रायपुर, एजेंसी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 17, 18 और 19 मई को छत्तीसगढ़ दौरे पर रहेंगे। रविवार रात 8:15 बजे वे रायपुर पहुंचे। शाह आज रात यहीं रुकेंगे। एयरपोर्ट से वे सीधे मेफेयर रिसॉर्ट के लिए रवाना हुए।
दौरे के दौरान रायपुर और बस्तर संभाग में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जानकारी के मुताबिक, अमित शाह कल नेतानार जाएंगे और जगदलपुर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक लेंगे। इसके अलावा डायल-112 के 400 वाहन रवाना करेंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहुंचे रायपुर
इस दौरान उनका फोकस सुरक्षा व्यवस्था, बस्तर में विकास कार्यों की समीक्षा, जनसुविधाओं के विस्तार और मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक पर रहेगा।
खास बात यह है कि इस दौरे में सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश नजर आएगी। डायल-112 सेवा के विस्तार से लेकर बस्तर में जन सुविधा केंद्र के उद्घाटन, फॉरेंसिक यूनिट्स, और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि तक, कार्यक्रमों की पूरी श्रृंखला इसी दिशा में तैयार की गई है।
मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में सीएम विष्णुदेव साय समेत 4 राज्यों के मुख्यमंत्री होंगे शामिल। (फाइल)
डायल-112 सेवा का पूरे प्रदेश में विस्तार
18 मई सोमवार की सुबह अमित शाह राजधानी के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल पहुंचेंगे। यहां सुबह 10:40 बजे से 10:50 बजे के बीच वे डायल-112 सेवा के लिए शामिल 400 नए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
यह कार्यक्रम राज्य सरकार की उन बड़ी योजनाओं में शामिल है, जिनके जरिए पुलिस रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करने की तैयारी की गई है। अभी तक डायल-112 सेवा प्रदेश के 16 जिलों तक सीमित थी, लेकिन अब इसे पूरे छत्तीसगढ़ में लागू किया जा रहा है।
डिप्टी सीएम विजय शर्मा पहले ही बता चुके हैं कि नई व्यवस्था के बाद प्रदेश के सभी थानों तक डायल-112 की पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में पुलिस सहायता पहले की तुलना में ज्यादा तेज और प्रभावी हो सकेगी।
हर जिले को मिलेगी फॉरेंसिक जांच की सुविधा
राज्य सरकार इस दौरे के दौरान अपराध जांच सिस्टम को तकनीकी रूप से मजबूत करने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाने जा रही है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश के सभी 33 जिलों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट्स रवाना की जाएंगी।
इन विशेष वाहनों में आधुनिक फॉरेंसिक उपकरण लगाए गए हैं, जिनकी मदद से घटनास्थल पर ही शुरुआती वैज्ञानिक जांच संभव हो सकेगी। इससे अपराधों की विवेचना में तेजी आएगी और जांच की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के इससे पहले के बस्तर दौरे की तस्वीरें।
रायपुर से सीधे बस्तर रवाना होंगे शाह
रायपुर कार्यक्रम के बाद केंद्रीय गृहमंत्री सुबह 11:05 बजे विशेष विमान से जगदलपुर के लिए रवाना होंगे। करीब 11:50 बजे उनका आगमन मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पर होगा। यहां से वे बीएसएफ हेलीकॉप्टर के जरिए बस्तर जिले के नेतानार पहुंचेंगे।
नेतानार में दोपहर 12:20 बजे से 12:50 बजे तक जन सुविधा केंद्र के उद्घाटन का कार्यक्रम निर्धारित है। माना जा रहा है कि यह केंद्र स्थानीय ग्रामीणों को प्रशासनिक और सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा।
बस्तर क्षेत्र लंबे समय से सुरक्षा चुनौतियों और विकास की जरूरतों के बीच संतुलन की चर्चा का केंद्र रहा है। ऐसे में शाह का यह दौरा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमर वाटिका में शहीद जवानों को देंगे श्रद्धांजलि
नेतानार कार्यक्रम के बाद अमित शाह दोपहर करीब 1:25 बजे जगदलपुर स्थित अमर वाटिका पहुंचेंगे। यहां वे शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान कई जवानों ने अपनी जान गंवाई है। ऐसे में अमर वाटिका में श्रद्धांजलि कार्यक्रम को सुरक्षा बलों के मनोबल से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
बादल एकेडमी में होगी विकास और सुरक्षा पर चर्चा
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद अमित शाह जगदलपुर के एक निजी होटल पहुंचेंगे, जहां दोपहर भोजन के बाद बैठकों का दौर शुरू होगा।
दोपहर 2:35 बजे से वे बादल एकेडमी में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेंगे। इस दौरान बस्तर क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों, सुरक्षा अभियानों और जनकल्याण योजनाओं की समीक्षा की जाएगी।
इसके बाद होटल ग्रैंड एम्बिशन में अलग-अलग विभागों की ओर से प्रेजेंटेशन भी दिए जाएंगे। माना जा रहा है कि इन प्रस्तुतियों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है।
भाजपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात और लोक संस्कृति कार्यक्रम
शाम के समय अमित शाह भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे फिर से बादल अकादमी पहुंचेंगे, जहां ‘बस्तर के संग’ नाम से आयोजित लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।
