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छत्तीसगढ़

सर्पदंश नहीं, फिर भी मिला 4 लाख मुआवजा:बिलासपुर में ‘डायमंड गैंग’ 1.5 लाख में करता था डील, डॉक्टर, पुलिस, कर्मचारी सब सेट थे

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में फर्जी स्नेक बाइट मुआवजा घोटाले में अब तक डॉक्टर, पुलिसकर्मी और तहसील कर्मचारियों समेत 17 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में सामने आया है कि ‘एडवोकेट डायमंड गैंग’ में पुलिस, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल थे। अस्पताल में किसी की मौत की सूचना मिलते ही गैंग एक्टिव हो जाता था और सर्पदंश का फर्जी केस बनाकर करीब 1.5 लाख रुपए में सेटिंग की जाती थी।

पुलिस अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर फर्जी दस्तावेजों के जरिए मुआवजा राशि लेने वाले आरोपियों पर कार्रवाई कर रही है। तहसील कार्यालय के 3 कर्मचारियों के बाद अब 2 पुलिसकर्मियों को भी गिरफ्तार किया गया है। वहीं, फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाने के आरोप में सिम्स के कई डॉक्टर फरार बताए जा रहे हैं।

बता दें कि, बिलासपुर में सामान्य मौतों को फर्जी सर्पदंश बताकर प्रति केस 4 लाख रुपए के हिसाब से 431 मामलों में 17.24 करोड़ रुपए का मुआवजा लिया गया। इसके लिए फर्जी दस्तावेज और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाई गईं, कई मामलों में परिजनों की जानकारी के बिना ही रकम का बंदरबांट कर दिया गया।

तहसील कार्यालय के 3 कर्मचारियों की भी गिरफ्तारी हुई है।

तहसील कार्यालय के 3 कर्मचारियों की भी गिरफ्तारी हुई है।

कैसे काम करता था एडवोकेट डायमंड गैंग

सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े की जांच में सिम्स से तहसील तक फैले कथित नेटवर्क की परतें खुल रही हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि, सिम्स में मौत की सूचना पुलिसकर्मी और होमगार्ड के जवान गिरोह तक पहुंचाते थे। इसके बाद एडवोकेट हीरा खांडेकर (एडवोकेट डायमंड गैंग का सरगना) और उसके सहयोगी सक्रिय हो जाते थे।

जो मृतक के परिजन को पैसों और मुआवजे का लालच देकर उन्हें सर्पदंश की बात बताने के लिए तैयार करते थे। भले ही व्यक्ति की मौत दूसरे किसी कारण से हुई हो। इस आपराधिक लालच में आकर मृतक के परिवार वाले शासन के आपदा कोष से दी जाने वाली राशि का कुछ हिस्सा पाकर इस गिरोह के कारनामे में खुद शामिल हो जाते थे।

1.5 लाख में सेट करता था तहसील

जांच में पता चला है कि तहसील से जुड़ा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी गोविंद विश्वकर्मा 1 से 1.5 लाख रुपए लेकर तहसील स्तर पर केस आगे बढ़वाने और पूरी प्रक्रिया की सेटिंग कराने का काम करता था। फर्जी पीएम रिपोर्ट, पटवारी प्रतिवेदन और दस्तावेजों के जरिए मुआवजा प्रकरण तैयार कर सरकारी राशि तक पहुंचने का आरोप है।

सिम्स चौकी में तैनात कर्मचारियों से शवों की जानकारी मिलने के बाद गिरोह के सदस्य परिजनों से संपर्क करते थे। आरोप है कि कुछ मामलों में शवों पर सर्पदंश के निशान दिखाने के लिए छेड़छाड़ की गई और संबंधित थाने से मर्ग पंचनामा की कार्रवाई कराई गई।

महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

डॉक्टर से मिलकर तैयार कराते थे फर्जी पीएम रिपोर्ट

इसके बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हेरफेर कराने का खेल चलता था। पुलिस जांच में कुछ मामलों में डॉक्टरों की फर्जी पीएम रिपोर्ट और हस्ताक्षर सामने आने की बात कही जा रही है। इसके बाद फर्जी पटवारी रिपोर्ट तैयार कर मुआवजा केस तहसील में जमा किए जाते थे।

