कोरबा
आदिवासियों की जमीन कब्जाने की कोशिशों के खिलाफ किसान सभा ने किया जबरदस्त प्रदर्शन
कोरबा/भैसमा। कोरबा जिले में भैसमा तहसील अंतर्गत ग्राम पतरापाली के आदिवासी किसानों के जमीन को कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा बेनामी खरीद के जरिए कब्जा करने की कोशिश के खिलाफ गांव के लोगों ने 08 मई को यहां तानसेन चौक से रैली निकालकर जिलाधीश कार्यालय पर जबरदस्त प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा ने किया। डिप्टी कलेक्टर टी आर भारद्वाज ने किसानों की समस्या को सुना और ज्ञापन लेते हुए जांच करने हेतु गांव में शिविर लगाने का आश्वासन दिया।
उल्लेखनीय है कि ग्राम पतरापाली एक आदिवासी बाहुल्य गांव हैं और लगभग सभी आदिवासी या तो निरक्षर हैं या बहुत कम पढ़ें लिखे हैं। उन्हें भूमि कानूनों के संबंध में उनकी जानकारी बहुत कम है, जिसका फायदा, उनकी जमीन को हड़पने के लिए प्रभावशाली तबके के कई लोग सक्रिय हैं।
किसान सभा के इस प्रदर्शन में शामिल घसिया राम पिता दौलतराम, पुनिराम पिता करन सिंह, राजेश पिता गेदाराम, तिजराम पिता घसीराम, भूखनराम पिता लोहरी, मिलक राम पिता उजित राम, धनीराम पिता भालेराम, जीवन सिंह पिता घसिया राम, चमरा सिंह पिता नेतराम, महेत्तर पिता तिजराम आदि ने बताया कि वे पतरापाली गांव के निवासी हैं। खेती-किसानी ही इनकी आजीविका का साधन है और अपने पूर्वजों से प्राप्त जमीन पर वे खेती कर रहे हैं। वे अपनी जमीन पर आज दिनांक तक काबिज हैं, लेकिन पिछले एक माह से शहरों के कुछ लोग उनके गांवों में आकर उनकी कृषि भूमि को अपना बता रहे हैं। वे इस जमीन के पंजीयन के कुछ कागजात भी दिखा रहे हैं और उन पर अपनी जमीन छोड़ने का दबाव बना रहे है या फिर उन्हें बेदखल करने की धमकी दे रहे हैं। वे इन लोगों को पहचानते तक नहीं है।
इन ग्रामीणों ने बताया कि ये बाहरी लोग वर्ष 1990 में ही उनके पूर्वजों से उनकी जमीन खरीदने का दावा कर रहे हैं। मामला तब गंभीर हो गया, जब ऐसे ही एक मामले में एक गैर-आदिवासी ने सगे भाईयों मंगल सिंह और भूखन लाल पिता लोहरी को उसकी जमीन से बेदखल करके और उस जमीन पर घेरा डालकर कब्जा कर लिया। इसके बाद सभी आदिवासी अपनी जमीन से जबरन बेदखली की आशंका से डरे हुए हैं।
छत्तीसगढ़ किसान सभा के संयुक्त सचिव प्रशांत झा, जिला सचिव दीपक साहू, सीटू के राज्य महासचिव एस एन बनर्जी ने बताया कि ऐसा ही एक प्रकरण वर्ष 1999 में सामने आया था, जिसमें न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी कोरबा ने यह पाया था कि गैर कानूनी तरीके से आदिवासी भूमि को गैर आदिवासी को अंतरित किया गया था। न्यायालय ने प्रकरण क्रमांक 8/अ-23/99-2000 के जरिए पीड़ित आदिवासी के पक्ष में फैसला सुनाया था। उन्होंने कहा कि सभी आदिवासियों के प्रकरण लगभग ऐसे ही हैं, जिनमें उनकी भूमि का 40-50 साल पहले विक्रय होना बताया जा रहा है, जबकि भूमि पर मूल भूस्वामी अभी तक काबिज है। ये सभी भूमि अंतरण बेनामी है और अवैध है, क्योंकि आदिवासी भूमि का किसी भी गैर-आदिवासी को अंतरण नहीं हो सकता।
प्रशासन ने शिकायतों की जांच करने के लिए गांव में शिविर लगाकर भूमि स्वामित्व का निराकरण करने का आश्वाशन दिया है। किसान सभा और सीटू ने आदिवासी किसानों के पक्ष में सकारात्मक कार्यवाही न होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है। उन्होंने आशंका जताई है कि केवल पतरापाली ही नहीं, आसपास के अन्य गांवों में भी आदिवासियों की जमीन हड़पने के लिए ऐसे बेनामी फर्जी सौदे हुए होंगे, इसलिए इस क्षेत्र के गांवों में शिविर लगाकर वास्तविक भूमि स्वामित्व का सत्यापन किए जाने की जरूरत है।
