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बिज़नस

Volkswagen का मुनाफा 33% गिरा, हजारों नौकरियों पर मंडराया खतरा

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बर्लिन, एजेंसी। जर्मनी की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी फॉक्सवैगन (Volkswagen) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। कंपनी को दूसरी तिमाही में मुनाफे में बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ा है। अप्रैल-जून 2026 की दूसरी तिमाही में कंपनी का टैक्स चुकाने के बाद शुद्ध मुनाफा (Net Profit) 32.9 फीसदी घटकर 1.54 अरब यूरो रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 2.29 अरब यूरो था। दिलचस्प बात यह है कि कंपनी का कुल राजस्व (Revenue) 2 फीसदी बढ़कर 82.44 अरब यूरो पहुंचा लेकिन बढ़ती लागत, कमजोर बिक्री और वैश्विक चुनौतियों ने मुनाफे पर बड़ा असर डाला।

अप्रैल-जून तिमाही के दौरान फॉक्सवैगन का राजस्व 2 प्रतिशत बढ़कर 82.44 अरब यूरो पहुंचा। इसके बावजूद ऑपरेटिंग प्रॉफिट 9.5 प्रतिशत घटकर 3.47 अरब यूरो रह गया। वहीं, कर-पूर्व लाभ में भी 23 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। जनवरी से जून की पहली छमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 30.7 प्रतिशत घटकर 3.10 अरब यूरो रहा।

चीन के बाजार में आई भारी गिरावट 

कंपनी के प्रदर्शन पर सबसे बड़ा असर चीन के बाजार से पड़ा। पहली छमाही में चीन में कंपनी की बिक्री 31.6 फीसदी गिर गई। वहीं, दूसरी तिमाही में कुल वाहन बिक्री 9.7 फीसदी घटकर 20.43 लाख यूनिट रह गई, जबकि उत्पादन 13.4 फीसदी घटकर 20.14 लाख वाहन पर आ गया। कंपनी के सीईओ ओलिवर ब्लूम का कहना है कि चीन को छोड़ दें तो अन्य बाजारों में प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा लेकिन चीन की कमजोरी ने पूरे समूह के नतीजों पर दबाव डाला।

चीन में स्थानीय इलेक्ट्रिक वाहन (EV) कंपनियां कम कीमत और बेहतर फीचर्स वाली कारों के साथ तेजी से बाजार पर कब्जा कर रही हैं। इसके अलावा अमेरिका के आयात शुल्क, यूरोप में कमजोर मांग, जर्मनी में ऊंची उत्पादन लागत और इलेक्ट्रिक वाहनों की धीमी मांग ने भी कंपनी की कमाई प्रभावित की है। अमेरिका में ID.4 इलेक्ट्रिक SUV के उत्पादन से जुड़ा लगभग 50 करोड़ यूरो का अतिरिक्त खर्च भी नतीजों पर भारी पड़ा।

50,000 नौकरियां कम करने की योजना

फॉक्सवैगन लागत कम करने के लिए बड़े पुनर्गठन की तैयारी कर रही है। कंपनी पहले ही 2030 तक करीब 50,000 नौकरियां कम करने की योजना पर काम कर रही है, जिनमें से 35,000 पद केवल फॉक्सवैगन एजी में घटाए जाएंगे। अब प्रबंधन अतिरिक्त 50,000 नौकरियों में कटौती की संभावना का भी आकलन कर रहा है। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि 1 लाख नौकरियां खत्म करने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और इस पर अभी समीक्षा जारी है।

इसके साथ ही जर्मनी के एम्डेन, हनोवर, ज्विकाऊ और ऑडी के नेकारसुल्म प्लांट के भविष्य पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि फैक्ट्रियां बंद करने के बजाय उन्हें नए उत्पादन कार्यों के लिए इस्तेमाल करने पर प्राथमिकता दी जाएगी।

कमजोर तिमाही नतीजों के बाद फॉक्सवैगन ने 2026 के लिए अपना रेवेन्यू अनुमान भी घटा दिया है। अब कंपनी को पूरे साल राजस्व में 0 से 3 फीसदी तक गिरावट की आशंका है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि यूरोप में इलेक्ट्रिक वाहनों के ऑर्डर 50 फीसदी से अधिक बढ़े हैं और दूसरी छमाही में प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद बनी हुई है।

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देश

EPF मेंबर्स के लिए खुशखबरी, खातों में जमा हुआ ब्याज, कर्मचारियों को मिलने लगे SMS

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नई दिल्ली, एजेंसी। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए घोषित ब्याज राशि कर्मचारियों के ईपीएफ खातों में जमा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार द्वारा 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को मंजूरी मिलने के बाद लंबे समय से इसका इंतजार कर रहे करोड़ों कर्मचारियों के खातों में अब ब्याज क्रेडिट होने लगा है। कई खाताधारकों को मोबाइल पर एसएमएस के जरिए इसकी सूचना भी मिलने लगी है।

हालांकि, ब्याज जमा होने का संदेश मिलने के बावजूद कई सदस्यों की पासबुक में संशोधित बैलेंस तुरंत दिखाई नहीं दे रहा है। ईपीएफओ के अनुसार, करोड़ों खातों को चरणबद्ध तरीके से अपडेट किया जा रहा है, इसलिए सभी खातों में नई राशि और ब्याज की एंट्री दिखाई देने में कुछ समय लग सकता है।

