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LPG संकट- पंजाब में सिलेंडर लेकर भागते दिखे लोग:ब्लैक में कॉमर्शियल सिलेंडर ₹4 हजार का बिक रहा, सरकार बोली- रोजाना 76 लाख बुकिंग आ रही

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नई दिल्ली,एजेंसी। अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो गई है। गैस एजेंसियों के बाहर लम्बी लाइनें हैं। गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी भी हो रही है।

कई जगहों पर रू. 2 हजार का कॉमर्शियल सिलेंडर रू. 4 हजार में बिक रहा है। वहीं पंजाब में लोग सिलेंडर लेकर भागते नजर आए। केरल में करीब 40% रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर है।

उधर, दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने LPG सप्लाई की बिगड़ी स्थिति को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। राजस्थान में प्रदर्शन करते हुए सिलेंडर की शवयात्रा निकाली गई।

रोजाना 75.7 लाख सिलेंडर बुक हो रहे, पहले 55.7 लाख होते थे

सरकार की तरफ से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी (मार्केटिंग एवं ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने कहा कि LPG एक चिंता का विषय जरूर है क्योंकि हमारा ज्यादातर इम्पोर्ट ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ के रास्ते आता है, जो फिलहाल बंद है।

दिक्कत अफवाहों और ‘पैनिक बुकिंग’ की वजह से हो रही है। आम तौर पर रोजाना 50-55 लाख बुकिंग होती थी, जो अब बढ़कर 75-76 लाख तक पहुंच गई है।

सरकार की तरफ से पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी (मार्केटिंग एवं ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

सरकार की तरफ से पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी (मार्केटिंग एवं ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

राजस्थान: गैस सप्लाई ठप, सिलेंडर की शवयात्रा निकाली

होटल-रेस्टोरेंट में गैस का स्टॉक खत्म होने से बिजनेस ठप होने लगे हैं। कई जगह ताले भी लटकने लगे हैं। वहीं कोटा समेत कई शहरों में हॉस्टल मेस और ढाबों में मजबूरी में लकड़ी, कोयले और इलेक्ट्रिक चूल्हों पर खाना बनाया जा रहा है।

कई शहरों में एजेंसियों पर सुबह 5 बजे से ही लंबी लाइनें लग रही हैं और सिलेंडर न मिलने पर लोगों की पुलिस से झड़प तक हो रही है। इस संकट के बीच सिलेंडर की कालाबाजारी भी हो रही है, जिसके विरोध में कांग्रेस ने जयपुर में सिलेंडर की शवयात्रा निकाली।

चांदपोल में जयपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के प्रदर्शन के दौरान LPG सिलेंडर की शवयात्रा निकालते कार्यकर्ता।

चांदपोल में जयपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के प्रदर्शन के दौरान LPG सिलेंडर की शवयात्रा निकालते कार्यकर्ता।

उत्तर प्रदेश: चूड़ी से लेकर पेठा फैक्ट्रियां तक बंद

यूपी में फैक्ट्रियों को गैस सप्लाई नहीं हो रही है। इसका असर पॉटरी, चूड़ी से लेकर पेठा फैक्ट्रियों तक पड़ रहा। बुलंदशहर में एशिया के सबसे बड़े पॉटरी उद्योग पर पड़ा है। यहां 300-325 यूनिट में से 95% पॉटरी यूनिट बंद हैं। 30 हजार से ज्यादा वर्कर्स बेरोजगार हो गए हैं।

यही हाल फिरोजाबाद में बनने वाली चूड़ियों और आगरा की पेठा फैक्ट्रियों का है। गैस की सप्लाई नहीं मिलने से भटि्ठयां बंद हैं। 55 बड़ी फैक्ट्रियों में से 40 बंद हो चुकी हैं। अगर गैस की सप्लाई शुरू नहीं हुई तो आगरा में बनने वाली चांदी की पायल पर भी संकट आ सकता है।

