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पाकिस्तानी रक्षा मंत्री बोले- अमेरिका ने हमारा इस्तेमाल किया:मतलब निकलने पर टॉयलेट पेपर की तरह फेंका, साथ देने की कीमत आज भी चुका रहे

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इस्लामाबाद,एजेंसी। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बुधवार को संसद में कहा कि अमेरिका ने अपने फायदे के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया और काम निकलने के बाद उसे टॉयलेट पेपर की तरह फेंक दिया। पाकिस्तान रक्षा मंत्री ने कहा,

हमने अफगानिस्तान में दो जंग लड़ीं। इसमें इस्लाम और मजहब के नाम पर हिस्सा लिया, लेकिन असल में दो सैन्य तानाशाहों (जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ) ने वैश्विक ताकत का समर्थन पाने के लिए ऐसा किया।

उन्होंने 1979 में सोवियत संघ के हस्तक्षेप का जिक्र करते हुए कहा कि यह कदम अफगान सरकार के न्योते पर उठाया गया था, लेकिन अमेरिका ने इसे सीधा हमला बताकर अपनी तरह से नरेटिव तैयार किया।

आसिफ ने पाकिस्तान की अमेरिका के साथ 1999 के बाद हुई नई रणनीतिक साझेदारी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद अमेरिका के साथ खड़े होने की कीमत पाकिस्तान आज भी चुका रहा है।

आसिफ बोले- पाकिस्तान ने इतिहास से सबक नहीं सीखा

आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान ने इतिहास से सबक नहीं सीखा और अपने छोटे फायदे के लिए कभी अमेरिका, कभी रूस और कभी ब्रिटेन की ओर झुकता रहा। उन्होंने कहा कि अब इन देशों का यहां पहले से ज्यादा प्रभाव है, जो 30-40 साल पहले नहीं था।

उन्होंने यह भी माना कि पाकिस्तान का आतंकी इतिहास रहा है। आसिफ ने कहा कि अफगानिस्तान की दो जंगों में शामिल होना पाकिस्तान की बड़ी भूल थी और आज देश में जो आतंकवाद है, वह उन्हीं गलतियों का नतीजा है।

आसिफ बोले- जंग को सही ठहराने के लिए एजुकेशन सिस्टम में बदलाव किए

आसिफ ने कहा कि हम अपने इतिहास और गलतियों को स्वीकार नहीं करते। आज का आतंकवाद उन्हीं डिक्टेटरों की गलतियों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।

ख्वाजा आसिफ ने यह भी दावा किया कि इन जंगो को सही ठहराने के लिए पाकिस्तान की एजुकेशन सिस्टम में जानबूझकर बदलाव किए गए। उनके मुताबिक, यह बदलाव आज भी सिस्टम में मौजूद हैं।

आसिफ ने बिल क्लिंटन के दौरे का जिक्र किया

उन्होंने साल 2000 में अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की इस्लामाबाद की कुछ घंटों की यात्रा का जिक्र किया। क्लिंटन भारत दौरे के बाद थोड़े समय के लिए पाकिस्तान आए थे।

आसिफ ने कहा कि इससे साफ दिखता है कि दोनों देशों का रिश्ता सिर्फ मतलब तक सीमित हो गया था। उस समय अमेरिका ने सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ पर लोकतंत्र, परमाणु प्रसार और आतंकवाद को लेकर दबाव डाला था।

2000 में पाकिस्तान का प्रधानमंत्री कोई नहीं था, क्योंकि उस समय देश में सैन्य शासन चल रहा था। नवंबर 1997 से अक्टूबर 1999 तक नवाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे।

12 अक्टूबर 1999 को जनरल परवेज मुशर्रफ ने तख्तापलट करके नवाज शरीफ की सरकार को हटा दिया और खुद चीफ एक्जीक्यूटिव बन गए। 1999 के बाद से 2002 तक पाकिस्तान में कोई निर्वाचित प्रधानमंत्री नहीं था।

मुशर्रफ ने सत्ता संभाली और 2002 में चुनाव करवाए, जिसके बाद जफरुल्लाह खान जमाली प्रधानमंत्री बने।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ बिल क्लिंटन। तस्वीर- 4 जुलाई, 1999 की है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ बिल क्लिंटन। तस्वीर- 4 जुलाई, 1999 की है।

