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छत्तीसगढ़

विद्युत उपभोक्ताओं को बताए अधिकार, शिकायत निवारण की प्रक्रिया समझाई

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जांजगीर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) के अधीक्षण यंत्री कार्यालय, जांजगीर में विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम के तत्वावधान में उपभोक्ता जागरूकता बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपभोक्ताओं को बिजली संबंधी शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया, उनके अधिकारों तथा विभागीय व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

बैठक की अध्यक्षता विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अशोक गोयल ने की। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए निर्धारित प्रक्रिया की जानकारी होना आवश्यक है। पहले स्थानीय वितरण केंद्र में शिकायत दर्ज करानी चाहिए, समाधान नहीं मिलने पर प्रकरण को फोरम के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है।

कार्यक्रम में अधीक्षण यंत्री अमर चौधरी ने उपभोक्ताओं से सीधे संवाद करते हुए विद्युत सेवाओं को और अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने उपभोक्ताओं से बिजली के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग की अपील भी की।

बैठक में कार्यपालन यंत्री हरिशंकर राठौर, अजय भारद्वाज एवं राकेश साहू, सहायक यंत्री कमलेश नेताम तथा उप अभियंता सौरभ कश्यप सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी व उपभोक्ता उपस्थित रहे।

अधिकारियों ने बताया कि विद्युत आपूर्ति में व्यवधान, वोल्टेज संबंधी समस्याएं, लोड शेडिंग, मीटर एवं बिजली बिल से जुड़ी शिकायतें, कनेक्शन में विलंब, विच्छेदन-पुनर्संयोजन तथा सेवा मानकों के पालन से संबंधित मामलों में उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम का सहारा ले सकते हैं। बैठक में शिकायतों के समयबद्ध निराकरण, आवेदन प्रक्रिया और निर्धारित समय-सीमा की भी जानकारी दी गई।

इन मामलों में कर सकते हैं शिकायत

बिजली आपूर्ति में व्यवधान, लो या हाई वोल्टेज की समस्या, लोड शेडिंग एवं अनियोजित कटौती, मीटर संबंधी शिकायतें, बिजली बिल से जुड़े विवाद, कनेक्शन में देरी, विद्युत विच्छेदन एवं पुनर्संयोजन

सेवा मानकों के उल्लंघन से जुड़े मामले

बैठक के दौरान उपभोक्ताओं ने अपनी समस्याएं एवं सुझाव भी साझा किए, जिन पर अधिकारियों ने आवश्यक मार्गदर्शन देते हुए समाधान की प्रक्रिया समझाई।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : शिक्षा नीति में वैश्विक दृष्टिकोण और विलुप्त ज्ञान के पुनरुद्धार पर बल

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कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय में टैगोर पुण्यतिथि पर बौद्धिक विमर्श

​रायपुर। आधुनिक शिक्षा प्रणाली में भारतीय ज्ञान परंपरा  का समावेश छात्रों के सर्वांगीण विकास, नैतिक मूल्यों के उत्थान और मानसिक कल्याण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह प्राचीन वैज्ञानिक सोच, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद, योग और दर्शन को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर एक व्यावहारिक और समग्र दृष्टिकोण प्रदान करती है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि के अवसर पर आधुनिक शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्व विषय पर एक गरिमामय बौद्धिक विचार-विमर्श का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों ने राष्ट्रीय चेतना, चरित्र निर्माण और आधुनिक संदर्भों में प्राचीन ज्ञान के समावेश पर अपने विचार साझा किए।

*भारत की ज्ञान परंपरा, दर्शन और अध्यात्म का सार तत्व है राष्ट्रगान जन-गण-मन*

    ​कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल ने कहा कि राष्ट्रगान जन-गण-मन केवल एक औपचारिक गीत नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा, दर्शन और अध्यात्म का सार तत्व है। उन्होंने बताया कि गुरुदेव टैगोर ने इसमें संकीर्ण पश्चिमी राष्ट्रवाद के स्थान पर भारत की सर्वसमावेशी आत्मा को पिरोया है, जो उपनिषद के मूल्य सह नाववतु, सह नौ भुनक्तु (साथ चलें, साथ बढ़ें) की भावना को चरितार्थ करता है।

