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“पहले न्याय, फिर जनसुनवाई” – वर्षों से लंबित वादे पूरे किए बिना मानिकपुर परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई स्वीकार नहीं : जयसिंह अग्रवाल

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कोरबा। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की मानिकपुर ओपनकास्ट विस्तार परियोजना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रभावित ग्रामीणों के वर्षों पुराने लंबित मुद्दों का समाधान किए बिना पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित करना केवल कानूनी औपचारिकता पूरी करने का प्रयास होगा, जिसे प्रभावित जनता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगी।
उन्होंने एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को विस्तृत पत्र भेजकर मांग की है कि 21 अगस्त 2026 को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले सभी लंबित मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार एवं विस्थापन संबंधी मामलों का निराकरण किया जाए, अन्यथा जनसुनवाई तत्काल स्थगित कर नई तिथि घोषित की जाए।

जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि एसईसीएल को यह समझना होगा कि पर्यावरणीय जनसुनवाई कोई खानापूर्ति या सरकारी फाइल पूरी करने की प्रक्रिया नहीं है। यह उन हजारों परिवारों के भविष्य का प्रश्न है, जिनकी जमीन, मकान, खेती, रोजगार, जलस्रोत और पूरा सामाजिक जीवन इस परियोजना से प्रभावित होने जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भिलाई खुर्द, दादरखुर्द, मानिकपुर, इमलीडुग्गू, उरगा, कुरूडीह, बेन्दरकोना, गोढ़ी, पंडरीपानी, सेमीपाली सहित अनेक गांवों के लोग वर्षों से एसईसीएल के अधूरे वादों का बोझ उठा रहे हैं। पिछली जनसुनवाइयों में रोजगार, पुनर्वास, लंबित मुआवजा, स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता, सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, धूल नियंत्रण, ब्लास्टिंग से क्षति का मुआवजा, हरित पट्टी विकास तथा स्थानीय परिवहनकर्ताओं को अवसर देने जैसे अनेक आश्वासन दिए गए थे, लेकिन अधिकांश आज भी कागजों तक सीमित हैं।
उन्होंने कहा कि जब पुराने वादे पूरे नहीं हुए, तब नई जनसुनवाई में दिए जाने वाले आश्वासनों पर जनता विश्वास कैसे करे?
पूर्व मंत्री ने भिलाई खुर्द के सर्वेक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि लगभग 50 परिवारों को मनमाने ढंग से सर्वे और मुआवजा प्रक्रिया से बाहर रखा गया, जबकि समान परिस्थितियों वाले अन्य मकानों को शामिल कर लिया गया। उन्होंने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताते हुए सभी छूटे परिवारों का निष्पक्ष पुनः सर्वे कराने की मांग की।
जयसिंह अग्रवाल ने पुनर्वास नीति को भी कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि ₹6.91 लाख देकर प्रभावित परिवारों से यह कहना कि वे स्वयं जमीन खरीदकर नया मकान बना लें, वास्तविकता से पूरी तरह कटा हुआ निर्णय है। आज की परिस्थितियों में इतनी राशि से न जमीन खरीदी जा सकती है और न सम्मानजनक आवास बनाया जा सकता है। यदि एसईसीएल हजारों करोड़ रुपये का कोयला निकाल सकती है तो उसे प्रभावित परिवारों के लिए विकसित पुनर्वास कॉलोनी बसाने की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए।
उन्होंने कचांदी नाला को क्षेत्र के किसानों की जीवनरेखा बताते हुए कहा कि इसके साथ किसी भी प्रकार का छेड़छाड़ हजारों किसानों की सिंचाई व्यवस्था और भूजल पर गंभीर प्रभाव डालेगी। बिना वैज्ञानिक अध्ययन, वैकल्पिक व्यवस्था और ग्रामीणों की सहमति के इसका डायवर्सन किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं होगा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में कोयला परिवहन आबादी के बीच से कराने के बजाय मानिकपुर से बरबसपुर बायपास तक रेलवे लाइन के समानांतर वैकल्पिक सड़क बनाई जाए, जिससे दुर्घटनाएं कम हों, प्रदूषण घटे और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
जयसिंह अग्रवाल ने वर्ष 1964 से 1968 के बीच तत्कालीन नेशनल कोल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनसीडीसी) द्वारा अधिग्रहित भूमि के लंबित मुआवजा प्रकरणों को एसईसीएल के इतिहास का सबसे बड़ा लंबित न्यायिक एवं मानवीय प्रश्न बताया। उन्होंने कहा कि लगभग छह दशक बाद भी अनेक परिवार अपने पूर्वजों की भूमि का वैधानिक मुआवजा पाने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने को विवश हैं। केवल यह कह देना कि राशि किसी ट्रिब्यूनल में जमा है, सार्वजनिक उपक्रम की जिम्मेदारी से बचने का आसान रास्ता नहीं हो सकता। एसईसीएल को ग्रामवार समीक्षा कर सभी वैधानिक उत्तराधिकारियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए।
पूर्व मंत्री ने कहा कि जनसुनवाई से पहले पूर्व के सभी आश्वासनों की अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, लंबित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार के मामलों का निराकरण किया जाए, पुनर्वास पैकेज का पुनर्मूल्यांकन हो, भिलाई खुर्द के सभी छूटे परिवारों को सर्वे में शामिल किया जाए तथा जिला प्रशासन, एसईसीएल और प्रभावित ग्रामीणों की संयुक्त बैठक बुलाकर सभी विवादों का समाधान किया जाए।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी विकास का विरोध नहीं करती, लेकिन विकास के नाम पर स्थानीय लोगों के अधिकारों, सम्मान और भविष्य की बलि भी स्वीकार नहीं करेगी। जनता की सहमति के बिना विकास नहीं, बल्कि संघर्ष पैदा होता है।”
जयसिंह अग्रवाल ने अंत में कहा कि यदि 21 अगस्त 2026 से पहले उपर्युक्त सभी प्रमुख मुद्दों पर ठोस और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता, तो प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई को तत्काल स्थगित किया जाना चाहिए। यदि बिना समाधान के केवल औपचारिक जनसुनवाई आयोजित की जाती है और उसके दौरान प्रभावित ग्रामीण लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराते हैं अथवा कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।