इस वर्ष संगठन को देशभर के करोड़ों ईपीएफ खातों में लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपए ब्याज के रूप में जमा करने हैं। अधिकारियों के अनुसार, नई केंद्रीकृत आईटी प्रणाली (CITES) लागू होने के बाद ब्याज जमा करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और स्वचालित हो गई है, जिससे इस बार काम निर्धारित समय से पहले पूरा होने की उम्मीद है।

ऐसे चेक करें बैलेंस की जानकारी 

खाताधारक अपने ईपीएफ खाते का अद्यतन बैलेंस ईपीएफओ के सदस्य पासबुक पोर्टल पर देख सकते हैं। इसके लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) और पासवर्ड की आवश्यकता होगी। पोर्टल पर लॉग-इन करने के बाद ‘View Passbook’ विकल्प में ब्याज राशि और कुल बैलेंस की जानकारी उपलब्ध होगी।

ईपीएफओ ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी सदस्य के खाते में ब्याज की प्रविष्टि तुरंत दिखाई नहीं देती है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। सभी खातों का डेटा क्रमवार अपडेट किया जा रहा है और यह प्रक्रिया पूरी होने में कुछ समय लग सकता है।

इस बीच, संगठन ने अपनी अधिकांश सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा दिया है। साथ ही, संशोधित नियमों के तहत पात्र सदस्य आवश्यकता पड़ने पर अपने ईपीएफ खाते में जमा राशि का 75 प्रतिशत तक निकाल सकते हैं। इससे कर्मचारियों को आपात स्थिति में आर्थिक सहायता प्राप्त करना पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है।

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देश

रुपया 18 पैसे मजबूत होकर 96.55 प्रति डॉलर पर

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मुंबई, एजेंसी। रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे मजबूत होकर 96.55 (अस्थायी) पर रहा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप से रुपए को समर्थन मिला। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली और घरेलू शेयर बाजार में कमजोर धारणा से रुपए पर दबाव बना रहा। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया कमजोर रुख के साथ 96.81 प्रति डॉलर पर खुला। 

कारोबार के दौरान यह 96.30 से 96.81 प्रति डॉलर के दायरे में रहा और अंत में पिछले बंद भाव के मुकाबले 18 पैसे की बढ़त के साथ 96.55 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ। रुपया बृहस्पतिवार को 20 पैसे की गिरावट के साथ 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की निकासी से रुपए पर दबाव बना हुआ है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि शुक्रवार को रुपया दोपहर साढ़े तीन बजे के आसपास 96.55 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा था। उन्होंने कहा कि रुपए में और गिरावट रोकने के लिए आरबीआई के हस्तक्षेप की रिपोर्ट है। कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा भी रुपए को स्थिर रखने के लिए डॉलर बेचने की बात सामने आई है। मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की स्थिति में रुपये पर दबाव बना रह सकता है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी रुपए को प्रभावित कर सकती हैं, हालांकि दोनों देशों के बीच राजनयिक बातचीत से रुपए में तेज गिरावट रुक सकती है। 

चौधरी ने कहा कि आरबीआई का हस्तक्षेप रुपये को निचले स्तर पर सहारा दे सकता है। उनके अनुसार, डॉलर के मुकाबले रुपया का हाजिर भाव 96.30 से 96.85 के दायरे में रह सकता है। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 101.38 पर रहा। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 100.4 डॉलर प्रति बैरल पर रहा, हालांकि यह 100 डॉलर के स्तर से ऊपर बना रहा। घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ 331.62 अंक टूटकर 76,059.77 अंक पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 102.15 अंक की गिरावट के साथ 23,767.45 अंक पर रहा। 

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देश

शेयर बाजार में लगाचार पांचवें दिन गिरावट, सेंसेक्स 332 अंक फिसला

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मुंबई, एजेंसी। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका के नए व्यापार शुल्क से उपजी चिंताओं के बीच शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार लगातार पांचवें सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 332 अंक गिर गया जबकि निफ्टी 102 अंक नुकसान में रहा। विश्लेषकों के मुताबिक, कच्चे तेल के दाम में मजबूती कायम रहने, विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में बिकवाली से धारणा नकारात्मक रही।

बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 331.62 अंक यानी 0.43 प्रतिशत गिरकर 76,059.77 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह एक समय 916.96 अंक यानी 1.20 प्रतिशत लुढ़ककर 75,474.43 तक गिर गया था। वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 102.15 अंक यानी 0.43 प्रतिशत फिसलकर 23,767.45 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, एशियन पेंट्स और इन्फोसिस प्रमुख रूप से नुकसान में रहीं। दूसरी तरफ, एचसीएल टेक, आईटीसी, एक्सिस बैंक और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।

ऑनलाइन ट्रेडिंग मंच एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पोनमुदी आर ने कहा, “भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें दिन गिरावट में रहा, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिकी शुल्क की चिंताओं से निवेशक सतर्क रहे। एशियाई बाजारों की कमजोरी से भी घरेलू स्तर पर बिकवाली का दबाव बढ़ा।”

इस बीच, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 3.66 प्रतिशत गिरकर 96.98 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि पिछले सत्र में यह 100 डॉलर के पार चला गया था।

एशिया के अन्य बाजारों में भी भारी गिरावट देखी गई। दक्षिण कोरिया का सूचकांक कॉस्पी 5.72 प्रतिशत लुढ़क गया, जबकि जापान का निक्की, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग सूचकांक भी नुकसान में रहे। यूरोपीय बाजार बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार बृहस्पतिवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को 2,999.23 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। इससे पहले बृहस्पतिवार को सेंसेक्स 363.66 अंक टूटकर 76,391.39 अंक और निफ्टी 126.65 अंक घटकर 23,869.60 अंक पर बंद हुए थे।

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