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छत्तीसगढ़

दंतेवाड़ा : पत्थरों में उकेरी इतिहास की जीवंत गाथा : बारसूर का बत्तीसा मंदिर अद्भुत शिल्पकला का प्रतीक

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दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में स्थित बारसूर का बत्तीसा मंदिर भारतीय स्थापत्य कला, आध्यात्मिक आस्था और प्राचीन इतिहास का एक अनुपम संगम है। दंतेवाड़ा जिले के बारसूर नगर में स्थित यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह उस युग की उत्कृष्ट शिल्प परंपरा और वैज्ञानिक निर्माण तकनीक का जीवंत प्रमाण है। कभी नागवंशी शासकों की राजधानी रहा बारसूर आज भी “मंदिरों की नगरी” के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है।

बत्तीसा मंदिर 32 विशाल पत्थर के स्तंभों पर टिकी हुई

        बत्तीसा मंदिर का निर्माण 11 वीं शताब्दी में नागवंशीय शासक सोमेश्वर देव के काल में हुआ माना जाता है। शिलालेखों के अनुसार इसका निर्माण शक संवत 1130 (लगभग 1209 ईस्वी) में पूर्ण हुआ। इस मंदिर का नाम “बत्तीसा” इसलिए पड़ा क्योंकि इसकी संपूर्ण संरचना 32 विशाल पत्थर के स्तंभों पर टिकी हुई है। ये स्तंभ आठ पंक्तियों में अत्यंत संतुलित ढंग से स्थापित किए गए हैं, जो उस समय के वास्तु ज्ञान और इंजीनियरिंग कौशल को दर्शाते हैं।

मंदिर का निर्माण बिना चूना-गारा से

मंदिर की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसके निर्माण में पत्थरों को बिना चूना-गारा के जोड़ा गया है। प्रत्येक स्तंभ पर देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं और अलंकरणों की बारीक नक्काशी की गई है, जो उस समय के शिल्पकारों की अद्भुत दक्षता और सौंदर्यबोध को प्रकट करती है। मंदिर की संरचना चतुर्भुजाकार है और इसमें दो गर्भगृह बनाए गए हैं, जहां अलग- अलग शिवलिंग स्थापित हैं। मान्यता है कि इन शिवालयों में राजा और रानी अलग-अलग पूजा-अर्चना करते थे।

शिवलिंग एक विशेष यांत्रिक प्रणाली पर आधारित

         मंदिर के गर्भगृह के बाहर सुसज्जित नंदी बैल की प्रतिमा श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है। यहां यह भी विश्वास है कि नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहने से वह पूर्ण होती है। गर्भगृह के भीतर स्थापित शिवलिंग अपनी विशिष्ट संरचना के कारण अत्यंत रोचक है। बताया जाता है कि यह शिवलिंग एक विशेष यांत्रिक प्रणाली पर आधारित है, जो जल प्रवाह के प्रभाव से बिना घर्षण और बिना ध्वनि के घूम सकता है। यह प्राचीन भारतीय विज्ञान और तकनीकी समझ का अद्भुत उदाहरण माना जाता है।

        बारसूर का यह मंदिर केवल स्थापत्य और आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिलालेखों से ज्ञात होता है कि मंदिर के रख-रखाव हेतु केरामरूका ग्राम दान में दिया गया था और इसके निर्माण में तत्कालीन मंत्री, सचिव और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। वर्तमान में यह शिलालेख नागपुर के संग्रहालय में सुरक्षित है।
        इस मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथाएं भी इसे और अधिक रहस्यमयी बनाती हैं। मान्यता है कि बाणासुर ने इस क्षेत्र में अपनी राजधानी बसाई थी, जो आगे चलकर ऐतिहासिक बारसूर के रूप में विकसित हुई। यह स्थल दंडकारण्य क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक धारा का प्रमुख केंद्र रहा है।

