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Gold Price को लेकर Morgan Stanley का अनुमान, कीमतों में आएगा बंपर उछाल

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वाशिंगठन, एजेंसी। साल 2026 की शुरुआत सोने ने ऐतिहासिक तेजी के साथ की है। 2025 के आखिर में अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहली बार सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस यानी 31.1035 ग्राम (करीब 3.74 लाख रुपए) के पार पहुंचा। 7 जनवरी 2026 को स्पॉट गोल्ड का कारोबार 4,440 डॉलर प्रति औंस (लगभग 3.69 लाख रुपए) के आसपास रहा है। हालिया मुनाफावसूली से कीमतों में हल्की नरमी आई है लेकिन बाजार का रुझान अब भी तेजी का बना हुआ है। 

निवेशकों की नजर 4,450 डॉलर (करीब 3.69 लाख रुपए) के अहम रेजिस्टेंस लेवल पर है, जिसे पार करते ही सोना 4,600 डॉलर (लगभग 3.82 लाख रुपए) की ओर दौड़ सकता है। दिग्गज निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली ने 2026 की चौथी तिमाही तक सोने का लक्ष्य 4,800 डॉलर प्रति औंस तय किया है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 3.98 लाख से 4.0 लाख रुपए प्रति औंस बैठता है। बैंक का कहना है कि कमजोर अमरीकी डॉलर, फैडरल रिजर्व की संभावित नरम ब्याज नीति और नेतृत्व परिवर्तन जैसी परिस्थितियां सोने के लिए “परफैक्ट स्टॉर्म” तैयार कर रही हैं।

केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीद

वैश्विक केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। उभरती अर्थव्यवस्थाएं डॉलर पर निर्भरता घटाकर अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं। बैंक ऑफ अमरीका के विश्लेषक माइकल विडमर के मुताबिक 2026 में सोने की औसत कीमत 4,538 डॉलर प्रति औंस (करीब 3.77 लाख रुपए) रह सकती है। घटती आपूर्ति और बढ़ती लागत कीमतों को मजबूत सहारा दे रही है। सोने-चांदी की ऊंची कीमतों का सीधा फायदा खनन कंपनियों को मिल रहा है। जब सोना 3.7 लाख डॉलर प्रति औंस से ऊपर बना हुआ है, तो माइनिंग कंपनियों का मुनाफा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यही वजह है कि 2026 की शुरुआत में ही माइनिंग स्टॉक्स एस.एंड.पी.  500 के टॉप परफॉर्मर्स में शामिल हो गए हैं।

सोने की सप्लाई पर दबाव

जहां मांग तेजी से बढ़ रही है, वहीं सप्लाई मोर्चे पर चुनौतियां गहराती जा रही हैं। बैंक ऑफ अमरीका के अनुसार उत्तरी अमरीका की 13 प्रमुख खनन कंपनियों का उत्पादन 2026 में करीब 2 फीसदी घटकर 1.92 करोड़ औंस रह सकता है। खनन लागत बढ़कर 1,600 डॉलर प्रति औंस (करीब 1.33 लाख रुपए) तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे सोने की कीमतों के लिए एक मजबूत न्यूनतम स्तर बनता है।

दिसंबर में शेयर बाजार पर भारी पड़ा सोना

दिसंबर 2025 में निवेशकों ने शेयर बाजार की तुलना में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) को ज्यादा तरजीह दी। सोने की कीमतों में तेज़ी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच गोल्ड ईटीएफ में निवेश तीन गुना बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

म्यूचुअल फंड उद्योग की शीर्ष संस्था एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (ए.एम.एफ.आई.) के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में गोल्ड ई.टी.एफ. में शुद्ध निवेश बढ़कर 1,16,467 करोड़ रुपए हो गया, जो एक महीने पहले की तुलना में करीब तीन गुना अधिक है। यह अब तक का सबसे ऊंचा मासिक निवेश है।

चांदी बनी 2026 की हाई-ग्रोथ मेटल

सोने के साथ-साथ चांदी भी 2026 में निवेशकों की पसंद बनती जा रही है। जनवरी की शुरुआत में चांदी 80 डॉलर प्रति औंस (लगभग 6,600 रुपए) के पार पहुंच चुकी है। बैंक ऑफ अमरीका के मुताबिक गोल्ड-टू-सिल्वर रेशियो फिलहाल 60:1 के आसपास है। अगर यह अनुपात घटता है, तो चांदी 135 डॉलर से 300 डॉलर प्रति औंस, यानी करीब 11,200 रुपए से 24,900 रुपए तक जा सकती है। 2026 से चीन ने चांदी के निर्यात पर नई लाइसेंस व्यवस्था लागू की है। इसके तहत दुनिया की करीब 60–70 फीसदी रिफाइंड चांदी सप्लाई पर सरकारी मंजूरी जरूरी होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे वैश्विक बाजार में चांदी की कीमतों पर और दबाव बनेगा।

सोने-चांदी की ऊंची कीमतों का सीधा फायदा खनन कंपनियों को मिल रहा है। जब सोना 3.7 लाख डॉलर प्रति औंस से ऊपर बना हुआ है, तो माइनिंग कंपनियों का मुनाफा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यही वजह है कि 2026 की शुरुआत में ही माइनिंग स्टॉक्स एस.एंड.पी.  500 के टॉप परफॉर्मर्स में शामिल हो गए हैं।

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देश

Gold Demand in India: भारत में सोने की मांग मजबूत, आयात रिकॉर्ड स्तर पर, चांदी में भी जबदरस्त उछाल