CMD SECL Bilaspur – 21.07.2026
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कोरबा

कोरबा में 24 घंटे में दूसरी हत्या,आरोपी फरार:छोटे भाई ने खेत में काम कर रहे बड़े भाई को टांगी से उतारा मौत के घाट

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कोरबा। कोरबा जिले में 24 घंटे के भीतर हत्या की दूसरी बड़ी वारदात सामने आई है। मंगलवार (21 जुलाई) की रात बांगो थाना क्षेत्र में बड़े भाई ने छोटे भाई की हत्या की थी, वहीं बुधवार सुबह श्यांग थाना क्षेत्र के छुईमाटी गांव में छोटे भाई ने बड़े भाई पर टांगी से ताबड़तोड़ हमला कर उसकी हत्या कर दी। दोनों मामलों में हथियार टांगी ही रहा और रिश्ते भी खून के थे।

श्यांग थाना क्षेत्र के ग्राम जिल्गा के छुईमाटी गांव में राम भरोस राठिया (47) अपने घर से लगी बाड़ी में घास साफ कर रहे थे। इसी दौरान उनका छोटा भाई रामजीवन राठिया वहां पहुंचा और गर्दन पर टांगी से लगातार 6 से 7 वार कर दिए। हमले में राम भरोस की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के समय उनकी पत्नी सनिसो राठिया भी मौजूद थीं और उन्होंने पूरी वारदात देखी।

पुरानी रंजिश बनी हत्या की वजह

पुलिस की जांच में दोनों भाइयों के बीच लंबे समय से विवाद होने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक आरोपी रामजीवन का स्वभाव भी सनकी बताया जा रहा है। दोनों भाई एक ही गांव में आमने-सामने अलग-अलग घरों में रहते थे और खेती-किसानी करते थे।

दोनों परिवारों पर टूटा दुख

मृतक राम भरोस राठिया की पत्नी और दो बेटियां हैं, जिनमें एक की शादी हो चुकी है। वहीं आरोपी रामजीवन राठिया के परिवार में पत्नी और चार बच्चे हैं, जिनमें दो बेटे और दो बेटियां शामिल हैं।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलते ही श्यांग थाना प्रभारी लक्ष्मण खूंटे पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। मृतक के बेटे राम अवतार राठिया की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी वारदात के बाद से फरार है और उसकी तलाश में पुलिस की टीमें जुटी हुई हैं। गांव में साक्ष्य जुटाने और लोगों के बयान दर्ज करने की कार्रवाई जारी है।

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कोरबा

23-24 जुलाई को रद्द की गई 4 मेमू ट्रेन बहाल:चार ट्रेनें अब भी रद्द रहेंगी, भाटापारा-हथबंध में ऑटो सिग्नलिंग काम होगा

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रायपुर, एजेंसी। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने भाटापारा-हथबंध स्टेशनों के बीच तीसरी लाइन सेक्शन में ऑटो सिग्नलिंग के लिए नॉन-इंटरलॉकिंग (एनआई) कार्य के कारण ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया है। रेलवे ने पहले जिन ट्रेनों को रद्द करने की घोषणा की थी।

