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छत्तीसगढ़

साहित्यकार को मंच से भगाया…GGU कुलपति को हटाने की मांग:सड़क पर उतरे लेखक, कथाकार, बोले- VC पर एक्शन हो, आंदोलन की चेतावनी

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बिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति के साहित्यकार के अपमान का मामला प्रदेश भर के साथ ही देश भर में तूल पकड़ने लगा है। इस घटना पर बिलासपुर के साहित्यकार, कथाकार और लेखकों ने भी विरोध जताया है।

उन्होंने सड़क पर उतरकर संस्कारधानी को बदनाम और शर्मसार करने वाले कुलपति को हटाने की मांग करते हुए आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

लेखक, साहित्यकार और लोगों ने कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर राष्ट्रीय कार्यक्रम में साहित्यकारों का अपमान करने का आरोप लगाकर कुलपति को तत्काल पद से हटाने की भी मांग की है।

राष्ट्रीय परिसंवाद कार्यक्रम में VC ने व्यक्तिगत जीवन की कहानी सुनाई, जिसके बाद यह विवाद हुआ।

राष्ट्रीय परिसंवाद कार्यक्रम में VC ने व्यक्तिगत जीवन की कहानी सुनाई, जिसके बाद यह विवाद हुआ।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में 7 जनवरी को ‘समकालीन हिंदी कहानी’ विषय पर एक राष्ट्रीय परिसंवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा सहित कई राज्यों के साहित्यकार और प्रोफेसर्स को बुलाया गया था।

कार्यक्रम में कुलपति प्रोफेसर आलोक चक्रवाल अपने जीवन के अनुभव और उपलब्धियों का जिक्र करने लगे। बातचीत के दौरान वो गुजराती और बनारसी भाषी सहित अपने व्यक्तिगत जीवन की कहानी बताने लगे। इस दौरान साहित्यकार असहज महसूस करने लगे।

इस दौरान कुलपति चक्रवाल ने कहा कि आप लोग पहली बार मुझे सुन रहे हैं, क्षमा करिएगा कुछ अतिरिक्त हो जाए तो। इसके बाद भी वो कहानी सुनाते रहे। इसी दौरान साहित्यकार मनोज रूपड़ा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि भाई साहब आप बोर तो नहीं हो रहे हैं। इस पर साहित्यकार ने कहा कि मुद्दे की बात हो तो बेहतर होगा।

मंच से कहा- इन्हें कुलपति से बात करने की तमीज नहीं, चलिए बाहर

इस दौरान कुलपति चक्रवाल ने साहित्यकार से सख्त लहजे में पूछा कि आपका नाम क्या है। इस पर साहित्यकार ने अपना नाम मनोज रूपड़ा बताया। इसके बाद कहने लगे कि मैं सीधे मुद्दे की बात पर आता हूं। कुलपति ने भड़कते हुए कहा कि बहुत बड़े कहानीकार- विद्यावान बन रहे हो, लेकिन इन्हें तमीज नहीं कि कुलपति से कैसे बात करते हैं।

कुलपति ने उन्हें सभा से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस पर मनोज रूपड़ा उठकर चले गए। इस दौरान कुलपति के इस रवैए को देखकर सभा में मौजूद साहित्यकार और प्रोफेसर विरोध करने लगे। तब उन्हें भी कुलपति ने कह दिया कि उन्हें अच्छा नहीं लग रहा है तो बाहर चले जाएं।

विश्वविद्यालय से VC के कहने पर उठकर चले गए अतिथि।

विश्वविद्यालय से VC के कहने पर उठकर चले गए अतिथि।

वाइसचांसलर को पद से हटाने की मांग

इस आयोजन में शामिल साहित्यकार और कथाकारों का कहना है कि खुद कुलपति आलोक चक्रवाल ने कथाकार मनोज रुपड़ा से सवाल किया कि आप बोर नहीं हो रहें हैं, जिस पर उन्होंने सहजता से जवाब दिया और उन्हें विषय पर बात करने का सुझाव दिया।

आगे उन्होंने कहा कि ‘लेकिन, इसके बाद कुलपति का रवैया बदल गया और वो टॉपिक पर आने की बात कहते हुए अमर्यादित भाषा का उपयोग किया। एक अतिथि के साथ उन्हें इस तरह का बर्ताव नहीं करना चाहिए था। जिन्हें अपने पद की गरिमा ख्याल नहीं है। उन्हें पद पर रहने का अधिकार नहीं है।’