विश्व की तीसरी सबसे बड़ी गणेश प्रतिमा विशेष आकर्षण का केन्द्र

        बारसूर में स्थित अन्य प्रसिद्ध मंदिर जैसे मामा-भांजा मंदिर और चंद्रादित्य मंदिर के साथ मिलकर बत्तीसा मंदिर बस्तर की समृद्ध विरासत को और अधिक सशक्त बनाता है। यहां विश्व की तीसरी सबसे बड़ी गणेश प्रतिमा विशेष आकर्षण का केन्द्र है, जो पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती है।राज्य सरकार और पुरातत्व विभाग द्वारा इस धरोहर के संरक्षण हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2003 में इसका पुनर्निर्माण और संरक्षण कार्य किया गया, जिससे इसकी मूल संरचना और सौंदर्य को सुरक्षित रखा जा सका।
         आज बत्तीसा मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यह न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह प्रदेश की प्राचीन कला, संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रतीक भी है। पत्थरों में उकेरी गई यह अद्भुत गाथा हर आगंतुक को अतीत की गौरवमयी यात्रा पर ले जाती है और भारतीय सभ्यता की समृद्धता का एहसास कराती है।

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कोरबा

देवरी का टूटा पुल बना हजारों ग्रामीणों की परेशानी, भाजपा नेता राजेश यादव ने शासन पर उठाए सवाल

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सुशासन तिहार में आवेदन के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, बरसात में स्कूल जाने वाले बच्चों की बढ़ेगी मुश्किल

कोरबा/चाकाबुड़ा। विकासखंड कटघोरा के ग्राम देवरी में लगभग एक वर्ष पूर्व क्षतिग्रस्त हुआ पुल आज भी पुनर्निर्माण की बाट जोह रहा है। बरसात नजदीक होने के बावजूद शासन-प्रशासन की उदासीनता से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। भाजपा झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ छत्तीसगढ़ के प्रदेश सह संयोजक राजेश यादव ने इस गंभीर समस्या को लेकर शासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

राजेश यादव ने बताया कि उन्होंने 19 मई 2026 को सुशासन तिहार के दौरान लिखित आवेदन देकर देवरी-कोराई तथा देवरी-चाकाबुड़ा मार्ग पर आवागमन बाधित होने की समस्या से प्रशासन को अवगत कराया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि बरसात शुरू होते ही पुल पर डाली गई मिट्टी बह जाएगी और दोनों ओर से संपर्क पूरी तरह टूट जाएगा, जिससे कोराई ग्राम पंचायत सहित कई गांवों का आवागमन प्रभावित होगा। इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि सबसे अधिक परेशानी क्षेत्र के स्कूली बच्चों को होगी। देवरी स्थित विद्यालयों में पढ़ने वाले बुंदेली, कसाईपाली, चाकाबुड़ा एवं आसपास के गांवों के विद्यार्थियों को बरसात के दिनों में लगभग 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी और कई विद्यार्थियों के नियमित विद्यालय पहुंचने पर भी संकट खड़ा हो सकता है।

राजेश यादव ने कहा कि यह केवल पुल का मामला नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीणों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और दैनिक जीवन से जुड़ा मुद्दा है। किसान अपनी उपज बाजार तक नहीं पहुंचा पाएंगे, मरीजों को अस्पताल जाने में कठिनाई होगी तथा आम लोगों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन का इस गंभीर विषय पर अब तक ध्यान नहीं देना अत्यंत चिंताजनक है।

उन्होंने जिला प्रशासन एवं राज्य शासन से मांग की है कि बरसात शुरू होने से पहले तत्काल नए पुल के निर्माण की स्वीकृति देकर कार्य प्रारंभ कराया जाए, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना से बचाव हो सके और क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को राहत मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों के साथ मिलकर जनहित में आंदोलन करने पर भी विचार किया जाएगा।

