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तमिलनाडु के नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन पूछताछ के बाद रिहा:पुलिस ने एक्ट्रेस तृषा पर आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में गिरफ्तार किया था, उदयनिधि ने कहा- बदले की कार्रवाई

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चेन्नई, एजेंसी। तमिलनाडु के नेता प्रतिपक्ष और डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन को अभिनेत्री तृषा पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया।

उदयनिधि सोमवार को तंजावुर में कावेरी जल विवाद पर आयोजित रैली में भी मौजूद थे। इसी दौरान भीड़ में “तृषा, तृषा” के नारे लगे। आरोप है कि इस पर उदयनिधि ने कहा, “पानी कहीं और पहुंचे या न पहुंचे, वहां जरूर पहुंचना चाहिए।” बाद में सफाई दी कि उनका इशारा कावेरी के पानी की ओर था।

पुलिस ने उनके खिलाफ 6 धाराओं में केस दर्ज किया है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उदयनिधि ने मद्रास हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी। हालांकि, उस पर सुनवाई होने से पहले ही पुलिस ने उन्हें अरेस्ट कर लिया।

मद्रास हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि उदयनिधि को पूछताछ के बाद आज ही रिहा कर दिया जाए।

विजय की चुनाव में जीत के बाद मिलने पहुंची थीं तृषा

4 मई को तमिलनाडु विधानसभा के रिजल्ट आए थे। TVK ने 234 में से 108 सीटें जीती थीं। उस दिन तृषा का बर्थडे था। रिजल्ट आने से पहले वो तिरुमाला मंदिर पहुंचीं, दर्शन किए और फिर विजय के घर पहुंचीं।

विजय और तृषा की केमिस्ट्री काफी चर्चा में रही है। दोनों करीब 5 फिल्मों में साथ नजर आए हैं, जिनमें से 2023 में रिलीज सुपरहिट फिल्म लियो भी शामिल है। यह वही वक्त था जब विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम तलाक के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ रही थीं।

TVK ने घोषणा पत्र में कहा था- कावेरी का पानी तमिलनाडु को दिलाएंगे

विजय की पार्टी TVK ने अपने घोषणा-पत्र में कहा था कि तमिलनाडु के कावेरी जल अधिकारों की पूरी रक्षा की जाएगी। राज्य के हिस्से का पानी हर हाल में सुनिश्चित कराया जाएगा। कर्नाटक की मेकेदातु बांध परियोजना का विरोध जारी रखा जाएगा। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेशों को सख्ती से लागू कराने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।

कावेरी जल विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर है। नदी कर्नाटक से निकलकर तमिलनाडु की ओर बहती है। कर्नाटक इसका उपयोग सिंचाई और पीने के पानी के लिए करता है, जबकि तमिलनाडु का कृषि क्षेत्र पूरी तरह इसी पर निर्भर है।

1924 के ब्रिटिशकालीन समझौते के तहत पानी का बड़ा हिस्सा तमिलनाडु को दिया गया था। लेकिन कर्नाटक का कहना है कि ये पुराने नियम गलत हैं और कम बारिश के सालों में वह पानी नहीं छोड़ सकता। वहीं तमिलनाडु का कहना है कि समय पर पानी न मिलने से उसके किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं।

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एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट टर्बुलेंस में फंसी, 15 घायल:पैसेंजर ने बताया- विमान 3 मिनट पलटी खाता रहा, कई लोगों के पैर-कंधे में चोट

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नई दिल्ली, एजेंसी। थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया फ्लाइट AI2379 मंगलवार को टर्बुलेंस, यानी तेज हवा के झटकों में फंस गई। अचानक 300 फीट तक नीचे आ गई।

हालांकि, पायलट ने स्थिति संभाली और फ्लाइट को दिल्ली एयरपोर्ट पर सुबह 11:30 बजे सुरक्षित उतार लिया। प्लेन में 134 यात्री और 8 क्रू मेंबर्स सवार थे।

