छत्तीसगढ़
खेत एक एकड़ से कम:तरबूज, मिर्च, टमाटर और बैंगन उगाकर 4 गुना कमाई, नरेगा सुपरवाइजर की नौकरी छोड़ रामनारायण ने शुरू की मल्टी-लेयर फार्मिंग
जांजगीर-चांपा। जिले को धान की खेती के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यहां की आबोहवा में विदेशी किस्मों के फल भी मिठास घोल रहे हैं। करनौद गांव स्थित शिखा नर्सरी के संचालक रामनारायण जलतारे ने अपनी तकनीकी दक्षता और नवाचार से जिले की जलवायु में यूएसएम स्पेशल (कैप्सूल) तरबूज की खेती कर 100% सफलता हासिल की है।
यह प्रयोग इसलिए खास है क्योंकि यह किस्म आमतौर पर दूसरे राज्यों और अलग जलवायु के लिए उपयुक्त मानी जाती थी, लेकिन यहां के युवाओं ने इसे संभव कर दिखाया है। रामनारायण जलतारे ने बताया कि उनके पिता हॉर्टिकल्चर विभाग में थे, जहां से उन्हें बचपन में ही प्रेरणा मिली।
वे खुद भी नरेगा सुपरवाइजर के पद पर थे, लेकिन बागवानी के प्रति प्रेम ने उनसे नौकरी छुड़वा दी और उन्होंने अपनी नर्सरी स्थापित की। आज वे न केवल खुद खेती कर रहे हैं, बल्कि जिले के लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में अन्य किसानों को भी वैज्ञानिक पद्धति से खेती के लिए मार्गदर्शन दे रहे हैं।

उन्होंने पहली बार तरबूत उगाने का प्रयोग झर्रा ग्राम के कृषक गिरजानन्द चंद्रा के साथ मिलकर किया। 90 डेसिमल खेत में किए गए इस ट्रायल से उम्मीद से बेहतर नतीजे मिले हैं।
आमतौर पर तरबूज की इस किस्म यानी किरण वैरायटी के बीज आसानी से उपलब्ध नहीं होते, लेकिन बागवानी में 11 साल का अनुभव रखने वाले रामनारायण ने अपनी तकनीकी टीम के साथ मिलकर इसे सफल बनाया।
इस खेती से बंपर उत्पादन हुआ है। महज 90 डेसिमल खेत से ही 5 ट्रैक्टर ट्रॉली (लगभग 12-14 टन) तरबूज निकल रहा है, जबकि प्रति एकड़ 15 से 20 टन तक की क्षमता है। यह फसल मात्र 65 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है।
2 महीने की इस मेहनत से किसान को तरबूज से ही 1 से 1.5 लाख रुपए की आय हो रही है। कैप्सूल आकार का यह तरबूज अपनी जबरदस्त मिठास और बेहतर शेल्फ लाइफ के लिए जाना जाता है।
रामनारायण केवल पारंपरिक तरीके से खेती नहीं कर रहे, बल्कि उन्होंने मिश्रित फसल का बेहतरीन मॉडल पेश किया है। उन्होंने तरबूज की फसल के बीच ही मिर्च के पौधे लगाए हैं। जब तक तरबूज की हार्वेस्टिंग पूरी होगी, तब तक मिर्च के पौधे बड़े हो जाएंगे।
इसके अलावा वे इसी जमीन पर बैंगन और टमाटर का भी प्रायोगिक उत्पादन कर रहे हैं। इस मॉडल से 90 डेसिमल की जमीन से सालभर की आमदनी 4 गुना बढ़कर करीब 4 लाख रुपए तक होने का अनुमान है।
बिना किसी बड़े डिग्रीधारियों की मदद के रामनारायण अपनी तकनीक और अनुभव से ऐसी फसलें ले रहे हैं जिन्हें देखकर कृषि विशेषज्ञ भी हैरान हैं। उन्होंने ताइवान की रेड लेडी पपीता का भी सफल उत्पादन किया है।
वे अधिया मॉडल पर दूसरों की बंजर या कम उपजाऊ जमीनों को भी सोना उगलने लायक बना रहे हैं। उनकी नर्सरी में फल और सब्जियों के ए-टू-जेड पौधे उपलब्ध हैं।
रामनारायण का कहना है कि धान की पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत और गिरते जल स्तर को देखते हुए शिखा नर्सरी का यह प्रयास किसानों के लिए नई राह है। यदि सही तकनीक और बाजार की मांग को समझा जाए, तो जांजगीर की मिट्टी किसी भी फल या सब्जी के उत्पादन के लिए सक्षम है।
छत्तीसगढ़
अनिल अग्रवाल ने सिंहितराई पावर प्लांट हादसे पर दुख जताया, सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई
सक्ती/सिंघीतराई। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सिंहितराई पावर प्लांट हादसे पर सोशल मीडिया (एक्स) पर 27 अप्रैल 2026 को अपनी दूसरी पोस्ट में इस साल की शुरुआत में अपने बेटे के निधन और हाल ही में हुए बॉयलर हादसे, जिसमें 25 लोगों की जान गई, के बाद गहरे व्यक्तिगत और पेशेवर दुख के दौर पर बात की। सोमवार को अपनी पोस्ट में, अग्रवाल ने पिछले कुछ महीनों को अपने जीवन के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण समयों में से एक बताया और दोनों घटनाओं से जुड़े अपार दुख को व्यक्त किया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एथेना प्लांट कड़े सुरक्षा और सेफ्टी प्रोटोकॉल के तहत संचालित हो रहा था। इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी एनजीएसएल को सौंपी गई थी, जो भारत की विश्वसनीय महारत्न कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड और जनरल इलेक्ट्रिक के बीच साझेदारी है। यह काम अनुभवी टीमों, स्थापित प्रणालियों और उद्योग मानकों के सुरक्षा उपायों के साथ किया जा रहा था। इन सभी उपायों के बावजूद, उन्होंने कहा कि यह दुखद घटना हो गई, जो इस तरह की घटनाओं की अनिश्चितता को दर्शाती है।
उन्होंने आगे वेदांता की इस प्रतिबद्धता को दोहराया कि कंपनी प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी रहेगी और अपने सभी कार्यों में सुरक्षा, देखभाल और जिम्मेदारी पर लगातार ध्यान बनाए रखेगी।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा:
““सुना था वक्त अक्सर इम्तिहान लेता है, पिछले कुछ महीनों से मैं यह अनुभव भी कर रहा हूँ।
साल की शुरुआत में ही, मैंने पहले अपने नौजवान बेटे को खो दिया और फिर इस महीने, 14 अप्रैल को सिंहितराई पावर प्लांट में हुए अफसोसजनक हादसे ने मुझसे 25 बेशकीमती साथी छीन लिए। मैं ऐसी असामयिक मृत्यु का दर्द भली भाँति जानता हूँ।
दोनों ही हादसे, इतने अननेचुरल से, पीड़ा से भरे लगते हैं, जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता।
मुझे दुख और हैरत होती है सोचकर कि हमारे इस एथेना प्लांट में हमने सर्वोच्च सावधानी बरती, इस प्लांट की पूरी जिम्मेदारी भी हमने हिंदुस्तान की सबसे भरोसेमंद महारत्न कंपनी एनटीपीसी-जीई की पार्टनरशिप एनजीएसएल को सौंपी। कॉन्टैक्टर्स और एम्पलॉइज भी उनके थे। एक्सपरटाईज भी उनका था। और इसी भरोसे पे निश्चिंत होकर हमने इस प्लांट का रखरखाव और ऑपरेशन्स, आउटसोर्स किया था। फिर भी यह दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हो गया।
यह वैसा ही है जैसे अक्सर वाहन मालिक, अपना वाहन किसी भरोसेमंद ड्राइवर को दे देते हैं। और उम्मीद करते हैं कि वाहन चालक और वाहन, नियमों के साथ चलकर सलामत रहेंगे।
वेदांता के हर कांट्रैक्ट में सेफ्टी पर सबसे ज़्यादा फोकस रहता है। और एनटीपीसी और जीई की भी यही पॉलिसी रही है। उसके बाद भी इतनी बड़ी दुर्घटना हो जाए तो दिल टूट जाता है।
मेरे बेटे अग्निवेश सहित, जो 25 प्रियजन हमने खोए हैं, उन सभी जनों को मैं, वेदांता परिवार और अपनी ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
छत्तीसगढ़
बालोद : इसरो के यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम में चयनित होने वाली हिमांशी साहू का कलेक्टर ने किया सम्मान
सेजेस कन्नेवाड़ा की हिमांशी को उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं
