कोरबा
‘सेवा सेतु’- छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजीटल प्रशासन का नया अध्यायआम नागरिक डिजीटल सेवा का उठा सकते हैं लाभ-कलेक्टर
कोरबा। छत्तीसगढ़ में शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में “सेवा सेतु” एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सेवाओं को आम नागरिकों तक सरल,त्वरित और डिजिटल माध्यम से पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी सोच का परिणाम है कि अब आय,जाति, निवास प्रमाण-पत्र, विवाह पंजीयन, राशन कार्ड, भू-नकल सहित 441 से अधिक शासकीय सेवाएं एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही है। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सेवा सेतु अन्तर्गत उपलब्ध सेवाओं का आन लाईन माध्यम में लाभ उठा सकते हैं। इसमें समय सीमा निर्धारित है।

डिजिटल सुशासन का प्रभावी माध्यम
पहले नागरिकों को अलग-अलग विभागों की सेवाओं के लिए विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। प्रमाण-पत्र बनवाने जैसी मूलभूत सेवाओं में समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों की बड़ी खपत होती थी। “सेवा सेतु” ने इस पारंपरिक व्यवस्था को बदलते हुए नागरिकों को “वन स्टॉप सॉल्यूशन” उपलब्ध कराया है। अब लोग ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर रहे हैं और निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
राज्य शासन की यह पहल केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव का भी संकेत है। यह व्यवस्था नागरिकों को यह भरोसा दिला रही है कि शासन उनकी सुविधा और अधिकारों को प्राथमिकता दे रहा है।
86 से बढ़कर 441 सेवाएं
छत्तीसगढ़ में पहले ई-डिस्ट्रिक्ट प्लेटफॉर्म के माध्यम से केवल 86 सेवाएं उपलब्ध थीं। समय की आवश्यकता को देखते हुए इसका उन्नत संस्करण “सेवा सेतु” विकसित किया गया,जिसमें अब 441 सेवाएं जोड़ी जा चुकी हैं। इनमें 54 नई सेवाएं शामिल हैं, जबकि विभिन्न विभागों की 329 री-डायरेक्ट सेवाओं का भी सफल एकीकरण किया गया है। तीस से अधिक विभाग इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं, जिससे नागरिकों को अलग-अलग पोर्टल या कार्यालयों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनी हैं।
समयबद्ध सेवा का भरोसा
छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत नागरिकों को निर्धारित समय-सीमा में सेवाएं प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। “सेवा सेतु” इसी अधिकार को व्यवहारिक रूप से मजबूत कर रहा है। पिछले 28 महीनों के आंकड़े इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाते हैं। इस अवधि में 75 लाख 70 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 68 लाख 41 हजार से अधिक मामलों का निराकरण किया गया। इनमें 95 प्रतिशत से अधिक आवेदन तय समय-सीमा में निपटाए गए। यह आंकड़ा प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
प्रमाण-पत्र सेवाओं की सबसे अधिक मांग
चिप्स कार्यालय के अनुसार सबसे अधिक आवेदन आय प्रमाण-पत्र के रहे, जिनकी संख्या 32 लाख से अधिक है। इसके अलावा मूल निवास प्रमाण-पत्र, अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण-पत्र, अनुसूचित जाति एवं जनजाति प्रमाण-पत्र, विवाह प्रमाण-पत्र और भू-नकल संबंधी सेवाओं का भी बड़े पैमाने पर उपयोग हुआ है।
यह दर्शाता है कि नागरिकों की दैनिक जरूरतों से जुड़ी सेवाओं को डिजिटल माध्यम में लाना कितना आवश्यक था। अब ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोग भी कॉमन सर्विस सेंटर, लोक सेवा केंद्र और इंटरनेट आधारित सेवाओं के माध्यम से सुविधाओं का लाभ उठा पा रहे हैं।
व्हाट्सएप तक पहुंची सरकारी सेवाएं तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए अब “सेवा सेतु” की सेवाओं को व्हाट्सएप से भी जोड़ा गया है। इससे लोगों को जानकारी प्राप्त करने और सेवाओं तक पहुंचने में और अधिक सुविधा मिल रही है। अब तक 3.3 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजेक्शन इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से किए जा चुके हैं। यह कदम डिजिटल इंडिया की अवधारणा को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
पारदर्शिता और विश्वास का नया मॉडल