तहसील में रीडरों की आईडी से आगे बढ़ते थे केस

जांच के अनुसार, तहसील और एसडीएम कार्यालय में पदस्थ रीडरों की आईडी से प्रकरणों को आगे बढ़ाया जाता था। आरोप है कि दैनिक वेतनभोगी गोविंद विश्वकर्मा रीडरों के संपर्क में रहकर प्रकरणों को स्वीकृति दिलाने में भूमिका निभाता था।

मुआवजा स्वीकृत होने के बाद राशि मृतकों के परिजनों के बैंक खातों में पहुंचती थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि, गिरोह के सदस्य परिजनों को कुछ रकम देकर बाकी राशि निकलवा लेते थे।

14 ठिकानों पर पुलिस की दबिश, डॉक्टर, पुलिसकर्मी और राजस्व अफसर भी शामिल

सर्पदंश मुआवजा मामले में पुलिस अब तक 14 से ज्यादा ठिकानों पर दबिश दे चुकी है। इनमें तत्कालीन सिम्स चौकी प्रभारी गुलाब सिंह सोनवानी, प्रधान आरक्षक, होमगार्ड के दो जवान, डॉक्टर एनएच बोले, डॉ. प्रियंका सोनी, अधिवक्ता हीरा खांडेकर और गोविंद विश्वकर्मा समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं।

कोनी थाने के सभी मामलों में दस्तावेज फर्जी मिले

पुलिस जांच में कोनी थाने में दर्ज सर्पदंश के सभी मामलों में पेश दस्तावेजों में गड़बड़ी मिली है। इनमें पीएम रिपोर्ट, मर्ग इंटीमेशन और पटवारी प्रतिवेदन फर्जी तरीके से तैयार किए जाने की बात सामने आई है। कोनी थाने में 3 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से दो मृतकों के परिजनों को मुआवजा मिलने की जानकारी तक नहीं होने की बात जांच में सामने आई है।

फर्जी पीएम रिपोर्ट सामने आने के बाद डॉक्टर फरार

पुलिस जांच में डॉ. प्रियंका सोनी के अलावा डॉ. एसएन बोले की ओर से जारी पीएम रिपोर्ट भी जांच के दायरे में आई है। फर्जी पीएम रिपोर्ट सामने आने के बाद डॉ. बोले के फरार होने की जानकारी है। पुलिस उनके घर पर भी दबिश दे चुकी है।

फर्जी हस्ताक्षरों से बदली मौत की वजह

जांच में डॉ. आरके मरकाम समेत कुछ डॉक्टरों के फर्जी हस्ताक्षरों के इस्तेमाल की बात सामने आई है। रतनपुर थाने में दर्ज एक मामले में हार्ट अटैक से हुई मौत को फर्जी हस्ताक्षर के जरिए सर्पदंश बताकर मुआवजा लेने का आरोप है।

पुलिस अब सर्पदंश मुआवजा से जुड़े सभी मामलों की जांच कर रही है। इसमें शामिल बाकी लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

डीन बोले- डॉ. बोले की छुट्टी खत्म, ड्यूटी पर नहीं लौटे

सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि डॉ. एसएन बोले ने तीन दिन की छुट्टी ली थी। उनकी छुट्टी खत्म हो चुकी है। सोमवार को उन्हें ड्यूटी पर आना था, लेकिन वे नहीं आए हैं। इसकी जानकारी विभागाध्यक्ष की ओर से दी गई है।

एसएसपी बोले- किसी को भी नहीं बक्शा जाएगा

सर्पदंश मामले में अधिवक्ता और उसकी टीम सिंडिकेट बनाकर काम कर रही थी। इसमें जिन-जिन लोगों के नाम सामने आएंगे, सभी के खिलाफ कार्रवाई होगी। मामले में अब तक मुख्य आरोपी अधिवक्ता, उसका भांजा, बैंक कर्मी, डॉक्टर और तहसील के चार कर्मचारियों समेत कुछ अन्य लोगों को जेल भेजा जा चुका है।

