मुख्यमंत्री ने ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला का किया शुभारंभ
नदियों के उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक एवं समयबद्ध कार्ययोजना पर जोर
मानचित्रण, संरक्षण, पुनर्भरण, जनभागीदारी और कार्ययोजना के पांच प्रमुख स्तंभों पर होगा नदी संरक्षण का काम
नेशनल वाटर एकेडमी पुणे के साथ एमओयू से जल संरक्षण के क्षेत्र में मजबूत होगा क्षमता निर्माण
एंट्रिक्स कॉरपोरेशन बेंगलुरु के सहयोग से आधुनिक भू-स्थानिक तकनीक का होगा उपयोग
कुनकुरी तहसील के लगभग 1540 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आधुनिक तकनीक से जल संसाधनों की होगी निगरानी और विश्लेषण
मुख्यमंत्री ने किया जल संरक्षण पर आधारित ‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन
रायपुर, 19 अगस्त 2026। नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, कृषि और समृद्धि की जीवनधारा हैं। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा बनाने में प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जिन नदियों ने हमारी सभ्यता को पोषित किया और हमें समृद्धि दी, उनका संरक्षण हम सभी का साझा दायित्व है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के ओमाया गार्डन में आयोजित ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम स्थलों एवं जलग्रहण क्षेत्रों की पहचान और संरक्षण, जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने तथा नदी संरक्षण को व्यापक जन अभियान का स्वरूप देना है। कार्यशाला में जल संरक्षण, नदी पुनरुद्धार और जल प्रबंधन से जुड़े विषय विशेषज्ञों के साथ राज्य एवं जिला स्तरीय समितियों के सदस्य तथा विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों द्वारा मंथन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नदी बचेगी तो जल बचेगा और जल बचेगा तो जीवन बचेगा। इसी भावना के साथ राज्य सरकार नदियों के उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और जनभागीदारी के समन्वय से व्यापक कार्ययोजना पर आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान नदियों से गहराई से जुड़ी हुई है। महानदी सहित प्रदेश की अनेक नदियों ने कृषि, आजीविका और सामाजिक जीवन को समृद्ध किया है। नदियों का अस्तित्व उनके उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के स्वास्थ्य पर निर्भर है। इसलिए नदी संरक्षण का कार्य केवल उसके प्रवाह क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता। हमें नदी के स्रोत से लेकर उसके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को समझकर संरक्षण की समग्र योजना बनानी होगी।
उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। स्रोत महोत्सव में विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवों के आधार पर ऐसी ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसे धरातल पर समयबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।
’पांच प्रमुख स्तंभों पर आगे बढ़ेगा नदी संरक्षण अभियान’
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में नदी संरक्षण के लिए मानचित्रण, संरक्षण, पुनर्भरण, जनभागीदारी और कार्ययोजना के पांच प्रमुख स्तंभों पर काम किया जाएगा। प्रत्येक नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र का वैज्ञानिक तरीके से मानचित्रण किया जाएगा। नदी का उद्गम कहां है, उसके प्रवाह क्षेत्र की प्रकृति कैसी है, भू-उपयोग में किस प्रकार के बदलाव हुए हैं और किन कारणों से नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर प्रभाव पड़ रहा है – इन सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक मानचित्रण और अध्ययन के आधार पर नदी के पूरे इकोसिस्टम के संरक्षण की योजना तैयार की जाएगी। इसमें वन एवं वनस्पति संरक्षण, मृदा क्षरण की रोकथाम, पारंपरिक जल संरचनाओं का संरक्षण एवं पुनर्जीवन, आवश्यकतानुसार नई जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण और भू-जल पुनर्भरण जैसे कार्य शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षाजल हमारे नदी तंत्र और भू-जल का मूल आधार है। इसलिए बारिश के पानी को तेजी से बहकर निकल जाने देने के बजाय उसे अधिक से अधिक मात्रा में धरती के भीतर पहुंचाने के उपाय करने होंगे। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा, जल स्रोतों को पुनर्जीवन मिलेगा और नदियों में लंबे समय तक जल प्रवाह बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