मध्य प्रदेश: LPG की ऑनलाइन बुकिंग ठप…वेटिंग 7-8 दिन बढ़ी

मध्य प्रदेश में LPG सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग लगभग ठप है। सर्वर डाउन होने से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर समेत पूरे प्रदेश में लोग सिलेंडर की बुकिंग नहीं कर पा रहे हैं। वेटिंग 7 से 8 दिन तक पहुंच गई है। गैस एजेंसियों में लोगों की भीड़ लगी हुई है।

इधर गैस की किल्लत के बीच इंडक्शन की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। भोपाल में इसकी बिक्री 7 गुना तक बढ़ गई है। वहीं 50 हजार होटल-रेस्टॉरेंट में गैस खत्म होने के कगार पर है।

होटल, रेस्टॉरेंट को 4 दिन से कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिले हैं। भोपाल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली के मुताबिक, भोपाल के करीब 2 हजार होटल-रेस्टोरेंट को 4 दिन में एक भी सिलेंडर नहीं मिला।

बिहार: एजेंसी के बाहर लंबी लाइन; कोयला-लकड़ी के रेट बढ़े

बिहार में 4 दिन से कॉमर्शियल सिलेंडर की बुकिंग बंद है। सप्लाई नहीं होने की वजह से होटल, रेस्टॉरेंट पर काफी असर पड़ रहा है। पटना के बाजारों में लकड़ी और कोयले के भाव भी बढ़ गए हैं। जो लकड़ी एक दिन में 10 किलो ही बिकती थी, अब तीन क्विंटल प्रतिदिन खरीदे जा रहे हैं।

दरभंगा में सुबह 6 बजे से ही गैस एजेंसी के बाहर 500 मीटर लंबी लाइन लग गई। अररिया में लोग सिलेंडर के लिए कतार में खड़े हैं। मोतिहारी में सिलेंडर के लिए दो लोग आपस में भिड़ गए। ये लड़ाई लाइन में पहले लगने के लिए हुई।

पंजाब: लाइन में लगे बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत, लुधियाना में सिलेंडर लूटा

बरनाला के गांव शैहना में सिलेंडर के लिए 2 घंटे से लाइन में लगे 66 साल के बुजुर्ग भूषण कुमार मित्तल की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वहीं अमृतसर में सिलेंडर को लेकर एजेंसी मैनेजर और ग्राहकों के बीच झड़प हुई। वहीं लुधियाना में एक्टिवा सवार बदमाशों द्वारा युवक से सिलेंडर छीनने जैसी वारदातें सामने आई हैं।

गुजरात: 3 से 4 हजार रुपए में बिक रहे कॉमर्शियल सिलेंडर

कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी कमी की वजह से यहां ये ब्लैक में 3 से 4 हजार रुपए में बिक रहे हैं। गैस सिलेंडरों की अनुपलब्धता के कारण कुछ व्यापारियों को अपना कारोबार बंद करना पड़ा है। कुछ व्यापारी गैस सिलेंडरों के स्थान पर कोयले के चूल्हे पर काम चला रहे हैं। हालांकि, कोयले के चूल्हे पर खाना पकाने में अधिक समय लगने के चलते कारोबार में गिरावट आई है।

गुजरात के एक गैस एजेंसी पर लाइन में खड़ी महिला अचानक गिर गई।

गुजरात के एक गैस एजेंसी पर लाइन में खड़ी महिला अचानक गिर गई।

महाराष्ट्र: हर जिले में बनेगा कंट्रोल रूम और कमेटी

राज्य में LPG की बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम और कमेटियों का गठन किया है। खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अधिकारियों को गैस वितरण व्यवस्था पर पैनी नजर रखने को कहा है।

वहीं कई ग्राहकों ने ऑनलाइन और फोन पर सिलेंडर बुक किए हैं, लेकिन उन्हें समय पर डिलीवरी नहीं मिल रही है। इस वजह से पिछले कुछ दिनों में गैस एजेंसियों के सामने लंबी लाइनें लगी है। कई जगहों पर लोग सुबह एजेंसियों के खुलने से पहले ही कतारों में खड़े हैं।

