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अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर 24 घंटे में 1200 बम गिराए:सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत, बेटी-दामाद, बहू-पोती भी मारी गईं, ईरान बोला- खतरनाक बदला लेंगे

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तेल अवीव/तेहरान,एजेंसी। इजराइल और अमेरिका ने पिछले 24 घंटे में ईरान पर 1,200 से ज्यादा बम गिराए हैं। इजराइली वायुसेना ने यह जानकारी दी है। इन हमलों में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है।

खामेनेई के ऑफिस कॉम्प्लेक्स पर शनिवार को 30 मिसाइलों से हमला हुआ था। हमले में उनकी बेटी-दामाद, बहू और पोती समेत कॉम्प्लेक्स में मौजूद 40 कमांडर्स भी मारे गए हैं। हमले के समय खामनेई कमांडर्स के साथ मीटिंग कर रहे थे।

इजराइल के प्रधानमंती नेतन्याहू ने शनिवार देर रात खामनेई के मारे जाने की बात कही थी। इसके कुछ देर बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी उनके मारे जाने का दावा किया था। रविवार सुबह ईरान की सरकारी मीडिया एजेंसी ‘तसनीम’ और ‘फार्स’ ने इसकी पुष्टि की।

इधर ईरानी सेना ने कहा कि वह सबसे खतरनाक अभियान की शुरुआत करने जा रही है। ईरान ने इजराइल समेत मिडिल-ईस्ट के कई देशों में हमले शुरू कर दिए हैं। इजराइल में एक हमले में 4 लोगों की मौत हो गई है।

ईरान में 200 की मौत, 740 घायल

इजराइल और अमेरिका ने ईरान की राजधानी तेहरान समेत 10 बड़े शहरों को निशाना बनाया। हमलों से अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 740 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 148 छात्राओं की मौत हो गई और 45 घायल हैं। ईरान ने भी देशों पर जवाबी हमले किए थे।

वहीं, खामनेई के मारे जाने पर ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिन की छुट्टी घोषित कर दी गई है। ईरानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा, ‘हमने एक महान नेता खो दिया है और पूरा देश शोक मना रहा है।’

इजराइली सेना IDF ने तेहरान में हमले का फुटेज जारी किया है। इसमें ईरान के रक्षा मुख्यालय समेत कई सरकारी इमारतों को निशाना बनाया गया था।

इजराइली सेना IDF ने तेहरान में हमले का फुटेज जारी किया है। इसमें ईरान के रक्षा मुख्यालय समेत कई सरकारी इमारतों को निशाना बनाया गया था।

इजराइल के तेल अवीव में मिसाइल के टकराने से जोरदार विस्फोट हुआ।

इजराइल के तेल अवीव में मिसाइल के टकराने से जोरदार विस्फोट हुआ।

तेल अवीव में ईरानी मिसाइल हमले के बाद क्षतिग्रस्त अपार्टमेंट से जान बचाकर बाहर भागते लोग।

तेल अवीव में ईरानी मिसाइल हमले के बाद क्षतिग्रस्त अपार्टमेंट से जान बचाकर बाहर भागते लोग।

ईरानी हमले में तेल अवीव में कई गाड़ियां जल कर राख हो गईं। हमले के बाद जलती हुई कार को बुझाता दमकलकर्मी।

ईरानी हमले में तेल अवीव में कई गाड़ियां जल कर राख हो गईं। हमले के बाद जलती हुई कार को बुझाता दमकलकर्मी।

ईरानी हमले के बाद इजराइल के एक इलाके में 4 फीट गहरा गड्ढा बन गया।

ईरानी हमले के बाद इजराइल के एक इलाके में 4 फीट गहरा गड्ढा बन गया।

ईरान की राजधानी तेहरान में सुप्रीम लीडर खामेनेई के घर के पास हमला हुआ।

ईरान की राजधानी तेहरान में सुप्रीम लीडर खामेनेई के घर के पास हमला हुआ।

ईरान में इजराइली हमले के बाद कई लोग मलबे में दब गए, जिन्हें बाद में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर निकाला गया।