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छत्तीसगढ़

पिस्टल की नोक पर व्यापारी का अपहरण:मरवाही में पुलिसकर्मी बनकर आए बदमाश, जबरन उठाया, 25 दिन पहले सर्राफा व्यापारी की हुई थी हत्या

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, एजेंसी। छत्तीसगढ़ की गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में दिनदहाड़े 2 बदमाश पुलिसकर्मी बनकर घर आए और बंदूक की नोक पर व्यापारी को किडनैप कर लिया। जबरन व्यापारी को पकड़कर अपनी गाड़ी में बैठाकर साथ ले गए। इस घटना का लाइव CCTV वीडियो भी सामने आया है। मामला मरवाही थाना इलाके के उषाढ गांव का है।

पुलिस केस दर्ज कर सीसीटीवी की मदद से आरोपियों और व्यापारी की तलाश शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक फिरौती या किसी और चीज को लेकर कोई कॉल या मैसेज नहीं आया है। इससे 25 दिन पहले सर्राफा व्यापारी प्रदीप सोनी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

क्या है पूरा मामला ?

जानकारी के मुताबिक, व्यापारी गिरीश यादव अपने गांव उषाढ में ही किराना, छड़-सीमेंट और आटा चक्की का व्यवसाय करते हैं। शनिवार (20 जून) की सुबह 11 बजे गिरीश यादव घर के गलियारे पर सो रहे थे। उनका बेटा पंकज दुकान पर बैठा था।

इसी दौरान एक नीले रंग की कार से दो व्यक्ति वहां पहुंचे। बदमाशों ने दुकान से सिगरेट और पानी खरीदा। उसके बाद पंकज से उसके पिता के बारे में पूछा। पंकज जैसे ही अपने पिता को बुलाने अंदर जाने लगा, दोनों बदमाश जबरन घर में घुस गए। उन्होंने सो रहे गिरीश यादव को उठाया और स्टील रंग की पिस्तौल दिखाकर खुद को पुलिसकर्मी बताने लगे।

व्यापारी गिरीश यादव।

व्यापारी गिरीश यादव।

गोली मारने की धमकी, कार में बैठा ले गए

विरोध करने पर बदमाशों ने गिरीश यादव को पैर में गोली मारने की धमकी दी, उसे जबरन कार में बैठाकर बरौर बस्ती की ओर ले गए। परिजन चिल्लाते रहे, लेकिन वो रुके नहीं। पंकज ने कार के नंबर का कुछ हिस्सा ‘OD 8552’ देखा था।

यह वारदात घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। जिसमें बदमाश जबरन व्यापारी को उठाकर अपने साथ ले जा रहे हैं। इसकी जानकारी लगने पर व्यापारी के पत्नी का मुंहबोला भाई मनीष जायसवाल ने बरौर में कार को रोकने की कोशिश की, लेकिन बदमाश मरवाही की तरफ तेजी से भाग गए।

पत्नी ने दर्ज कराई शिकायत

पत्नी दुर्गा यादव ने मामले की शिकायत मरवाही थाने में दर्ज कराई है। जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने इसकी जांच की, जब पता चला कि वो पुलिस वाले नहीं है, तो केस दर्ज कर तलाश शुरू की गई। पुलिस की कई टीमें अलग-अलग जगह दबिश दे रही है।

एडिशनल एसपी अविनाश मिश्रा ने बताया कि, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 140(3), 3(5), 333, 351(3) और आर्म्स एक्ट की धारा 25, 27 के तहत केस दर्ज कर लिया है। सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों की तलाश की जा रही है।

25 दिन पहले सर्राफा व्यापारी की हुई थी हत्या

इससे पहले, 26 मई को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में सर्राफा व्यापारी प्रदीप सोनी की कोटमी साप्ताहिक बाजार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बाइक सवार बदमाश उनसे सोने-चांदी का बैग भी छीनकर भाग गए थे। इसके लिए बिहार-झारखंड से शूटर बुलाए गए थे।

