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बिज़नस

वो Luxury Villa जिसे देखने दुनिया भर से आते हैं रईस, 32 कमरे और आलीशान Pool, जानें कौन है इसका मालिक और क्या है कीमत?

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बीजिंग, एजेंसी। खूबसूरत वादियों, शांत समंदर या किसी खूबसूरत आइलैंड (द्वीप) पर अपना एक आलीशान घर होना हर किसी का सपना होता है। जरा सोचिए, एक ऐसा घर जो चारों तरफ से नीले पानी और पहाड़ों से घिरा हो, जिसमें तैरने के लिए एक शानदार इनफिनिटी पूल हो और अंदर कदम रखते ही सात सितारा होटल जैसी लक्जरी का अहसास हो। चीन के सूझोउ (Suzhou) शहर में स्थित एक ऐसा ही आलीशान महलनुमा घर इस समय पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह चीन का अब तक का सबसे महंगा घर है जिसकी भव्यता और कीमत सुनकर अच्छे-अच्छों के होश उड़ जाते हैं।

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क्या है इस महल का नाम और कहां है स्थित?

इस आलीशान विला को ‘ताओहुआयुआन’ (Taohuayuan) नाम दिया गया है। चीनी भाषा में इसका मतलब होता है ‘यूटोपिया’ (Utopia)—यानी एक ऐसी आदर्श और शांत दुनिया जहां सिर्फ सुख और शांति हो। यह घर चीन की मशहूर ‘दुशु झील’ (Dushu Lake) के ठीक बीच में बने एक बेहद खूबसूरत प्राइवेट आइलैंड (निजी द्वीप) पर स्थित है।

कौन है इसका रहस्यमयी मालिक? 

इस घर की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसका असली मालिक कौन है यह आज तक कोई नहीं जानता। इस आलीशान प्रॉपर्टी का मालिकाना हक पूरी तरह से गुप्त (गुमनाम) रखा गया है जो इसे और ज्यादा रहस्यमयी बनाता है।

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जानिए इसकी खासियतें

रिपोर्ट के मुताबिक इस घर को तैयार करने में दुनिया भर के बेहतरीन आर्किटेक्ट्स को लगाया गया था। यह प्रॉपर्टी करीब 72,400 वर्ग फुट के विशाल एरिया में फैली हुई है। इसे पूरी तरह से बनकर तैयार होने में 3 साल से भी ज्यादा का समय लगा था। इस घर के अंदर कुल 32 आलीशान बेडरूम और 32 हाई-टेक बाथरूम बनाए गए हैं।

घर का नक्शा इस तरह तैयार किया गया है कि इसके हर एक कमरे में सूरज की प्राकृतिक रोशनी (Natural Light) सीधी पहुंचती है। इस पूरे विला का डिजाइन यूनेस्को की विश्व धरोहरों से प्रेरित है। इसे फेंगशुई के सभी नियमों को ध्यान में रखकर बनाया गया है और इसे तराशने के लिए खास पारंपरिक कारीगरों की मदद ली गई थी।

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कितनी है इस Luxury Villa की कीमत?

चीन के बाजार में इसकी कीमत 1 अरब युआन है। डॉलर में आंका जाए तो यह संपत्ति लगभग 150 मिलियन डॉलर की है। भारतीय मुद्रा के हिसाब से इस एक अकेले घर की कीमत करीब 1200 करोड़ रुपये बैठती है। खूबसूरत बगीचों, पारंपरिक चीनी नक्काशी और आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस इस द्वीप-महल को देखने और इसकी एक झलक पाने के लिए दुनिया भर से रईस और टूरिस्ट चीन पहुंचते हैं।

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देश

टाटा ट्रस्ट ने चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने को गैरकानूनी बताया:कहा– बहुमत नहीं, डायरेक्टर्स की मंजूरी जरूरी, टाटा संस चेयरमैन का कार्यकाल 3 दिन पहले बढ़ा था

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मुंबई, एजेंसी। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल 5 साल बढ़ाने को टाटा ट्रस्ट ने गलत बताया है।

