Connect with us

विदेश

अमेरिका डिएगो-गार्सिया मिलिट्री बेस को लेकर ब्रिटेन से नाराज:हिंद महासागर से ईरान पर हमला करना था, ट्रम्प बोले- ब्रिटिश PM से निराश हूं

Published

on

तेल अवीव/तेहरान,एजेंसी। इजराइल-अमेरिका और ईरान जंग का आज तीसरा दिन है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर से नाराजगी जताई है। दरअसल ब्रिटिश पीएम ने अमेरिका को हिंद महासागर में मौजूद अपना मिलिट्री बेस डिएगो गॉर्सिया से इनकार कर दिया था।

इसे लेकर ट्रम्प ने कहा है कि वे ब्रिटिश पीएम से बेहद निराश है। दरअसल अमेरिका को जंग के पहले दिन इस बेस से ईरान पर हमला करना था। हालांकि ब्रिटेन ने इसकी इजाजत नहीं दी।

वहीं कुवैत ने सोमवार को गलती से 3 अमेरिकी फाइटरजेट्स को दुश्मन का विमान समझकर निशाना बनाया। हादसे में सभी अमेरिकी पायलट सुरक्षित हैं।

दूसरी तरफ ईरान ने साइप्रस में ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स (RAF) के अक्रोटिरी बेस पर ड्रोन हमला किया है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रविवार देर रात हुए इस हमले में बेस को मामूली नुकसान पहुंचा, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।

इसके जवाब में ब्रिटिश सेना कार्रवाई कर रही है। दरअसल, ब्रिटिश PM कीर स्टारमर ने ईरानी मिसाइल साइट्स पर हमले के लिए अमेरिका को इस बेस का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी।

कुवैत में अमेरिकी फाइटर जेट क्रैश हुए। फुटेज में फाइटर जेट जमीन पर गिरता दिख रहा है।

कुवैत में अमेरिकी फाइटर जेट क्रैश हुए। फुटेज में फाइटर जेट जमीन पर गिरता दिख रहा है।

ईरान का 4 देशों में 6 अमेरिकी बेस पर हमला

ईरान ने सोमवार को मिडिल-ईस्ट के 4 देशों में 6 अमेरिकी बेस पर हमला किया है। कुवैत में अमेरिका के कई फाइटर जेट क्रैश हो गए है। जेट हवा में गोल-गोल घूमने के थोड़ी देर बाद जमीन से टकरा गए। हालांकि, इसमें किसी मौत की नहीं हुई है।

दूसरी ओर ईरान के टॉप नेशनल सिक्योरिटी अधिकारी अली लारीजानी ने सोमवार को कहा कि ईरान अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेगा। यह बयान उन खबरों के जवाब में आया है, जिनमें कहा गया था कि ईरान ने अमेरिका से फिर से बातचीत शुरू करने की कोशिश की है।

ईरान में 555 की मौत, 740 घायल

अल-जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल ने मिलकर अब तक ईरान के 1000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं। इस दौरान शुरुआती 30 घंटे में 2000 से ज्यादा बम गिराए गए।

इनमें अब तक 555 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 180 छात्राओं की मौत हो गई और 45 घायल हैं।

28 फरवरी को शुरू हुई इस लड़ाई के पहले दिन हुई बमबारी में ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। इसके अलावा रविवार को 3 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे।

इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें…

ईरान ने सऊदी अरब की बड़ी तेल रिफाइनरी रास तनूरा पर हमला किया है। यहां हमले के बाद धुंआ उठता नजर आया।

ईरान ने सऊदी अरब की बड़ी तेल रिफाइनरी रास तनूरा पर हमला किया है। यहां हमले के बाद धुंआ उठता नजर आया।

ईरान के सनंदज शहर पर हमला हुआ है। इसमें दो लोग मारे गए हैं।

ईरान के सनंदज शहर पर हमला हुआ है। इसमें दो लोग मारे गए हैं।

कुवैत में अमेरिका का फाइटर जेट क्रैश हो गया।

कुवैत में अमेरिका का फाइटर जेट क्रैश हो गया।

इजराइल ने रविवार को रातभर ईरान की राजधानी तेहरान में हवाई हमले किए।

इजराइल ने रविवार को रातभर ईरान की राजधानी तेहरान में हवाई हमले किए।

इजराइल के यरुशलम में ईरानी मिसाइल के हमले से भारी तबाही हुई। तस्वीर में मलबे में दबी कार नजर आ रही है।

इजराइल के यरुशलम में ईरानी मिसाइल के हमले से भारी तबाही हुई। तस्वीर में मलबे में दबी कार नजर आ रही है।

