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छत्तीसगढ़

IAS रमेश कुमार शर्मा बने सहकारिता आयुक्त:पहले गृह विभाग के सचिव थे, सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया आदेश

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी रमेश कुमार शर्मा को नई जिम्मेदारी सौंपी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने उनका तबादला करते हुए आयुक्त, सहकारिता एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां के पद पर पदस्थ किया है।

वर्तमान में रमेश कुमार शर्मा गृह विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत थे। राज्य सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल के तहत उन्हें सहकारिता विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए नई पदस्थापना की है।

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छत्तीसगढ़

सौरभ चंद्राकर के खिलाफ दोबारा गिरफ्तारी वारंट जारी:महादेव ऐप के मास्टरमाइंड के प्रत्यर्पण की तैयारी तेज, इस बार ED ने जारी कराया वारंट

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रायपुर, एजेंसी। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के कथित प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की प्रक्रिया में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने ओमान से उसके प्रत्यर्पण (Extradition) के लिए स्पेशल पीएमएलए कोर्ट से फिर से ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट जारी कराया है। वारंट जारी होने के बाद प्रत्यर्पण से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज तैयार कर भारत के हाई कमीशन को भेज दिए गए हैं।

ED के विशेष लोक अभियोजक सौरभ पांडे ने बताया कि एजेंसी को सूचना मिली थी कि सौरभ चंद्राकर दुबई में है। इसी आधार पर स्पेशल पीएमएलए कोर्ट से ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट जारी कराया गया था और प्रत्यर्पण के लिए आवश्यक दस्तावेज दुबई भेजे गए थे।

बाद में जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि सौरभ दुबई छोड़कर ओमान पहुंच गया है। इसके बाद ED ने रायपुर की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में नया आवेदन पेश किया। कोर्ट ने 16-17 जुलाई में दोबारा ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट जारी किया, ताकि ओमान के माध्यम से प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में एंट्री ली।

फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में एंट्री ली।

हाई कमीशन भेजे गए दस्तावेज

वकील सौरभ पांडे ने बताया कि कोर्ट से वारंट मिलने के बाद प्रत्यर्पण से संबंधित सभी दस्तावेजों पर आवश्यक न्यायिक एंडोर्समेंट कराए गए। इसके बाद सारे दस्तावेज भारत के हाई कमीशन को भेज दिए गए। अब मामला ओमान में संबंधित अधिकारियों और भारतीय एजेंसियों के समन्वय से आगे बढ़ रहा है।

ED के अधिकारियों का कहना है कि सौरभ चंद्राकर को भारत लाने के लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। अब प्रत्यर्पण की अगली कार्रवाई दोनों देशों के बीच तय प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

क्या होता है ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट?

ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट ऐसा वारंट होता है, जिसकी कोई निर्धारित समय-सीमा नहीं होती। यह तब तक प्रभावी रहता है, जब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो जाती या संबंधित अदालत इसे वापस नहीं लेती। विदेश में फरार आरोपियों के मामलों में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को प्रभावी बनाए रखने के लिए ऐसे वारंट का इस्तेमाल किया जाता है।

अब तक 4336 करोड़ की संपत्तियां अटैच

ED ने इस मामले में अब तक 175 से ज्यादा ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन किए गए। 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 74 लोगों को आरोपी बनाया गया। साथ ही रायपुर की विशेष PMLA अदालत में 5 प्रॉसिक्यूशन शिकायतें दाखिल की गई हैं।

एजेंसी के मुताबिक अब तक इस मामले में कुल 4336 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियां अटैच, सीज या फ्रीज की जा चुकी हैं।

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छत्तीसगढ़

11.38 करोड़ का लोन घोटाला, CBI ने दर्ज की FIR:इसमें केपेक्स-कंपनी की डायरेक्टर का नाम, कैश क्रेडिट से दूसरे लोन चुकाने का आरोप

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बलौदाबाजार, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में राजकुमार सराफ के मकान में शनिवार शाम से रविवार शाम तक कार्रवाई हुई। शुरुआत में इसे ED की रेड से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन FIR कॉपी के अनुसार यह कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से की गई है। इसके अलावा IT ने भी मामले में कार्रवाई की है।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने करीब 11.38 करोड़ के बैंक लोन घोटाले के मामले में धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड, उसके डायरेक्टरों, गारंटर, अज्ञात बैंक अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

आरोप है कि आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से बैंक को धोखा देकर लोन की राशि का गलत इस्तेमाल किया। इसके साथ ही बैंक को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया। साफ शब्दों में कहे तो सभी पर कैश क्रेडिट से पैकिंग क्रेडिट चुकाने का आरोप है।

धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड बॉक्साइट की बिक्री और निर्यात का कारोबार करती थी। कंपनी से जुड़ी KSR इंफ्रा और केपेक्स 2 एंटरप्राइजेज नाम की दो अन्य फर्में भी संचालित की जा रही थीं। इसी कारोबार के लिए कंपनी ने बैंक से लोन लिया था।

7 मई को बैंक ने की शिकायत

CBI की FIR के अनुसार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया रीजनल ऑफिस रायपुर के डिप्टी जनरल मैनेजर और रीजनल हेड रणधीर कुमार ने 7 मई 2026 को शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया कि कंपनी और उसके जिम्मेदार लोगों ने बैंक से मिली क्रेडिट सुविधा का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी की।

15 करोड़ की एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट सुविधा ली

जांच में सामने आया कि 19 अप्रैल 2023 को कंपनी को 15 करोड़ रुपए की एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट (EPC) सुविधा मंजूर हुई थी। इसमें 5 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट (CC) सीमा और 7.50 करोड़ रुपए की लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) सीमा शामिल थी।

सिस्टर कंसर्न के जरिए रकम घुमाने का आरोप

CBI के अनुसार, कंपनी ने लोन की रकम को सीधे कारोबार में लगाने के बजाय अपनी सहयोगी फर्मों भारत मल्टी ट्रेड, क्रिस एंटरप्राइजेज और राधे कृष्णा एंटरप्राइजेज के खातों में ट्रांसफर किया।

जांच में यह भी सामने आया कि भारत मल्टी ट्रेड के मालिक संतोष कुमार रमानी, कंपनी की सहयोगी फर्म केपेक्स 2 एंटरप्राइजेज से जुड़े हैं। क्रिस एंटरप्राइजेज के मालिक कृतार्थ सोनी, कंपनी के गारंटर कुशल सोनी के भाई हैं।

CBI का आरोप है कि कंपनी ने कैश क्रेडिट खाते से निकाली गई रकम को अलग-अलग फर्मों के जरिए घुमाकर उसी दिन पैकिंग क्रेडिट खाते में जमा कराया। इससे ऐसा दिखाया गया कि पैकिंग क्रेडिट का भुगतान किया गया है।

12 अक्टूबर 2024 को खाता हुआ NPA

बैंक के अनुसार, कंपनी समय पर लोन नहीं चुका सकी। इसके बाद 12 अक्टूबर 2024 को लोन खाता NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित कर दिया गया। 31 जनवरी 2026 तक बैंक का 11.38 करोड़ रुपए बकाया था।

इन पर दर्ज हुई FIR

CBI ने इस मामले में धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड, कंपनी की डायरेक्टर राजलक्ष्मी सराफ, अभिषेक गुप्ता, गारंटर कुशल सोनी, अज्ञात बैंक अधिकारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया है।

आरोपियों के खिलाफआपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग, लेखा में हेराफेरी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और धारा 13(2) सहपठित 13(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

CBI का कहना है कि शुरुआती जांच में बैंक के साथ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और लोन राशि के दुरुपयोग के पर्याप्त आधार मिले हैं। अब मामले में सभी वित्तीय लेन-देन, संबंधित कंपनियों, बैंक अधिकारियों और अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच की जाएगी।

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कोरबा

बाइक गुम होने के तनाव में युवक ने दी जान:कोरबा में नशे की हालत में खोई थी बाइक, कमरे में फंदे पर मिला शव

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कोरबा। कोरबा जिले के बांकी मोंगरा थाना क्षेत्र के ग्राम बलगीखार में सोमवार सुबह एक 27 वर्षीय युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान दीपक कंवर के रूप में हुई है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार दीपक कंवर अविवाहित था और मजदूरी कर अपना जीवनयापन करता था। कुछ दिन पहले वह दर्री क्षेत्र गया था। बताया जा रहा है कि नशे की हालत में उसकी बाइक कहीं गुम हो गई थी। काफी तलाश के बावजूद बाइक नहीं मिली, जिसके बाद से वह लगातार मानसिक तनाव में रहने लगा था।

सुबह कमरे में फंदे पर लटका मिला शव

परिजनों के मुताबिक, रविवार (26 जुलाई) देर रात दीपक नशे की हालत में घर लौटा। खाना खाने के बाद वह अपने कमरे में सोने चला गया। सोमवार सुबह काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं आने पर परिजनों ने आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। खिड़की से देखने पर उसका शव पंखे से लटकता मिला।

घर में मचा कोहराम

घटना का पता चलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। सूचना मिलने पर बांकी मोंगरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची, दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतारा और पंचनामा कार्रवाई की।

सुसाइड नोट नहीं मिला

पुलिस की जांच में कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने परिजनों और आसपास के लोगों के बयान दर्ज किए हैं।

पुलिस कर रही जांच

परिजनों ने पुलिस को बताया कि बाइक गुम होने के बाद से दीपक काफी परेशान रहता था और बार-बार उसी बात का जिक्र करता था। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है।

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