तहसील ऑफिस के कर्मचारियों की गिरफ्तारी पर बवाल

सर्पदंश मुआवजा घोटाले में तहसील ऑफिस के तीन कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद कर्मचारी संघ में बवाल मच गया है। कर्मचारी की गिरफ्तारी पर लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी से पहले शासन को सूचना दे दी चाहिए। लेकिन, प्रक्रिया का पालन ही नहीं किया जा रहा है।

बड़े अफसरों को जांच के दायरे से बाहर रखने पर सवाल

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि,करोड़ों के इस घोटाले में कर्मचारी केवल केस पेश करते हैं। जबकि, पूरा अधिकार राजस्व अफसरों को रहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घोटाले में छोटे कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है। जबकि, जिम्मेदार बड़े अफसर अब भी जांच के दायरे से बाहर हैं।

सोमवार को बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के पदाधिकारियों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि कुछ कर्मचारियों को केवल पूछताछ के नाम पर थाने बुलाया गया और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।

संगठन ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। उन्हें न्यायालय में हथकड़ी लगाकर पेश किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि अगर घोटाले में किसी की भूमिका है तो उसकी निष्पक्ष जांच हो, लेकिन कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, जशपुर जिले में पिछले 3 साल में केवल 96 मौतें दर्ज हुईं। जबकि अकेले बिलासपुर में 431 मौतें बताकर 17 करोड़ 24 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया। विधानसभा में काफी हंगामे के बाद इस पर सदन में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही थी।

शासन के नियमों के अनुसार, सांप काटने पर 4 लाख रुपए मुआवजे का प्रावधान है। यही वजह है कि सरकारी मुआवजा हासिल करने लोगों ने अपने परिजनों की सामान्य मौत को सर्पदंश बताकर सरकार से लाखों रुपए मुआवजा ले लिए।

इसके लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और मौत का कारण बदलकर मुआवजे के लिए आवेदन जमा किया गया। जांच में यह भी पता चला है कि कुछ मामलों में बिना परिजनों की सहमति के आरोपी मुआवजा लेकर बंदरबांट कर चुके हैं।

2025 में सामने आया था पहला मामला

फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का पहला मामला 2025 में बिल्हा थाना क्षेत्र से सामने आया था। उस केस में जहर खाने से हुई मौत को सर्पदंश बताकर फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार की गई थी। उस समय भी डॉ. प्रियंका सोनी, मृतक के परिजन और एक अधिवक्ता को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू की, जिसमें कई और संदिग्ध केस सामने आए।

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कोरबा

अपराधों की रोकथाम और ‘प्रिवेंटिव पुलिसिंग’ को प्रभावी बनाने आईजीपी राम गोपाल गर्ग के मार्गदर्शन में उच्च स्तरीय पुलिस कार्यशाला आयोजित

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गुंडा और निगरानी बदमाशों की सघन चेकिंग के लिए जारी हुईं एसओपी (SOPs)
एक गुंडा-एक जवान’ नीति तथा सक्रिय अपराधियों पर सख्त निगरानी के दिये आदेश

बिलासपुर/कोरबा। आज दिनांक 21.07.2026 को राम गोपाल गर्ग पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज, द्वारा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा संपत्ति एवं शरीर संबंधी अपराधों पर पूरी तरह अंकुश लगाने के उद्देश्य से एक वृहद ऑनलाइन बैठक एवं कार्यशाला का आयोजन पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय बिलासपुर रेंज मीटिंग हॉल में किया गया। कार्यशाला में रेंज के समस्त पुलिस अधिकारियों, एसडीओपी (SDOPs) और थाना प्रभारियों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान प्रफुल्ल ठाकुर,पुलिस अधीक्षक जिला-सक्ती, द्वारा 'गुंडा एवं निगरानी बदमाश' विषय पर अपना व्यापक अनुभव साझा करते हुए 'प्रिवेंटिव पुलिसिंग' (निवारक पुलिसिंग) और बेसिक पुलिसिंग की पुनर्स्थापना पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।

