम मोदी ने आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी दोहराया और कहा कि आदिवासी युवाओं को शिक्षा और रोज़गार के बेहतर मौकों से जोड़ा जा रहा है।
पीएम मोदी ने कहा, “आदिवासी समाज को आगे बढ़ाने के लिए हम आदिवासी युवाओं को शिक्षा और रोज़गार के मौकों से जोड़ रहे हैं। इन बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर सुविधाएँ मिलनी चाहिए… इसके लिए देश भर में लगभग 500 एकलव्य मॉडल स्कूल खोले गए हैं।”
इस इलाके के साथ अपने जुड़ाव का ज़िक्र करते हुए, पीएम मोदी ने लोगों की भारी मौजूदगी के लिए आभार जताया और कहा कि मयूरभंज के लोगों का प्यार उन्हें बार-बार यहाँ खींच लाता है।
पीएम मोदी ने कहा, “ओडिशा में बीजेपी सरकार के अब 2 साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर आप सभी के बीच आना, मयूरभंज आने का यह सौभाग्य और इतनी बड़ी संख्या में आपकी मौजूदगी—यह मौका मेरे लिए बहुत खास है। आपका प्यार मुझे बार-बार यहाँ खींच लाता है।” इस समय के सांस्कृतिक महत्व पर ज़ोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि ओडिशा अभी त्योहारों के माहौल में है और यहाँ बड़े पारंपरिक उत्सव चल रहे हैं। पीएम ने आगे कहा, “हमारा ओडिशा अभी त्योहारों की खुशी में डूबा हुआ है। पिछले हफ़्ते ही यहाँ ‘गण परदा’ त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया गया। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की तैयारियाँ भी ज़ोरों पर हैं। मयूरभंज में बारीपदा रथ यात्रा को लेकर भी उत्साह का माहौल है। और इन सबके बीच, लोकतंत्र और विकास का उत्सव भी चल रहा है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा में लगभग 47,000 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया, जिनका मकसद राज्य के बुनियादी ढाँचे और सार्वजनिक सेवाओं को बदलना है। इससे पहले दिन में, एक अहम सांस्कृतिक पहल के तहत, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मयूरभंज ज़िले के पहाड़पुर गाँव का दौरा किया। दोनों नेताओं ने ‘संताली जाहिरा’ और ‘हो जाहिरा’ के पवित्र स्थलों पर पारंपरिक पूजा-अर्चना और अनुष्ठान किए और देश की समृद्धि के लिए आशीर्वाद माँगा।
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