इस कार्यक्रम में बस्तर की पारंपरिक लोक कला, नृत्य और संस्कृति की झलक पेश की जाएगी। सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ रात्रि भोज का आयोजन भी रखा गया है। इसके बाद शाह जगदलपुर में ही रात्रि विश्राम करेंगे।
19 मई को होगी मध्य क्षेत्रीय परिषद की अहम बैठक
दौरे के तीसरे दिन यानी 19 मई मंगलवार को जगदलपुर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगी। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह करेंगे।
इस बैठक में 4 राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में अंतरराज्यीय समन्वय, क्षेत्रीय विकास, सुरक्षा व्यवस्था, नक्सल प्रभावित इलाकों की स्थिति और प्रशासनिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें राज्यों के बीच समन्वय से जुड़े कई लंबित मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद दिल्ली रवाना होंगे
बैठक के बाद दोपहर भोजन का कार्यक्रम रखा गया है। इसके बाद अमित शाह दोपहर 2:50 बजे से 3:30 बजे तक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान वे सुरक्षा, विकास और परिषद बैठक से जुड़े अहम फैसलों की जानकारी साझा कर सकते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद वे जगदलपुर एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगे और शाम 3:45 बजे विशेष विमान से दिल्ली लौट जाएंगे। उनका विमान शाम 6 बजे पालम स्थित एयरफोर्स स्टेशन पहुंचेगा, जहां से वे सड़क मार्ग से अपने आवास रवाना होंगे।
अमित शाह के इस दौरे को छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुरक्षा और विकास के एजेंडे के साथ हो रहे इस दौरे पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है।
जल संचय और जल जीवन मिशन के कार्यों को मिशन मोड में करें पूरा – मुख्यमंत्री साय
मार्च 2028 तक सभी जल संरचनाओं को पूर्ण करने के निर्देश, गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष जोर
जल जीवन मिशन की जिलेवार नियमित समीक्षा करें कलेक्टर, बाधाओं का तत्काल करें समाधान
पूर्ण हो चुके कार्यों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश
कोरिया, धमतरी और राजनांदगांव सहित अन्य जिलों के बेहतर प्रदर्शन की मुख्यमंत्री ने की सराहना
रायपुर 10 सितंबर 2026। जल संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा विषय है। प्रदेश में जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण हो और प्रत्येक परिवार को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिले, इस लक्ष्य के साथ राज्य सरकार जल संचय और जल जीवन मिशन के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जल संसाधन विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जल संचय जन भागीदारी अभियान की जिलेवार प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग हो और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में काम किया जाए।
जनभागीदारी से मजबूत होगा जल संरक्षण अभियान
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल संरक्षण को केवल शासकीय कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाया जाना चाहिए। वर्ष 2025-26 में प्रदेश के अनेक जिलों ने जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत उल्लेखनीय कार्य किए हैं। अब सभी जिलों को अपने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर बेहतर परिणाम के लिए प्रयास करना होगा।
मुख्यमंत्री ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से अभियान की जिलेवार प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कोरिया, धमतरी राजनांदगांव सहित अन्य जिलों में जल संरक्षण की दिशा में किए गए कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों के अनुभव और कार्यप्रणाली का लाभ अन्य जिलों को भी मिलना चाहिए, ताकि पूरे प्रदेश में जल संरक्षण के प्रयासों को समान गति मिल सके।
जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश कुमार टोप्पो ने बैठक में बताया कि जल संचय जन भागीदारी अभियान में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी है। उन्होंने बताया कि सभी जिलों को इस वर्ष निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के साथ उससे बेहतर प्रदर्शन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के प्रयास तभी दीर्घकालिक परिणाम देंगे, जब शासन के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित होगी। जनभागीदारी की इसी शक्ति के माध्यम से छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थायी रूप से स्थापित करना है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत सभी जिलों के नोटिफाइड नक्शे तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। अभियान की मुख्य सचिव स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में जल संरक्षण से जुड़े कार्यों की सतत मॉनिटरिंग की जाए तथा जहां भी कमियां सामने आएं, उन्हें तत्काल दूर किया जाए। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न हो और सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे हों।
हर घर तक नल से स्वच्छ जल पहुंचाना हमारा लक्ष्य