तेल अवीव में हुए ईरानी मिसाइल हमले के स्थल का दौरा करते राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग।

तेल अवीव में हुए ईरानी मिसाइल हमले के स्थल का दौरा करते राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग।

Continue Reading

विदेश

ट्रम्प की धमकी से ईरान नाराज, अमेरिका से बातचीत रोकी:कहा- दबाव में बात नहीं करेंगे, अमेरिकी अधिकारियों के साथ हाथ भी नहीं मिलाया

Published

on

तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन, एजेंसी। स्विट्जरलैंड में 21 जून को ईरान और अमेरिका के बीच हुई बातचीत ट्रम्प की धमकी की वजह से खत्म हो गई। ईरानी वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा, “करीब 80 मिनट की बातचीत के बाद मुझे पता चला कि ट्रम्प ने हमारे राष्ट्रपति, हमारी वार्ता टीम और हमारे इलाके को लेकर धमकी भरे बयान दिए हैं।”

गालिबाफ ने कहा कि इसके बाद ईरानी डेलिगेशन ने बैठक खत्म कर दी और वहां से चला गया। उन्होंने बताया कि बाद में अमेरिकी पक्ष ने मध्यस्थों के जरिए एक और बैठक करने की इच्छा जताई, लेकिन ईरान ने इसे स्वीकार नहीं किया।

ईरानी टीम ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ हाथ मिलाने और संयुक्त फोटो सत्र में शामिल होने से इनकार कर दिया। इसे लेकर जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से पत्रकारों ने सवाल किया तो उन्होंने कहा,

लोग सोचते हैं कि केवल नेतन्याहू ही बातचीत को नुकसान पहुंचा सकते हैं, लेकिन कई बार ट्रम्प के अचानक और सख्त बयानों से भी तनाव पैदा हो जाता है।

दरअसल, जब अमेरिका-ईरान के प्रतिनिधि बातचीत कर रहे थे, तभी ट्रम्प ने ईरान को धमकी देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा था कि ईरान तुरंत लेबनान में हिजबुल्ला को परेशानी पैदा करने से रोके। अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो हम ईरान पर फिर बहुत सख्त हमला करेंगे।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची स्विट्जरलैंड में आयोजित लेक लूसर्न समिट के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से बातचीत करते हुए।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची स्विट्जरलैंड में आयोजित लेक लूसर्न समिट के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से बातचीत करते हुए।

PAK पीएम बोले- अमेरिका-ईरान वार्ता सफल

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत सकारात्मक रही। दोनों पक्ष 60 दिन के भीतर अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ने, हाई लेवल कमेटी बनाने और तकनीकी स्तर की वार्ता जारी रखने पर सहमत हुए।

अमेरिका ने ईरान को 60 दिन तेल बेचने की छूट दी

ट्रम्प प्रशासन ने ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन और बिक्री पर 21 अगस्त तक के लिए प्रतिबंधों में ढील दे दी। अमेरिका का कहना है कि यह फैसला होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही जारी रखने पर ईरानी सहमति के बाद लिया गया।

ईरान ने कहा- बातचीत के बीच भी सेना पूरी तरह अलर्ट

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी गदीर नेजामी ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत जारी रहने के बावजूद सेना की तैयारियों में कोई कमी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है।

होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर बढ़ने लगी

करीब 20 लाख बैरल तेल लेकर दो टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। यह टैंकर किस देश के हैं इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई हैं। हालांकि, जहाजों की संख्या अभी भी युद्ध से पहले के स्तर से काफी कम है।

स्विट्जरलैंड वार्ता के बाद गालिबाफ और अराघची ओमान रवाना

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची अमेरिका के साथ बातचीत के बाद ओमान पहुंचे हैं। वहां होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन पर चर्चा होगी।

Continue Reading

देश

भारत की सैन्य ताकत होगी और घातक, अमेरिका ने 4555 करोड़ की रक्षा डील को दी मंजूरी

Published

on

वाशिंगठन/नई दिल्ली, एजेंसी। भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को और मजबूत करते हुए अमेरिका ने भारतीय सेना के AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों और M777A2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों के लिए 482.2 मिलियन डॉलर (लगभग ₹4,555 करोड़) के सपोर्ट पैकेज को मंजूरी दे दी है। इस पैकेज में रखरखाव, तकनीकी सहायता, स्पेयर पार्ट्स और अन्य लॉजिस्टिक सेवाएं शामिल हैं। अमेरिका की Defense Security Cooperation Agency (DSCA) ने 17 जून को इस प्रस्तावित सौदे की आधिकारिक सूचना जारी की। यह एजेंसी अमेरिकी सरकार के फॉरेन मिलिट्री सेल्स (FMS) कार्यक्रम का संचालन करती है। 

इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग ने भी अमेरिकी कांग्रेस को इस संभावित रक्षा सौदे के बारे में जानकारी दी थी। भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने कहा कि दोनों देश प्रतिदिन रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि M777A2 हॉवित्जर तोपों के लिए लगभग 230 मिलियन डॉलर का सपोर्ट पैकेज भी अंतिम चरण में है। राजदूत ने कहा कि यह प्रस्ताव अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के अनुरूप है और साथ ही भारत की रक्षा क्षमताओं को बनाए रखने और मजबूत करने में मदद करेगा।

भारत ने M777A2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों को अमेरिका से खरीदा था। इन हल्की लेकिन अत्यधिक प्रभावी तोपों को विशेष रूप से पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में तेजी से तैनात करने के लिए डिजाइन किया गया है। लद्दाख और उत्तरी सीमाओं पर इनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। वहीं, भारतीय वायुसेना और थलसेना के पास मौजूद AH-64E Apache हेलीकॉप्टर दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में गिने जाते हैं। ये सटीक हमले, टैंक रोधी अभियानों और युद्धक्षेत्र में सैनिकों को समर्थन देने में सक्षम हैं।

अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि यह पैकेज भारत को मौजूदा और भविष्य के सुरक्षा खतरों का सामना करने में मदद करेगा। इससे भारतीय सेना के महत्वपूर्ण हथियार प्लेटफॉर्म अधिक समय तक प्रभावी और संचालन योग्य बने रहेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा केवल उपकरणों के रखरखाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक सहयोग और भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों की गहराई को भी दर्शाता है। विश्लेषकों के अनुसार, भारत की सीमाओं पर बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच यह सौदा भारतीय सेना की परिचालन क्षमता को मजबूत करेगा। साथ ही यह दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच रक्षा सहयोग के लगातार विस्तार का संकेत भी है।

Continue Reading

देश

रूस से तेल-कोयले की सप्लाई के लिए भारत का नया दांव, चेन्नई-व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर बना नई लाइफलाइन

Published

on

नई दिल्ली, एजेंसी। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक शृंखलाओं पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे समय में भारत और रूस के बीच विकसित किया गया ईस्टर्न मैरीटाइम कॉरिडोर (EMC) भारत के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक व्यापार मार्ग के रूप में उभर रहा है। यह समुद्री मार्ग भारत के Chennai Port को रूस के सुदूर पूर्व में स्थित Vladivostok बंदरगाह से जोड़ता है और इसे आर्थिक तथा सामरिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत ने वर्ष 2024 में इस मार्ग को सक्रिय किया था, जब लाल सागर क्षेत्र में हमास-इजरायल संघर्ष के प्रभाव के चलते यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाया जा रहा था। अब अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान ने इस समुद्री गलियारे की उपयोगिता को और बढ़ा दिया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, EMC के जरिए रूस से भारत आने वाले जहाजों का ट्रांजिट समय लगभग 24 दिन रह जाता है, जबकि पारंपरिक Suez Canal मार्ग से यही यात्रा 40 दिनों से अधिक समय ले सकती है।इससे भारत को रूस से कच्चा तेल, कोकिंग कोल और अन्य महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों की तेज और अपेक्षाकृत कम लागत वाली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।भारत की इस्पात और ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में रूस से निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना रणनीतिक आवश्यकता बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो EMC भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत सरकार की Sagarmala Project के तहत बंदरगाह अवसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। इससे रूस से आने वाले कच्चे माल और ऊर्जा संसाधनों को भारतीय बंदरगाहों से देश के विभिन्न हिस्सों तक तेज़ी और कम लागत में पहुंचाना संभव होगा।

यह समुद्री गलियारा भारत की Act East Policy के अनुरूप भी माना जा रहा है। इसके माध्यम से भारत पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ अपनी आर्थिक और सामरिक भागीदारी मजबूत कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की भारत की व्यापक रणनीति का भी हिस्सा है। EMC भारत को उभरते हुए आर्कटिक क्षेत्र तक पहुंच बनाने में भी मदद कर सकता है। प्राकृतिक संसाधनों, दुर्लभ खनिजों और नई समुद्री व्यापारिक संभावनाओं के कारण आर्कटिक अब वैश्विक शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा का नया केंद्र बनता जा रहा है।रिपोर्ट के अनुसार, चीन पहले ही आर्कटिक मार्ग का उपयोग कर यूरोप तक तेज़ समुद्री परिवहन का प्रदर्शन कर चुका है। ऐसे में भारत के लिए भी इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677