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छत्तीसगढ़

रायपुर : राज्यपाल डेका ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से की सौजन्य भेंट

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 राज्यपाल श्री डेका ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से की सौजन्य भेंट
 राज्यपाल श्री डेका ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से की सौजन्य भेंट

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने आज नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से सौजन्य मुलाकात की।

मुलाकात के दौरान दोनों के बीच विभिन्न समसामयिक विषयों पर  चर्चा हुई। राज्यपाल श्री डेका ने रक्षा मंत्री का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट की।

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अंबेडकर में 700 बेड वाला भवन डेढ़ साल से अटका:231 करोड़ का टेंडर अब तक फाइनल नहीं, निर्माण एजेंसी तय नहीं हुई

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रायपुर, एजेंसी। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन 700 बेड वाले नए अस्पताल भवन का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। 231 करोड़ रुपए की इस परियोजना का टेंडर डेढ़ साल बाद भी फाइनल नहीं हुआ है।

अंबेडकर अस्पताल में पूरे प्रदेश से मरीज इलाज के लिए आते हैं। पिछले कुछ महीनों में एम्स से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां रेफर किए जा रहे हैं। इसके चलते कई वार्डों में बेड कम पड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा दबाव स्त्री रोग, शिशु रोग और मेडिसिन विभाग पर है।

इसी जरूरत को देखते हुए राज्य सरकार ने दो साल पहले मेडिकल कॉलेज परिसर में 700 बेड का नया अस्पताल बनाने की घोषणा की थी। यह छह मंजिला भवन होगा। इसके निर्माण की जिम्मेदारी सीजीएमएससी को दी गई, लेकिन अब तक निर्माण करने वाली एजेंसी तय नहीं हो सकी है।

सीजीएमएससी के अधिकारियों का कहना है कि टेंडर को लेकर शासन से मार्गदर्शन लिया जा रहा है। तकनीकी कारणों से दो बार टेंडर रद्द करना पड़ा। पिछले टेंडर में चार कंपनियों ने हिस्सा लिया था, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

नए भवन में क्या होगा?

नए अस्पताल में महिलाओं और बच्चों के इलाज के लिए अलग विभाग बनाए जाएंगे। इसके अलावा स्किन, ईएनटी और मनोरोग विभाग भी यहां संचालित होंगे। ओपीडी, वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और इलाज की आधुनिक सुविधाएं एक ही भवन में मिलेंगी। योजना के अनुसार ग्राउंड फ्लोर पर स्त्री रोग और शिशु रोग की ओपीडी, जबकि पहली मंजिल पर ऑपरेशन थिएटर बनाए जाएंगे।

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बिलासपुर के गांव में दीवारों पर लिखे GK-करंट अफेयर्स:बच्चे चलते-फिरते कर रहे पढ़ाई, बिना कोचिंग के हो रही कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी

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बिलासपुर, एजेंसी। स्कूली बच्चों की पढ़ाई और कोचिंग की बढ़ती दौड़ को देखते हुए बिलासपुर के ग्राम पंचायत सेलर में जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों ने एक अनोखी पहल शुरू की है। यहां बच्चों को एजुकेशन के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करवाई जा रही है।

यहां गांव की दीवारों को ‘चलती-फिरती पाठशाला’ में बदल दिया गया है। गलियों और सार्वजनिक स्थानों की दीवारों पर सामान्य ज्ञान, इतिहास, भूगोल, विज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवाल लिखे गए हैं, जिन्हें बच्चे रोज पढ़ते हुए स्कूल पहुंचते हैं।

किताबों के पन्नों से निकलकर पढ़ाई अब गांव की दीवारों तक पहुंच गई है। गांव की यह पहल साबित करती है कि शिक्षा में बदलाव के लिए बड़े बजट की नहीं, बल्कि नई सोच की जरूरत होती है। आने वाले समय में यह मॉडल दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

इस पहल के तहत दीवारों पर लिखे गए 50 सवालों को हर दो महीने में बदल दिए जाएंगे। यानी पूरे साल में बच्चों को करीब 300 नए सवाल पढ़ने और याद करने को मिलेंगे। इसके अलावा सिर्फ सवाल पढ़ने तक ही यह काम सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इन्हीं सवालों पर समय-समय पर प्रतियोगिताएं भी कराई जाएंगी। अच्छे प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जाएगा।

दरअसल, शहरों के बच्चों की तरह गांव के बच्चे भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें, इसके लिए सही मार्गदर्शन और कोचिंग की कमी एक बड़ी समस्या बन जाती है। इसी वजह से कई बार गांव के होनहार छात्र पीछे रह जाते हैं।

इस समस्या को देखते हुए बिल्हा जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष विक्रम सिंह और ग्राम पंचायत सेलर के सरपंच धनंजय सिंह ठाकुर ने एक नई पहल शुरू की है। उनका मकसद है कि प्राइमरी से लेकर मिडिल और हाईस्कूल तक के बच्चे भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।