मुख्यमंत्री श्री साय ने बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। प्रदेश के प्रत्येक घर तक पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जल जीवन मिशन के शेष कार्यों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाए। सभी कलेक्टर अपने-अपने जिलों में इसकी नियमित समीक्षा करें और जहां भी प्रशासनिक, तकनीकी अथवा क्रियान्वयन संबंधी बाधाएं आ रही हैं, उनका तत्काल समाधान करते हुए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराएं। उन्होंने कहा कि केवल अधोसंरचना निर्माण ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि योजनाओं का वास्तविक लाभ परिवारों तक पहुंचे और लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो। इसके लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया जाए।
पूर्ण कार्यों के भुगतान में न हो अनावश्यक विलंब
मुख्यमंत्री श्री साय ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत पूर्ण हो चुके कार्यों के भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन कार्यों को निर्धारित मापदंड और गुणवत्ता के अनुरूप पूर्ण किया जा चुका है, उनका भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर मिशन की नियमित समीक्षा करते हुए प्रेजेंटेशन में सामने आई कमियों और समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण किया जाए। योजना से जुड़े सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय से शेष कार्यों को गति दी जाए।
हर जिले की प्राथमिकता बने जल सुरक्षा
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे अपने जिलों में जल संरक्षण और हर घर तक नल से पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। स्थानीय परिस्थितियों और जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए तथा जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संचय जन भागीदारी अभियान और जल जीवन मिशन सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़े हैं। इन प्रयासों के प्रभावी क्रियान्वयन से जहां वर्तमान में लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा मिलेगी, वहीं भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव भी तैयार होगी।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करने का अवसर है। इसके लिए शासन-प्रशासन के साथ जनभागीदारी को और मजबूत करते हुए प्रत्येक जिले को अपनी पूरी क्षमता से कार्य करना होगा। हमारा लक्ष्य ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है, जहां जल का बेहतर संरक्षण हो, जल स्रोत सुरक्षित और समृद्ध हों तथा प्रत्येक परिवार को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल सहज रूप से उपलब्ध हो।
बैठक में मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, जल संसाधन विभाग के सचिव आर. एस. टोप्पो, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव अब्दुल कैसर हक, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, संयुक्त सचिव प्रभात मलिक सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
कोरबा। जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतरेगा पिकनिक स्पॉट के रिसॉर्ट में सुबह उस वक्त पर्यटनों एवं कर्मचारियों में हड़कंप मच गया, जब विद्युत मीटर बोर्ड के पीछे करीब 8 फीट लंबा किंग कोबरा छिपकर बैठा मिला। किंग कोबरा की जानकारी मिलते ही रेस्ट हाउस के मैनेजर इस्तीखार खान ने तत्काल वन विभाग एवं नोवा नेचर संस्था के सदस्य जितेंद्र सारथी को सूचना दिया, जिसके बाद सारथी ने अपने अजगर बहार के स्थानीय टीम के सदस्य कमलेश, देवेंद्र, राम, गौतम, दिल ,नरेश, देव मरावी को तत्काल सतरेगा के लिए रवाना कर साथ ही इसकी जानकारी कोरबा वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय दिया एवं उनके निर्देशानुसार उपवनमण्डलाधिकारी रामसिंह राठिया उत्तर के मार्गदर्शन एवं बालकों रेंजर जयंत सरकार के नेतृत्व में जितेंद्र सारथी एवं सिद्धांत जैन कोरबा से रेस्क्यू के लिए मौके पर पहुंच कर सर्वप्रथम विद्युत विभाग को सूचना देकर बिजली को बंद करवाया गया, फिर पूरी सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, किंग कोबरा सर्किट बोर्ड के पीछे बेहद संकरी जगह में छिपा हुआ था, जिसके कारण उसे बाहर निकालना टीम के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत और सावधानी के बाद टीम ने करीब 8 फीट लंबे किंग कोबरा को सफलतापूर्वक सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
रेस्क्यू के दौरान किंग कोबरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटकों की भीड़ लग गई, इतने फुर्तीले और लंबे सांप को देख कर लोग जिज्ञासा वश फोन से वीडियो बनाने से नहीं चुके, साथ ही मौजूद लोगों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया, सफल रेस्क्यू के बाद पंचनामा के पश्चात किंग कोबरा को उसके उपयुक्त प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया।
