Connect with us

देश

Vadilal ब्रांड को लेकर बढ़ा विवाद, बॉम्बे हाईकोर्ट में पहुंचा मामला

Published

on

नई दिल्ली, एजेंसी। देश की प्रमुख आइसक्रीम कंपनी वाडीलाल (Vadilal) से जुड़े पारिवारिक विवाद ने एक बार फिर कानूनी मोड ले लिया है। कंपनी की मुंबई इकाई वाडीलाल डेयरी इंटरनेशनल (VDIL) ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अहमदाबाद समूह पर उसके कारोबारी अधिकारों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है। कंपनी ने अदालत से अंतरिम राहत की मांग करते हुए ब्रांड के तहत अपने कारोबार को बिना किसी रुकावट जारी रखने की अनुमति देने की अपील की है।

मुंबई समूह का कहना है कि वर्ष 1993 में हुए पारिवारिक समझौते के तहत उसे महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और अविभाजित आंध्र प्रदेश में वाडीलाल ब्रांड के नाम से आइसक्रीम और जूस के निर्माण, बिक्री और वितरण का स्थायी अधिकार मिला था। कंपनी का दावा है कि इस समझौते के बदले उसने समूह की ट्रेडमार्क होल्डिंग कंपनी में अपनी हिस्सेदारी भी छोड़ दी थी।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि अहमदाबाद समूह ने विभिन्न कानूनी कार्रवाइयों और अन्य कदमों के जरिए मुंबई इकाई के कारोबार को प्रभावित करने की कोशिश की। इनमें विदेश में ट्रेडमार्क से जुड़े मामले, उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल उठाना और अन्य कानूनी कार्रवाई शामिल हैं।

Continue Reading

देश

MSME की मांग, GST में अनुलोम शुल्क ढांचे से उत्पन्न बाधाएं दूर की जाएं

Published

on

नई दिल्ली, एजेंसी। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) चाहते हैं कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में अनुलोम शुल्क ढांचे (Progressive fee structures) से उत्पन्न बाधाओं को दूर किया जाए ताकि उनके समक्ष कार्यशील पूंजी की समस्या न पैदा हो। आगामी एक जुलाई को देश में जीएसटी व्यवस्था लागू हुए नौ साल पूरे हो जाएंगे। इस अवसर पर लेखा कंपनी डेलॉयट द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले आधे से अधिक एमएसएमई ने अनुलोम शुल्क ढांचे और रिफंड में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया है। 

डेलॉयट साउथ एशिया के इनडायरेक्ट टैक्स लीडर महेश जयसिंग ने कहा, ‘भारत के एमएसएमई ने अनुलोम शुल्क ढांचे से उत्पन्न होने वाली कार्यशील पूंजी की बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है। लगभग 69 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अनुलोम शुल्क की रिफंड व्यवस्था में इनपुट सेवाओं और पूंजीगत वस्तुओं को शामिल करने का समर्थन किया है। वहीं, 63 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने इनवर्जन से जुड़ी विसंगतियों को कम करने के लिए जीएसटी दरों को और अधिक तकर्संगत बनाने की जरूरत बतायी है। उत्तरदाताओं में 51 प्रतिशत एसमएसई ने संचित आईटीसी शेष के साल के अंत में रिफंड का समर्थन का समर्थन किया है जबकि 49 प्रतिशत पिछली अवधियों के लिए अनंतिम रिफंड शुरू करने का समर्थन करते हैं।’

सर्वेक्षण में पता चला है कि व्यापक प्रणालीगत सुधारों की भी मजबूत मांग है। उत्तरदाताओं में 72 प्रतिशत केंद्रीयकृत ऑडिट प्रणाली का समर्थन कर रहे हैं। लगभग 89 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने विलंबित जीएसटी रिफंड और प्री-डिपॉजिट पर ब्याज के स्वत: भुगतान का समर्थन किया, जबकि 88 प्रतिशत ने इनवॉइस-आधारित आईटीसी पात्रता और 87 प्रतिशत ने तिमाही कर भुगतान व्यवस्था का समर्थन किया। एमएसएमई के बीच तिमाही रिटर्न फाइलिंग का सबसे व्यापक समर्थन मिला है। 