इसके लिए गांव में एक अनोखी व्यवस्था की गई है, जहां दीवारों को ही ‘चलती-फिरती पाठशाला’ बना दिया गया है। गांव की गलियों, चौक-चौराहों और सार्वजनिक जगहों की दीवारों पर सामान्य ज्ञान, गणित, रीजनिंग, इतिहास, भूगोल और करंट अफेयर्स से जुड़े सवाल लिखे गए हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बनेगा मिल का पत्थर

सरपंच धनंजय सिंह ठाकुर का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य युवाओं को रोजमर्रा की दिनचर्या के बीच पढ़ाई से जोड़े रखना है। गांव से गुजरने वाला हर व्यक्ति इन सवालों को पढ़ सकता है और अपने ज्ञान की परीक्षा ले सकता है। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को नियमित अभ्यास का अवसर मिल रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्रयोग छात्रों के साथ-साथ आम नागरिकों के लिए भी उपयोगी साबित हो रहा है। सुबह-शाम टहलने निकलने वाले युवा और छात्र दीवारों पर लिखे प्रश्नों के उत्तर याद करते हैं, जिससे उनकी तैयारी मजबूत हो रही है।

पढ़ाई स्कूल तक नहीं, पूरे गांव तक

सेलर ग्राम पंचायत का उद्देश्य पढ़ाई को स्कूल की चारदीवारी से बाहर निकालकर पूरे गांव तक पहुंचाना है। सोच यह है कि बच्चा घर से निकले तो रास्ते में भी कुछ नया सीखे। यही वजह है कि गांव की दीवारों को ज्ञान की दीवार बनाया गया है, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी बचपन से ही आदत का हिस्सा बन सके।

बच्चों में विकसित होगी सीखने की आदत

इस पहल का मकसद सिर्फ सामान्य ज्ञान बढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों में नियमित पढ़ने और खुद को परखने की आदत विकसित करना भी है। हर तीन महीने में नई प्रश्नावली, परीक्षा और पुरस्कार की व्यवस्था बच्चों में उत्साह बनाए रखेगी और सीखने की प्रक्रिया लगातार चलती रहेगी।

ग्रामीण बच्चों के लिए प्रेरणा बनेगा मॉडल

गांव के अभिभावक और जनप्रतिनिधि भी इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव मान रहे हैं। उनका कहना है कि यदि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी स्कूली स्तर से शुरू होगी तो ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और भविष्य में वे बड़ी परीक्षाओं में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

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बारिश से गिरी जर्जर दीवार,दो बच्चियों की मौत, बुआ गंभीर:घर के आंगन में खेलते वक्त हुआ हादसा, बेमेतरा के राउरपुर गांव की घटना

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बेमेतरा, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में बारिश से पुराने कच्चे मकान की जर्जर दीवार अचानक गिर गई। दीवार के नीचे दबने से दो बहनों की मौत हो गई, जबकि उसकी बुआ गंभीर रूप से घायल हो गई। यह घटना बेमेतरा थाना क्षेत्र के राऊरपुर गांव की है।

जानकारी के अनुसार, गांव के रहने वाले चंद्रप्रकाश कोसले ने नया घर बना लिया था, लेकिन पुराने कच्चे घर की 7 से 8 फीट ऊंची जर्जर दीवार नहीं हटाई गई थी। रविवार सुबह 8:30 बजे शशिकला कोसले दीवार (40 वर्ष) के पास बर्तन धो रही थी, जबकि चंद्रप्रकाश की दो बेटियां वंशिका कोसले (12 वर्ष) और राधिका कोसले (9 वर्ष) आंगन में खेल रही थी। तभी अचानक दीवार गिर गई और तीनों उसके नीचे दब गए।

हादसे में दोनों बच्चियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि जगोना कोसले गंभीर रूप से घायल हो गई। गांव के लोगों ने तुरंत मलबा हटाकर बचाव का काम शुरू किया, लेकिन तीनों करीब एक घंटे तक मलबे में दबी रहीं।

सूचना मिलने पर बेमेतरा पुलिस मौके पर पहुंची। घायल महिला को पहले जिला अस्पताल ले जाया गया। उनकी हालत गंभीर होने पर उन्हें रायपुर रेफर कर दिया गया। पुलिस ने दोनों बच्चियों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं और मामले की जांच शुरू कर दी है। घायल महिला बच्चियों की बुआ हैं।

सिटी कोतवाली बेमेतरा की टीआई सोनल ग्वाला ने बताया कि कोतवाली थाना क्षेत्र के राउरपुर गांव में दीवार गिरने से दो मासूम सगी बहनों की मौत हो गई। इस हादसे में उनकी बुआ भी गंभीर रूप से घायल हुई हैं। उन्हें पहले प्राथमिक उपचार दिया गया, फिर बेहतर इलाज के लिए रायपुर भेजा गया।

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