कोरबा जिले के लेमरू, बालको , पसरखेत , करतला, कुदमुरा एवं आसपास के वन क्षेत्रों से पिछले कुछ समय से छोटे आकार के किंग कोबरा लगातार सामने आ रहे हैं, छोटे किंग कोबरा का बार-बार मिलना इस क्षेत्र में इनके प्राकृतिक प्रजनन और अनुकूल आवास की उपलब्धता का सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, साथ ही यह बात भी सिद्ध करता हैं कि एक ही सांप बार बार रेस्क्यु नहीं हो रहे बल्कि सभी किंग कोबरा दूसरे से भिन्न हैं। हालांकि, क्षेत्र में इनकी वास्तविक संख्या और आबादी की स्थिति निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब स्थानीय लोगों में भी किंग कोबरा और अन्य वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ रही है। आज किसी क्षेत्र में किंग कोबरा दिखाई देने पर लोग उसे मारने या नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन विभाग अथवा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देते हैं। सूचना का समय पर मिलना और सांप का सुरक्षित रेस्क्यू होकर पुनः प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाना वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है।
वन विभाग एवं नोवा नेचर ने आम लोगों से अपील की है कि किंग कोबरा या किसी भी सांप के दिखाई देने पर उससे दूरी बनाए रखें और स्वयं पकड़ने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें, तत्काल प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दें।
कांग्रेस बोली-छत्तीसगढ़ की खदान कौड़ियों के भाव बेच रही बीजेपी…:हसदेव-अरण्य में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी पर सवाल,जयराम रमेश-विकास उपाध्याय ने सरकार को घेरा
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर हसदेव के जंगल और खनिज संसाधन निजी कंपनियों को सौंपने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश और रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने नीलामी को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा- ‘छत्तीसगढ़ की खदान कौड़ियों के भाव बेची जा रही हैं।’ कांग्रेस नेता ने वीडियो जारी कर सरकार से इस फैसले पर जवाब मांगा है।
कांग्रेस सांसद ने सोशल मीडिया में पोस्ट किया है।
तारा कोल ब्लॉक की नीलामी में सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड विजेता बनी है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, यह कंपनी मुंद्रा सिनर्जी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
कांग्रेस सांसद ने सोशल मीडिया में पोस्ट किया है।
विधानसभा ने नई खदानों के खिलाफ पारित किया था प्रस्ताव
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से हसदेव-अरण्य में किसी नए कोल ब्लॉक के आवंटन या नीलामी पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया था।
इसके बाद 16 जुलाई 2023 को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा था कि हसदेव-अरण्य में किसी नई खदान के आवंटन या विकास की जरूरत नहीं है।
कांग्रेस का दावा है कि 19 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा समेत 40 कोल ब्लॉक्स को नीलामी प्रक्रिया से डीनोटिफाई कर दिया था। इसके बावजूद अब तारा ब्लॉक की दोबारा नीलामी की गई है। इसका नाम बदलकर तारा (रिवाइज्ड) किया गया है।
कांग्रेस पूर्व विधायक विकास उपाध्याय।
विकास उपाध्याय का बीजेपी सरकार पर हमला
कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने बीजेपी सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि लगातार छत्तीसगढ़ के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों को बेचने का काम बीजेपी पार्टी कर रही है। फिर से 9 ब्लॉको का आवंटन कर दिया गया और टेंडर प्रक्रिया चालू कर दी गई।
बीजेपी सरकार को छत्तीसगढ़ के लोगों से कोई लेना देना नहीं है। कौड़ियों के दाम पर जमीन को बेचा जा रहा है। कांग्रेस पार्टी पूर्व में भी विरोध किया। स्थानीय आदिवासी लगातार विरोध कर रहे है। इसके बाद भी कीमती खदानों को भारतीय जनता पार्टी को चंदा देने वालों को मामूली कीमत में दिया जा रहा है।
तारा कोल ब्लॉम में 4 हजार एकड़ से ज्यादा घना जंगल होने का दावा किया गया है।
5 हजार एकड़ में ब्लॉक, 4 हजार एकड़ से ज्यादा जंगल
तारा कोल ब्लॉक करीब 5 हजार एकड़ क्षेत्र में फैला है। इसमें 4 हजार एकड़ से ज्यादा घना जंगल होने का दावा किया गया है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक खनन शुरू होने पर 10 लाख से ज्यादा पेड़ों की कटाई का खतरा है। उनका कहना है कि इसका असर जंगल पर निर्भर आदिवासी समुदाय और उनकी रोजमर्रा की आजीविका पर पड़ेगा।
लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास खनन पर सवाल
कांग्रेस ने लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास खनन को लेकर भी चिंता जताई है। नेताओं का कहना है कि इससे हाथियों की आवाजाही का रास्ता प्रभावित हो सकता है। साथ ही दूसरी वन्य प्रजातियों के सामने भी खतरा बढ़ सकता है।
हसदेव के जंगलों को बचाने के लिए स्थानीय आदिवासी समुदाय करीब 15 वर्षों से ग्राम सभा प्रस्ताव, धरना, जन अभियान और विरोध मार्च के जरिए आवाज उठाता रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्राकृतिक जंगल काटकर कहीं और पौधे लगाने से पुराने जंगल की जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की भरपाई नहीं की जा सकती।