कार्यशाला के मुख्य बिंदु एवं निर्देश:
अपराधियों का सटीक वर्गीकरण: पुलिस रेगुलेशन (पैरा 855-860) के तहत आदतन चोरों/लुटेरों को A-Class (निगरानी) और मारपीट/रंगदारी/भू-माफिया को B-Class (गुंडा) में वर्गीकृत कर उनका पूरा बायोडाटा (फोटो, फिंगरप्रिंट, बैंक खाते) अपडेट रखने के निर्देश दिए गए। गंभीर मामलों के लिए ‘गैंग हिस्ट्री शीट’ बनानी होगी।
सरप्राइज चेकिंग : बदमाशों की चेकिंग का समय अनिश्चित (Unpredictable) रखने तथा अधिकारियों को 2-3 सदस्यों की टीम में रहने, टॉर्च को शरीर से दूर (दाहिनी ओर) रखने जैसी सुरक्षा SOPs और बदमाशों के रहन-सहन/आजीविका के मिलान के निर्देश दिए गए।

रिकॉर्ड संधारण एवं डिजिटल-मैनुअल तालमेल
रोजनामचा में रवानगी/वापसी की क्रॉस-एंट्री अनिवार्य।
रजिस्टर 7, परवाना फाइल और A-to-Z अल्फाबेटिकल रजिस्टर का संधारण (ताकि त्वरित रिकॉर्ड खोजा जा सके)।
बीट जवानों के लिए A, B नोटबुक तथा ‘C Notebook’ (क्राइम) का पुनरुद्धार।
‘एक गुंडा – एक जवान’ नीति व कठोर वैधानिक कार्रवाई
हर बदमाश की निगरानी के लिए एक विशिष्ट पुलिसकर्मी जिम्मेदार रखने तथा जमानत के बाद पुन: अपराध करने पर BNSS की धारा 480 के तहत तुरंत जमानत निरस्तीकरण (Bail Cancellation) के निर्देश दिये गए.
धारा 110 BNSS, 20-50 हजार रुपये का बाउंड ओवर, जिला बदर और PIT NDPS के तहत सख्त कदम। Natgrid व CDR से फरार आरोपी ट्रैक होंगे।
मानवाधिकार और माननीय सुप्रीम कोर्ट के नियम : ‘पुट्टस्वामी केस’ व सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले (अमानतुल्लाह खान बनाम दिल्ली पुलिस, 2024) का पालन करते हुए विमुक्त जनजातियों, पिछड़ों या नाबालिगों पर मनमानी कार्रवाई न करने और निजता/मानवाधिकारों का पूरा सम्मान करने के निर्देश दिए गए।
ग्राम अपराध नोटबुक (VCNB) व मूवमेंट ट्रैकिंग
VCNB में गांव के प्रतिष्ठित लोगों, कोटवारों और पेंशनर्स का डेटा रहेगा।
कोटवारों की रोस्टर हाजिरी और मुसाफिर रजिस्टर अनिवार्य।
अंतरराज्यीय/अंतरजिला अपराधियों के लिए BC Roll, SS Roll और केंद्र सरकार के Cri-MAC ऐप से इंटेलिजेंस शेयरिंग की जाएगी।

सुधार का अवसर (माफी) : जो अपराधी वर्षों से अपराध छोड़कर सामान्य जीवन जी रहे हैं , उन्हें निगरानी सूची से हटाया जाएगा, ताकि पुलिस का ध्यान केवल सक्रिय बदमाशों पर रहे।
त्योहारों से पहले परेड : राष्ट्रीय पर्वों व त्योहारों से पूर्व थानों में गुंडा-बदमाशों की परेड और क्लास ली जाएगी।