ईरान में इजराइली हमले के बाद कई लोग मलबे में दब गए, जिन्हें बाद में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर निकाला गया।

अयातुल्ला अली खामेनेई के बारे में जानिए…

  • अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के धार्मिक शहर मशहद में एक मौलवी परिवार में हुआ था। वे खोमैनी शाह की नीतियों के खिलाफ थे और इस्लामी शासन की वकालत करते थे।
  • 1963 में शाह के खिलाफ भाषण देने पर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। धीरे-धीरे वे सरकार विरोधी आंदोलन का बड़ा चेहरा बन गए और खोमैनी के भरोसेमंद सहयोगी माने जाने लगे।
  • 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति हुई और शाह की सरकार गिर गई। खोमैनी देश लौटे और नई इस्लामी सरकार बनाई। खामेनेई को क्रांतिकारी परिषद में जगह मिली और बाद में उप रक्षामंत्री बनाया गया।
  • 1981 में तेहरान की एक मस्जिद में भाषण के दौरान खामेनेई पर बम हमला हुआ। उसी साल एक और बम धमाके में तत्कालीन राष्ट्रपति की मौत हो गई। इसके बाद हुए चुनाव में खामेनेई भारी बहुमत से जीतकर ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने।
  • 1989 में खोमैनी के निधन के बाद खामेनेई को देश का सर्वोच्च नेता यानी ‘रहबर’ बनाया गया। इसके लिए संविधान में बदलाव भी किया गया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक उन पर सख्त और कट्टर शासन चलाने का आरोप लगाते हैं।

खामेनेई की तस्वीरें…

1979 में ईरान की इस्लामिक क्रांति के एक प्रोटेस्ट में खामेनेई।

1979 में ईरान की इस्लामिक क्रांति के एक प्रोटेस्ट में खामेनेई।

1980 में तेहरान यूनिवर्सिटी के बाहर बैठे खामेनेई। वो अपनी सादगी के लिए जाने जाते थे।

1980 में तेहरान यूनिवर्सिटी के बाहर बैठे खामेनेई। वो अपनी सादगी के लिए जाने जाते थे।

1981 में हत्या की कोशिश के बाद घायल खामेनेई को दक्षिणी तेहरान के बहारलू हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था।

1981 में हत्या की कोशिश के बाद घायल खामेनेई को दक्षिणी तेहरान के बहारलू हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था।

ईरान का पलटवार- इजराइल समेत 9 देशों पर हमला

अमेरिका और इजराइल के हमले के जवाब में ईरान ने भी ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इन हमलों में इजराइल समेत मिडिल-ईस्ट के 9 देशों को निशाना बनाया गया।

ईरान ने इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागीं और कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब व UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया। इतना ही नहीं, ईरान ने UAE के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर दुबई पर भी हमला किया।

ईरान ने दुबई के पाम होटल एंड रिसोर्ट और बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन हमला किया। इसके अलावा बहरीन में कई रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया।

ईरान-इजराइल के बीच विवाद

  1. न्यूक्लियर प्रोग्राम: अमेरिका को शक है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर सकता है। इसी वजह से उसने कई बार उस पर पाबंदियां लगाईं। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ बिजली बनाने और वैज्ञानिक रिसर्च के लिए है, हथियार बनाने के लिए नहीं।
  2. बैलिस्टिक मिसाइल मुद्दा: परमाणु समझौते की बातचीत में ईरान का मिसाइल प्रोग्राम सबसे बड़ा अड़ंगा बना हुआ है। ईरान साफ कहता है कि उसकी बैलिस्टिक मिसाइलें उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी हैं और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा। वह इसे अपनी “रेड लाइन” मानता है।
  3. इजराइल को लेकर टकराव: अमेरिका, इजराइल का सबसे बड़ा समर्थक है। वहीं ईरान इजराइल का खुलकर विरोध करता है और उस पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाता है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ जाता है।
  4. मिडिल ईस्ट में दखल: अमेरिका का आरोप है कि ईरान इराक, सीरिया, लेबनान और यमन जैसे देशों में अपने समर्थक गुटों को मदद देकर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। ईरान कहता है कि वह अपने हितों और सहयोगियों की रक्षा कर रहा है।
  5. आर्थिक पाबंदियां: अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। इसके जवाब में ईरान भी कभी अपने परमाणु कार्यक्रम को तेज करने या सख्त बयान देने जैसे कदम उठाता है।
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आखिर 4 माह बाद होगी खामेनेई की अंतिम विदाई; जनाजे की भव्य तैयारी, जानें क्यों हुई संस्कार में देरी?