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मुंबई, एजेंसी। देश में सोने का आयात वित्त वर्ष 2025-26 में 24 प्रतिशत बढ़कर अब तक के उच्चतम स्तर 71.98 अरब डॉलर पहुंच गया है। यह वृद्धि मुख्य रूप से कीमती धातु की ऊंची कीमतों के कारण हुई है। वाणिज्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी। वित्त वर्ष 2024-25 में सोने का आयात 58 अरब डॉलर रहा था, जबकि 2023-24 में यह 45.54 अरब डॉलर और 2022-23 में 35 अरब डॉलर था।

वित्त वर्ष 2025-26 में मात्रा के हिसाब से सोने का आयात 4.76 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 757.09 टन था। इसी तरह, चांदी का आयात बीते वित्त वर्ष में लगभग 150 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर हो गया। मात्रा के लिहाज से यह 42 प्रतिशत बढ़कर 7,334.96 टन रहा। इन कीमती धातुओं के आयात में वृद्धि से देश का व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 333.2 अरब डॉलर पहुंच गया। 

आयात मूल्य बढ़ा

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आयात मूल्य बढ़ा है, जबकि मात्रा में गिरावट आई है। मंत्रालय ने बताया कि सोने के आयात की कीमत वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 99,825.38 डॉलर प्रति किलोग्राम हो गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 76,617.48 डॉलर प्रति किलोग्राम थी। इसी दौरान आयात मात्रा 757.09 टन से घटकर 721.03 टन रह गई। 

स्विट्जरलैंड सबसे बड़ा सप्लायर

मंत्रालय के अनुसार स्विट्जरलैंड सोने के आयात का सबसे बड़ा स्रोत रहा, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (16 प्रतिशत से अधिक) और दक्षिण अफ्रीका (लगभग 10 प्रतिशत) का स्थान है। सोना देश के कुल आयात का पांच प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और इसका उपयोग मुख्य रूप से आभूषण उद्योग में होता है। 

आंकड़ों के अनुसार, स्विट्जरलैंड से आयात 11.36 प्रतिशत बढ़कर 24.27 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुसार, चालू खाता घाटा (सीएडी) दिसंबर तिमाही में बढ़कर 13.2 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) हो गया, जबकि पिछले वर्ष 2024-25 की इसी अवधि में यह 11.3 अरब डॉलर था। हालांकि, चालू खाता घाटा अप्रैल-दिसंबर 2025 में घटकर 30.1 अरब डॉलर (जीडीपी का एक प्रतिशत) रहा, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 36.6 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) था। 

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देश

2030 तक भारत का डिजिटल विज्ञापन बाजार छू लेगा $22 अरब का आंकड़ा, दोगुनी होगी रफ्तार

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मुंबई, एजेंसी। बाजार अनुसंधान कंपनी रेडसीर कंसल्टिंग (RedSeer Consulting) ने कहा कि भारत में डिजिटल विज्ञापन बाजार अगले पांच वर्षों में दोगुना होकर 2030 तक 22 अरब डॉलर का हो सकता है। रेडसीर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार डिजिटल विज्ञापन खर्च की वृद्धि व्यापक अर्थव्यवस्था से आगे निकल रही है। यह खंड 2025 में कुल वैश्विक विज्ञापन खर्च का 70 से 75 प्रतिशत था और 2025 में वैश्विक वास्तविक जीडीपी की तुलना में 3 से 5 गुना तेज गति से बढ़ रहा है। 

रेडसीर कंसल्टिंग के वरिष्ठ सलाहकार माधव गुलाटी ने बताया, ”भारतीय डिजिटल विज्ञापन बाजार 2025 में 11 अरब डॉलर का था। इसके 2030 तक 10 से 15 प्रतिशत की संचयी वार्षिक वृद्धि दर से बढ़कर 19 अरब डॉलर से 22 अरब डॉलर के बीच रहने का अनुमान है।” 

भौगोलिक लिहाज से 2025 में वैश्विक डिजिटल विज्ञापन खर्च में लगभग 46 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अमेरिका सबसे आगे है। उसके बाद लगभग 24 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ चीन का स्थान है। रिपोर्ट के मुताबिक इस बाजार में भारत की हिस्सेदारी करीब एक प्रतिशत है। 

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देश

क्रिसिल का पहली तिमाही में शुद्ध लाभ 46% बढ़कर 233 करोड़ रुपए

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मुंबई, एजेंसी। घरेलू क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का 2026 की जनवरी-मार्च तिमाही में शुद्ध लाभ 45.9 प्रतिशत बढ़कर 233.3 करोड़ रुपए रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 159.8 करोड़ रुपए था। कंपनी की एकीकृत कुल आय भी वर्ष 2026 की पहली तिमाही में 29.6 प्रतिशत बढ़कर 1,093.7 करोड़ रुपए हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 843.8 करोड़ रुपए थी। क्रिसिल का वित्त वर्ष एक जनवरी से 31 दिसंबर (कैलेंडर वर्ष) तक चलता है। 

क्रिसिल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमीश मेहता ने कहा कि इस अवधि में कारोबार में वृद्धि ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण और विशिष्ट, विशेषज्ञता-आधारित समाधानों के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि जटिल हालात में ग्राहकों के लिए क्रिसिल की विश्लेषणात्मक और जोखिम समाधान सेवाओं की कितनी अहम भूमिका है। 

क्रिसिल ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि और मजबूती उसके कारोबार के लिए अवसर प्रदान करती रहेगी। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 7.6 प्रतिशत से कम है। हालांकि इसमें और गिरावट का जोखिम भी बताया गया है। क्रिसिल ने प्रति शेयर नौ रुपए के अंतरिम लाभांश की भी घोषणा की है। 

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