टाटा ट्रस्ट का कहना है कि सिर्फ बोर्ड में बहुमत से वोट मिलने से चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति नहीं हो सकती। कंपनी के नियमों में उनके द्वारा नामित डायरेक्टर्स की सहमति जरूरी है।

ट्रस्ट्स ने कहा- उनके नॉमिनी डायरेक्टर नोएल टाटा के विरोध के बाद भी यह प्रस्ताव पास होना अवैध है।

बता दें कि टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में 66% हिस्सेदारी है, इसलिए ट्रस्ट की आपत्ति का कंपनी के कंट्रोल और लीडरशिप पर असर पड़ सकता है।

टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल 17 सितंबर को 5 साल बढ़ाकर 2032 तक कर दिया गया था। वे फरवरी 2027 में रिटायर होने वाले थे। चंद्रशेखरन ने पिछले महीने 12 अगस्त 2026 को इस्तीफा दे दिया था।

तब नोएल टाटा से मतभेद और ट्रस्ट में खींचतान की वजह बनी थी। एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने के फैसले को अभी सालाना आम बैठक में मंजूरी मिलना बाकी है।

2 नॉमिनी डायरेक्टर्स में बहुमत के लिए 2 वोटों की जरूरत, 1 की नहीं

टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन यानी कंपनी के कानून के मुताबिक, किसी भी बड़े फैसले या प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए टाटा ट्रस्ट्स की ओर से नोमिनेटेड डायरेक्टर्स के बहुमत का समर्थन अनिवार्य है।

17 सितंबर की मीटिंग में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के री-अपॉइंटमेंट के खिलाफ वोट दिया था, जबकि ट्रस्ट्स के दूसरे नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने इसका समर्थन किया था। पूरे बोर्ड में प्रस्ताव के पक्ष में 4 और विपक्ष में 1 वोट पड़ा था।

हालांकि, ट्रस्ट्स का कहना है कि जब बोर्ड में उनके 2 प्रतिनिधि हैं, तो बहुमत का मतलब दो वोट होता है, न कि एक। ऐसे में यह शर्त पूरी नहीं हुई और प्रस्ताव खारिज माना जाएगा।

टाटा ट्रस्ट्स ने कहा- स्पेशल वोट से प्रस्ताव पास नहीं किया जा सकता

टाटा ट्रस्ट्स ने साफ किया कि जब कोई प्रस्ताव नियम के तहत पहले ही खारिज हो चुका हो, तो चेयरमैन अपने स्पेशल वोट का इस्तेमाल करके उसे दोबारा मंजूर नहीं करा सकते।

ट्रस्ट्स का कहना है कि दोनों प्रतिनिधियों के अलग-अलग वोट देने से कोई भ्रम या अड़चन पैदा नहीं हुई थी। नियम (AoA) के मुताबिक, जवाब पहले से ही ‘ना’ था।

चेयरमैन का स्पेशल वोट सिर्फ तब काम आता है, जब पक्ष और विपक्ष में बराबर-बराबर वोट पड़े हों, खारिज हो चुके फैसले को बदलने के लिए नहीं।

साइरस मिस्त्री केस का हवाला देकर कहा- सुप्रीम कोर्ट में कही बात से पीछे नहीं हट सकते

टाटा ट्रस्ट्स ने याद दिलाया कि साइरस मिस्त्री को हटाने के समय टाटा संस ने खुद अदालत में ट्रस्ट्स के विशेष वोटिंग अधिकारों का समर्थन किया था।

ट्रस्ट्स का कहना है कि तब टाटा संस ने सुप्रीम कोर्ट में माना था कि ये नियम बड़े शेयरहोल्डर्स यानी ट्रस्ट्स के हक की रक्षा के लिए जरूरी हैं।

अब टाटा संस अपने ही उस पुराने रुख से पीछे नहीं हट सकती, जिसके बचाव के लिए वह देश की सबसे बड़ी अदालत तक गई थी।

12 अगस्त को कहा- अगला कार्यकाल नहीं लेंगे, 17 सितंबर को टाटा संस ने बढ़ाया

चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक है। उन्होंने 12 अगस्त को कहा था कि वे अगला कार्यकाल नहीं लेंगे।