केरल: 40 प्रतिशत रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर

केरल में करीब 40% रेस्टोरेंट बंद होने को मजबूर हैं। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि कई रेस्टोरेंट कुकिंग के दूसरे तरीकों को अपनाने की स्थिति में नहीं हैं। इस संकट का असर सिर्फ रेस्टोरेंट पर ही नहीं, बल्कि कैटरर्स, हॉस्टल, कैंटीन और श्मशान घाटों पर भी पड़ा है।

  • केरल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (KHRA) के अध्यक्ष जी. जयपाल ने पीटीआई को बताया कि शुक्रवार तक राज्य के करीब 40% रेस्टोरेंट बंद हो जाएंगे।
  • केंद्र सरकार ने खाना पकाने के वैकल्पिक तरीके अपनाने की सलाह दी है, लेकिन KHRA का कहना है कि शहरी इलाकों में लकड़ी का इस्तेमाल मुमकिन नहीं है।

हरियाणा: लकड़ी के चूल्हे पर पकने लगा शादियों का खाना

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के चलते हरियाणा समेत पूरे भारत में गैस का संकट शादियों और ढाबों पर दिख रहा है। सरकार ने कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों के लिए सीमित कर दी है।

इंडक्शन: अमेजन पर 1 दिन में ही 1.34 लाख इंडक्शन बिके

LPG गैस की किल्लत की वजह से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेजन पर एक ही दिन में करीब 1.34 लाख इंडक्शन की बिक्री दर्ज की गई है। वैसे एक माह में करीब 1.80 लाख इंडक्शन बिकते हैं।

पिछले चार दिनों में अमेजन सहित अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों को मिलाकर करीब 5 लाख इंडक्शन की बिक्री हुई है। अमेजन पर इंडक्शन बेचने वाली ज्यादातर कंपनियों का स्टॉक खत्म हो गया है।

LPG सिलेंडर बुकिंग के नियम 6 दिन में तीन बार बदले

  • 6 मार्च: घरेलू LPG बुकिंग के लिए लॉक-इन पीरियड 21 दिन किया गया।
  • 9 मार्च: डिमांड बढ़ने से शहरों में लॉक-इन पीरियड बढ़ाकर 25 दिन किया।
  • 12 मार्च: ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर बुक करने का गैप 45 दिन किया गया।

फूड डिलीवरी के ऑर्डर 50 से 60% तक कम हुए

गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन’ ने कहा कि LPG की किल्लत के कारण जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म्स पर फूड डिलीवरी के ऑर्डर 50 से 60% तक कम हो गए हैं। इससे डिलीवरी पार्टनर्स और इस सेक्टर से जुड़े दूसरे वर्कर्स की कमाई पर संकट खड़ा हो गया है।

यूनियन ने केंद्रीय श्रम मंत्री को पत्र लिखकर तुरंत दखल देने की मांग की है। यूनियन की मांग है कि जोमैटो, स्विगी और दूसरे प्लेटफॉर्म्स प्रभावित होने वाले हर वर्कर को तुरंत 10,000 रुपए की राहत राशि दें। वर्कर्स की ID बंद करने पर 3 महीने की रोक लगे।

PNG और CNG की सप्लाई बिना रुकावट जारी रहेगी

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में मार्केटिंग और ऑयल रिफाइनरी की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं को दी जाने वाली पीएनजी और सीएनजी की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी। नागरिकों को किसी भी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

वहीं उन्होंने कहा कि कई कॉमर्शियल उपभोक्ता फिलहाल LPG की सप्लाई को लेकर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे अपने स्थानीय सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क या डीलर से संपर्क करें और एलपीजी के विकल्प के तौर पर PNG कनेक्शन लेने की कोशिश करें।

