Connect with us

देश

NBFC के वित्तपोषण के लिए वाणिज्यिक पत्र बना हुआ है प्रमुख जरिया: इंडिया रेटिंग्स

Published

on

मुंबई, एजेंसी। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) वित्तपोषण के लिए मार्च महीने में वाणिज्यिक पत्र जारी करने के मामले में आगे रही हैं जबकि कंपनियों ने अल्पकालिक कर्ज लागत में वृद्धि के कारण सतर्कता बरती है। रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने एक रिपोर्ट में यह बात कही है। ‘कमर्शियल पेपर’ यानी वाणिज्यिक पत्र एक बिना गारंटी वाले, अल्पकालिक कर्ज जुटाने का साधन हैं। कंपनियां अल्पकालिक देनदारियों के वित्तपोषण के लिए इसके जरिये पैसा जुटाती हैं। रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि उधार लेने के प्रतिरूप में यह अंतर बना रहेगा। 

इसका कारण एनबीएफसी विशेष रूप से वित्त वर्ष के अंत में अपनी वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वाणिज्यिक पत्र बाजार का सक्रियता से उपयोग करना जारी रखेंगी जबकि कंपनियां उच्च वित्तपोषण लागत और पर्याप्त आंतरिक नकदी के कारण चयनात्मक रुख अपनाएंगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि आमतौर पर एनबीएफसी के लिए वित्तपोषण के लिहाज से मार्च का महीना महत्वपूर्ण समय होता है और प्रतिफल में वृद्धि के बावजूद उनकी मांग मजबूत बनी हुई है। इस रुख को दर्शाते हुए, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों द्वारा जारी किए गए वाणिज्यिक पत्र (सीपी) मार्च, 2026 में बढ़कर 70,300 करोड़ रुपए का हो गया, जो फरवरी, 2026 में 45,500 करोड़ रुपए का था। इसके विपरीत, कंपनियों का वाणिज्यिक पत्र के जरिये वित्तपोषण जुटाने में इसी अवधि में भारी गिरावट आई और यह घटकर 26,600 करोड़ रुपए रहा जो एक महीने पहले 40,700 करोड़ रुपए था। 

रेटिंग एजेंसी ने कहा, ”वर्तमान स्थिति से संकेत मिलता है कि एनबीएफसी तिमाही के अंत के दायित्वों को पूरा करने के लिए अल्पकालिक बाजारों का सहारा लेना जारी रखेंगी, जबकि लागत संबंधी चिंताओं और आंतरिक नकदी के कारण कंपनियां सतर्क रुख अपना सकती हैं।” इस बीच, बैंकों द्वारा जारी जमा प्रमाणपत्र (सीडी) आने वाले महीनों में अधिक संतुलित रहने की संभावना है। इसका कारण जमा की स्थिति स्थिर हो रही है और नए वित्त वर्ष की शुरुआत में कर्ज की मांग आमतौर पर हल्का रहता है। 

रिपोर्ट के अनुसार, 24 मार्च, 2026 तक, लगभग दो लाख करोड़ रुपए के जमा प्रमाणपत्र जारी किये गए थे। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का हिस्सा 1.32 लाख करोड़ रुपए था, जबकि निजी क्षेत्र के बैंकों ने 67,800 करोड़ रुपए के जमा प्रमाणपत्र जारी किये थे। मासिक आधार पर यह राशि लगभग अपरिवर्तित रही। इंडिया रेटिंग्स के अनुसार, जमा प्रमाणत्र जारी करने में आई यह नरमी बैंकों में अल्पकालिक वित्तपोषण दबाव में कुछ कमी का संकेत देती है और नकदी की स्थिति में अपेक्षित सुधार के साथ कर्ज लेने की गति में और कमी आने की संभावना है। 

Continue Reading

देश

PM आवास के बाहर धरने पर बैठे कांग्रेसी नेताओं ने केंद्र सरकार के सामने रखीं ये 5 बड़ी मांगें

Published

on

नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कई अन्य नेता छात्रों के खिलाफ पुलिस के बल प्रयोग के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने पर बैठ गए। प्रधानमंत्री के आवास ‘7 लोक कल्याण मार्ग’ के निकट धरने पर बैठे कांग्रेस नेताओं ने यहां ‘प्रधानमंत्री इस्तीफा दो’ के नारे लगाए।

केंद्र के सामने रखी ये 5 बड़ी मांगें

  • प्रदर्शन के दौरान हिंसा की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की
  • गृहमंत्री का दोनों सदनों में बयान
  • सदन में इस मामले की डिटेल पर चर्चा होनी चाहिए
  • शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग रखी
  • छात्रों के मुद्दे को सुने जाने की बात कही

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने की खरगे से मुलाकात

धरना स्थल पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह पहुंचे हैं। यहां पर वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से बातचीत कर उन्हें प्रदर्शन रोकने के लिए बातचीत कर रहे हैं। 