*प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था का मूल ध्येय चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास*

    ​बौद्धिक विमर्श के प्रमुख बिंदु में शामिल ​चरित्र निर्माण और प्रकृति सम्मान पर चर्चा करते हुए डॉ. कपिल देव प्रजापति ने स्पष्ट किया कि प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था का मूल ध्येय चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास, समाज सेवा और प्रकृति के प्रति निष्ठा विकसित करना रहा है। ​निरंतर विकासशील ज्ञान परंपरा पर चर्चा करते हुए प्रो. शैलेंद्र खंडेलवाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान स्थायी न होकर समय और परिस्थितियों के अनुकूल निरंतर विकसित हुआ है। इसे गहराई से समझने के लिए सतत शोध की आवश्यकता है।

*प्राचीन ज्ञान को आधुनिक संदर्भों में खोजकर पुनर्जीवित करने के प्रयास होने चाहिए*

     इसी तरह ​वैश्विक ज्ञान का समावेश पर डॉ. राजेंद्र मोहंती ने सुझाव दिया कि भारतीयता के संरक्षण के साथ-साथ विश्व भर के श्रेष्ठ और आधुनिक ज्ञान को भी शिक्षा नीति में शामिल किया जाना चाहिए। ​लुप्तप्राय ज्ञान का पुनरुद्धार पर डॉ. आशुतोष मंडावी ने बल देते हुए कहा कि जो प्राचीन ज्ञान समय के साथ विलुप्त हो गया है, उसे आधुनिक संदर्भों में खोजकर पुनर्जीवित करने के प्रयास होने चाहिए।

    ​कार्यक्रम में पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष पंकज नयन पांडेय, कुलसचिव सुनील शर्मा, विभागाध्यक्ष डॉ. नृपेन्द्र शर्मा सहित विश्वविद्यालय के समस्त संकायों के प्राध्यापक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम में बोले तकनीकी शिक्षा मंत्री पॉलिटेक्निक संस्थानों में शुरू होंगे AI पाठ्यक्रम

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कौशल विकास और नवाचार पर जोर

 स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम में बोले तकनीकी शिक्षा मंत्री पॉलिटेक्निक संस्थानों में शुरू होंगे AI पाठ्यक्रम
 स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम में बोले तकनीकी शिक्षा मंत्री पॉलिटेक्निक संस्थानों में शुरू होंगे AI पाठ्यक्रम

रायपुर। शासकीय कन्या पॉलिटेक्निक एवं शासकीय सह-शिक्षा पॉलिटेक्निक, रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के दिशा-निर्देशानुसार आयोजित स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम में मुख्य अतिथि के रूप में तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ कौशल विकास, नवाचार, उद्यमिता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर विशेष बल दिया।

AI पाठ्यक्रमों की शुरुआत

       तकनीकी शिक्षा मंत्री ने घोषणा की कि राज्य शासन आगामी शैक्षणिक सत्र से पॉलिटेक्निक संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संबंधित पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए प्रयासरत है। मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार व्यावहारिक कौशल और नवाचार ही सफलता का आधार हैं। उन्होंने राज्य शासन द्वारा संचालित आई-हब (प्.भ्नइ) और नई औद्योगिक नीति का उल्लेख करते हुए युवाओं से स्टार्टअप व स्वरोजगार के अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। प्रदेश के पॉलिटेक्निक संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडल संस्थानों के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