सरकार रोजाना 50 लाख सिलेंडर बांट रही

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, “हम अपनी जरूरत की लगभग 60% LPG बाहर से मंगवाते हैं और इसका करीब 90% हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आता है। स्थिति थोड़ी मुश्किल है, लेकिन सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है।”

उन्होंने कहा, “हम हर दिन लगभग 50 लाख सिलेंडर डिलीवर करते हैं। डिस्ट्रीब्यूशन के स्तर पर फिलहाल कहीं भी किल्लत की कोई खबर नहीं है। लेकिन घबराहट की वजह से बुकिंग कई गुना बढ़ गई है। राज्य सरकारों से लाभार्थियों की लिस्ट तैयार करने को कहा है ताकि सिलेंडर की डिलीवरी प्राथमिकता के आधार पर की जा सके।”

सरकार ने अब तक 5 जरूरी कदम उठाए

1. हाई-लेवल कमेटी बनाई: संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो सप्लाई की समीक्षा करेगी।

2. एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू: गैस की सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ लागू कर दिया है।

3. 25 दिन बाद होगी LPG बुकिंग: घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। उपभोक्ता एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक कर सकेंगे।

4. OTP और बायोमेट्रिक अनिवार्य: गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी एजेंट OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का सख्ती से इस्तेमाल कर रहे हैं।

5. LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश: सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरीज को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था। अब उत्पादन 28% बढ़ गया है।

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मोदी बोले-श्रीराम कॉलेज के पूर्व छात्र जेन–जी लैंग्वेज में OG:ये धुरंधर न हों, लेकिन दुनियाभर में इन्होंने धूम मचाई

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नई दिल्ली, एजेंसी। पीएम मोदी 13 साल बाद शनिवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) पहुंचे। वे मेट्रो का सफर करके कॉलेज पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मेट्रो में बैठे बच्चों और लोगों से भी बातचीत की।

कॉलेज के 100 साल पूरे होने पर शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है। इसी दौरान पीएम जेन-Z को संबोधित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा- यहां के एलुमिनाई OG हैं, यानी ओरिजनल गैंगस्टर हैं। यहां के एलुमिनाई स्टूडेंट्स ने हर क्षेत्र में धूम मचाई है। वे धुरंधर भले न हों, पर धूम तो मचाई है।

समारोह की शुरुआत में पीएम ने 100 रुपए का सिक्का जारी किया। इसी साल अप्रैल में वे डाक टिकट भी जारी कर चुके हैं।

पीएम इससे पहले 2013 में श्रीराम कॉलेज का दौरा कर चुके हैं। उस समय वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

पीएम मोदी 2013 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के समारोह में शामिल हो चुके हैं।

पीएम मोदी 2013 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के समारोह में शामिल हो चुके हैं।

मोदी ने 13 साल पहले दी स्पीच की खास बातें दोहराईं

संबोधन के दौरान पीएम ने 2013 में दी गई अपनी स्पीच की खास बातें दोहराईं। उन्होंने कहा- “उस समय आप सब स्कूल में रहे होंगे। पर आज इंटरनेट पर जाकर उस समय की खबरें पढ़ेंगे तब आपको पता चलेगा उस समय देश में क्या हालत थी। मैं चाहूंगा कि आप इंटरनेट पर पढ़ें। मैं उस वक्त की हेडलाइन की कुछ झलक दिखाना चाहता हूं। LOC पर भारतीय सैनिकों की हत्या। वर्ल्ड बैंक ने GDP का नंबर घटाया। महंगाई दर 10% के करीब। हेलिकॉप्टर में घूसखोरी और हैदराबाद में ब्लास्ट ये उस समय की हेडलाइंस थीं।”