कोरबा
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 : धान उपार्जन हेतु किसान पंजीयन 1 जुलाई से 31 अक्टूबर तक, एग्री-स्टैक आईडी अनिवार्य
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने खाद्य सहित संबंधित अधिकारियों के दिये आवश्यक दिशा निर्देश
कोरबा। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करने के इच्छुक किसानों के लिए पंजीयन एवं संशोधन की प्रक्रिया 1 जुलाई 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक की जाएगी। छत्तीसगढ़ शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए किसानों का एग्री-स्टैक पोर्टल में पंजीयन तथा फार्मर आईडी/एग्री-स्टैक आईडी होना अनिवार्य होगा।
जारी निर्देशों के अनुसार, खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में पंजीकृत किसानों को वर्ष 2026-27 के लिए भी पंजीकृत माना जाएगा। ऐसे किसानों को नया पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन यदि उनकी भूमि, खसरा, बैंक विवरण, नामांतरण, बंटवारा, फौती अथवा अन्य कारणों से कोई परिवर्तन हुआ है तो संबंधित समिति/उपार्जन केंद्र में जाकर संशोधन कराना होगा। यह प्रक्रिया विभागीय वेबसाइट fcs.cg.gov.in के ऑनलाइन सोसायटी मॉड्यूल के माध्यम से पूरी की जाएगी।
शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस वर्ष किसानों को कृषि विभाग के एकीकृत किसान पोर्टल में पृथक पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी, किंतु एग्री-स्टैक आईडी के साथ धान विक्रय हेतु संबंधित सभी खसरों की फार्मर आईडी लिंक होना आवश्यक रहेगा। वन पट्टाधारी, डूबान क्षेत्र के कृषक, शासकीय पट्टेदार, कोटवार, संस्थागत कृषक, अधिया/रेगहा, बटाईदार तथा लीज पर खेती करने वाले कृषकों के लिए भी एग्री-स्टैक में पंजीयन अनिवार्य किया गया है। ऐसे प्रकरणों में अधिकृत मॉड्यूल के माध्यम से प्राधिकरण और पंजीयन की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए शासन द्वारा आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण प्रणाली को इस वर्ष भी लागू रखा गया है। धान विक्रय के समय किसान स्वयं अथवा उनके द्वारा नामांकित नॉमिनी के माध्यम से बायोमेट्रिक आधारित खरीदी प्रणाली के जरिए धान बेच सकेंगे। पंजीयन के दौरान किसान के साथ एक नॉमिनी का आधार विवरण भी दर्ज किया जाएगा। नॉमिनी के रूप में किसान के परिवार के सदस्य अथवा निकट संबंधियों को मान्य किया गया है। खरीदी केंद्रों में संभावित तकनीकी अथवा प्रमाणीकरण संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु ट्रस्टेड पर्सन की नियुक्ति भी कलेक्टर द्वारा की जाएगी।
निर्देशों में कहा गया है कि नवीन किसान पंजीयन, पुराने किसानों के खसरा मैपिंग, बैंक विवरण संशोधन तथा अधिया/रेगहा हेतु नॉमिनी पंजीयन की कार्रवाई 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक की जाएगी। इसी अवधि में वनाधिकार पट्टाधारी, डूबान श्रेणी के कृषकों तथा संस्थागत कृषकों का नवीन पंजीयन भी किया जाएगा। वहीं नॉमिनी संशोधन की सुविधा 1 जुलाई 2026 से धान खरीदी अवधि तक उपलब्ध रहेगी। किसानों की फसल एवं रकबे की प्रविष्टि डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से 15 अगस्त से 31 अक्टूबर 2026 तक की जाएगी।
