देश
बालेन सरकार का नया कड़ा फरमान, नेपाल में ID कार्ड बिना भारतीयों की एंट्री की बैन ! R*मुस्लिम बताए वजह
काठमांडू, एजेंसी। नेपाल ने भारत से आने वाले लोगों के लिए सीमा पर सुरक्षा जांच कड़ी कर दी है। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब जोगबनी सीमा चौकी से नेपाल में प्रवेश करने वाले भारतीय नागरिकों को पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य रोहिंग्या मुस्लिमों (R*Muslims) की अवैध घुसपैठ, आपराधिक गतिविधियों और संदिग्ध लोगों की आवाजाही पर रोक लगाना है । फिलहाल यह फैसला मोरंग जिला सुरक्षा समिति ने लिया है। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य अवैध घुसपैठ, आपराधिक गतिविधियों और संदिग्ध लोगों की आवाजाही पर रोक लगाना है।

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक यह कदम किसी कूटनीतिक विवाद के तहत नहीं बल्कि आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। हालांकि दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी “ओपन बॉर्डर” व्यवस्था जारी रहेगी। अब नेपाल जाने वाले भारतीय यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपने साथ आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी या अन्य वैध पहचान दस्तावेज जरूर रखें।भारत और नेपाल के बीच लगभग 1,850 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है, जहां दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग रोजाना व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और पारिवारिक कारणों से सीमा पार करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में सीमा पार तस्करी, अवैध गतिविधियों और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए नेपाल निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना चाहता है। नेपाल सरकार ने साफ किया है कि यह कदम भारत-नेपाल के ऐतिहासिक और करीबी संबंधों को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा और रिकॉर्ड प्रबंधन बेहतर करने के लिए उठाया गया है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नेपाल प्रशासन को आशंका है कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बाद रोहिंग्या मुसलमान या अवैध घुसपैठिए नेपाल की ओर आने की कोशिश कर सकते हैं।
नेपाल के अधिकारियों ने कहा कि सीमा पर विशेष निगरानी खासकर ट्रेनों के आने के समय बढ़ाई गई है, क्योंकि एक साथ सैकड़ों लोग सीमा पार करते हैं। ऐसे समय यात्रियों के पहचान पत्र जांचने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सीमा सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित खोजी कुत्तों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम फरार अपराधियों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भी जरूरी है। भारत और नेपाल के बीच दशकों पुरानी खुली सीमा व्यवस्था है, जहां दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में सुरक्षा चिंताओं के कारण निगरानी बढ़ाने की मांग लगातार उठती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की यह सख्ती आने वाले समय में सीमा प्रबंधन और भारत-नेपाल सुरक्षा सहयोग को नया आयाम दे सकती है।
देश
पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट जारी, यहां चेक करें प्रमुख शहरों का भाव
मुंबई, एजेंसी। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर फिलहाल आम लोगों को राहत मिलती दिखाई दे रही है। तेल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) हर दिन सुबह 6 बजे ईंधन के नए रेट जारी किए लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू स्तर पर कीमतों को स्थिर बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