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तेहरान, एजेंसी। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के लगभग चार महीने बाद उनकी अंतिम यात्रा निकालने की तैयारी पूरी कर ली गई है। अधिकारियों के अनुसार, जून के तीसरे सप्ताह में होने वाले अंतिम संस्कार में करीब दो करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है, जो आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी अंतिम यात्राओं में से एक बन सकती है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, खामेनेई का पार्थिव शरीर तेहरान, क़ोम और मशहद में अंतिम दर्शन के लिए ले जाया जाएगा। तीन दिनों तक जनता को श्रद्धांजलि देने का अवसर दिया जाएगा, जिसके बाद उन्हें मशहद में दफनाया जाएगा।

इमाम रज़ा की दरगाह के पास होगी दफन
अधिकारियों ने बताया कि खामेनेई की अंतिम इच्छा थी कि उन्हें ईरान के पवित्र शहर मशहद में स्थित इमाम रज़ा की दरगाह के निकट दफनाया जाए। शिया मुस्लिम समुदाय के लिए यह दुनिया के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। इमाम रज़ा, जिन्हें अली अल-रिदा के नाम से भी जाना जाता है, ट्वेल्वर शिया परंपरा के आठवें इमाम थे। उनकी दरगाह हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है और ईरान की आध्यात्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, मुख्य शोक समारोह तेहरान में आयोजित होगा, जो लगभग 24 घंटे तक चल सकता है। इसके बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक नगर क़ोम ले जाया जाएगा और फिर मशहद में अंतिम संस्कार किया जाएगा। तेहरान नगर प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि अंतिम यात्रा पवित्र शहरों क़ोम और मशहद से होकर गुजरेगी, जहां लाखों लोग श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

क्यों हुई अंतिम संस्कार में  देरी?
इस्लामी परंपरा के अनुसार किसी व्यक्ति को मृत्यु के कुछ दिनों के भीतर दफनाया जाता है, लेकिन ईरानी अधिकारियों का कहना है कि युद्धकालीन परिस्थितियों, सुरक्षा चुनौतियों और अभूतपूर्व भीड़ की आशंका के कारण अंतिम संस्कार को स्थगित करना पड़ा। अधिकारियों के अनुसार, इतने बड़े आयोजन की तैयारियों और सुरक्षा प्रबंधों के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता थी।विश्लेषकों का मानना है कि यदि अनुमानित दो करोड़ लोग अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं तो यह 1989 में ईरान के इस्लामी गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी की अंतिम यात्रा का रिकॉर्ड तोड़ सकता है।खोमैनी के अंतिम संस्कार में लगभग एक करोड़ लोग शामिल हुए थे। उस दौरान भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई थी, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी और हजारों घायल हुए थे।