राज्यपाल-राष्ट्रपति वीडियो देखकर ले संज्ञान

साहित्यकारों का आरोप है कि इस कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति ने मंच से ही अतिथि कथा लेखक के साथ असंसदीय और अपमानजनक व्यवहार किया। इस घटना से साहित्य जगत में गहरी नाराजगी है।

इस घटना के विरोध में लेखकों, संस्कृतिकर्मियों और जनसंस्कृति मंच के सदस्यों ने एकजुट होकर राज्यपाल और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में कहा गया है कि कुलपति का यह व्यवहार न केवल लेखक का अपमान है, बल्कि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान की गरिमा के भी खिलाफ है।

राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय को किया बदनाम

कलेक्ट्रेट पहुंचे साहित्यकारों और लोगों ने कहा कि जहां विश्वविद्यालयों में विचारों की स्वतंत्रता और स्वस्थ होनी चाहिए, वहां इस तरह का तानाशाही और अभद्र आचरण बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। साहित्यकारों का आरोप है कि इस घटना से विश्वविद्यालय की छवि राष्ट्रीय स्तर पर धूमिल हुई है।

साहित्य प्रेमियों ने मांग की है कि शासन और जिला प्रशासन पूरे मामले में हस्तक्षेप करें और राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजकर कुलपति के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

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छत्तीसगढ़

रायपुर में धान में पानी डालने का मामला:ग्रामीणों ने किया हंगामा, आरंग के धान खरीदी केंद्र मामले में कलेक्टर ने लिया संज्ञान, जांच कमेटी गठित

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रायपुर,एजेंसी। रायपुर के आरंग विकासखंड के भलेरा सहकारी समिति के धान खरीदी केंद्र में धान के स्टैक में पानी डालने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया है, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने तत्काल संज्ञान लिया और पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। कलेक्टर के निर्देश पर मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। इस टीम को तुरंत मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की वस्तुस्थिति की जांच करने और तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा है कि धान खरीदी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा है कि धान खरीदी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सहायक आयुक्त के नेतृत्व में जांच

प्राप्त जानकारी के अनुसार सहायक आयुक्त विनय शुक्ला के नेतृत्व में सहकारिता विस्तार अधिकारी सुमित डडसेना और सहकारिता निरीक्षक अशोक साहू की टीम घटनास्थल पर पहुंचकर जांच कर रही है। टीम द्वारा खरीदी केंद्र में रखे धान के स्टैक, भंडारण व्यवस्था और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया है

वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया है

ग्रामीणों से भी ली जाएगी जानकारी

जांच दल द्वारा स्थानीय ग्रामीणों और किसानों से भी जानकारी ली जा रही है, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके और जांच रिपोर्ट तथ्यों के आधार पर तैयार की जा सके।

टीम को तुरंत मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की वस्तुस्थिति की जांच करने और तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

टीम को तुरंत मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की वस्तुस्थिति की जांच करने और तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

अनियमितता मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई

कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा है कि धान खरीदी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि जांच में किसी कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उनके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

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छत्तीसगढ़

रतनपुर को मिला प्रदेश का पहला डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट:₹13.12 करोड़ की केंद्रीय सहायता से होगा निर्माण, तोखन साहू की पहल

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बिलासपुर,एजेंसी। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत रतनपुर को प्रदेश का पहला डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट (DHP) स्वीकृत किया गया है। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 13.12 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की है।

छत्तीसगढ़ का पहला डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री और बिलासपुर सांसद तोखन साहू के निरंतर प्रयासों और पहल से रतनपुर को यह महत्वपूर्ण परियोजना मिली है।यह परियोजना नई दिल्ली में आयोजित सेंट्रल सैंक्शनिंग एंड मॉनिटरिंग कमेटी (CSMC) की बैठक में टेक्नोलॉजी एंड इनोवेटिव सब-मिशन (TISM) के अंतर्गत मंजूर की गई।

यह छत्तीसगढ़ का पहला डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट होगा,जो रतनपुर में आधुनिक और उन्नत निर्माण तकनीकों का उपयोग कर आवास निर्माण का एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करेगा।

बिलासपुर सांसद तोखन साहू के प्रयासों से रतनपुर को यह महत्वपूर्ण परियोजना मिली

बिलासपुर सांसद तोखन साहू के प्रयासों से रतनपुर को यह महत्वपूर्ण परियोजना मिली

परियोजना सामाजिक कल्याण गतिविधियों के लिए रेंटल मॉडल पर होगी संचालित

स्वीकृत परियोजना के तहत G+2 मॉडल पर एक आधुनिक आवासीय परिसर विकसित किया जाएगा। प्रत्येक इकाई का कार्पेट एरिया 28.57 वर्गमीटर और प्लिंथ एरिया 42.79 वर्गमीटर निर्धारित किया गया है। यह परियोजना सामाजिक कल्याण गतिविधियों के लिए रेंटल मॉडल पर संचालित होगी।