डायरेक्टर जनरल सिविल एविएशन (DGCA) के अधिकारी ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि घटना में 11 यात्री और 4 क्रू मेंबर्स समेत 15 लोग घायल हुए हैं। इनमें से कुछ को दिल्ली एयरपोर्ट के मेडिकल सेंटर और 7 घायलों को फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

एअर इंडिया ने पहले बताया था कि सभी यात्री और क्रू सुरक्षित हैं। किसी के गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है।

फ्लाइट में सवार एक यात्री ने दावा किया कि उड़ान भरने के करीब डेढ़ घंटे बाद तेज झटके लगने लगे। सुबह का समय था और ज्यादातर यात्री सो रहे थे। अचानक विमान जोर से हिलने लगा और 2-3 मिनट तक पलटी खाता रहा।

डायरेक्टर जनरल सिविल एविएशन (DGCA) इस घटना की जांच कर रहा है।

यात्री के मुताबिक कुछ लोगों को ज्यादा चोटें आई हैं, जबकि 70 से 80% लोगों को मामूली चोट लगी हैं। फ्लाइट की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें उसकी सीलिंग के पैनल में दरारें दिखीं।

विमान की छत में दरारें…

टर्बुलेंस में अचानक कई फीट नीचे आ सकता है विमान

टर्बुलेंस का मतलब है हवा का बहाव अचानक बदल जाना, जिससे विमान को झटके लगने लगते हैं। इस दौरान विमान कुछ समय के लिए ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं हिल सकता है और कभी-कभी कुछ फीट नीचे भी आ जाता है। इसी वजह से यात्रियों को लगता है कि विमान गिर रहा है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में ऐसा नहीं होता।

टर्बुलेंस तीव्रता के लिहाज से तीन तरह के होते हैं

  • हल्के टर्बुलेंस: इसमें प्लेन 1 मीटर तक ऊपर-नीचे होता है। यात्रियों को पता भी नहीं चलता।
  • मध्यम टर्बुलेंस: इसमें जहाज 3-6 मीटर तक ऊपर-नीचे होते हैं। इससे ड्रिंक गिर सकता है।
  • गंभीर टर्बुलेंस: इसमें जहाज 30 मीटर तक ऊपर-नीचे होते हैं। सीट बेल्ट न लगाए रहने पर पैसेंजर उछलकर गिर सकते हैं।

क्या टर्बुलेंस की वजह से प्लेन क्रैश हो सकता है?

आधुनिक तकनीक और बेहतर सुरक्षा सिस्टम की वजह से आज टर्बुलेंस से विमान हादसे की आशंका काफी कम हो गई है। हालांकि, बेहद गंभीर टर्बुलेंस या खराब मौसम में दुर्घटना का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता।

हालांकि, आज के आधुनिक विमान हर तरह के टर्बुलेंस को झेलने के हिसाब से बनाए जाते हैं। पायलटों को भी ऐसी परिस्थितियों से सुरक्षित तरीके से निपटने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है।

दुनिया में टर्बुलेंस से जुड़े 5 बड़े विमान हादसे

  • 2001 में अमेरिकन एयरलाइंस फ्लाइट 587 टेकऑफ के कुछ देर बाद वेक टर्बुलेंस की वजह से क्रैश हो गई थी। इस हादसे में विमान में सवार सभी 260 लोगों की मौत हो गई थी।
  • 1966 में जापान की बीओएसी फ्लाइट का पिछला हिस्सा माउंट फूजी के पास माउंटेन वेव टर्बुलेंस से हवा में टूट गया, जिससे 124 लोगों की मौत जो गई।
  • 1964 में अमेरिका की नॉर्थवेस्ट ओरिएंट फ्लाइट तूफान और उससे पैदा हुई टर्बुलेंस की चपेट में आकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में 84 लोगों की मौत हो गई।
  • 1994 में अमेरिका की यूएस एयर फ्लाइट 1016 लैंडिंग के दौरान तूफान से पैदा हुए टर्बुलेंस की चपेट में आकर क्रैश हो गई थी। इस हादसे में 37 लोगों की मौत हुई थी।
  • 1999 में अमेरिकन एयरलाइंस फ्लाइट 1420 भी खराब मौसम और टर्बुलेंस के बाद रनवे से फिसलकर क्रैश हो गई थी, जिसमें 11 लोगों की जान गई।

