छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक फेरबदल:IAS चंदन कुमार को CRDA का अतिरिक्त जिम्मेदारी, तीर्थराज अग्रवाल से प्रभार वापस
रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर फेरबदल करते हुए दो अधिकारियों के प्रभार में बदलाव किया है। यह फैसला सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अलग-अलग आदेशों में लिया गया है।
जारी आदेश के मुताबिक आईएएस अधिकारी चंदन कुमार को राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण का अतिरिक्त सीईओ नियुक्त किया है, जबकि तीर्थराज अग्रवाल से धर्मस्व विभाग का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया है।
आईएएस चंदन कुमार को अतिरिक्त जिम्मेदारी
वर्ष 2011 बैच के आईएएस अधिकारी चंदन कुमार को एक अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। अब उन्हें राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (CRDA) का अतिरिक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बनाया गया है।
चंदन कुमार फिलहाल वित्त विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे बजट संबंधी काम देख रहे हैं और नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी भी हैं।
तीर्थराज अग्रवाल से अतिरिक्त प्रभार वापस
वहीं, राज्य शासन ने आईएएस तीर्थराज अग्रवाल से एक अतिरिक्त जिम्मेदारी वापस ले ली है। वे फिलहाल योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग में उप सचिव के पद पर हैं। उन्हें धर्मस्व एवं धार्मिक न्यास विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, जो अब वापस ले लिया गया है। अब वे सिर्फ योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग में उप सचिव के रूप में ही कार्य करेंगे।
छत्तीसगढ़
DEO पर गबन-भ्रष्टाचार का आरोप…जांच कमेटी पर सवाल:संयुक्त संचालक ने BEO को बनाया जांच अधिकारी, कमेटी से 7 दिन में मांगी रिपोर्ट
बिलासपुर,एजेंसी। बिलासपुर में शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति, अटैचमेंट और प्रमोशन के साथ ही गबन और भ्रष्टाचार के आरोप में जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और उनका स्टाफ विवादों में है।
कांग्रेस नेता और पूर्व जिला पंचायत सदस्य अंकित गौरहा की शिकायत के बाद संभागीय संयुक्त संचालक ने अनुकंपा नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। कमेटी को 7 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
अब कांग्रेस नेता ने जांच के बिंदु तय करने के साथ ही जांच कमेटी को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि अगर दोषियों को बचाने के लिए षड्यंत्र किया गया, तो वे आंदोलन करेंगे।
डीईओ पर वित्तीय अनियमितता और नियुक्तियों में गड़बड़ी के आरोप
डीईओ विजय टांडे और सुनील यादव पर पद का दुरुपयोग करते हुए वित्तीय अनियमितता और नियुक्तियों में गड़बड़ी के आरोप है। इस मामले में संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर ने 6 मार्च को आदेश जारी किया है। जेडी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है।
जांच टीम में जांजगीर-चांपा के डीईओ अशोक सिन्हा, जेडी कार्यालय बिलासपुर के जेके शास्त्री और बीईओ बिल्हा भूपेन्द्र कौशिक शामिल हैं। इन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि शिकायतों की जांच करके 7 दिनों के अंदर अपनी राय और जांच रिपोर्ट पेश करें।

शिकायतकर्ता अंकित गौरहा
शिकायतकर्ता ने जांच कमेटी के गठन पर उठाए सवाल
शिकायतकर्ता अंकित गौरहा ने संयुक्त संचालक द्वारा गठित की गई जांच समिति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि डीईओ के अधीनस्थ कार्यरत बिल्हा बीईओ भूपेंद्र कौशिक को जांच टीम में शामिल किया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि बीईओ अपने से बड़े पद पर कार्यरत अधिकारी के खिलाफ रिपोर्ट कैसे दे सकता है।
दरअसल, इससे पहले कोटा बीईओ रहते हुए विजय टांडे पर एक महिला ने मृत शिक्षक पति के रुके हुए वेतन और अन्य भुगतान के बदले 1.35 लाख रुपए रिश्वत मांगने की शिकायत की थी।
कलेक्टर ने मामले में जांच के निर्देश दिए थे। जांच के लिए गठित टीम में बिल्हा बीईओ भूपेंद्र कौशिक समेत अन्य सदस्य थे। समिति ने डीईओ को जांच के बाद क्लीनचिट दे दी थी। इस मामले में भी बिल्हा बीईओ को शामिल किया गया है।