आईजी श्री गर्ग ने निर्देश दिए कि पुलिस की टारगेट बदमाशों पर रहना चाहिये कि वह अपराध की पुनर्विती ना करें. यह महत्वपूर्ण कार्यशाला  गुंडा और निगरानी बदमाशों की सघन चेकिंग करने विषय पर केंद्रित है। इसका मुख्य उद्देश्य "प्रिवेंटिव पुलिसिंग की सफलता, कोटवारों, पुलिस-मित्रों और जनता के सीधे संवाद पर निर्भर करती है। नियमों का कड़ाई से पालन कर क्षेत्र को पूरी तरह अपराध-मुक्त बनाया जाएगा।"
उक्त ऑन लाईन कार्यशाला में बिलासपुर रेंज के सभी जिलों से लगभग 200 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी सम्मिलित होकर प्रशिक्षण प्राप्त किये। बैठक के अंत में आईजी राम गोपाल गर्ग ने पुलिस अधीक्षक सकती का धन्यावाद ज्ञापित करते हुए  सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को इन निर्देशों की स्वयं मॉनिटरिंग करने तथा इनका अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने की हिदायत दी है।
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छत्तीसगढ़

रायपुर : राज्यपाल से प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों ने की सौजन्य मुलाकात

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सेवा भाव, संवेदनशीलता और तार्किक निर्णय से निभाएं दायित्व –  डेका

राज्यपाल से प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों ने की सौजन्य मुलाकात

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि आम जनता की सेवा का महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और ईमानदारी से निर्वहन करना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जहां चुनौतियां होती हैं, वहीं नए अवसर भी मौजूद होते हैं। इसलिए प्रत्येक परिस्थिति का सकारात्मक दृष्टिकोण से सामना करते हुए जनता के हित में निर्णय लिए जाने चाहिए।

राज्यपाल आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के वर्ष 2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों से चर्चा कर रहे थे। ये अधिकारी वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी, निमोरा में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों ने अकादमी के महानिदेशक टी.सी. महावर के नेतृत्व में राज्यपाल से सौजन्य भेंट की।
राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक निर्णय में मानवीय संवेदनाओं का भी समावेश होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक कार्य में ह्यूमन टच होना आवश्यक है, ताकि शासन की योजनाओं और निर्णयों का लाभ वास्तविक रूप से आम नागरिकों तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जनता से नियमित संवाद करना चाहिए, क्षेत्र का सतत भ्रमण करना चाहिए और लोगों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो कार्य संभव हो, उसे प्राथमिकता के साथ पूरा करें और यदि किसी कारणवश कोई कार्य संभव नहीं है तो उसकी स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी संबंधित व्यक्ति को अवश्य दें। इससे प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होता है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए तार्किक सोच और विवेकपूर्ण निष्कर्ष अत्यंत आवश्यक हैं। तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेना ही एक सक्षम अधिकारी की पहचान है। उन्होंने कहा कि जनता को न्याय दिलाना लोक सेवक का प्रथम कर्तव्य है और प्रत्येक अधिकारी को इस भावना के साथ कार्य करना चाहिए।
उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे युवा हैं और उनके कंधों पर भविष्य के प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्हें अपने कार्यों के माध्यम से सुशासन, पारदर्शिता और जनविश्वास को मजबूत करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि आपको छत्तीसगढ़ जैसे शांत, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य में सेवा करने का अवसर मिला है। यहां के लोगों में सेवा, सहयोग और आत्मीयता की भावना अत्यंत प्रबल है। इस विश्वास और अपनत्व को बनाए रखते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही एक सफल प्रशासनिक अधिकारी की पहचान होगी।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी की प्रशिक्षण निदेशक श्रीमती मेनका प्रधान एवं प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

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छत्तीसगढ़

शैलेष पांडेय बोले- अमर अग्रवाल इस्तीफा देकर नया जनादेश लें:बिलासपुर में कहा- शहर की समस्याओं पर मौन, विधानसभा में एक भी सवाल नहीं पूछा