नदी संरक्षण को बनाना होगा जन आंदोलन
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल संरक्षण का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। नदियों के किनारे बसे गांवों और वहां रहने वाले लोगों का नदी से सीधा संबंध है, इसलिए उन्हें नदी संरक्षण की प्रक्रिया का प्रमुख भागीदार बनाना होगा।
उन्होंने जिला स्तरीय समितियों के सदस्यों से कहा कि नदियों के किनारे बसे गांवों में स्थानीय समितियां गठित कर पंचायतों के सहयोग से नदी संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्य आगे बढ़ाए जाएं। स्थानीय समुदाय को नदी की स्थिति, उसके महत्व और संरक्षण के उपायों की जानकारी दी जाए। जब समाज स्वयं अपनी नदी और जल स्रोतों के संरक्षण की जिम्मेदारी लेता है, तब ऐसे प्रयास अधिक प्रभावी और स्थायी होते हैं।
मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों से भी आग्रह किया कि जल संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान को सरल एवं सहज भाषा में लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका लाभ धरातल पर दिखाई दे और आम नागरिक उसे समझकर अपने जीवन में अपना सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ है। नदियों ने पीढि़यों से मानव जीवन को जल, भोजन और आजीविका प्रदान की है। इसलिए एक सभ्य समाज के रूप में हमारा दायित्व है कि हम अपनी आने वाली पीढि़यों के लिए नदियों और जल स्रोतों को सुरक्षित रखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्रोत महोत्सव 2026 से निकलने वाले निष्कर्ष छत्तीसगढ़ में नदी संरक्षण और जल सुरक्षा की दिशा में एक प्रभावी रोडमैप तैयार करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।
’जल संरक्षण और आधुनिक तकनीक के लिए दो महत्वपूर्ण एमओयू’
कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण के क्षेत्र में राज्य की संस्थागत और तकनीकी क्षमता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण एमओयू किए गए। नेशनल वाटर एकेडमी, पुणे के साथ हुए एमओयू के माध्यम से जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और मैदानी अमले के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इससे आधुनिक जल प्रबंधन, नवीन तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इसी प्रकार एंट्रिक्स कॉरपोरेशन, बेंगलुरु के साथ हुए एमओयू के माध्यम से इसरो की विशेषज्ञता और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों का उपयोग जल संसाधनों के वैज्ञानिक विश्लेषण एवं निगरानी में किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में कुनकुरी तहसील के लगभग 1540 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में उन्नत भू-स्थानिक तकनीक के माध्यम से जल संसाधनों की स्थिति का अध्ययन, निगरानी और विश्लेषण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक से प्राप्त वैज्ञानिक आंकड़ों को स्थानीय अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़कर जल संरक्षण की अधिक प्रभावी योजनाएं बनाई जा सकती हैं। इससे क्षेत्र विशेष की आवश्यकता के अनुरूप समाधान तैयार करने और उनके परिणामों की निगरानी करने में भी मदद मिलेगी।
‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में जल संरक्षण पर आधारित ‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक नीर की रक्षा, नारी की भागीदारी और जल संपदा के संरक्षण की अवधारणा को रेखांकित करती है। पुस्तक में जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न अनुभवों, प्रयासों और नवाचारों का दस्तावेजीकरण किया गया है।
जलस्रोतों की पहचान और संरक्षण भविष्य की जल सुरक्षा के लिए जरूरी : डॉ. विनोद तारे