इनमें से चार मेमू ट्रेनों को बहाल (रिस्टोर) कर दिया है। ये ट्रेनें अब अपने निर्धारित समय पर चलेंगी।

ये 4 ट्रेनें अब रद्द नहीं होंगी

रेलवे के संशोधित आदेश के अनुसार 23 जुलाई को चलने वाली ये ट्रेनें अब सामान्य रूप से संचालित होंगी।

  • 68728 रायपुर–बिलासपुर मेमू
  • 68734 बिलासपुर–कोरबा मेमू
  • 68733 कोरबा–बिलासपुर मेमू
  • 68719 बिलासपुर–रायपुर मेमू

अब ये ट्रेनें रहेंगी रद्द

संशोधित सूची के अनुसार अब भी ये ट्रेनें रद्द रहेंगी।

  • 23 जुलाई: 58203 कोरबा–रायपुर पैसेंजर
  • 23 जुलाई: 58204 रायपुर–कोरबा पैसेंजर
  • 23 जुलाई: 68746 रायपुर–गेवरा रोड मेमू
  • 24 जुलाई: 68745 कोरबा–रायपुर मेमू

इस ट्रेन का आंशिक परिचालन

23 जुलाई को चलने वाली 68862/68861 झारसुगुड़ा–गोंदिया–झारसुगुड़ा मेमू केवल बिलासपुर तक ही चलेगी। यह ट्रेन बिलासपुर स्टेशन पर ही समाप्त और वहीं से प्रारंभ होगी। बिलासपुर–गोंदिया–बिलासपुर के बीच इसका परिचालन रद्द रहेगा।

क्यों किया गया बदलाव?

रेलवे के अनुसार रायपुर मंडल के भाटापारा-हथबंध स्टेशनों के बीच तीसरी लाइन सेक्शन में ऑटो सिग्नलिंग की कमीशनिंग के लिए नॉन-इंटरलॉकिंग (एनआई) कार्य किया जा रहा है। इसी वजह से कुछ ट्रेनों के संचालन में अस्थायी बदलाव किए गए हैं।

यात्रियों के लिए सलाह

रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, NTES या हेल्पलाइन के माध्यम से जरूर जांच लें, क्योंकि इंजीनियरिंग कार्य के दौरान परिचालन में अस्थायी बदलाव किए गए हैं।

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बिस्तर पर लिपटा करैत, सोते मासूम को डसा:कोरबा में इलाज के दौरान 6 साल के बच्ची की मौत, पिता के साथ सो रही थी

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कोरबा। कोरबा जिले के कटघोरा थाना क्षेत्र के आमाखोखरा गांव में करैत सांप के डसने से 6 साल की बच्ची सान्वी कंवर की मौत हो गई। वह अपने पिता के साथ बिस्तर पर सो रही थी। रात करीब 1 बजे सांप ने उसे डस लिया। परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान उसकी जान नहीं बच सकी।

सान्वी के पिता किरण सिंह आमाखोखरा गांव में रहते हैं। वे मजदूरी और खेती कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। घटना वाली रात परिवार के सभी सदस्य खाना खाने के बाद सोने चले गए। सान्वी अपने पिता के साथ एक कमरे में सो रही थी, जबकि उसकी मां और दूसरा बच्चा दूसरे कमरे में थे।

चिल्लाने पर खुली नींद

रात करीब 1 बजे करैत सांप ने पहले सान्वी के कान और फिर हाथ पर डस लिया। दर्द से वह चिल्लाते हुए उठी, जिससे परिवार की नींद खुल गई। शुरुआत में परिजनों को लगा कि किसी कीड़े ने काटा है, लेकिन सर्पदंश के लक्षण दिखने पर वे उसे तुरंत कटघोरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।

मेडिकल कॉलेज रेफर, इलाज के दौरान तोड़ा दम

बच्ची की गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। वहां इलाज शुरू किया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

बिस्तर पर ही छिपा था करैत सांप

मासूम के पिता किरण सिंह ने बताया कि घटना के बाद उन्हें लगा कि सांप बाहर निकल गया होगा। बाद में देखा तो करैत सांप बिस्तर पर ही लिपटा हुआ था। उनका कहना है कि संभवतः सांप पहले से ही बिस्तर पर था, लेकिन अंधेरे में नजर नहीं आया।

बरसात में बढ़ जाता है सर्पदंश का खतरा

स्नेक कैचर जितेंद्र सारथी ने बताया कि बरसात के मौसम में सांप घरों में घुस आते हैं, जिससे सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने लोगों से मच्छरदानी लगाकर सोने, घर के आसपास साफ-सफाई रखने और सर्पदंश होने पर बिना देरी किए अस्पताल पहुंचने की अपील की। साथ ही झाड़-फूंक के बजाय तुरंत चिकित्सकीय इलाज कराने की सलाह दी।

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