इसके बाद नॉमिनेशन कमेटी ने 3 सितंबर को उनसे अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया। 17 सितंबर को चंद्रशेखरन तैयार हो गए।

ग्रुप में पहली बार रिटायरमेंट उम्र के बाद भी कार्यकाल बढ़ा

टाटा ग्रुप में पहली बार किसी ग्रुप एग्जीक्यूटिव को 65 साल की तय रिटायरमेंट उम्र के बाद भी पद बनाए रखने पर सहमति बनी। टाटा ग्रुप की पॉलिसी के मुताबिक एग्जीक्यूटिव आमतौर पर 65 साल की उम्र में रिटायर होते हैं। हालांकि, नॉन-एग्जीक्यूटिव पद पर वे 70 साल तक रह सकते हैं।

चंद्रशेखरन अभी 63 साल के हैं। अगर वे चेयरमैन बने रहेंगे तो उनका नया कार्यकाल 2032 में खत्म होगा, तब वे 70 साल के होंगे। चंद्रशेखरन अक्टूबर 2016 में पहली बार टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे।

टाटा में चंद्रशेखरन अहम क्यों?

  • समूह का रेवेन्यू तिगुना: 2019 में 6 लाख करोड़ था। 2026 में 16.24 लाख करोड़ हो गया।
  • टाटा संस की संपत्ति चौगुनी: 2018 में 43,252 करोड़ थी। 2026 में 1,79,010 करोड़ हो गई है।
  • लिस्टेड कंपनियों का पूंजीकरण तिगुना: 2020 में 9.2 लाख करोड़ था। 2026 में 24 लाख करोड़ रहा।

टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में फर्क जानिए

  • टाटा ग्रुपः टाटा नाम से चलने वाली अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों को मिलाकर टाटा ग्रुप बनता है। जैसे- टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एअर इंडिया।
  • टाटा संसः टाटा संस, टाटा ग्रुप की मुख्य कंपनी है। यह ग्रुप की बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाती है।
  • टाटा ट्रस्ट्सः टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक और परोपकारी काम करने वाले ट्रस्टों का समूह है। इसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।

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देश

चंद्रशेखरन 5 साल और टाटा संस के चेयरमैन रहेंगे:बोर्ड ने कार्यकाल बढ़ाया, पिछले महीने नोएल टाटा से मतभेद के चलते इस्तीफा दिया था

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नई दिल्ली, एजेंसी। टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल 2032 तक बढ़ा दिया गया है। टाटा संस लिमिटेड के बोर्ड ने गुरुवार को नया कार्यकाल देने को मंजूरी दी। कंपनी को शेयर मार्केट में उतारने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

अभी चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल चल रहा है, वे फरवरी 2027 में रिटायर होने वाले थे। चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त 2026 को इस्तीफा दे दिया था। तब नोएल टाटा से मतभेद और ट्रस्ट में खींचतान की वजह बनी थी।

एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने के फैसले को अभी सालाना आम बैठक में मंजूरी मिलना बाकि है, जिसमें टाटा ट्रस्ट की 66% हिस्सेदारी है। ट्रस्ट के बोर्ड सदस्य नोएल टाटा फैसले के खिलाफ हैं, जबकि वेनु श्रीनिवासन ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का समर्थन किया है।

ग्रुप में पहली बार रिटायरमेंट की उम्र के बाद भी कार्यकाल बढ़ा

टाटा ग्रुप में पहली बार कोई ग्रुप एग्जीक्यूटिव 65 साल की तय रिटायरमेंट उम्र के बाद भी पद पर बना रहेगा। टाटा ग्रुप की पॉलिसी के मुताबिक एग्जीक्यूटिव आमतौर पर 65 साल की उम्र में रिटायर होते हैं। हालांकि, नॉन-एग्जीक्यूटिव पद पर वे 70 साल तक रह सकते हैं।

चंद्रशेखरन अभी 63 साल के हैं। उनका नया कार्यकाल 2032 में खत्म होगा, तब वे 70 साल के होंगे। चंद्रशेखरन अक्टूबर 2016 में पहली बार टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे। जनवरी 2017 में उन्हें चेयरमैन बनाया गया। उन्होंने 1987 में TCS में इंटर्न के तौर पर करियर शुरू किया था।