सीगंगा के संस्थापक एवं आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नदियों के उद्गम और उन्हें पोषित करने वाले जल स्रोतों की पहचान एवं संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। बारिश का पानी ही नदियों और भू-जल का प्रमुख आधार है। वर्षाजल के तेज बहाव को नियंत्रित कर उसे अधिक से अधिक मात्रा में जमीन के भीतर पहुंचाना होगा, जिससे भू-जल स्तर बढ़े और भविष्य के लिए जल सुरक्षित किया जा सके।
डॉ. तारे ने कहा कि जल संरक्षण के लिए प्राचीन ज्ञान, स्थानीय एवं पारंपरिक अनुभव और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के बीच समन्वय जरूरी है। इन तीनों को एक साथ जोड़कर तैयार की गई कार्ययोजना ही जल स्रोतों के दीर्घकालिक संरक्षण और जल के सतत उपयोग का आधार बन सकती है।
साइंस बेस्ड और साइट स्पेसिफिक समाधान तैयार होंगे: जल संसाधन विभाग सचिव
जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो ने कहा कि स्रोत महोत्सव 2026 का उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम और कैचमेंट एरिया के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक, व्यवहारिक और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करना है। नदी संरक्षण में केवल डाउनस्ट्रीम फ्लो का अध्ययन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सोर्स एरिया, भूमि उपयोग, मिट्टी की नमी, भू-जल रिचार्ज, वनस्पति और मृदा क्षरण सहित नदी के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को एक साथ समझना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में नौ नदी समूहों पर अलग-अलग चर्चा की जा रही है। इन समूहों में क्षेत्र विशेष की परिस्थितियों के अनुरूप साइट स्पेसिफिक और साइंस बेस्ड समाधान तैयार किए जाएंगे। इसमें समस्या की स्पष्ट पहचान के साथ समाधान, क्रियान्वयन की जिम्मेदारी और परिणामों के आकलन की समय-सीमा भी निर्धारित करने पर जोर रहेगा।
श्री टोप्पो ने कहा कि जल संरक्षण केवल अधोसंरचना निर्माण का विषय नहीं है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी ही संरक्षण कार्यों की दीर्घकालिक सफलता और स्थायित्व की कुंजी है। कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और निष्कर्षों के आधार पर छत्तीसगढ़ के लिए समयबद्ध रिवर सोर्स रेस्टोरेशन रोडमैप तैयार करने की दिशा में आगे कार्य किया जाएगा।
कार्यशाला में सीगंगा के संस्थापक एवं आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे, नमामि गंगे मिशन से जुड़े विषय विशेषज्ञ, एनआईटी रायपुर के प्राध्यापक, राज्य एवं जिला स्तरीय समितियों के सदस्य, विभिन्न जिलों के कलेक्टर एवं अधिकारी तथा जल एवं नदी संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञ उपस्थित थे।
कोरबा। कोरबा जिले में हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। कटघोरा और कोरबा वन मंडल के अलग-अलग रेंज में करीब 50 हाथी झुंडों में विचरण कर रहे हैं। पसान रेंज में मरवाही से पहुंचे एक दंतैल हाथी ने कुम्हारी सानी के पास ग्रामीणों को दौड़ाने का प्रयास किया।
वहीं, बनिया के जंगल में घूम रहे दूसरे दंतैल ने रात में तनेरा गांव में एक मकान तोड़ दिया। हाथियों की लगातार बदलती लोकेशन से वन विभाग ने सभी रेंज में अलर्ट जारी किया है।
ग्रामीणों ने पत्थर फेंके तो दंतैल ने दौड़ाया
पसान रेंज के कुम्हारी सानी गांव के पास मंगलवार को एक दंतैल हाथी नाले के किनारे पहुंच गया। हाथी को देखकर ग्रामीणों ने शोर मचाया और उसे भगाने के लिए पत्थर फेंकने लगे। इससे हाथी कई बार ग्रामीणों की ओर दौड़ने लगा। बाद में वह खेतों से होते हुए जंगल की ओर चला गया। शाम को यही हाथी पसान गांव के किनारे कोसाबाड़ी क्षेत्र में दिखाई दिया।
दूसरे दंतैल ने तनेरा में तोड़ा मकान
पसान रेंज के बनिया जंगल में भी एक दंतैल हाथी घूम रहा है। इस हाथी ने रात में तनेरा गांव में एक मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत फैल गई। मरवाही से पसान पहुंचा दंतैल अब बीजाडाड़ की ओर बढ़ गया है। वन विभाग उसकी लगातार निगरानी कर रहा है।