मोदी बोले- देश के लिए जीने का जज्बा मेरे अंदर भावविष्ट

स्पीच के दौरान पीएम ने कहा- “देश के लिए जी जान से जुटना। देश के लिए जीने का जज्बा, जो मेरे अंदर भावविष्ट है। वो 2013 में यहीं से शब्दों की माला में गढ़ता गया। मैं काफी देर बोला था। मैंने उस दिन पानी के ग्लास का एक उदाहरण दिया था। मैंने कहा था कि पानी के आधे भरे ग्लास को देखने के तीन नजरिए क्या होते हैं। एक जिनको ग्लास आधा खाली दिखता है। दूसरा जिन्हें ग्लास आधा भरा दिखता है। और तीसरा जिन्हें ग्लास पूरा भरा दिखता है। आधा हवा से आधा पानी से।”

पीएम बोले- कुछ दिन इस आयोजन की खूब चर्चा है

पीएम मोदी ने कहा- “कुछ दिनों से इस कार्यक्रम की खूब चर्चा है। लोग मेरे 2013 के संबोधन को याद कर रहे हैं। नई पीढ़ी के लोगों ने भी उसे रिविजिट किया है। आज भी 13-14 साल बाद भी उस सभा और संबोधन का प्रभाव बरकरार है। साथियों तब आपकी जगह आपके सीनियर थे। मैं तब सीएम तो था पर मैं विपक्षी पार्टी में था। लोग उम्मीद कर रहे थे कि मैं उस वक्त तब की केंद्र सरकार पर आरोपों की झड़ी लगा दूंगा। पर मैंने इस मंच का वो उपयोग नहीं किया। मैंने एक विजन रखा था। मैंने तब जो कहा था वो मेरा कनविक्शन था।”

पीएम बोले- यहां के एलुमिनाई जेन जी की भाषा में OG और धुरंधर

  • इस कॉलेज की यात्रा दरियागंज के एक छोटे से स्थान से शुरू हुई थी। और वही छोटा कॉलेज एक विशाल वृक्ष बन चुका है। इसने कई लोगों को छांव और शीतलता दी है।
  • आज भी जब कोई पूछता है कि DU में कौन सा कॉलेज, तो SRCC कहना ही अपने आप में फ्लैक्स होता है। आपकी भाषा में कहूं तो यहां के एल्युमनाई OG हैं।
  • जिन्होंने SRCC का नाम पूरी दुनिया में पहुंचाया। हमारे अरुण जेटली जी यहीं पढ़े थे। और मैं कह सकता हूं कि हमारी ऐसी कोई मुलाकात नहीं हुई जहां उन्होंने SRCC की बात न की हो। कभी-कभी तो मैं तंग आ जाता था।
  • लोग मेरे 2013 के संबोधन को याद कर रहे हैं। नई पीढ़ी के लोगों ने भी उसे रिविजिट

पीएम मोदी का संबोधन शुरू, बोले- मैं छठा खिलाड़ी हूं

पीएम मोदी ने संबोधन की शुरुआत में एलुमिनाई स्टूडेंट्स के नाम लिए और फिर बोले- मैं छठा खिलाड़ी हूं। आज का ये अवसर बहुत ऐतिहासिक है। ये देश के शिक्षा जगत के लिए भी अहम है। यहां SRCC का हिस्सा रही अनेक पीढ़ियां जुड़ी हैं।

मोदी ने कहा- मैं कॉलेज के संस्थापक सर श्री राम जी का भी धन्यवाद करता हूं। जब कोई इंसान 100 साल जीता है तो उसके अनुभवों का सागर माना जाता है। और जब कोई संस्थान ऐसा करता है तो वो उपलब्धियों का महासागर हो जाता है।

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पीएम दिल्ली के श्रीराम कॉलेज के शताब्दी समारोह में पहुंचे:मेट्रो में बैठे, बच्चों से बातचीत की

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नई दिल्ली, एजेंसी। पीएम मोदी 13 साल बाद शनिवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) पहुंचे। वे मेट्रो का सफर करके कॉलेज पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मेट्रो में बैठे बच्चों और लोगों से भी बातचीत की।

कॉलेज के 100 साल पूरे होने पर शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है। इसी दौरान पीएम जेन-Z को संबोधित करेंगे।