“सेवा सेतु” केवल एक पोर्टल नहीं, बल्कि नागरिक और शासन के बीच भरोसे का नया सेतु बनता जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ्लो प्रणाली के कारण आवेदन प्रक्रिया की निगरानी संभव हुई है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और अनावश्यक विलंब में कमी आई है। राज्य सरकार की यह पहल प्रशासनिक सुधार, तकनीकी नवाचार और नागरिक सुविधा का समन्वित उदाहरण है। यदि इसी गति से सेवाओं का विस्तार और गुणवत्ता सुधार जारी रहा, तो “सेवा सेतु” आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।
डिजिटल युग में सुशासन का अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें समय पर और सरल तरीके से जनता तक पहुंचाना है। “सेवा सेतु” इसी सोच को साकार कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म छत्तीसगढ़ में प्रशासन को अधिक मानवीय, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। निश्चित रूप से “सेवा सेतु” आने वाले वर्षों में राज्य की डिजिटल प्रशासनिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कोरबा
कोरबा प्रेस क्लब में जयसिंह और अरुण साव आमने-सामने:शपथ ग्रहण समारोह में विकास पर सियासी बहस, उपलब्धियों और चुनावी नतीजों को लेकर तीखी नोकझोंक
कोरबा। कोरबा प्रेस क्लब के शपथ ग्रहण समारोह का मंच गुरुवार को उस समय राजनीतिक रंग में रंग गया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने प्रदेश सरकार के ढाई साल के कार्यकाल पर सवाल उठाए। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव और उद्योग मंत्री तथा स्थानीय विधायक लखनलाल देवांगन भी मौजूद थे।
अपने संबोधन में जयसिंह अग्रवाल ने कहा, “सरकार अपनी ढाई साल की सिर्फ ढाई उपलब्धियां ही बता दे।” उन्होंने कहा कि यदि विकास के दावे किए जा रहे हैं तो उन पर खुले मंच से सार्वजनिक बहस होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार के किसी भी मंत्री को कोरबा के विकास कार्यों पर चर्चा की चुनौती दी।

डिप्टी सीएम अरुण साव ने चुनावी नतीजों का हवाला देकर किया पलटवार
कोरबा का दौरा करने की दी सलाह
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि उप मुख्यमंत्री अरुण साव लंबे समय बाद कोरबा आए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित रहने के बजाय कोरबा, कुसमुंडा, गेवरा, दीपका, कटघोरा और बालको का दौरा करें, ताकि जिले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
महापौर पर नरमी, सरकार पर सवाल
पूर्व मंत्री ने कहा कि कोरबा महापौर संजू देवी राजपूत का कार्यकाल अभी केवल 16 महीने का है, इसलिए उनके कामकाज पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा। वहीं उन्होंने राज्य सरकार के ढाई साल के कार्यकाल को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के समय भी अधिकारियों की गड़बड़ी का खुले मंच से विरोध किया जाता था।
अरुण साव का पलटवार
जयसिंह अग्रवाल के बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया। समारोह के बाद मीडिया से बातचीत में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पलटवार करते हुए कहा, “पहले जयसिंह अग्रवाल अपने कार्यकाल का आत्ममंथन करें। पांच साल कांग्रेस की सरकार रही, महापौर भी उनके घर से थी, लेकिन जनता ने चुनाव में जवाब दे दिया।”
उन्होंने दावा किया कि वर्तमान भाजपा सरकार ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ कोरबा सहित पूरे छत्तीसगढ़ के विकास के लिए काम कर रही है।
कोरबा
जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक स्थगित
कोरबा। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक, जो 24 जुलाई को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में श्रीमती ज्योत्सना महंत, सांसद, लोकसभा क्षेत्र कोरबा की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली थी, अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दी गई है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत कोरबा ने बताया कि बैठक की अगली तिथि एवं समय की सूचना संबंधित सदस्यों एवं अधिकारियों को पृथक से प्रदान की जाएगी।
कोरबा
सामान्य सभा की बैठक 25 जुलाई को
कोरबा। जिला पंचायत कोरबा की सामान्य सभा की बैठक 25 जुलाई शनिवार को दोपहर 12 बजे जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित की गई है।
बैठक में शिक्षा विभाग, स्वास्थय, पशुपालन, कृषि, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल ग्रामीण कोरबा/कटघोरा की समीक्षा की जायेगी।
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