बालोद। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम में चयनित होकर राज्य का मान बढ़ाने वाली स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कन्नेवाड़ा की छात्रा हिमांशी साहू को बालोद कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने सम्मानित किया। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने आज बालोद के संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान कुमारी हिमांशी साहू की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की भूरी-भूरी सराहना करते हुए उनके इस उपलब्धि को पूरे जिले के लिए गौरव बताया। इस अवसर पर कलेक्टर ने हिमांशी साहू को प्रशस्ति पत्र के अलावा शाॅल, श्रीफल भेंटकर उनका आत्मीय सम्मान किया।

इस अवसर पर कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने हिमांशी की उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने कुमारी हिमांशी साहू को कड़ी मेहनत कर जीवन में उपलब्धि हासिल करने की सीख भी दी। उल्लेखनीय है कि हिमांशी साहू स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कन्नेवाड़ा में कक्षा 9वीं में अध्ययनरत है। कुमारी हिमांशी ने 96 प्रतिशत अंकों के साथ कक्षा 8वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है।
छात्रा हिमांशी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम में पूरे राज्य में तीसरा स्थान प्राप्त कर अपने विद्यालय तथा संपूर्ण बालोद जिला का नाम रोशन किया है। इस अवसर पर कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने कुमारी हिमांशी के पिता अभय कुमार और माता श्रीमती सहिता साहू को भी सम्मानित कर उनकी सुपुत्री की महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस मौके पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक, अजय किशोर लकरा एवं नूतन कंवर सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़
जगदलपुर : विधायक किरण देव ने मोबाइल ऐप से स्वयं की अपने परिवार की जनगणना
नागरिकों से की डिजिटल भागीदारी की अपील
जगदलपुर। तकनीक और नवाचार के इस दौर में डिजिटल इंडिया के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए जगदलपुर विधायक किरण देव ने सोमवार को एक अनुकरणीय पहल के तहत जनगणना 2026 में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए स्व-गणना की प्रक्रिया पूरी की। उन्होंने भारत सरकार की जनगणना प्रक्रिया के तहत मोबाइल ऐप का उपयोग करते हुए अपने परिवार का विवरण स्वयं दर्ज किया। विधायक ने इस आधुनिक प्रक्रिया को अपनाकर यह संदेश दिया कि राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण कार्यों में तकनीक का समावेश न केवल पारदर्शिता लाता है, बल्कि नागरिकों के समय और श्रम की भी बचत करता है।

सोमवार को अपने निवास पर ऐप के माध्यम से जनगणना कार्य पूर्ण करने के बाद किरण देव ने स्थानीय नागरिकों और ग्रामीणों को इस प्रक्रिया से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जनगणना केवल शासकीय आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह भविष्य की योजनाओं, संसाधनों के आबंटन और जन-कल्याणकारी नीतियों के निर्धारण का सबसे सशक्त आधार है। विधायक ने कहा कि मोबाइल ऐप के माध्यम से स्वयं जानकारी दर्ज करना बेहद सरल और सुरक्षित है, जिससे डेटा की सटीकता बनी रहती है।
उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे भी इस डिजिटल माध्यम का अधिक से अधिक उपयोग करें और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में जनगणना कार्य हेतु अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने विश्वास जताया कि जब समाज का हर व्यक्ति तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगा, तभी विकास की धारा समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंच सकेगी।
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