12 अगस्त को लिखा था- एक सदस्य के विरोध के चलते इस्तीफा दे रहा हूं

चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को पद से इस्तीफा दे दिया था। इस दौरान उन्होंने भावुक पोस्ट लिखी थी। उन्होंने कहा था कि, “टाटा संस के चेयरमैन के रूप में मेरा मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके मेरे अगले 5 साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की थी।

इसे टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी और बोर्ड ने दर्ज किया था और आगे बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद, यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड के सामने रखा गया था।

हालांकि, यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया। सर्वसम्मत समर्थन न मिलने की वजह से मैंने इस फैसले को टालने का विकल्प चुना। उस बोर्ड मीटिंग को हुए 6 महीने बीत चुके हैं और आज तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।

टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और कई बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट्स अभी अहम मोड़ पर हैं। फरवरी 2027 के बाद ग्रुप की अगुआई करने के लिए न सिर्फ एक लीडर का होना जरूरी है, बल्कि कर्मचारियों, निवेशकों, पार्टनर्स और बाकी स्टेकहोल्डर्स के लिए लीडरशिप को लेकर स्पष्टता होना भी बहुत जरूरी है।”

चंद्रशेखरन का 9 साल का सफर: रेवेन्यू रू.16.24 लाख करोड़ पहुंचा

चंद्रशेखरन के 2017 में कमान संभालने के बाद टाटा ग्रुप का दायरा काफी बढ़ा है। चंद्रशेखरन ने ग्रुप को एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे नए क्षेत्रों में उतारा।

  • रेवेन्यू: वित्त वर्ष 2020 में ग्रुप का रेवेन्यू रू.7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर रू.16.24 लाख करोड़ हो गया।
  • मुनाफा: ग्रुप का मुनाफा रू.32,000 करोड़ से बढ़कर रू.1.71 लाख करोड़ हो गया।
  • मार्केट कैप: लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 2020 के रू.9.31 लाख करोड़ से बढ़कर 2026 में रू.24.39 लाख करोड़ पहुंच गया।

टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में फर्क जानिए

  • टाटा ग्रुपः टाटा नाम से चलने वाली अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों को मिलाकर टाटा ग्रुप बनता है। जैसे- टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एअर इंडिया।
  • टाटा संसः टाटा संस, टाटा ग्रुप की मुख्य कंपनी है। यह ग्रुप की बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाती है।
  • टाटा ट्रस्ट्सः टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक और परोपकारी काम करने वाले ट्रस्टों का समूह है। इसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।

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देश

भारतीय इकोनॉमी RBI के अनुमान से ज्यादा तेजी से बढ़ी:पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही, IT-रियल एस्टेट सेक्टर्स में बढ़त का असर

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नई दिल्ली, एजेंसी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव से बढ़ती महंगाई के बावजूद भारत की इकोनॉमी RBI के अनुमान से ज्यादा मजबूत रही। GDP इस साल की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में 7.8% रही। RBI का अनुमान 7% था। एक साल पहले की इसी तिमाही में यह 6.9% की दर से बढ़ी थी।

फाइनेंस, रियल एस्टेट, आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में 12% से ज्यादा की बढ़त रही। इससे महंगाई का असर GDP ग्रोथ पर नहीं पड़ा। सोमवार को यह आंकड़े केंद्र सरकार के सांख्यिकी विभाग ने जारी किए।

PM मोदी ने कहा- यह देश के लोगों की ताकत का नतीजा

PM मोदी ने X पर पोस्ट शेयर कर लिखा, ‘दुनिया भर के संकटों और तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद, भारत ने इस साल की पहली तिमाही में 7.8% की GDP ग्रोथ हासिल की है।

यह देश के लोगों की ताकत का नतीजा है। मंदी की आशंका जताने वाले फिर पीछे छूट गए और भारत ने एक बार फिर बड़ी कामयाबी हासिल की।’

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