Middle East तनाव से बढ़ी चिंता
हाल के दिनों में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ी है, क्योंकि दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। यदि यहां शिपमेंट प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
घरेलू ईंधन कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं
हालांकि, भारत सरकार और तेल कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि फिलहाल घरेलू ईंधन कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा। कंपनियां बाजार के उतार-चढ़ाव का कुछ असर खुद वहन कर सकती हैं ताकि उपभोक्ताओं पर अचानक बोझ न पड़े।
आज देश के बड़े शहरों में पेट्रोल के दाम
नई दिल्ली – 94.77 रुपए प्रति लीटर
मुंबई – 103.54 रुपए प्रति लीटर
कोलकाता – 105.45 रुपए प्रति लीटर
चेन्नई – 100.85 रुपए प्रति लीटर
नोएडा – 95.05 रुपए प्रति लीटर
गुरुग्राम – 95.65 रुपए प्रति लीटर
बेंगलुरु – 102.96 रुपए प्रति लीटर
हैदराबाद – 107.46 रुपए प्रति लीटर
जयपुर – 104.56 रुपए प्रति लीटर
लखनऊ – 94.73 रुपए प्रति लीटर
पटना – 105.23 रुपए प्रति लीटर
चंडीगढ़ – 94.30 रुपए प्रति लीटर
भुवनेश्वर – 101.11 रुपए प्रति लीटर
तिरुवनंतपुरम – 107.48 रुपए प्रति लीटर
आज डीजल के ताजा रेट
नई दिल्ली – 87.67 रुपए प्रति लीटर
मुंबई – 90.03 रुपए प्रति लीटर
कोलकाता – 92.02 रुपए प्रति लीटर
चेन्नई – 92.40 रुपए प्रति लीटर
नोएडा – 88.19 रुपए प्रति लीटर
गुरुग्राम – 88.10 रुपए प्रति लीटर
बेंगलुरु – 90.99 रुपए प्रति लीटर
हैदराबाद – 95.70 रुपए प्रति लीटर
जयपुर – 90.07 रुपए प्रति लीटर
लखनऊ – 87.86 रुपए प्रति लीटर
पटना – 91.49 रुपए प्रति लीटर
चंडीगढ़ – 82.45 रुपए प्रति लीटर
भुवनेश्वर – 92.69 रुपए प्रति लीटर
तिरुवनंतपुरम – 96.48 रुपए प्रति लीटर
प्रीमियम ईंधन हुआ महंगा
तेल कंपनियों ने प्रीमियम फ्यूल की कीमतों में भी बदलाव किया है। इंडियन ऑयल के XP100 पेट्रोल की कीमत में ₹11 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। अब इसकी कीमत करीब ₹160 प्रति लीटर पहुंच गई है। यह ईंधन मुख्य रूप से लग्जरी कारों और हाई-परफॉर्मेंस बाइकों में इस्तेमाल होता है। इसके अलावा Xtra Green डीजल की कीमत भी बढ़ाई गई है, जो अब लगभग ₹92.99 प्रति लीटर हो गई है।
क्या आगे बढ़ सकते हैं दाम?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल सरकार और OMCs उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश कर रही हैं।
देश
हफ्ते की शुरुआत में बाजार धड़ाम, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट से निवेशकों में घबराहट
मुंबई, एजेंसी। रविवार को पीएम मोदी के गोल्ड न खरीदने की अपील के बाद आज सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट बढ़ गई और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों बड़े इंडेक्स भारी गिरावट के साथ कारोबार करने लगे। ग्लोबल तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और महंगाई को लेकर बढ़ती चिंता ने बाजार पर दबाव बनाया।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स करीब 900 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 250 अंकों से अधिक फिसल गया। शुरुआती कारोबार में लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में दिखाई दिए।

बाजार खुलते ही बढ़ी गिरावट
30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,328 के मुकाबले करीब 76,600 के स्तर पर खुला। कारोबार शुरू होने के कुछ ही मिनटों में इसमें और गिरावट आई और इंडेक्स लगभग 944 अंक टूटकर 76,300 के आसपास पहुंच गया।
वहीं, निफ्टी 50 भी पिछले बंद 24,176 से नीचे खुला और शुरुआती कारोबार में 23,900 के करीब पहुंच गया। बाजार में तेज बिकवाली के चलते निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर नजर आया।
बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें
1. Middle East Tension से बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता फिर बढ़ गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ा और निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी।
2. Crude Oil Prices में तेज उछाल
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। तेल महंगा होने से भारत जैसे आयात करने वाले देशों पर दबाव बढ़ता है। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई देता है।
3. निवेशकों में बढ़ा डर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई, ग्लोबल अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की सतर्कता ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया है।
सभी सेक्टर में बिकवाली
सोमवार की गिरावट में आईटी, बैंकिंग, फार्मा और मेटल सेक्टर के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। कई बड़ी कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे:
- TCS
- Infosys
- Tech Mahindra
- ICICI Bank
- Kotak Mahindra Bank
- Tata Steel
- Sun Pharma
- ITC
लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखी गई।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक ग्लोबल तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे समय में निवेशकों को घबराहट में फैसले लेने से बचना चाहिए और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।
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पश्चिम एशिया संकट पर भारत अलर्ट, राजनाथ सिंह ने मंत्रियों साथ की हाईलेवल मीटिंग
नई दिल्ली, एजेंसी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया में उभरती स्थिति पर नज़र रखने के लिए गठित मंत्रियों के अनौपचारिक अधिकार प्राप्त समूह (IGoM) की बैठक की अध्यक्षता की।
आप को बता दें कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे माल की कीमतों में आई तेजी के बीच एडहेसिव (चिपकाने वाले उत्पाद) और निर्माण रसायन बनाने वाली कंपनी पिडिलाइट इंडस्ट्रीज कीमतों में एक और दौर की वृद्धि पर विचार कर रही है। कंपनी के प्रबंध निदेशक सुधांशु वत्स ने यह जानकारी दी। फेविकोल, डॉ. फिक्सिट, फेवीक्विक और एम-सील जैसे ब्रांड की मालिक कंपनी अप्रैल और मई में पहले ही दो बार कीमतें बढ़ा चुकी है। वत्स ने कंपनी के तिमाही नतीजों की घोषणा के बाद संवाददाताओं से कहा कि कंपनी के कच्चे माल की लागत, जो मुख्य रूप से कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों पर आधारित है, पश्चिम एशिया संकट के कारण भारित औसत आधार पर 40-50 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

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