समारोह की शुरुआत में पीएम ने 100 रुपए का सिक्का जारी किया। इसी साल अप्रैल में वे डाक टिकट भी जारी कर चुके हैं।

पीएम इससे पहले 2013 में श्रीराम कॉलेज का दौरा कर चुके हैं। उस समय वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

पीएम मोदी 2013 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के समारोह में शामिल हो चुके हैं।

पीएम मोदी 2013 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के समारोह में शामिल हो चुके हैं।

दिल्ली मेट्रो में सफर के दौरान पीएम मोदी की तस्वीरें…

मोदी ने लिखा- SRCC ने लीडर्स की पीढ़ियां तैयार कीं

इवेंट के लिए रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने X पर एक पोस्ट में लिखा- इस कॉलेज ने एकेडमिक एक्सीलेंस, संस्थान बनाने और बिजनेस, पब्लिक लाइफ और समाज में लीडर्स की पीढ़ियों को तैयार करने के मामले में सालों में अपनी अलग पहचान बनाई है।

अप्रैल में डाक टिकट जारी किया गया था

इस साल अप्रैल में पीएम ने संस्थान के 100 साल पूरे होने के मौके पर एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया था।

इस साल अप्रैल में पीएम ने संस्थान के 100 साल पूरे होने के मौके पर एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया था।

1926 में हुई थी श्रीराम कॉलेज की स्थापना

दिल्ली यूनिवर्सिटी का श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स भारत के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों में से एक है और कॉमर्स, इकोनॉमिक्स और मैनेजमेंट के क्षेत्रों में सीखने का एक प्रतिष्ठित केंद्र है।

मशहूर उद्योगपति और समाजसेवी सर श्री राम ने 1926 में स्थापित इस कॉलेज ने एक सदी के दौरान विद्वानों, पेशेवरों, प्रशासकों, उद्यमियों, नीति-निर्माताओं और राष्ट्र-निर्माताओं की पीढ़ियों को तैयार किया है।

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UN ने बदला दुनिया का नक्शा, अमेरिका ने विरोध किया:नए मैप में अफ्रीका बड़ा, यूरोप-US छोटे, भारत पर इसका क्या असर

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नई दिल्ली, एजेंसी। दुनिया का नक्शा अब कुछ बदला नजर आएगा। इसे लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया है। भारत ने भी प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। अमेरिका प्रस्ताव के खिलाफ वोट करने वाला अकेला देश रहा।

इस फैसले से देशों और महाद्वीपों के क्षेत्रफल पर कोई असर नहीं पड़ेगा, बस इनका आकार पहले से थोड़ा छोटा या बड़ा दिख सकता है।

अब तक धरती पर देशों और महाद्वीपों को दिखाने के लिए मर्केटर वर्ल्ड मैप का उपयोग किया जाता था। इसमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनके असली क्षेत्रफल से बड़ा या छोटा दिखता था।

नए नक्शे का नाम इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन है। इसमें अफ्रीका पहले से काफी बड़ा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका छोटे नजर आएंगे। एशिया के कुछ हिस्सों का आकार भी पहले से छोटा दिखेगा।

भारत: क्षेत्रफल वही, आकार बड़ा दिख सकता है

भारत की वास्तविक जमीन, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं या क्षेत्रफल में कोई बदलाव नहीं होगा। यह बदलाव देशों की सीमाएं बदलने वाला नहीं, बल्कि नक्शे पर पृथ्वी को दिखाने का तरीका बदलने वाला है।

भारत का नक्शा देखने में भी थोड़ा अलग दिख सकता है, लेकिन भारत के मामले में बदलाव बहुत बड़ा नहीं होगा।

नया नक्शा क्षेत्रफल सही अनुपात में दिखाता है। पुराने नक्शे में भूमध्य रेखा के आसपास के इलाके अपने आकार से छोटे और ध्रुवों के पास के इलाके बड़े दिखते हैं।