शिया मस्जिद पर हमले की निंदा की

यह बयान उस समय आया जब संसद ने इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में हुए हमले के खिलाफ निंदा का प्रस्ताव पास किया। 6 फरवरी को नमाज के दौरान हुए इस आत्मघाती हमले में 31 लोगों की मौत हो गई और 169 लोग घायल हुए। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट समूह ने ली है।

आसिफ ने राजनीतिक एकता की अपील की और कहा कि आतंकवाद की निंदा जैसे मुद्दे पर भी एकजुटता नहीं दिख रही। उन्होंने कहा कि देश की एक ऐसी पहचान होनी चाहिए जिस पर कोई मतभेद न हो और उन लोगों की आलोचना की जो राजनीतिक कारणों से पीड़ितों के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए।

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 6 फरवरी को जुमे की नमाज के दौरान शिया मस्जिद में आत्मघाती हमला हुआ था।

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 6 फरवरी को जुमे की नमाज के दौरान शिया मस्जिद में आत्मघाती हमला हुआ था।

अमेरिकी विदेश मंत्री बोले थे- भारत की कीमत पर पाकिस्तान से दोस्ती नहीं

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में को कहा था कि अमेरिका, पाकिस्तान के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करना चाहता है, लेकिन भारत की कीमत पर नहीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रुबियो ने बताया था कि अमेरिका और पाकिस्तान पहले से ही आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करते रहे हैं, लेकिन इससे भारत के साथ उसकी अच्छी दोस्ती को कोई नुकसान नहीं होगा।

जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत ने अमेरिका-पाकिस्तान की नजदीकी पर चिंता जताई, तो रुबियो ने कहा कि भारतीय डिप्लोमेसी में समझदारी है। वे जानते हैं कि हमें कई देशों से रिश्ते रखने पड़ते हैं। उनके भी कुछ देशों से रिश्ते हैं। यह समझदारी भरी विदेश नीति का हिस्सा है।

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विदेश

अमेरिका NATO से अलग हो सकता है:ट्रम्प बोले- इसने जरूरत के वक्त मदद नहीं की, ये कागजी शेर, पुतिन भी यही मानते हैं

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तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वे NATO से बाहर निकलने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उन्होंने NATO को कागजी शेर बताया।

एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि वे पहले से ही NATO से ज्यादा प्रभावित नहीं थे और उन्हें लगता है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी यही मानते हैं।

ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका हमेशा अपने साथियों के लिए खड़ा रहा है, लेकिन इस बार कोई भी अमेरिका के साथ नहीं आया। उन्होंने यूक्रेन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अमेरिका ने मदद की थी, लेकिन अब वही समर्थन अमेरिका को नहीं मिल रहा।

यह बयान तब आया है जब NATO देशों ने ईरान जंग में अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया। अमेरिका चाहता था कि NATO देश होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने के लिए अपने वॉरशिप भेजें, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

जंग से मिडिल ईस्ट को 18 लाख करोड़ का नुकसान

यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) ने कहा है कि मध्य पूर्व में चल रहा युद्ध पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक यह संघर्ष अब सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा संकट बन गया है।

  • रीजन की GDP 3.7% से 6% तक घट सकती है
  • करीब 18 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है
  • होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही 70% से ज्यादा घट गई
  • तेल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल हो गई है
  • 16 लाख से लेकर 36 लाख नौकरियों पर संकट

ईरान जंग से जुड़ी तस्वीरें…

अमेरिका ने सोमवार को ईरान के इस्फहान में हवाई हमले किए।

अमेरिका ने सोमवार को ईरान के इस्फहान में हवाई हमले किए।

लेबनान की राजधानी बेरुत में मंगलवार को इजराइली एयरस्ट्राइक में एक इमारत पूरी तरह तबाह हो गई।

लेबनान की राजधानी बेरुत में मंगलवार को इजराइली एयरस्ट्राइक में एक इमारत पूरी तरह तबाह हो गई।

बेरुत के दक्षिणी इलाके में मंगलवार को इजराइल के हवाई हमले के बाद उठता धुआं।

बेरुत के दक्षिणी इलाके में मंगलवार को इजराइल के हवाई हमले के बाद उठता धुआं।

होर्मुज संकट पर ब्रिटेन की मेजबानी में 35 देशों की इमरजेंसी बैठक

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि इस सप्ताह उनका देश 35 देशों की एक अहम बैठक की मेजबानी करेगा। इस बैठक का मकसद होर्मुज को फिर से खोलने पर चर्चा करना है।