इस परियोजना में डाइनिंग रूम, किचन, टॉयलेट सहित कार्यालय कक्ष, गतिविधि कक्ष, टॉयलेट सहित मेडिकल रूम, टॉयलेट सहित केयरटेकर कक्ष और लॉन्ड्री रूम जैसी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक सामुदायिक भवन का भी निर्माण किया जाएगा।

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छत्तीसगढ़

टीचर्स एसोसिएशन ने DPI को दिया विभागीय TET का प्रपोजल:आयु सीमा में छूट और अनुभव को वेटेज देने की मांग, परीक्षा ऑफलाइन लेने का सुझाव

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रायपुर,एजेंसी। टीईटी को लेकर चल रही अनिश्चितता के बीच छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग से विभागीय सीमित टीईटी परीक्षा कराने की मांग उठाई है। इस मुद्दे को लेकर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने लोक शिक्षण संचालनालय में अधिकारियों से मुलाकात कर शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा पर चर्चा की।

बैठक में अधिकारियों ने टीईटी देने वाले सहायक शिक्षकों की संख्या, बिना टीईटी वाले शिक्षकों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव और न्यायालय व शासन से जुड़े पहलुओं पर जानकारी ली। साथ ही एसोसिएशन से विभागीय टीईटी परीक्षा को लेकर विस्तृत सुझाव देने को कहा।

प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने डीपीआई ऋतुराज रघुवंशीऔर उप संचालक ए.एन. बंजारा से कहा कि प्रदेश में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा और पदोन्नति के अवसर बनाए रखने के लिए “विभागीय सीमित शिक्षक पात्रता परीक्षा” आयोजित करना जरूरी है।

एसोसिएशन ने इस संबंध में शिक्षा सचिव और संचालक को प्रस्ताव भेजकर विभागीय टीईटी कराने की मांग भी की है।

पुनर्विचार याचिका खारिज होने पर बढ़ सकती है परेशानी

एसोसिएशन ने कहा कि यदि न्यायालय में दायर पुनर्विचार याचिका खारिज हो जाती है तो टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए निर्धारित दो वर्ष की समय-सीमा समाप्त होने का खतरा रहेगा। ऐसी स्थिति में कई शिक्षक सेवा-सुरक्षा और पदोन्नति के लाभ से वंचित हो सकते हैं।

एसोसिएशन ने यह भी आशंका जताई कि क्रमोन्नति प्रकरण की तरह फिर से शिक्षकों को न्यायालयीन प्रक्रिया के नाम पर भटकाया जा सकता है। इसलिए विभागीय सीमित टीईटी परीक्षा शिक्षकों के हित में सकारात्मक कदम होगा। एसोसिएशन ने विभाग आठ बिन्दुओं में एक प्रस्ताव दिया हैं। इसके अलाव एग्जाम पैटर्न पर भी सुझाव दिया है।

प्रपोजल के प्वाइंटस

  • कार्यरत शिक्षकों के लिए पृथक विभागीय सीमित शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की जाए।
  • परीक्षा का पाठ्यक्रम व्यावहारिक और सेवा-अनुभव आधारित हो।
  • न्यूनतम उत्तीर्णांक युक्तिसंगत रखा जाए ताकि अनुभवी शिक्षक अपात्र न हों।
  • परीक्षा में आयु सीमा में छूट और सेवा अनुभव को वेटेज दिया जाए।
  • परीक्षा को पदोन्नति और सेवा नियमितीकरण से जोड़ा जाए।
  • परीक्षा प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और विभागीय स्तर पर ही संचालित हो।
  • परीक्षा प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक दोनों स्तरों के लिए आयोजित की जाए।
  • परीक्षा के लिए सुझाए गए प्रावधान

एग्जाप पैटर्न पर सुझाव

सेवाकालीन परीक्षा होने के कारण न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 प्रतिशत रखा जाए।

पेपर-1 और पेपर-2 आयोजित किए जाएं।

प्रश्न कक्षा 1–5 और 6–8 के पाठ्यक्रम व सामान्य शैक्षणिक अवधारणाओं पर आधारित हों।

दोनों परीक्षाओं के बीच कम से कम 15 दिन का अंतर रखा जाए।

परीक्षा ऑफलाइन (OMR आधारित) हो।

कुल 100 बहुविकल्पीय प्रश्न हों और परीक्षा अवधि 3 घंटे की हो।

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