छत्तीसगढ़
रायपुर : प्रतिभा, पारदर्शिता और अवसर से ही बनेगा भारत वैश्विक खेल शक्ति, मजबूत खेल व्यवस्था से ही ओलंपिक में सफलता संभव : अरुण साव
उप मुख्यमंत्री ने श्रीनगर में राष्ट्रीय खेल चिंतन शिविर में ‘गुड गवर्नेंस इन स्पोर्ट्स’ सत्र की अध्यक्षता की, छत्तीसगढ़ की खेल योजनाओं एवं भविष्य की रणनीतियों को किया साझा
केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्रालय जल्दी ही युवा मामलों पर भी आयोजित करेगा विशेष चिंतन शिविर

रायपुर। केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्रालय द्वारा श्रीनगर में आयोजित खेल चिंतन शिविर के दूसरे दिन आज उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने ‘गुड गवर्नेंस इन स्पोर्ट्स’ (Good Governance in Sports) पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने इस दौरान छत्तीसगढ़ की खेल योजनाओं एवं भविष्य की रणनीतियों पर बेस्ट प्रेक्टिसेस पर आधारित वीडियो प्रेजेंटेशन भी दिया। श्री साव ने विभिन्न राज्यों से आए खेल मंत्रियों एवं अधिकारियों के समक्ष छत्तीसगढ़ में खेलों और खिलाड़ियों के विकास के लिए लागू बेस्ट गवर्नेंस प्रेक्टिसेस (Best Governance Practices) को विस्तार से साझा किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों से सुझाव भी प्राप्त किए। चिंतन शिविर में शामिल अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ की भावी योजनाओं की सराहना करते हुए इसे एक प्रभावी मॉडल बताया।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने राष्ट्रीय खेल चिंतन शिविर के दौरान दो दिनों तक विभिन्न राज्यों के खेल मंत्रियों एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से संवाद कर महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। उन्होंने खेलों को बढ़ावा देने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराते हुए छत्तीसगढ़ में बेहतर खेल अवसंरचना, प्रतिभा संवर्धन एवं खिलाड़ियों को अधिक अवसर प्रदान करने पर जोर दिया।

श्री साव ने कहा कि प्रतिभा, पारदर्शिता और अवसर से ही भारत वैश्विक खेल शक्ति बनेगा। मजबूत खेल व्यवस्था और प्रोत्साहन से ही देश को ओलंपिक खेलों में बड़ी सफलता मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह चिंतन शिविर छत्तीसगढ़ और पूरे देश में खेलों के समग्र विकास, सुदृढ़ खेल व्यवस्था के निर्माण तथा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए नई दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
चिंतन शिविर के दूसरे दिन भी आज अलग-अलग सत्रों में खेल प्रशासन, नीतिगत सुधार एवं युवा मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। इस दौरान राज्यों में खेल सामग्रियों के निर्माण, सरकारी योजनाओं तथा स्पोर्ट्स स्टार्ट-अप्स (Sports Startups) को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई। इसमें यह बात प्रमुखता से आई कि भारत में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल उपकरणों का निर्माण किया जाए, जिससे देश का खेल उद्योग आत्मनिर्भर बन सके।
आज एक महत्वपूर्ण सत्र में सलेक्शन पॉलिसी और एज फ्रॉड (Selection Policy & Age Fraud) पर भी विशेष चर्चा हुई। इसमें खिलाड़ियों के चयन में पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं स्पष्ट मापदंड सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही उम्र में गड़बड़ी (Age Fraud) की रोकथाम के लिए सख्त सत्यापन प्रक्रिया एवं तकनीकी उपाय अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि खेलों में ईमानदारी एवं विश्वसनीयता बनी रहे।
आज का अंतिम सत्र ‘माई भारत’ (MY Bharat) की योजनाओं और इसकी कार्ययोजना (Action Plan) पर केंद्रित रहा। इसमें खेलों के साथ-साथ युवा मामलों को भी समान महत्व देते हुए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला गया। साथ ही योजनाओं के प्रभावी प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया, ताकि अधिक से अधिक युवाओं तक इनका लाभ पहुंच सके।
चिंतन शिविर के समापन के दौरान केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने घोषणा की कि जल्दी ही केवल युवा मामलों पर केंद्रित एक विशेष चिंतन शिविर का आयोजन किया जाएगा। दो दिवसीय चिंतन शिविर में देश के दिग्गज खिलाड़ी ओलंपियन अभिनव बिंद्रा, पुलेला गोपीचंद और गगन नारंग सहित खेल प्रशासक और नीति निर्माता भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
कोरबा
दीपका में 30 अप्रैल को 20वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी
देशभर के विद्वानों का होगा संगम-डॉ गजेंद्र
कोरबा। शासकीय महाविद्यालय दीपका, जिला कोरबा (छत्तीसगढ़) एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के बौद्धिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। महाविद्यालय एवं अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा की कसौटी पर विकलांग-विमर्श का पुनर्मूल्यांकनÓ विषय पर 20वीं एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 30 अप्रैल 2026, गुरुवार को किया जाएगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रात: 9:30 बजे महाविद्यालय परिसर में होगा। इस संगोष्ठी में देशभर से विद्वान, शिक्षाविद, शोधार्थी एवं विषय विशेषज्ञ सहभागी बनेंगे, जिससे विचारों का एक व्यापक और सार्थक आदान-प्रदान संभव होगा।