बेटे मोजतबा खामेनेई संभाल रहे हैं नेतृत्व
खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया था। हालांकि सत्ता संभालने के बाद से उन्होंने अपेक्षाकृत कम सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज कराई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि ईरान की राजनीतिक और वैचारिक एकजुटता का भी बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इमाम रज़ा की दरगाह के निकट दफनाए जाने से खामेनेई की विरासत को धार्मिक महत्व भी मिलेगा। समर्थकों के लिए यह कदम उन्हें शिया इतिहास और इमामों की परंपरा से जोड़ने वाला प्रतीक माना जा रहा है। आने वाले दिनों में पूरी दुनिया की नजर इस अंतिम यात्रा पर रहेगी, क्योंकि यह न केवल ईरान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय होगा, बल्कि मध्य पूर्व की राजनीति पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। 

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देश

अमेरिका में गूंजी भारत की आजादी गाथा, न्यूयॉर्क सीनेट में 15 अगस्त को लेकर ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित

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न्यूयॉर्क, एजेंसी। न्यूयॉर्क की सीनेट ने राज्य की गवर्नर कैथी होचुल से 15 अगस्त 2026 को राज्य में ‘भारत स्वतंत्रता दिवस’ घोषित करने का आग्रह करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें सांसदों ने महात्मा गांधी की विरासत को याद किया और अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान की सराहना की। सीनेटर जेरेमी कूनी द्वारा प्रायोजित इस प्रस्ताव में कहा गया है कि न्यूयॉर्क राज्य की विधायिका की परंपरा रही है कि वह उन महत्वपूर्ण दिनों को मान्यता देती है, जो राज्य के नागरिकों की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े होते हैं। प्रस्ताव में कहा गया कि ”भारत की स्वतंत्रता दुनिया भर के लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह नागरिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों के साथ-साथ आत्मनिर्णय के लिए चले 90 वर्षों के संघर्ष के अंत का प्रतीक है।”

प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कई राज्य सीनेटरों ने भारत की प्राचीन सभ्यता, लोकतांत्रिक परंपराओं, महात्मा गांधी के शांति संदेश और न्यूयॉर्क सहित पूरे अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बढ़ते योगदान की प्रशंसा की। कूनी ने कहा कि दुनिया भर में भारतीय अपने-अपने समुदायों पर स्थायी प्रभाव छोड़ रहे हैं और यह अवसर साझा इतिहास, संस्कृति और विरासत का जश्न मनाने तथा उस पर विचार करने का है। सीनेटर जॉन लियू ने कहा कि भारत का अस्तित्व हजारों वर्षों से है। उन्होंने कहा, ”भारत एक सभ्यता रहा है, एक राष्ट्र रहा है और वास्तव में हमारे देश से भी लंबे समय से लोकतंत्र का एक आदर्श मॉडल रहा है।”

सीनेटर टोबी ऐन स्टाविस्की ने दोनों देशों के बीच मित्रता की परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि दोनों देशों में समानताएं, मतभेदों से कहीं अधिक हैं। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सीनेट के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि ”यह भारत और अमेरिका के बीच मित्रता, लोकतंत्र और साझा मूल्यों के मजबूत संबंधों को दर्शाता है।” दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ”भारत की विरासत से लेकर न्यूयॉर्क के दिल तक : लोकतंत्र और समुदाय के रिश्तों का उत्सव।” भारतीय दूतावास ने प्रस्ताव आधिकारिक रूप से पेश करने के लिए जेरेमी कूनी का धन्यवाद किया और भारत की समृद्ध विरासत तथा न्यूयॉर्क में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के अमूल्य योगदान को सम्मान देने के लिए सभी विधायकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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दिल्ली मालवीय नगर होटल अग्निकांड की गूंज विदेशों तक, ग्लोबल मीडिया ने उठाए गंभीर सवाल, छिड़ गई नई बहस

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नई दिल्ली, एजेंसी। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत और दर्जनों लोगों के घायल होने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरी हैं। ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन, कतर और बांग्लादेश सहित कई देशों के प्रमुख मीडिया संस्थानों ने इस त्रासदी को प्रमुखता से कवर करते हुए भारत में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और भवन नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। हादसे में मृतकों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की होने के कारण यह घटना वैश्विक मीडिया का ध्यान आकर्षित कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए दो-दो लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है।