डेलॉयट साउथ एशिया के अध्यक्ष (कर) गोकुल चौधरी ने देश के एमएसई पारितंत्र को मजबूत करने में जीएसटी की भूमिका पर कहा, ‘भारत के एमएसएमई हमारे देश के कुल उत्पादन का एक-तिहाई हिस्सा तैयार करते हैं। कुल निर्यात में उनका योगदान लगभग 50 प्रतिशत है। देश की आपूर्ति श्रृंखला के कामकाज और एक पारदर्शी, औपचारिक पारितंत्र बनाने में जीएसटी एक प्रमुख उत्प्रेरक है। अगली पीढ़ी के सुधारों के तहत रिफंड में सुधार करके, इनपुट टैक्स क्रेडिट नियमों को सरल बनाकर और क्रेडिट के निर्बाध उपयोग को सक्षम करके दक्षता और नकदी को बढ़ावा देना चाहिए।’ 

Continue Reading

देश

Credit Card जारी करने में SBI, ICICI और HDFC में किसने मारी बाजी? सामने आए मई 2026 के आंकड़े

Published

on

मुंबई, एजेंसी। देश में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। खरीदारी, बिल भुगतान और अन्य दैनिक खर्चों के लिए लोग पहले के मुकाबले अधिक संख्या में क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर रहे हैं। प्राइवेट बैकों के क्रेडिट कार्डों से ज्यादा इन दिनों सरकारी बैंक ज्यादा पसंद कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में नए क्रेडिट कार्ड जारी करने के मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सबसे आगे रहा।

आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में SBI बैंक की तरफ से लोगों को 1.82 लाख नए क्रेडिट कार्ड जारी किए गए हैं। इस दौरान SBI कार्ड से कुल 38556 करोड़ रुपए का खर्च हुआ, जो अप्रैल के मुकाबले 2% ज्यादा है। ये आंकड़े किसी भी अन्य संस्था से कहीं ज्यादा हैं।

अन्य बैंकों का डाटा

  • ICICI बैंक ने मई 2026 में 1.68 लाख नए क्रेडिट कार्ड जारी किए, जिससे 32,818 करोड़ रुपए का खर्च हुआ, जो अप्रैल के मुकाबले 1% ज्यादा है।
  • HDFC बैंक ने 1.42 लाख नए क्रेडिट कार्ड जारी किए, जिससे कार्डधारकों ने 59,138 करोड़ रुपए खर्च किए।
  • HDFC बैंक के कार्ड में एक महीने क हिसाब से 2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
  • कोटक महिंद्रा बैंक ने 54,000 नए क्रेडिट कार्ड जारी किए, जिससे खर्च 6% बढ़कर 6,389 करोड़ रुपए पहुंच गया।
  • एक्सिस बैंक ने मई में 52,000 नए क्रेडिट कार्ड जारी किए हैं, जिससे खर्च 6% बढ़कर 23,301 करोड़ रुपए हो गया।
Continue Reading

देश

कानूनी समीक्षा में HDFC बैंक को पूर्व चेयरमैन की चिंताओं को लेकर नहीं मिला कोई सबूत

Published

on

नई दिल्ली, एजेंसी। निजी क्षेत्र के एचडीएफसी बैंक ने कहा है कि दो बाहरी विधि कंपनियों की एक स्वतंत्र कानूनी समीक्षा में पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अपने इस्तीफा पत्र या बाद के सार्वजनिक बयानों में जताई गई चिंताओं को साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला। बैंक ने कहा कि 24 मार्च को घोषित इस समीक्षा में यह जांच की गई कि क्या चक्रवर्ती ने जो चिंता जताई उसका कोई सबूत है। इस बात का पता लगाया गया कि क्या उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कोई असहमति दर्ज कराई थी और क्या ऐसी किसी असहमति का समाधान किया गया था। 