भारत भूमध्य रेखा से बहुत दूर नहीं है, इसलिए पुराने नक्शे में भी उसका आकार कुछ हद तक छोटा दिखता है।

भारत के लिए इसका मतलब

  • क्षेत्रफल: बिल्कुल वही रहेगा।
  • सीमाएं: नहीं बदलेंगी।
  • भारत की आकृति: थोड़ी बदली हुई/कम खिंची हुई दिखाई दे सकती है।
  • दूसरे देशों की तुलना में आकार: भारत कुछ बड़ा दिखाई दे सकता है, खासकर जब उसकी तुलना यूरोप, रूस, कनाडा जैसे ज्यादा उत्तरी देशों से की जाए।
  • अफ्रीका पर असर: सबसे ज्यादा नजर आएगा, क्योंकि उसका वास्तविक आकार पुराने मर्केटर नक्शे की तुलना में बहुत बड़ा दिखाई देगा।

अमेरिका ने प्रस्ताव का विरोध क्यों किया?

संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने वोट दिया, जबकि 6 देश वोटिंग से दूर रहे। अमेरिका ने इस पहल की कड़ी आलोचना की। अमेरिकी प्रतिनिधि यारिना फेरेन्सेविच ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को दुनिया की असली समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि 16वीं सदी के नक्शे को बदलने जैसी बहस पर।

उन्होंने इसे एक वैचारिक एजेंडा बताया और कहा कि ऐसी बहसों की वजह से संयुक्त राष्ट्र अपनी विश्वसनीयता खो रहा है।

वहीं, अफ्रीकी संघ ने इस फैसले का स्वागत किया। उसने दुनिया के नए नक्शे को ज्यादा सटीक और बराबरी वाला बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

मौजूदा नक्शे में आखिर दिक्कत क्या थी?

दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले नक्शों में से एक मर्केटर नक्शा है। इसे यूरोपियन मैप मेकर जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था।

इसका मकसद समुद्र में जहाजों के रास्ते और दिशा को समझना आसान बनाना था। लेकिन पूरी गोल धरती को सपाट नक्शे पर दिखाने की वजह से इसमें देशों और महाद्वीपों का आकार असल से अलग नजर आने लगता है।

जैसे-जैसे कोई इलाका भूमध्य रेखा से दूर जाता है, वह नक्शे पर जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही वजह है कि उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के कई इलाके असल से काफी बड़े नजर आते हैं।

मर्केटर प्रोजेक्शन में पृथ्वी का नक्शा। (फोटो: NASA)

मर्केटर प्रोजेक्शन में पृथ्वी का नक्शा। (फोटो: NASA)

ग्रीनलैंड इसका सबसे मशहूर उदाहरण है। मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका के लगभग बराबर दिखाई देता है। लेकिन असल में दोनों के आकार में बहुत बड़ा अंतर है।

ग्रीनलैंड का क्षेत्रफल करीब 22 लाख वर्ग किलोमीटर है। यह लगभग डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के बराबर है। वहीं अफ्रीका का क्षेत्रफल करीब 3 करोड़ वर्ग किलोमीटर है। यानी अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है।

फिर भी मर्केटर नक्शे को देखकर दोनों का आकार लगभग एक जैसा लग सकता है। यही वह फर्क है जिसे अब कम करने की कोशिश हो रही है।

अफ्रीकी देश नक्शा बदलने की मांग क्यों कर रहे थे?