विजय टांडे DEO बिलासपुर
कोटा बीईओ रहते भृत्य के वेतन में लाखों की गड़बड़ी के आरोप
आरोप है कि टांडे के कोटा बीईओ रहने के दौरान भृत्य देवेंद्र कुमार पालके को 495420 वेतन भुगतान और 354000 वर्दी धुलाई भत्ता देने का मामला सामने आया था। इस पूरे मामले में उनकी भूमिका भी संदिग्ध थी। उन्होंने कार्यकाल में पदस्थ भृत्य को गोपनीय मेकर और चेकर आईडी दे रखी थी।
वित्तीय शक्तियां देकर कर्मचारियों का वेतन भी भृत्य से ही बनवा रहे थे, जिससे लाखों रुपए वेतन के माध्यम से निकाले गए। पूरे मामले में भृत्य और एक अन्य के खिलाफ कोटा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है, लेकिन अब तक लापरवाह अधिकारियों का कहीं कोई जिक्र तक नहीं है। इस मामले में संचालनालय कोष, लेखा के आदेश पर वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने जांच की थी।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
इसमें कोटा के तत्कालीन बीईओ और जिले के डीईओ विजय टांडे पर कार्रवाई की अनुशंसा की है। टांडे के कार्यकाल में सबसे बड़ा गबन हुआ। इसके अलावा वर्तमान बीईओ नरेन्द्र प्रसाद मिश्रा भी जांच के घेरे में हैं। मिश्रा ने कार्यभार संभालने के बाद भी इस गड़बड़ी पर ध्यान नहीं दिया।
लेखा शाखा प्रभारी नवल सिंह पैकरा ने कार्य विभाजन के बावजूद भृत्य को काम करने दिया। इसके साथ ही भृत्य देवेन्द्र कुमार पालके के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई।
आंदोलन और न्यायालय जाने की चेतावनी
अंकित गौरहा ने चेतावनी दी है कि यदि जांच समिति में बदलाव नहीं किया गया और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं हुई, तो संयुक्त संचालक कार्यालय का घेराव किया जाएगा और भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस पूरे मामले को न्यायालय तक ले जाया जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
छत्तीसगढ़
भूपेश बोले- चंद्राकर ने सदन को हाईजैक कर लिया:जंबूरी खर्च पर सदन में हंगामा, नारेबाजी, मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष का वॉकआउट
रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ विधानसभा में जंबूरी आयोजन में अनियमितता और विधायक रिकेश सेन को जान से मारने की धमकी पर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने जंबूरी आयोजन में अनियमितताओं का मुद्दा उठाया और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
उन्होंने सवाल किया कि जंबूरी के लिए निविदा कितनी बार लगी, कब-कब लगी और काम शुरू होने से पहले क्या प्रक्रिया पूरी हुई थी। इस पर मंत्री गजेंद्र यादव के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्ष ने नारेबाजी की और सदन से वॉकआउट कर दिया, जिससे सदन में हंगामा मच गया।
शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के मुताबिक पहला टेंडर तकनीकी कारणों से निरस्त हुआ और नियमों में बदलाव के बाद 23 दिसंबर को फिर से जारी किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह का भ्रष्टाचार नहीं हुआ और नियमों में बदलाव नेशनल स्काउट गाइड परिषद की अनुमति से किए गए।
शून्य काल में विधायक रिकेश सेन को जान से मारने की धमकी का मुद्दा सदन में गूंजा। उमेश पटेल ने सुरक्षा और स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। संसदीय मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि विधायक पूरी तरह सुरक्षित हैं, जबकि विपक्ष ने स्पष्टीकरण से असंतुष्ट होकर नारेबाजी और वॉकआउट किया।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि विधायक से बात की गई है और जवाब आने तक विपक्ष कार्यवाही में भाग नहीं लेगा। इसके बाद आसंदी ने संसदीय कार्यमंत्री को मामले में जांच के निर्देश दिए हैं। संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप इस मामले में दुर्ग के एसपी और कलेक्टर से बात करके करेंगे।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्रेजरी बेंच खाली होने पर तंज कसा, जिस पर अजय चंद्राकर ने कहा कि भूपेश बघेल ने चरणदास महंत का अस्तित्व खत्म कर दिया और नेता प्रतिपक्ष को हाईजैक कर लिया। भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए जवाब दिया कि अजय चंद्राकर ने तो पूरे सदन को हाईजैक कर लिया है।

शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव बोले- पहला टेंडर तकनीकी कारणों से निरस्त हुआ।

भूपेश बघेल ने ट्रेजरी बेंच खाली होने पर तंज कसा।
स्वामी आत्मानंद स्कूल और प्री-प्राइमरी शिक्षा पर सवाल-जवाब
प्रश्नकाल में नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने स्वामी आत्मानंद स्कूल का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि प्रदेश में कितने अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हैं, नर्सरी कक्षाओं की स्वीकृति कब दी गई और प्री-प्राइमरी कक्षाएं कितनी चल रही हैं, साथ ही कई जिलों में शिक्षकों को हटाने की शिकायतें भी आई हैं।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने जवाब दिया कि अभी किसी जिले में शिक्षकों को नहीं हटाया गया है, 14 जिलों के 54 विद्यालयों में प्री-प्राइमरी स्कूल संचालित हैं और प्रदेश में 11 हजार बालवाड़ी नई शिक्षा नीति के तहत खोले जाएंगे।