चक्रवर्ती ने नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। यह पहली बार था जब एचडीएफसी बैंक के किसी अंशकालिक चेयरमैन ने बीच में ही पद छोड़ दिया, जिससे बैंक के कामकाज पर चिंताएं उत्पन्न हुईं। चक्रवर्ती ने 17 मार्च के अपने इस्तीफे में कहा, ”मैंने पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर कुछ घटनाएं और जो तौर-तरीकों को देखा है, वह मेरे व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं हैं। यही मेरे उक्त निर्णय का आधार है।” 

एचडीएफसी बैंक ने शुक्रवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि यह समीक्षा विल्सन सोनसिनी गुडरिच एंड रोसाटी, पीसी और वाडिया गांधी एंड कंपनी ने तीन महीने में की है। इसमें कहा गया है कि विधि कंपनियों ने चक्रवर्ती के इस्तीफे से पहले के दो वर्षों में निदेशक मंडल और समिति की बैठकों के ब्योरे और एजेंडा पत्रों की समीक्षा की, हजारों दस्तावेजों की जांच की और समितियों के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी और वरिष्ठ कार्यकारियों समेत स्वतंत्र निदेशकों से पूछताछ की। विधि कंपनियों ने चक्रवर्ती से समीक्षा में भाग लेने के लिए कई बार अनुरोध किया, लेकिन उनका साक्षात्कार नहीं हो सका। 

इसमें कहा गया है, ”व्यापक कानूनी समीक्षा पूरी करने के बाद, विधि कंपनियों ने पाया कि चक्रवर्ती के बयान और उनके निहितार्थ रिकॉर्ड और गवाहों के साक्षात्कारों से साबित नहीं हुए।” समीक्षा में पाया गया कि चक्रवर्ती ने जिन निदेशक मंडल की बैठकों में भाग लिया उनके ब्योरों को व्यापक रूप से लिखा और उसकी समीक्षा के साथ अनुमोदन प्रक्रिया का पालन किया जाता था। इससे उन्हें कोई भी असहमति या चिंता दर्ज करने का अवसर मिलता था। बैंक ने कहा कि उसे निदेशक मंडल या उसकी समितियों के रिकॉर्ड, मीटिंग के कागजात या बातचीत में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जो उनके बयान में उठाए गए मुद्दों का समर्थन करता हो। 

बैंक ने कहा कि गवाहों से पूछताछ में भी चक्रवर्ती के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। विधि कंपनियों ने इस्तीफे के बाद चक्रवर्ती के सार्वजनिक बयानों में ‘दुबई मामले’ के जिक्र की भी जांच की। उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे पता चले कि उन्होंने अपने निजी मूल्यों और नैतिकता से जुड़ी चिंताएं जताई हों या उस मामले या किसी अन्य मुद्दे पर निदेशक मंडल या उसकी समिति के फैसलों से असहमति जताई हो। एचडीएफसी बैंक ने 20 मार्च को अपनी दुबई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र (डीआईएफसी) शाखा में नए ग्राहक जोड़ने में कमियों के कारण तीन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। 

गलत तरीके से बिक्री के आरोपों के बाद, स्थानीय नियामक दुबई वित्तीय सेवा प्राधिकरण ने पिछले साल सितंबर में एचडीएफसी बैंक को अपनी डीआईएफसी शाखा में नए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया था। एचडीएफसी बैंक ने कानूनी समीक्षा के नतीजों का हवाला देते हुए कहा, ”कुल मिलाकर, जो सबूत देखे गए वे चक्रवर्ती के बयान से मेल नहीं खाते हैं। बाहरी विधि कंपनियों की समीक्षा में उस बयान का कोई ठोस आधार नहीं मिला।” 

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677