इससे पहले, राहुल गांधी ने कहा कि पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को माफी मांगनी चाहिए और पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से यह भी कहा कि छात्रों की पिटाई के लिए गृह मंत्री अमित शाह को भी त्यागपत्र देना चाहिए। प्रियंका गांधी ने कहा, ”हम सदन में चर्चा करना चाहते हैं, लेकिन विपक्ष को बात करने नहीं दिया जाता। ये सदन उन्हीं युवाओं का है जिन पर सरकार लाठी चला रही है, आंसू गैस के गोले छोड़ रही है। बच्चों की बात सुनी जाए और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया जाए। ” कांग्रेस के दोनों प्रमुख नेताओं ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मुलाकात भी की।

Continue Reading

देश

सोने में आने वाली है बड़ी गिरावट? बैंक ऑफ अमेरिका की भविष्यवाणी से मचा हड़कंप

Published

on

मुंबई, एजेंसी। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच आमतौर पर सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है लेकिन इस बार बाजार का रुख अलग नजर आ रहा है। एक तरफ जहां दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोना खरीद रहे हैं, वहीं दिग्गज ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका के तकनीकी रणनीतिकारों ने सोने में एक बहुत बड़ी गिरावट की चेतावनी जारी की है।

बैंक ऑफ अमेरिका के तकनीकी रणनीतिकार पॉल सियाना के अनुसार, सोने की मौजूदा कमजोरी अगस्त और सितंबर तक जारी रह सकती है। उनका कहना है कि कीमतों में गिरावट के पीछे दो प्रमुख तकनीकी संकेतक जिम्मेदार हैं।

सोने में गिरावट के दो बड़े कारण

पहला संकेत ‘डेथ क्रॉस’ का बनना है। यह स्थिति तब बनती है जब 50-दिवसीय शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज, 200-दिवसीय लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे आ जाता है। विश्लेषकों के अनुसार, वर्ष 1975 के बाद सोने में जब-जब ऐसा संकेत मिला, उसके बाद अधिकांश मामलों में कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

दूसरा संकेत रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) से जुड़ा है। हालिया तेजी के दौरान आरएसआई 90 के स्तर तक पहुंच गया था, जिसे अत्यधिक खरीदारी (ओवरबॉट) का संकेत माना जाता है। ऐसे में बाजार में करेक्शन की संभावना बढ़ जाती है।

अगस्त-सितंबर में बदल सकता है पूरा खेल

विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर टूटने के बाद मंदी का दबाव और बढ़ गया है। उनका मानना है कि मौजूदा रुझान वर्ष 1980 और 2011 में देखी गई बड़ी गिरावट जैसे पैटर्न की ओर संकेत कर सकता है।

बैंक ऑफ अमेरिका के अनुमान के मुताबिक, यदि गिरावट जारी रहती है तो सोना पहले 3,600 डॉलर प्रति औंस और उसके बाद 3,315 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकता है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि नए निवेशकों को अगस्त और सितंबर के दौरान बाजार की चाल पर नजर रखते हुए निवेश संबंधी निर्णय लेना चाहिए।

Continue Reading

देश

शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 238 अंक टूटा

Published

on

मुंबई, एजेंसी। स्थानीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट जारी रही और दोनों मानक सूचकांक नुकसान में रहे। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने तथा कच्चे तेल के दाम में तेजी के बीच एचडीएफसी बैंक में बिकवाली दबाव के साथ बीएसई सेंसेक्स 238 अंक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी में 51 अंक की गिरावट आई।

कारोबारियों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों की पूंजी निकासी जारी रहने से भी जोखिम लेने की धारणा प्रभावित हुई। तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 238.41 अंक यानी 0.31 प्रतिशत टूटकर 77,470.11 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान, एक समय यह 371.19 अंक की गिरावट के साथ 77,337.33 अंक पर आ गया था।

पचास शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी 50.80 अंक यानी 0.21 प्रतिशत के नुकसान के साथ 24,187.70 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स में शामिल शेयरों में एचडीएफसी बैंक में लगातार दूसरे दिन दो प्रतिशत की गिरावट आई। तिमाही वित्तीय परिणाम में मार्जिन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने से बैंक का शेयर नुकसान में रहा।

इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारतीय स्टेट बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस और पावर ग्रिड के शेयर में भी गिरावट आई। दूसरी तरफ, लाभ में रहने वाले शेयरों में बजाज फिनसर्व, इंटरग्लोब एविएशन, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचसीएल टेक, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाइटन शामिल हैं।

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 1,121.04 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.66 प्रतिशत बढ़कर 90.03 डॉलर प्रति बैरल रहा। एशिया के अन्य बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की और चीन का शंघाई कम्पोजिट लाभ में रहे, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर के कारोबार में तेजी का रुख था। अमेरिकी बाजार सोमवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे। सेंसेक्स सोमवार को 442.93 अंक टूटकर 77,708.52 अंक बंद हुआ था। निफ्टी 95.80 अंक की गिरावट के साथ 24,238.50 अंक पर रहा था।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677