जंबूरी आयोजन में अनियमितताओं का मुद्दा उठाया और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। जमकर हंगामा हुआ।

कार्यवाही के दौरान वन मंत्री केदार कश्यप और वित्त मंत्री ओपी चौधरी।
प्रश्नकाल में विपक्ष के सवाल और पक्ष का जवाब
जंबूरी आयोजन पर सवाल-जवाब
उमेश पटेल (कांग्रेस विधायक): जंबूरी के लिए निविदा कितनी बार लगी, कब-कब लगी और निरस्त करने का कारण क्या था?
गजेन्द्र यादव (शिक्षा मंत्री): टेंडर दो बार लगाया गया। पहला तकनीकी कारणों से निरस्त हुआ और 23 दिसंबर को नियमों में बदलाव के बाद फिर से जारी किया गया।
उमेश पटेल: क्या निविदा शुरू होने से पहले काम शुरू हो गया था? आदेश किसे मिला?
गजेन्द्र यादव: टेंडर से पहले काम नेशनल टीम के हिस्से में था, नियमों में बदलाव नेशनल स्काउट गाइड परिषद की अनुमति से किया गया। कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ।
उमेश पटेल: डाउन ग्रेड किया गया तो कोई क्राइटेरिया होना चाहिए। क्या इसे स्काउट गाइड परिषद ने निर्णय लिया?
गजेन्द्र यादव: नियमों में बदलाव परिषद की अनुमति से किया गया। जेम पोर्टल के माध्यम से टेंडर प्रक्रिया पूरी हुई। स्काउट गाइड परिषद कभी भंग नहीं होती।
ट्रेजरी-बेंच और हाईजैक विवाद
भूपेश बघेल (पूर्व मुख्यमंत्री): ट्रेजरी बेंच खाली होने पर तंज।
अजय चंद्राकर: भूपेश बघेल ने चरणदास महंत का अस्तित्व खत्म किया और नेता प्रतिपक्ष को हाईजैक कर लिया।
भूपेश बघेल: अजय चंद्राकर ने पूरे सदन को हाईजैक कर लिया है।
स्वामी आत्मानंद स्कूल पर सवाल-जवाब
डॉ. चरणदास महंत (नेता-प्रतिपक्ष): प्रदेश में कितने अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हैं? नर्सरी कक्षाओं की स्वीकृति कब दी गई? कितनी प्री-प्राइमरी कक्षाएं चल रही हैं?
मंत्री गजेन्द्र यादव: अभी किसी जिले में शिक्षकों को नहीं हटाया गया है। 14 जिलों के 54 विद्यालयों में प्री-प्राइमरी स्कूल संचालित हैं। प्रदेश में 11 हजार बालवाड़ी नई शिक्षा नीति के तहत खोली जाएंगी।
शराब घोटाले पर सदन में हंगामा
शकुंतला पोर्ते (भाजपा विधायक): प्रतापपुर विधानसभा में अवैध और मिलावटी शराब का मुद्दा उठाया।
लखनलाल देवांगन (आबकारी मंत्री): शिकायतें आई हैं और कार्रवाई की जा रही है।
शकुंतला पोर्ते: पिछली कांग्रेस सरकार में 2 हजार करोड़ का घोटाला भी हुआ था।
भूपेश बघेल (पूर्व मुख्यमंत्री): मंत्री देवांगन बताएं कि शराब मामले में नोटिस किसे दिया गया और कितनी रिकवरी हुई?
मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष: यह प्रश्न उद्भूत नहीं होता।
इस पर सदन में विपक्ष ने हंगामा किया और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच नोक-झोंक हुई।
छत्तीसगढ़
जांजगीर-चांपा में अवैध रेत उत्खनन पर कार्रवाई:हनुमान धारा और देवरघटा से 1 चैन माउंटेन, 2 ट्रैक्टर जब्त
जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिले में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। राजस्व और खनिज विभाग ने संयुक्त अभियान चलाकर एक चैन माउंटेन और दो ट्रैक्टर जब्त किए हैं। यह कार्रवाई कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देश पर की गई।
जिला खनिज अधिकारी ने बताया कि यह जांच चांपा तहसील के हनुमान धारा और पामगढ़ तहसील के ग्राम देवरघटा क्षेत्र में की गई। हनुमान धारा, चांपा में रेत उत्खनन में लगे एक चैन माउंटेन को जब्त किया गया।
अवैध उत्खनन पर ताबड़तोड़ करवाई
देवरघटा घाट में अवैध रूप से रेत का परिवहन करते पाए जाने पर दो ट्रैक्टरों को जब्त किया गया। कलेक्टर के निर्देशानुसार, जिले में खनिज के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल लगातार जांच कर कार्रवाई कर रहा है।
अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21 से 23 (ख) के तहत कार्रवाई की जाएगी।

मौके पर करवाई करती उड़नदस्ता टीम
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