इस बैठक में दुनिया के कई बड़े देश शामिल होंगे और इसका मकसद इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते की सुरक्षा और भविष्य को लेकर समाधान निकालना है।

कतर जैसे देश ने भी इस मुद्दे पर चर्चा में दिलचस्पी दिखाई है। भारत की इस बैठक में भागीदारी अभी तय नहीं हुई है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि भारत इसमें शामिल हो सकता है।

इसकी वजह यह है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर काफी निर्भर है और यहां बड़ी संख्या में भारतीय भी रहते हैं।

इजराइल बोला- यह आखिरी युद्ध नहीं, देश को सर्तक रहना होगा

इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा है कि यह जरूरी नहीं है कि यह इजराइल का आखिरी युद्ध हो।

उन्होंने कहा कि दुश्मन अभी भी हमला कर सकते हैं, इसलिए भविष्य में भी खतरा बना रहेगा और देश को सतर्क रहना होगा।

इजराइल का दावा- हिजबुल्लाह का बड़ा कमांडर मारा गया

इजराइल की सेना ने दावा किया है कि उसने उग्रवादी संगठन के एक बड़े कमांडर यूसुफ इस्माइल हाशेम को मार दिया है।

यह हमला बेरूत में हुआ था, हालांकि हिजबुल्लाह की तरफ से अभी तक इस पर कोई बयान नहीं आया है।

ईरान की चेतावनी- होर्मुज खुला रहेगा, लेकिन अमेरिका के लिए नहीं

ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा, लेकिन अमेरिका के लिए नहीं। अब 47 साल की मेहमाननवाजी खत्म हो चुकी है।

अजीजी ने कहा कि यह रास्ता सिर्फ उन देशों के लिए खुला रहेगा, जो ईरान के बनाए नए नियमों का पालन करेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ट्रम्प ने “रेजीम चेंज” का सपना पूरा कर लिया है, लेकिन यह जमीन पर नहीं बल्कि समुद्र के नियमों में हुआ है।

ईरान ने 65 लोगों को किया गिरफ्तार, जासूसी का आरोप

ईरान की सुरक्षा एजेंसी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि उसने 65 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों पर आरोप है कि वे दुश्मन देशों के लिए काम कर रहे थे या आतंकवादी संगठनों से जुड़े थे।

ईरान का कहना है कि हाल के महीनों में उसने कई लोगों को पकड़ा है, जो अमेरिका-इजराइल को जानकारी दे रहे थे और देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचा रहे थे।

ट्रम्प बोले- ईरान से डील की जरूरत नहीं, उनका एटमी प्रोग्राम डैमेज

डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए किसी समझौते (डील) की जरूरत नहीं है। अमेरिका यह युद्ध 2 से 3 हफ्तों में खत्म कर सकता है।

उन्होंने कहा- ईरान को कोई डील करने की जरूरत नहीं है। जब हमें लगेगा कि वे इतने कमजोर हो गए हैं कि कई सालों तक परमाणु हथियार नहीं बना सकते, तब हम वहां से निकल जाएंगे। डील हो या न हो, अब यह जरूरी नहीं है।

ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान के पास जो यूरेनियम बचा है, उससे उन्हें कोई चिंता नहीं है, क्योंकि वह जमीन के अंदर है और आसानी से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अमेरिका पहले ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफी नुकसान पहुंचा चुका है।

ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका जल्द ही ईरान से बाहर निकल जाएगा और इसके बाद तेल की कीमतें भी कम हो सकती हैं। इस युद्ध की वजह से थोड़ी परेशानी जरूर हो रही है, लेकिन इससे अमेरिका ज्यादा सुरक्षित हुआ है क्योंकि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं है।

होर्मुज स्ट्रेट के बारे में उन्होंने कहा कि अब इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका नहीं लेगा। जो देश इस रास्ते से तेल ले जाते हैं, उन्हें खुद अपनी सुरक्षा करनी होगी।

ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के कई बड़े नेताओं को खत्म कर दिया है और वहां की स्थिति बदल दी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनका मकसद सरकार बदलना नहीं था, बल्कि सिर्फ यह सुनिश्चित करना था कि ईरान परमाणु हथियार न बना सके।