        कार्यक्रम का आयोजन 01 अगस्त से 14 अगस्त 2026 तक किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य नए विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा, संस्थागत संस्कृति, नैतिक मूल्यों और व्यक्तित्व विकास से परिचित कराना है। तकनीकी शिक्षा संचालनालय के अतिरिक्त संचालक डॉ. अमिताभ दुबे ने विद्यार्थियों को निरंतर सीखने और अनुशासन के साथ लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का आयोजन कन्या पॉलिटेक्निक की प्राचार्य डॉ. वर्षा चौरसिया एवं सह-शिक्षा पॉलिटेक्निक के प्राचार्य डॉ. एस.के. सिंह के मार्गदर्शन में हुआ। मंच संचालन श्रीमती ममता देवांगन व श्रीमती तुलजा ज्योति भूआर्य ने किया और अंत में श्रीमती सावित्री रानी ने आभार व्यक्त किया।

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कोरबा

अलर्ट जारी, कभी भी खोला जा सकता है मिनीमाता बांगो जलाशय का गेट

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मिनीमाता बांगो जलाशय में जल भराव 89.55 प्रतिशत

कोरबा। कोरबा जिले  के मिनीमाता बांगो जलाशय में बारिश के साथ ही जलभराव में वृद्धि हुई है। बांगो जलाशय के कार्यपालन अभियंता एस.के.भारती से प्राप्त जानकारी के अनुसार आज की स्थिति में बांगो जलाशय में जलभराव  89.55 प्रतिशत है। जलाशय में पानी की आवक बढ़ने पर कभी भी मिनीमाता जलाशय का गेट खोलकर पानी बहाया जा सकता है।

बाढ़ क्षेत्र से परिसम्पतियां हटाने की सूचना जारी

वर्षाकाल 2026 के दौरान आवश्यकता होने पर मिनी माता बांगो बांध माचाडोली से हसदेव नदी में पानी प्रवाहित किया जायेगा। कार्यपालन अभियंता एस.के.भारती मिनीमाता हसदेव बांगो बांध संभाग क्रमांक 03 माचाडोली  ने सर्व साधारण एवं कार्य संबंधितों को सूचित किया है कि मिनीमाता बांगो जलाशय में बारिश के साथ ही जलभराव में वृद्धि हुई है। आज की स्थिति में बांगो जलाशय में जल भराव  मीटर 89.55 प्रतिशत है।

उक्त बांध से नीचे, हसदेव नदी के किनारे, बाढ़ क्षेत्र में स्थापित चल-अचल सम्पत्ति सुरक्षित स्थानों पर ले जायें। बाढ़ क्षेत्र में स्थापित खनिज खदान ठेकेदार, औद्योगिक इकाईयां, संस्थानों आदि को भी सूचित किया गया है कि वे अपनी परिसम्पत्तियों को बाढ़ क्षेत्र से बाहर कर लेवें। कार्यपालन अभियंता मिनीमाता बांगो बांध ने कहा है कि अकस्मात बाढ़ से होने वाली किसी भी प्रकार की क्षति के लिए जल संसाधन विभाग उत्तरदायी नहीं होगा। कार्यपालन अभियंता मिनीमाता बांगो बांध ने बाढ़ क्षेत्र में आने वाले गांवों में बाढ़ चेतावनी की मुनादी करवाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

कार्यपालन अभियंता ने बताया कि बाढ़ क्षेत्र में आने वाले संभावित गांवो में बांगो, चर्रा, पोड़ी उपरोड़ा, कोनकोना, लेपरा, टुनियाकछार, पाथा, गाड़ाघाट,  छिनमेर, कछार, कलमीपारा,  सिलीयारीपारा, जूनापारा, तिलाईडाड, डुगुपारा, टुंगुमांड़ा, छिर्रापारा, मछलीबाटा, कोरियाघाट, धनगांव, डोंगाघाट, नरमदा, औराकछार, सोनगुड़ा, जेलगांव, झाबू, नवागांव, तिलसाभाटा, लोतलोता, स्याहीमुड़ी, कोडा, हथमार,  झोरा, सिरकीकला आदि शामिल हैं।

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