छत्तीसगढ़
साहित्यकार को मंच से भगाया…GGU कुलपति को हटाने की मांग:सड़क पर उतरे लेखक, कथाकार, बोले- VC पर एक्शन हो, आंदोलन की चेतावनी
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3 days agoon
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Divya Akashबिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति के साहित्यकार के अपमान का मामला प्रदेश भर के साथ ही देश भर में तूल पकड़ने लगा है। इस घटना पर बिलासपुर के साहित्यकार, कथाकार और लेखकों ने भी विरोध जताया है।
उन्होंने सड़क पर उतरकर संस्कारधानी को बदनाम और शर्मसार करने वाले कुलपति को हटाने की मांग करते हुए आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
लेखक, साहित्यकार और लोगों ने कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर राष्ट्रीय कार्यक्रम में साहित्यकारों का अपमान करने का आरोप लगाकर कुलपति को तत्काल पद से हटाने की भी मांग की है।

राष्ट्रीय परिसंवाद कार्यक्रम में VC ने व्यक्तिगत जीवन की कहानी सुनाई, जिसके बाद यह विवाद हुआ।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में 7 जनवरी को ‘समकालीन हिंदी कहानी’ विषय पर एक राष्ट्रीय परिसंवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा सहित कई राज्यों के साहित्यकार और प्रोफेसर्स को बुलाया गया था।
कार्यक्रम में कुलपति प्रोफेसर आलोक चक्रवाल अपने जीवन के अनुभव और उपलब्धियों का जिक्र करने लगे। बातचीत के दौरान वो गुजराती और बनारसी भाषी सहित अपने व्यक्तिगत जीवन की कहानी बताने लगे। इस दौरान साहित्यकार असहज महसूस करने लगे।
इस दौरान कुलपति चक्रवाल ने कहा कि आप लोग पहली बार मुझे सुन रहे हैं, क्षमा करिएगा कुछ अतिरिक्त हो जाए तो। इसके बाद भी वो कहानी सुनाते रहे। इसी दौरान साहित्यकार मनोज रूपड़ा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि भाई साहब आप बोर तो नहीं हो रहे हैं। इस पर साहित्यकार ने कहा कि मुद्दे की बात हो तो बेहतर होगा।
मंच से कहा- इन्हें कुलपति से बात करने की तमीज नहीं, चलिए बाहर
इस दौरान कुलपति चक्रवाल ने साहित्यकार से सख्त लहजे में पूछा कि आपका नाम क्या है। इस पर साहित्यकार ने अपना नाम मनोज रूपड़ा बताया। इसके बाद कहने लगे कि मैं सीधे मुद्दे की बात पर आता हूं। कुलपति ने भड़कते हुए कहा कि बहुत बड़े कहानीकार- विद्यावान बन रहे हो, लेकिन इन्हें तमीज नहीं कि कुलपति से कैसे बात करते हैं।
कुलपति ने उन्हें सभा से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस पर मनोज रूपड़ा उठकर चले गए। इस दौरान कुलपति के इस रवैए को देखकर सभा में मौजूद साहित्यकार और प्रोफेसर विरोध करने लगे। तब उन्हें भी कुलपति ने कह दिया कि उन्हें अच्छा नहीं लग रहा है तो बाहर चले जाएं।

विश्वविद्यालय से VC के कहने पर उठकर चले गए अतिथि।
वाइसचांसलर को पद से हटाने की मांग
इस आयोजन में शामिल साहित्यकार और कथाकारों का कहना है कि खुद कुलपति आलोक चक्रवाल ने कथाकार मनोज रुपड़ा से सवाल किया कि आप बोर नहीं हो रहें हैं, जिस पर उन्होंने सहजता से जवाब दिया और उन्हें विषय पर बात करने का सुझाव दिया।
आगे उन्होंने कहा कि ‘लेकिन, इसके बाद कुलपति का रवैया बदल गया और वो टॉपिक पर आने की बात कहते हुए अमर्यादित भाषा का उपयोग किया। एक अतिथि के साथ उन्हें इस तरह का बर्ताव नहीं करना चाहिए था। जिन्हें अपने पद की गरिमा ख्याल नहीं है। उन्हें पद पर रहने का अधिकार नहीं है।’
राज्यपाल-राष्ट्रपति वीडियो देखकर ले संज्ञान
साहित्यकारों का आरोप है कि इस कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति ने मंच से ही अतिथि कथा लेखक के साथ असंसदीय और अपमानजनक व्यवहार किया। इस घटना से साहित्य जगत में गहरी नाराजगी है।
इस घटना के विरोध में लेखकों, संस्कृतिकर्मियों और जनसंस्कृति मंच के सदस्यों ने एकजुट होकर राज्यपाल और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में कहा गया है कि कुलपति का यह व्यवहार न केवल लेखक का अपमान है, बल्कि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान की गरिमा के भी खिलाफ है।
राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय को किया बदनाम
कलेक्ट्रेट पहुंचे साहित्यकारों और लोगों ने कहा कि जहां विश्वविद्यालयों में विचारों की स्वतंत्रता और स्वस्थ होनी चाहिए, वहां इस तरह का तानाशाही और अभद्र आचरण बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। साहित्यकारों का आरोप है कि इस घटना से विश्वविद्यालय की छवि राष्ट्रीय स्तर पर धूमिल हुई है।
साहित्य प्रेमियों ने मांग की है कि शासन और जिला प्रशासन पूरे मामले में हस्तक्षेप करें और राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजकर कुलपति के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
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कोरबा
सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य आयोजन
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11 hours agoon
January 16, 2026By
Divya Akash220 मातृशक्तियों की सहभागिता, नन्हे भैया-बहनों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया पारिवारिक संस्कारों का संदेश
कोरबा। सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी, कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य, सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्राचार्य राजकुमार देवांगन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में दीपक सोनी (कोरबा विभाग समन्वयक) एवं संजय कुमार देवांगन (प्रधानाचार्य, पूर्व माध्यमिक) उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत विद्यालय परिवार द्वारा पारंपरिक रीति से किया गया।