राज्य शासन के दिशा निर्देश के तहत कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने खाद्य अधिकारी, समितियों प्रबंधक सहित संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि किसान पंजीयन की पूरी प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा में, पारदर्शी और सुचारु रूप से पूर्ण कराई जाए। साथ ही किसानों की सुविधा के लिए समिति स्तर पर आवश्यक प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक किसान समय पर पंजीयन कर समर्थन मूल्य पर धान विक्रय का लाभ प्राप्त कर सकें।
कोरबा
षष्ठम विधानसभा का दशम् सत्र 13 जुलाई से
अधिकारी-कर्मचारियों के मुख्यालय छोड़ने पर प्रतिबंध
कोरबा। छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी षष्ठम् विधानसभा के दशम् सत्र आगामी 13 जुलाई से प्रारंभ होकर 17 जुलाई तक रहेगा। जिसमें विधानसभा प्रश्नों का उत्तर निर्धारित समयावधि में शासन/वरिष्ठ कार्यालय की ओर भेजा जाना आवश्यक है। इस संबंध में कलेक्टर कार्यालय कोरबा द्वारा आदेश जारी कर सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे आदेश जारी दिनांक 23 जून से 17 जुलाई 2026 तक कलेक्टर के अनुमति के बिना मुख्यालय से बाहर नहीं जायेंगे।
कोरबा
निजी कोचिंग संस्थानों से मांगी गई जानकारी
जिले के सभी कोचिंग संस्थानों को 7 दिवस के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश
कोरबा। उच्चतम न्यायालय के आदेश तथा छत्तीसगढ़ शासन, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में जिला शिक्षा अधिकारी, कोरबा द्वारा जिले में संचालित समस्त निजी कोचिंग संस्थानों से आवश्यक जानकारी निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा सभी संबंधित संस्थानों को पत्र प्रेषित कर समय-सीमा के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया है।
जारी निर्देशों के अनुसार निजी कोचिंग संस्थानों से संस्थान के पंजीयन, विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था, शिकायत निवारण तंत्र, मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण, अग्नि सुरक्षा, आपदा प्रबंधन तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की जाएगी। यह जानकारी शासन एवं संबंधित प्राधिकरणों को प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की प्रक्रिया के अंतर्गत संकलित की जा रही है।
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा स्पष्ट किया गया है कि जिले में संचालित सभी निजी कोचिंग संस्थान निर्धारित प्रपत्र में वांछित जानकारी पत्र प्राप्ति के 7 दिवस के भीतर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कोरबा में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें। प्रतिवेदन में संस्थान का नाम, पता, संचालक का नाम, मोबाइल नंबर, पंजीयन संबंधी विवरण, विद्यार्थियों की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, शिकायत निवारण समिति/प्रकोष्ठ की जानकारी, मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण हेतु किए गए उपाय तथा अन्य आवश्यक बिंदुओं का उल्लेख किया जाना आवश्यक होगा।
जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि यह कार्रवाई विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा, संस्थागत पारदर्शिता तथा कोचिंग संस्थानों में आवश्यक मानकों के पालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है। सभी निजी कोचिंग संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि वे इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समय-सीमा में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं। निर्धारित समयावधि में जानकारी प्रस्तुत नहीं करने वाले संस्थानों के संबंध में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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