इस वारदात का मास्टरमाइंड बिलासपुर जिले के बिटकुला गांव का रहने वाला खुशीराम साहू है। उसने बाजार में सोना-चांदी व्यापारियों की रेकी कर पूरी साजिश रची थी। इस काम में उसके भतीजे राजाराम साहू ने भी मदद की। पुलिस ने मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। सोने-चांदी के जेवरात भी बरामद कर लिया गया था।

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छत्तीसगढ़

जांजगीर-चांपा में ISI स्लीपर सेल गिरफ्तार:किराए के मकान में रह रहा था, पाकिस्तान, सऊदी अरब के नंबरों से ISI संपर्क के सबूत मिले

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जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एक संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। यह गिरफ्तारी अकलतरा थाना क्षेत्र में किरायेदार सत्यापन अभियान के दौरान हुई।

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान सेवक सिंह के रूप में हुई है, जो पंजाब के तरन तारण जिले के पट्टी का रहने वाला है। उसके खिलाफ अकलतरा थाने में बीएनएस की धारा 152 और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

दरअसल, पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय के निर्देश पर जिले में संदिग्ध और आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली थी कि अकलतरा के मिनीमाता चौक स्थित एक मकान में बाहरी राज्यों के कुछ लोग किराए पर रह रहे हैं। सूचना मिलने पर पुलिस वहां किरायेदारों का सत्यापन करने पहुंची, जहां सेवक सिंह संदिग्ध परिस्थितियों में मिला।

सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और वहां रह रहे किरायेदारों का वेरिफिकेशन शुरू किया। जांच के दौरान सेवक सिंह की गतिविधियां संदिग्ध लगीं, जिसके बाद पुलिस ने उससे पूछताछ की।

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में सेवक सिंह ने खुद को पाकिस्तान सीमा के पास के इलाके का रहने वाला बताया, लेकिन उसके जवाबों से पुलिस संतुष्ट नहीं हुई। शक गहराने पर पुलिस ने उसका मोबाइल फोन खंगाला।

जांच में मोबाइल से पाकिस्तान, सऊदी अरब और कुछ अन्य विदेशी नंबरों से संपर्क होने के सबूत मिलने का दावा किया गया। इन्हीं जानकारियों के आधार पर पुलिस ने उस पर ISI से जुड़े होने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

ISI समर्थित नेटवर्क से संपर्क का आरोप

प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान में बैठे ISI समर्थित लोगों के संपर्क में था। जांच में यह भी सामने आया है कि वह व्हाट्सएप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी नंबरों और संदिग्ध लोगों से लगातार बातचीत करता था।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी पर छत्तीसगढ़ के कुछ महत्वपूर्ण लोगों, संवेदनशील जगहों, लोकेशन, वाहनों के नंबर और फोटो-वीडियो जैसी जानकारियां साझा करने का भी संदेह है। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ जारी है।

मोबाइल से मिले महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत

पुलिस को आरोपी के मोबाइल फोन से कई जरूरी डिजिटल सबूत मिले हैं। इसमें व्हाट्सएप चैट, वीडियो कॉल के रिकॉर्ड, कॉल रिकॉर्डिंग और कुछ अन्य जानकारियां शामिल हैं।

पुलिस ने मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है और उसे फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है, ताकि उसके सभी संपर्कों और गतिविधियों की अच्छे से जांच की जा सके।

हथियार मिलने के बाद टारगेट किलिंग की थी साजिश

पुलिस जांच में यह भी बात सामने आई है कि आरोपी को पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार मिलने की योजना थी। हथियार मिलने के बाद उसे वहां बैठे लोगों के कहने पर किसी खास व्यक्ति या जगह को निशाना बनाने जैसे काम दिए जा सकते थे।

हालांकि पुलिस का कहना है कि इसकी अभी पूरी पुष्टि नहीं हुई है और जांच व फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।

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