अपने संबोधन में अतिथियों ने मातृशक्ति की भूमिका को बाल संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में माता का योगदान सबसे निर्णायक होता है। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे भैया-बहनों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बच्चों ने आकर्षक नृत्य, गीत एवं लघु प्रस्तुतियों के माध्यम से पारिवारिक वातावरण, नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं संस्कारों का संदेश दिया। बच्चों की सहज एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित माताओं एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में कुल 220 मातृशक्तियों की गरिमामयी सहभागिता रही, जिससे मातृसंगोष्ठी अत्यंत सफल रही। माताओं ने विद्यालय की शिक्षण पद्धति, संस्कार आधारित शिक्षा एवं गतिविधियों की सराहना की। शिशु नगरी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय की 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं एवं सहयोगी संस्थाओं की जीवंत प्रदर्शनी लगाई गई। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास, कौशल निर्माण, संस्कार शिक्षा एवं व्यवहारिक ज्ञान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। अभिभावक बंधुओं के सहयोग से आनंद मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्राथमिक विभाग के भैया-बहनों ने विभिन्न खेलों, गतिविधियों एवं मनोरंजन कार्यक्रमों में भाग लेकर भरपूर आनंद उठाया। आनंद मेला बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रधानाचार्य पंकज तिवारी ने सभी अतिथियों, मातृशक्तियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यालय एवं परिवार के बीच सहयोग और विश्वास और अधिक मजबूत होता है। उप-प्रधानाचार्य श्रीमती सीमा त्रिपाठी सहित समस्त आचार्य परिवार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कोरबा
बॉयोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर संजय सुमन ने कमाए साल में 3.20 लाख
Published
12 hours agoon
January 16, 2026By
Divya Akashकोरबा। विकासखंड करतला के ग्राम बड़मार निवासी संजय सुमन ने मछली पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत नवीन बॉयोफ्लॉक तकनीक अपनाकर उन्होंने कम भूमि में अधिक उत्पादन कर उल्लेखनीय आय अर्जित की है।
संजय सुमन ने अपनी 25 डिसमिल भूमि पर बॉयोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया। इस तकनीक में तालाब में लाइनर बिछाकर पानी भरा जाता है और तेजी से बढ़ने वाली उन्नत प्रजाति की मछलियों का पालन किया जाता है। इसकी विशेषता है कि वर्ष में दो बार उत्पादन लेकर अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।
सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत उन्हें 8.40 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। पिछले वर्ष संजय सुमन ने बॉयोफ्लॉक तालाब से 6 मैट्रिक टन मछली उत्पादन किया, जिसे बेचकर 07 लाख 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। उत्पादन लागत निकालने के बाद उन्हें 03 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
सफलता से उत्साहित संजय सुमन इस वर्ष अपने कार्य का विस्तार कर उत्पादन एवं आय को दुगुना करने की योजना बना रहे हैं। बॉयोफ्लॉक तकनीक की खासियत यह है कि कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव होता है, जिससे किसानों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
संजय सुमन की यह कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।
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सुशासन सरकार की नीतियों से किसान हुआ आत्मनिर्भर और निश्चिंत
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January 16, 2026By
Divya Akashसुगम व्यवस्था और सर्वाधिक समर्थन मूल्य, किसानों की आर्थिक ढाल
कोरबा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की सुशासन आधारित नीतियों का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेश के खेतों तक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। शासन की पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था और सर्वाधिक समर्थन मूल्य से छोटे एवं बड़े सभी किसानों को समान रूप से उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे किसानों का जीवन स्तर सुदृढ़ हो रहा है।
कोरबा जिले के ग्राम कल्दामार निवासी कृषक अरुण कुमार इसकी मिसाल हैं, उन्होंने उपार्जन केंद्र भैंसमा में इस वर्ष 190 क्विंटल धान का विक्रय बिना किसी असुविधा के किया। गत वर्ष भी उन्होंने लगभग 350 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया था। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती टिकैतिन बाई के नाम से टोकन कटवा कर धान विक्रय की प्रक्रिया पूर्ण की।
कृषक कुमार का कहना है कि शासन की पहल से उपार्जन केंद्रों में सभी आवश्यक सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध हैं। उच्च समर्थन मूल्य मिलने से अब किसानों को अगली फसल के लिए आर्थिक चिंता नहीं रहती और उन्हें उधार लेने की मजबूरी से भी मुक्ति मिली है। खेत से लेकर धान विक्रय तक की पूरी प्रक्रिया आज किसानों के लिए सहज, सुरक्षित और तनावमुक्त हो गई है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाया है और वे अब समृद्धि की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। किसानों के हित में संचालित योजनाओं और प्रभावी नीतियों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार एवं मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

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