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बिलासपुर, एजेंसी। बिलासपुर की राजनीति में बुधवार को नया सियासी घमासान देखने को मिला, जब कांग्रेस के पूर्व विधायक शैलेष पाण्डेय ने शहर विधायक अमर अग्रवाल पर सीधा हमला बोलते हुए शहर की समस्याओं पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि विधायक पूर्व मंत्री रहते हुए भी विधानसभा में शहर के मुद्दों को प्रभावी ढंग से नहीं उठा पा रहे हैं। पिछले ढाई साल के विधानसभा रिकॉर्ड में अमर अग्रवाल ने एक भी सवाल नहीं पूछा है।

पूर्व विधायक पाण्डेय ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि जनता की समस्याओं को सदन तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं तो उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देकर नया जनादेश लेना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार और स्थानीय विधायक को शहर की मूलभूत समस्याओं पर घेरते हुए कहा कि लंबे समय तक मंत्री और विधायक रहने के बावजूद बिलासपुर आज भी जलभराव, जर्जर सड़कों, पेयजल संकट, बिजली कटौती, अपराध, नशाखोरी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं से जूझ रहा है।

मंत्री पद की चाहत में किया समझौता

पूर्व विधायक समेत कांग्रेस नेताओं ने विधायक अमर अग्रवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने मंत्री पद की चाहत में बिलासपुर के विकास से समझौता कर लिया है। उन्हें डर है कि विधानसभा में बोलने और सवाल उठाने से सरकार और भाजपा के बड़े नेता नाराज हो जाएंगे और उन्हें मंत्री पद नहीं मिलेगा, जिसके कारण विधानसभा में वो चुप रहते हैं।

कांग्रेस नेताओं ने भाजपा विधायक अजय चंद्राकर, धरमलाल कौशिक और धर्मजीत का उदाहरण देते हुए कहा कि वो भी आवाज उठाने में पीछे नहीं रहते। लेकिन, शहर विधायक अग्रवाल को जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है।

पांच साल में MLA पाण्डेय ने पूछे 392 सवाल

शैलेष पांडेय ने कहा कि अपने विधायक कार्यकाल में उन्होंने विधानसभा में 392 प्रश्न उठाकर बिलासपुर के मुद्दों को प्रमुखता से रखा, जबकि वर्तमान विधायक का रिकॉर्ड जनता के सामने है। उन्होंने सवाल किया कि जब दूसरे विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याएं सदन में उठा रहे हैं तो बिलासपुर की आवाज आखिर क्यों खामोश है।

स्मार्ट सिटी पर भी साधा निशाना

कांग्रेस ने स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर भी सरकार को घेरा। जिला कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने आरोप लगाया कि करीब 1100 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद पहली ही बारिश में शहर जलमग्न हो गया।

कई घरों में पानी घुसने से लोगों के जरूरी दस्तावेज, छात्रों की मार्कशीट और घरेलू सामान खराब हो गए, लेकिन प्रभावित परिवारों को मात्र 6 हजार रुपए की सहायता देकर जिम्मेदारी पूरी मान ली गई। कांग्रेस ने वास्तविक नुकसान का सर्वे कर उचित मुआवजा देने और स्मार्ट सिटी के कार्यों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।

रेल, अस्पताल और कानून-व्यवस्था के मुद्दे भी उठाए

पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी ने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की बदहाल व्यवस्था, रेलवे ट्रेनों की निरस्ती, बिलासपुर से हवाई सेवाओं की कमी, बढ़ी बिजली दरों, निजी स्कूलों की फीस, स्वामी आत्मानंद स्कूलों की व्यवस्था और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के एलएलबी प्रश्नपत्र लीक मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी की।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि बिलासपुर के विकास और जनता के अधिकारों के लिए है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनहित के मुद्दों की अनदेखी जारी रही तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन और तेज करेगी। प्रेसवार्ता में पूर्व विधायक शैलेष पांडेय के साथ जिला कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा, पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी, नेता प्रतिपक्ष भरत कश्यप और उपनेता प्रतिपक्ष रामा बघेल मौजूद रहे।

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