इस गरिमामयी आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य एवं उद्योग, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम विभाग के मंत्री लखनलाल देवांगन उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व अध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं कुलपति, थावे विद्यापीठ, गोपालगंज (बिहार) डॉ. विनय कुमार पाठक करेंगे।
संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व न्यायाधीश उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति चंद्रभूषण बाजपेयी, अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री मदनमोहन अग्रवाल, तथा गेवरा प्रोजेक्ट के जनरल मैनेजर अरुण त्यागी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम को समृद्ध करेंगे। इसके साथ ही कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल समारोह भूषण विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
इस अवसर पर ‘विकलांग-विमर्श : विविध संदर्भÓ शीर्षक पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा, जिसके संपादन का कार्य डॉ. पायल लिल्हारे (निवाड़ी, मध्यप्रदेश) द्वारा किया गया है। यह पुस्तक विकलांग-विमर्श के विभिन्न आयामों को उजागर करते हुए समकालीन संदर्भों में महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. ममता ठाकुर ने बताया कि यह संगोष्ठी भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में विकलांग-विमर्श के पुनर्मूल्यांकन का एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो समाज में समावेशी दृष्टिकोण को सुदृढ़ करेगा। वहीं 20वी राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक डॉ. गजेंद्र तिवारी ने सभी शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं जागरूक नागरिकों से इस आयोजन में अधिकाधिक संख्या में सहभागिता कर इसे सफल बनाने का आह्वान किया है।
यह संगोष्ठी न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगी, बल्कि सामाजिक समरसता एवं समावेशिता के नए आयाम स्थापित करने में भी सहायक सिद्ध होगी।

छत्तीसगढ़
कोंडागांव : वन मंत्री केदार कश्यप ने दहिकोंगा तेंदूपत्ता फड़ का किया निरीक्षण
वन मंत्री ने संग्राहकों से किया सीधा संवाद

कोंडागांव। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने आज रविवार को कोंडागांव जिले के दहिकोंगा स्थित तेंदूपत्ता फड़ का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने तेंदूपत्ता की गुणवत्ता देखी और संग्राहकों को हो रहे ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान मंत्री श्री कश्यप ने दो संग्राहकों के मोबाइल में स्वयं ऑनलाइन एंट्री कर भुगतान प्रक्रिया को पूरा कराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तेंदूपत्ता संग्राहकों को पारदर्शी और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है।
वन मंत्री ने संग्राहकों से सीधे संवाद कर उन्हें “तेंदूपत्ता तिहार” की बधाई और शुभकामनाएं दीं तथा शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े श्रमिकों की आय बढ़ाने और उनकी सुविधाओं में सुधार के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
इस अवसर पर कोंडागांव के वन मंडलाधिकारी चूड़ामणि सिंह, संयुक्त वन मंडलाधिकारी डॉ. आशीष कोटरिवार, परिक्षेत्र अधिकारी कोंडागांव, परिक्षेत्र अधिकारी दहिकोंगा सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़
जनगणना में लगे शिक्षकों के लिए दुर्घटना बीमा की मांग:छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन बोला: चुनाव ड्यूटी जैसी सुरक्षा मिले, 1 करोड़ का बीमा हो
रायपुर,एजेंसी। जनगणना कार्य में लगाए जाने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए 1 करोड़ रुपए के दुर्घटना बीमा की मांग उठी है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, जनगणना आयुक्त और स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र सौंपकर निर्वाचन ड्यूटी की तर्ज पर बीमा सुरक्षा देने की मांग की है।
ड्यूटी के दौरान दुर्घटना, गंभीर बीमारी या असामयिक मृत्यु की स्थिति में कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा जरूरी है।

चुनाव ड्यूटी जैसी सुरक्षा की मांग
संगठन का कहना है कि जब जिम्मेदारी राष्ट्रीय स्तर की है और जोखिम भी चुनावी ड्यूटी जैसा है, तो सुरक्षा मानकों में भेदभाव नहीं होना चाहिए। इसलिए जनगणना कार्य में तैनात हर शिक्षक और कर्मचारी को 1 करोड़ रुपए का बीमा कवर दिया जाए।
तीन प्रमुख तर्क रखे
एसोसिएशन ने शासन के सामने तीन प्रमुख बिंदु रखे—
- समान जोखिम, समान सुरक्षा: जनगणना ड्यूटी में भी चुनाव जैसी चुनौतियां और खतरे हैं।
- आर्थिक संबल: हादसे या मृत्यु की स्थिति में परिवार को सहायता मिले।
- मानसिक निश्चिंतता: बीमा सुरक्षा से कर्मचारी निर्भीक होकर काम कर सकेंगे।

एसोसिएशन की ओर से लिखा गया लेटर।
हाल की घटनाओं का दिया हवाला
एसोसिएशन ने जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों की मौत की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों ने बीमा सुरक्षा की जरूरत को और गंभीर बना दिया है।
टीचर्स एसोसिएशन ने मांग की है कि जनगणना अधिसूचना जारी होने के साथ ही बीमा संबंधी दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएं, ताकि जमीनी स्तर पर काम कर रहे हजारों शिक्षकों को सुरक्षा मिल सके।
प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा के साथ प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान सहित संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने भी इस मांग का समर्थन किया है।
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