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बिज़नस

अमेरिका में पेट्रोल की कीमत चार डॉलर प्रति गैलन के पार, 2022 के बाद सबसे अधिक

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न्यूयॉर्क,एजेंसी। ईरान युद्ध के बीच वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से अमेरिका में पेट्रोल की कीमत 2022 के बाद पहली बार औसतन चार डॉलर प्रति गैलन से अधिक हो गई है। वाहन कंपनियों के संघ ‘एएए’ के अनुसार, नियमित पेट्रोल की राष्ट्रीय औसत कीमत अब 4.02 डॉलर प्रति गैलन हो गई है जो युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में एक डॉलर से अधिक है। 

इससे पहले रूस के यूक्रेन पर हमला करने के दौरान करीब चार वर्ष पहले अमेरिका में पेट्रोल इतना महंगा हुआ था। यह कीमत राष्ट्रीय औसत है जिसका अर्थ है कि कुछ राज्यों में लोग काफी समय से चार डॉलर प्रति गैलन से अधिक का भुगतान कर रहे हैं। राज्यों के बीच कीमतें कर दरों में अंतर के कारण अलग-अलग होती है। 

अमेरिका और इजराइन के 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और बढ़ोतरी हुई है। इस संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हुए हैं और पश्चिम एशिया के प्रमुख तेल उत्पादकों ने उत्पादन में कटौती भी की है जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा है। एएए के अनुसार, डीजल अब औसतन 5.45 अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन पर बिक रहा है, जो युद्ध शुरू होने से पहले लगभग 3.76 अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन था। डीजल का इस्तेमाल कई मालढुलाई और डिलिवरी ट्रक में ईंधन के रूप में किया जाता है। 

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विदेश

ट्रम्प बोले- अमेरिका किसी देश की मदद नहीं करेगा:हमसे तेल खरीदो, नहीं तो हिम्मत दिखाओ और होर्मुज जाकर ले लो

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तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अब अमेरिका किसी देश की मदद नहीं करेगा। देशों को खुद ही अपने हालात संभालने होंगे।

उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ब्रिटेन जैसे देश जो होर्मुज स्ट्रेट से फ्यूल नहीं ले पा रहे हैं, उन्हें अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए क्योंकि अमेरिका के पास इसकी कोई कमी नहीं है।

ट्रम्प ने कहा कि अगर देश चाहें, तो हिम्मत दिखाएं और खुद होर्मुज स्ट्रेट जाकर तेल ले लें। अमेरिका उनकी मदद के लिए नहीं आएगा, जैसे वे अमेरिका की मदद के लिए नहीं आए।

अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि ईरान काफी हद तक कमजोर हो चुका है और सबसे मुश्किल काम पहले ही पूरा हो गया है। अब बाकी देश खुद जाकर अपना तेल ले सकते हैं।

अमेरिका ने ईरान में हथियार डिपो पर एयरस्ट्राइक की

अमेरिका ने ईरान के इस्फहान शहर में एक बड़े हथियार डिपो पर एयरस्ट्राइक की है। वॉल स्ट्रीट जर्नल रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला सोमवार रात को किया गया। इसके लिए 2000 पाउंड के बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल हुआ।

रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि इस डिपो में बड़ी मात्रा में हथियार और सैन्य सामग्री रखी गई थी, जिसे निशाना बनाया गया। बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल मजबूत और भूमिगत ठिकानों को तबाह करने के लिए किया जाता है।

हमले के बाद डिपो में रखे हथियारों में विस्फोट होने से कई धमाके हुए और इलाके में आग के बड़े गुबार उठे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी सोशल मीडिया पर धमाकों का एक वीडियो शेयर किया है।

इस्फहान में हथियार डिपो पर हमले का वीडियो…

ईरान जंग से जुड़ी तस्वीरें…

इजराइल के हाइफा शहर में सोमवार को हिजबुल्लाह की तरफ से दागी गई एक ईरानी मिसाइल अटैक के बाद ऑयल रिफाइनरी में आग लग गई।

इजराइल के हाइफा शहर में सोमवार को हिजबुल्लाह की तरफ से दागी गई एक ईरानी मिसाइल अटैक के बाद ऑयल रिफाइनरी में आग लग गई।

लेबनान के बेरूत में विस्थापित लोगों के लिए अस्थायी शिविर बनाए गए हैं। तस्वीर में इन अस्थायी शिविर के बाहर बच्चे खेलते नजर आ रहे हैं।