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लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल ध्वनिमत से पारित, अब 34 से बढ़कर होंगे 38 जज

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नई दिल्ली, एजेंसी। लोकसभा ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के लागू होने के बाद प्रधान न्यायाधीश (CJI) समेत सुप्रीम कोर्ट के जजों की कुल स्वीकृत संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी। खास बात यह रही कि विपक्ष के हंगामे के कारण इस बिल पर सदन में कोई चर्चा नहीं हो सकी और इसे बिना बहस के ही पारित कर दिया गया।

हंगामे के बीच बिल पास

नीट पेपर लीक और राम मंदिर में कथित चंदा चोरी जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के बीच यह बिल पारित हुआ। यह बिल उस अध्यादेश की जगह लेने के लिए लाया गया था, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या पहले ही 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई थी। विपक्ष ने इन मुद्दों को लेकर जमकर नारेबाजी की। विपक्ष के सदस्यों द्वारा अध्यादेश जारी करने की निंदा करते हुए पेश किए गए एक वैधानिक प्रस्ताव को भी ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की संक्षिप्त टिप्पणी के बाद पीठासीन अधिकारी ने सदस्यों से बोलने का आग्रह किया, लेकिन नारेबाजी जारी रहने के कारण बिल को मतदान के लिए रखा गया और पारित कर दिया गया।

न्यायिक सुधारो के लिए बिल

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह विधेयक न्यायिक सुधारों की श्रृंखला का हिस्सा है। इसका उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में बढ़ते लंबित मामलों के बोझ को कम करना है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इसी साल मई में इस संबंध में अध्यादेश लाया था। इसके बाद बढ़ी हुई स्वीकृत संख्या के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति भी की जा चुकी है। बिल पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले पिछले सप्ताह जन्म और मृत्यु पंजीकरण में संशोधन करने वाला एक बिल भी बिना किसी बहस के पारित किया गया था।

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जंतर-मंतर प्रदर्शन; सरकार ने कहा- स्टूडेंट्स पर केस नहीं होगा:2700 अपराधियों पर FIR कायम रहेगी, सुप्रीम कोर्ट बोला-सख्ती करने वाले जवानों को न बचाएं

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नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि NEET पेपर लीक को लेकर विरोध करने वाले छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को कहा, ‘सरकार अपने वादे पर कायम है। छात्रों के खिलाफ कोई FIR नहीं होगी।’

मेहता ने ये भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान गंभीर अपराधों को लेकर जिन 2700 से ज्यादा लोगों पर FIR दर्ज हुई हैं, इन्हें वापस नहीं लिया जाएगा।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस मसले पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। उनकी 3 मांगें थी, जो सरकार ने मान ली थीं। इनमें एक मांग यह भी थी कि सरकार विरोध प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी। मामले पर अब 18 अगस्त को सुनवाई होगी।

कोर्ट बोला- जिन जवानों ने सख्ती की, उन्हें न बचाएं

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई की, जिनमें 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया गया है। वकील वृंदा ग्रोवर ने पूछा कि क्या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस ली जाएंगी या रद्द की जाएंगी। इस पर मेहता ने कहा कि कानूनी तौर पर जो भी तरीका सही हो, सरकार अपने वादे पर कायम है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगर कोई पुलिस अधिकारी जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल करता है, तो उसे बेवजह बचाया नहीं जाना चाहिए। और ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि छात्र प्रदर्शन की आड़ में किसी कुख्यात अपराधी को बचाया जाए।

परीक्षाओं में गड़बड़ी और NEET पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन 36 दिन तक चला था। 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह प्रदर्शन खत्म कर दिया गया था।

कोर्ट का फोकस 2 मुद्दों पर…

  • बेंच प्रदर्शनकारियों और पैलेट गन से घायलों के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में एक SIT बना सकती है।
  • कोर्ट यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकता है कि पुलिसकर्मियों पर हमले छात्रों ने किए थे या छात्रों की भीड़ में घुस आए शरारती तत्वों ने।

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