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अल जज़ीरा की रिपोर्ट
 कतर के समाचार चैनल अल जज़ीरा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि भारत में आग लगने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि मालवीय नगर स्थित भवन के निचले हिस्से में रेस्तरां और ऊपर होटल संचालित हो रहा था। अल जज़ीरा ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि आग लगने के बाद पूरा भवन धुएं से भर गया और लोग अंदर फंस गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई इमारतों में आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी के कारण ऐसी घटनाओं में भारी जनहानि होती है।

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BBC ने  लिखा
ब्रिटेन के BBC ने अपनी रिपोर्ट में  इलाज के लिए भारत आए विदेशी नागरिक भी बने हादसे का शिकार हैडलाइन दी और बताया कि मृतकों में कई विदेशी नागरिक शामिल हैं, जो भारत में चिकित्सा उपचार के लिए आए थे। BBC के अनुसार, यह भवन एक गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, जहां आसपास के निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीज और उनके परिजन ठहरते थे। रिपोर्ट में दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद के बयान का हवाला देते हुए कहा गया कि यह जांच की जा रही है कि भवन को गेस्ट हाउस के रूप में संचालित करने की वैध अनुमति थी या नहीं। BBC ने यह भी लिखा कि भारत में कई अग्निकांडों की जांच में खराब विद्युत व्यवस्था, सुरक्षा नियमों की अनदेखी और भवनों के गलत उपयोग जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं।

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स्पेन का एल पाइस
स्पेन के प्रमुख अखबार एल पाइस ने  सूचना मिलने में देरी और घनी आबादी को चुनौती बताया और लिखा कि दक्षिण दिल्ली के फ्लोरिश स्टे होटल में लगी आग की सूचना दमकल विभाग को देर से मिली। रिपोर्ट में कहा गया कि शुरुआती आशंका के अनुसार आग भवन के निचले हिस्से में चल रहे रेस्तरां से शुरू हुई हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एल पाइस ने दिल्ली की घनी आबादी, संकरी गलियों और पुराने भवनों में सुरक्षा मानकों की कमी को ऐसी घटनाओं के गंभीर होने का प्रमुख कारण बताया।

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जर्मनी का DW
जर्मन मीडिया संस्थान DW News ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भवन के बेसमेंट में रेस्तरां और ऊपर होटल संचालित हो रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक जांच में रेस्तरां से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आग के वास्तविक कारणों की जांच अभी जारी है।DW ने यह भी उल्लेख किया कि मृतकों में कुछ विदेशी नागरिक शामिल हैं, जो इलाज के लिए भारत आए थे।

ब्रिटिश टैब्लॉयड द सन
ब्रिटिश टैब्लॉयड द सन ने घटना के मानवीय पहलू को प्रमुखता से दिखाया। रिपोर्ट में कहा गया कि आग और धुएं के तेजी से फैलने के कारण ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों को जान बचाने के लिए खिड़कियों और बालकनियों से छलांग लगानी पड़ी। द सन ने स्थानीय लोगों की सराहना करते हुए लिखा कि उन्होंने सड़क पर गद्दे बिछाकर कई लोगों की जान बचाने में मदद की। रिपोर्ट में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का भी जिक्र किया गया, जिनमें इमारत से उठती लपटें और धुआं दिखाई दे रहा था।

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बांग्लादेश का डेली स्टार 
बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र डेली स्टार ने लिखा कि आग लगने के बाद कई घंटों तक बचाव अभियान चलाया गया और 40 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि मृतकों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जो इलाज या अन्य कार्यों के सिलसिले में दिल्ली आए हुए थे।विश्व मीडिया की अधिकांश रिपोर्टों में एक समान चिंता उभरकर सामने आई है ग्नि सुरक्षा मानकों का पालन, भवनों का उपयोग और आपातकालीन निकासी व्यवस्था।दिल्ली पुलिस ने होटल मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि भवन में अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

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