लेबनान के बेरूत में विस्थापित लोगों के लिए अस्थायी शिविर बनाए गए हैं। तस्वीर में इन अस्थायी शिविर के बाहर बच्चे खेलते नजर आ रहे हैं।

इटली का अमेरिका को सैन्य बेस देने से इनकार

इटली ने अमेरिका को अपने सिगोनेला मिलिट्री बेस का इस्तेमाल करने से रोक दिया। यह बेस सिसिली आइलैंड पर है। अमेरिका यहां विमान उतरना चाहता था, लेकिन इटली ने इजाजत नहीं दी।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के कुछ बॉम्बर विमान इटली के इस बेस पर उतरकर आगे मिडिल ईस्ट जाना चाहते थे। लेकिन इटली को इस प्लान की पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी। अमेरिका ने न तो इटली से इजाजत मांगी और न ही उसके सैन्य अधिकारियों से बात की।

इससे कुछ दिन पहले स्पेन भी ऐसा ही कदम उठा चुका है। स्पेन ने ईरान जंग में शामिल अमेरिकी विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था।

ट्रम्प बोले- होर्मुज के रास्ते तेल नहीं मिल रहा तो हमसे खरीदो

डोनाल्ड ट्रम्प ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ब्रिटेन जैसे देश जो होर्मुज स्ट्रेट से फ्यूल नहीं ले पा रहे हैं, उन्हें अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए क्योंकि अमेरिका के पास पर्याप्त तेल है।

उन्होंने कहा कि ये देश हिम्मत दिखाएं, होर्मुज तक जाएं और तेल खरीद लें।

ट्रम्प ने यह भी कहा कि अब देशों को खुद अपनी लड़ाई लड़ना सीखना होगा। अमेरिका उनकी मदद के लिए नहीं आएगा, जैसे वे अमेरिका की मदद के लिए नहीं आए थे।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि ईरान काफी हद तक कमजोर हो चुका है और अब देशों को अपना तेल खुद हासिल करना चाहिए।

मिडिल ईस्ट में जंग की वजह से यूरोप के कई देशों महंगाई बढ़ी

यूरोप के कई देशों में महंगाई बढ़ गई है। मार्च महीने में यह बढ़कर 2.5% हो गई, जबकि फरवरी में 1.9% थी। यह जानकारी यूरोप की संस्था यूरोस्टेट ने दी है।

महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह तेल और गैस की कीमतों का बढ़ना है। मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के कारण ऊर्जा की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में तेल-गैस की कीमतें करीब 4.9% बढ़ गईं, जबकि फरवरी में ये कम हुई थीं।

गाजा में अब तक UN के 390 से ज्यादा कर्मचारियों की मौत

गाजा में UN की एजेंसी UNRWA के 390 से ज्यादा कर्मचारियों की मौत हुई है। इसकी जानकारी UNRWA के प्रमुख फिलिप लाजारिनी ने दी है।

उन्होंने कहा कि इस मामले की सच्चाई जानने के लिए एक बड़ी और स्वतंत्र जांच टीम बनाई जानी चाहिए। UNRWA गाजा में लोगों की मदद करने वाली सबसे बड़ी संस्था है। यह वहां खाने-पीने, इलाज और जरूरी सेवाएं देती है।

लाजारिनी ने कहा कि इतने लोगों की मौत बहुत गंभीर बात है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

रिपोर्ट-अमेरिका की ईरान में घुसकर यूरेनियम जब्त करने की तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के खिलाफ जमीनी कार्रवाई करने का आदेश दे सकते हैं। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ईरान के पास मौजूद यूरेनियम को अपने कब्जे में लेना चाहते हैं।

ईरान के पास करीब 400 किलो समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम है, जिसका इस्तेमाल परमाणु बम बनाने में किया जा सकता है। ट्रम्प ने अपने सहयोगियों से कहा है कि ईरान को यह यूरेनियम छोड़ना ही होगा।

अगर बातचीत से बात नहीं बनी, तो इसे जबरदस्ती भी लिया जा सकता है। इस बीच, अमेरिका मिडिल ईस्ट में करीब 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की योजना बना रहा है। इनमें से 3,500 से ज्यादा सैनिक पहले ही वहां पहुंच चुके हैं।

यूरेनियम एक ऐसा पदार्थ है, जिससे परमाणु ऊर्जा भी बनाई जा सकती है और परमाणु बम भी। फर्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि उसे कितना एनरिच यानि कि शुद्ध किया गया है।

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