अफ्रीकी देशों का कहना है कि बात सिर्फ नक्शे पर किसी देश या महाद्वीप के छोटा-बड़ा दिखने की नहीं है। दुनिया का नक्शा यह भी तय करता है कि हम अलग-अलग हिस्सों को किस नजर से देखते हैं।

UN के सामने रखे गए प्रस्ताव में कहा गया था कि मर्केटर नक्शे में अफ्रीका का वास्तविक आकार काफी छोटा नजर आता है। लंबे समय तक ऐसी तस्वीर देखने से लोगों के मन में अफ्रीका के आकार और वैश्विक महत्व को लेकर गलत धारणा बन सकती है।

प्रस्ताव में लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि नक्शे में इन क्षेत्रों का छोटा नजर आना उनकी विकास जरूरतों, बुनियादी ढांचे और आर्थिक क्षमता को भी कम करके आंकने की धारणा बना सकता है।

अफ्रीकी देश टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे ने कहा कि नक्शे सिर्फ भूगोल समझने का साधन नहीं हैं, बल्कि वे शिक्षा और लोगों की सोच को भी प्रभावित करते हैं। यह प्रस्ताव टोगो ने पेश किया था और इसे अफ्रीकी संघ का समर्थन मिला।

फ्रांस भी मर्केटर मैप छोड़ने की तैयारी में

UN में मतदान से पहले फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो ने कहा कि उनका देश मर्केटर मैप की जगह ऐसे नक्शों का इस्तेमाल करेगा, जिनमें देशों का वास्तविक क्षेत्रफल ज्यादा सही तरीके से दिखाई दे।

फ्रांस अब एकर्ट IV प्रोजेक्शन का इस्तेमाल करेगा। एकर्ट IV नक्शा 1906 में जर्मन कार्टोग्राफर मैक्स एकर्ट-ग्राइफेंडॉर्फ ने बनाया था। उन्होंने दुनिया के नक्शे के छह अलग-अलग डिजाइन तैयार किए थे। इनमें चौथा नक्शा यानी एकर्ट IV क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे सटीक माना गया।

एकर्ट IV और इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन दोनों ऐसे नक्शे हैं, जिनमें देशों और महाद्वीपों का वास्तविक क्षेत्रफल सही अनुपात में दिखता है।

फिर 2018 में इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन की जरूरत क्यों पड़ी?

एकर्ट IV में क्षेत्रफल तो सही दिखाया गया है, लेकिन कई जगह देशों और महाद्वीपों के आकार में ज्यादा विकृति नजर आती है। इसी समस्या को कम करने के लिए इक्वल अर्थ बनाया गया,

इक्वल अर्थ बनाने का मकसद सिर्फ देशों और महाद्वीपों का सही क्षेत्रफल दिखाना नहीं था, बल्कि पूरी दुनिया को ऐसे रूप में दिखाना था, जो देखने में भी ज्यादा संतुलित लगे।

क्या UN का फैसला सभी पर लागू होगा?

नहीं। संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। यानी यह देशों, स्कूलों, किताबों के प्रकाशकों या टेक कंपनियों को मर्केटर नक्शा हटाने के लिए मजबूर नहीं करता।

लेकिन इससे नक्शे बनाने और पढ़ाने में ऐसे तरीकों को बढ़ावा मिल सकता है, जिनमें देशों और महाद्वीपों का वास्तविक क्षेत्रफल ज्यादा सही दिखाई दे।

मर्केटर नक्शे को पूरी तरह खत्म करने की भी बात नहीं कही गई है। समुद्री और हवाई नेविगेशन में इसका इस्तेमाल जारी रह सकता है, क्योंकि इसमें दिशाओं को सही रखने की खासियत है।

  • मैप: यह अंग्रेजी का शब्द है। माना जाता है कि यह लैटिन के माप्पा से आया। जिसका अर्थ कपड़ा या चादर है, जिस पर नक्शा बनाया जाता था। बाद में इसका अर्थ मानचित्र हो गया।
  • नक्शा: यह अरबी मूल का शब्द है। अरबी में नक्श का अर्थ है चित्र या नक्काशी। इसी से नक्शा बना और हिंदी-उर्दू में किसी जगह का चित्र/मानचित्र बताने के लिए इस्तेमाल होने लगा।
  • मानचित्र: संस्कृत मूल का शब्द है। मान + चित्र, यानी किसी स्थान को माप या अनुपात के साथ चित्र के रूप में दिखाना।

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