कुदमुरा में 2 दंतैल, 3 किसानों की फसल बर्बाद
कोरबा वन मंडल के कुदमुरा रेंज में भी दो दंतैल हाथी सक्रिय हैं। दोनों ने तीन किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाया है। वन विभाग को आशंका है कि ये हाथी वापस धरमजयगढ़ की ओर लौट सकते हैं।
7 हाथियों का दल सक्ती की ओर गया
करतला रेंज के लबेद में घूम रहा 7 हाथियों का दल रात में सक्ती रेंज के रैनखोल की ओर चला गया। इससे स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। यह दल पहले 22 हाथियों के झुंड के साथ क्षेत्र में पहुंचा था।
कटघोरा वन मंडल में 50 हाथी, रेंजों में अलर्ट
वन विभाग के अनुसार, कटघोरा वन मंडल में फिलहाल करीब 50 हाथी अलग-अलग झुंडों में विचरण कर रहे हैं। इनमें 19 हाथी सीमा क्षेत्र में हैं, जबकि केंदई रेंज के कोरबी क्षेत्र में 10 हाथी देखे गए हैं। रेंजर मनीष सिंह ने बताया कि 19 हाथी जटगा की ओर लौट गए हैं।
हाथी एक जगह नहीं रुक रहे, वन अमला निगरानी में
वन विभाग का अमला बुधवार को गांवों में पहुंचकर हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। रेंजर के मुताबिक, हाथी लगातार अपना स्थान बदल रहे हैं। इसी वजह से सभी रेंज के वनकर्मियों को अलर्ट किया गया है।
वन विभाग की अपील- जंगल न जाएं, हाथियों से दूरी रखें
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों की मौजूदगी वाले इलाकों में जंगल की ओर न जाएं। हाथियों को देखकर उनके पास जाने, शोर मचाने या पत्थर मारकर भगाने की कोशिश न करें। खासकर दंतैल हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इनके हमले का खतरा अधिक रहता है।
कोरबा। 55 करोड़ रुपए की ठगी के आरोपी को पकड़ने के लिए निर्धारित नियमों को दरकिनार कर हवाई यात्रा करना कटघोरा पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों को भारी पड़ गया। बिना उच्च अधिकारियों की अनुमति के दिल्ली जाने के लिए प्लेन से यात्रा करने के मामले में कटघोरा थाना प्रभारी निरीक्षक मोती बी. पटेल समेत 8 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।यह कार्रवाई बिलासपुर आईजी ने जांच के बाद की है।
आरोपी को पकड़ने दिल्ली जाना था, ट्रेन से यात्रा के थे निर्देश
मामला जेसीबी एजेंसी के नाम पर एक व्यापारी से हुई 55 करोड़ रुपए की ठगी से जुड़ा है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कटघोरा पुलिस की टीम को दिल्ली जाना था। पुलिसकर्मियों को नियमानुसार ट्रेन से यात्रा करने के निर्देश थे, लेकिन थाना प्रभारी एम. बी. पटेल ने कथित तौर पर पीड़ित व्यापारी द्वारा उपलब्ध कराए गए पैसों से प्लेन के टिकट बुक कराए और स्टाफ के साथ हवाई यात्रा की।
बिना अनुमति की हवाई यात्रा, जांच में खुली अनियमितता
पुलिस टीम की हवाई यात्रा की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद मामले की जांच कराई गई। प्रारंभिक जांच में बिना अनुमति हवाई यात्रा करने और शासकीय प्रक्रिया का पालन नहीं करने की बात सामने आई। जांच में 5 हवाई यात्राओं समेत अन्य अनियमितताएं भी सामने आने की बात पुलिस अधिकारियों ने कही है।
कटघोरा TI समेत इन 8 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में निरीक्षक मोती बी. पटेल, उप निरीक्षक राम पाण्डेय, प्रधान आरक्षक गुनाराम सिन्हा, प्रधान आरक्षक गोपाल यादव, प्रधान आरक्षक राजेश कंवर, आरक्षक प्रदीप राठौर, आरक्षक सुशील यादव और आरक्षक प्रशांत सिंह शामिल हैं।
कटघोरा का अतिरिक्त प्रभार प्रेमचंद साहू को
निरीक्षक एम. बी. पटेल को कुछ महीने पहले ही कोतवाली थाना से कटघोरा थाना प्रभारी बनाया गया था। उनके निलंबन के बाद दीपका थाना प्रभारी प्रेमचंद साहू को कटघोरा थाना का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वहीं दीपका थाना की जिम्मेदारी धर्म नारायण तिवारी को दी गई है।
आरोपी की गिरफ्तारी का दबाव, लेकिन नियमों की अनदेखी पड़ी भारी
पुलिस सूत्रों के अनुसार, 55 करोड़ की ठगी के आरोपी को जल्द पकड़ने का दबाव था। इसी दौरान पुलिस टीम ने निर्धारित प्रक्रिया से हटकर हवाई यात्रा की। हालांकि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबाव होने के बावजूद बिना अनुमति सरकारी प्रक्रिया को दरकिनार करना पुलिसकर्मियों के लिए कार्रवाई की वजह बन गया। मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है।
राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन:सीबीआई, एसआईटी जांच की मांग
11 सितंबर को SECL मुख्यालय बिलासपुर का महाघेराव करने और 2 अक्टूबर को इंसानियत सभा आयोजित करने की चेतावनी
कोरबा/दीपका। भारतीय जनाधिकार पार्टी छत्तीसगढ़ द्वारा ACB समूह की कोयला वाशरियों संबद्ध ताप विद्युत परियोजनाओं कोयला परिवहन एवं अन्य औद्योगिक गतिविधियों में वर्ष 1999 से वर्तमान तक हुए गंभीर तकनीकी पर्यावरणीय वित्तीय एवं नियामकीय अनियमतताओं की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर आज दीपका में एक दिवसीय विशाल एवं शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया ।
सुबह 11:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक बारिश के बावजूद सैकड़ों कार्यकर्ताओं और प्रभावित ग्रामीणों ने छाता लेकर 6 घंटे तक अनुशासित आंदोलन किया प्रदर्शन के उपरांत कार्यपालन दंडाधिकारी एवं तहसीलदार दीपका अभिजीत राज भानु के माध्यम से राष्ट्रपति प्रधानमंत्री केंद्रीय गृहमंत्री केंद्रीय कैबिनेट सचिव केंद्रीय कोयला मंत्री केंद्रीय ऊर्जामंत्री तथा केंद्र व राज्य सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा गया ।
ज्ञापन में की गई मुख्य मांगें एवं जांच के बिंदु
1999 से CBI एवं SIT जांच
मामला केवल किसी एक इकाई का नहीं बल्कि पूरी कोयला-ईंधन-पर्यावरण व्यवस्था की जांच का है पार्टी ने मांग की है कि CBI के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) और राज्य सरकार की बहु-विभागीय टीम द्वारा दीपका गेवरा कुसमुंडा चकाबुड़ा रतीजा रेंकी बिंझरी एवं अन्य संबद्ध कोल वाशरियों व पावर प्लांट्स की व्यापक जांच कराई जाए ।
1 करोड़ टन से अधिक कोयला परिवहन की जांच
खदान से वाशरी सड़क/रेलवे साइडिंग और ताप विद्युत संयंत्रों तक परिवहन किए गए एक-एक टन कच्चे एवं रिजेक्ट कोयले का स्वतंत्र वैज्ञानिक मिलान किया जाए ।
रिजेक्ट कोयले के नाम पर विचलन की आशंका
रिजेक्ट कोयले की आड़ में मूल्यवान और व्यावसायिक गुणवत्ता वाले कोयले का अन्यत्र विचलन या हेरफेर तो नहीं हुआ इसकी स्वतंत्र फोरेंसिक जांच हो ।
डिजिटल साक्ष्य और तौल कांटा की फोरेंसिक जांच
फर्जी वाहन प्रविष्टि काल्पनिक यात्रा और गलत तौल की संभावना को खत्म करने के लिए तौल कांटा सर्वर जीपीएस (GPS) फास्टैग आरएफआईडी (RFID) एएनपीआर और सीसीटीवी रिकॉर्ड्स को तत्काल सील कर डिजिटल फोरेंसिक परीक्षण कराया जाए ।
पर्यावरणीय उल्लंघन व स्वास्थ्य सर्वेक्षण
स्वीकृत क्षमता CTO/CTE, जल दोहन नदी-नालों के प्रदूषण और प्रभावित 10 किलोमीटर के दायरे में वायु जल कृषि एवं जनस्वास्थ्य पर पड़े प्रभावों का स्वतंत्र वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए ।
डिजेल-बायोडीजल व टैक्स लाभ की पड़ताल
वर्ष 2015 से प्रयुक्त औद्योगिक डीजल/बायोडीजल की खरीद-बिक्री ई-वे बिल और कंपनियों द्वारा ली गई टैक्स छूट व सरकारी सुविधाओं का वर्षवार मिलान हो ।
JSW Energy-MCCPL रू.1,410 करोड़ डील की फोरेंसिक जांच
ACB समूह से संबंधित कंपनी MCCPL के JSW Energy द्वारा किए गए लगभग रू.1,410 करोड़ के अधिग्रहण परिसंपत्तियों कोयला लिंकेज और वित्तीय दायित्वों के Due Diligence की उच्चस्तरीय फोरेंसिक जांच कराकर जवाबदेही तय की जाए ।
नियामक संस्थाओं की समीक्षा
SECL पर्यावरण खनन राजस्व वन और श्रम विभागों की निगरानी प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय हो ।
पार्टी नेतृत्व का वक्तव्य एवं आगामी रणनीति
धरना प्रदर्शन के दौरान भारतीय जनाधिकार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक दुबे ने सख्त लहजे में कहा यह राष्ट्रीय स्तर का महाघोटाला है यदि हमारी न्यायोचित मांगों और सीबीआई जांच की मांग को केंद्र व राज्य सरकार द्वारा अनदेखा किया गया तो हम चुप नहीं बैठेंगे जनता के स्वास्थ्य पर्यावरण और राष्ट्रीय संपदा की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी ।
आगामी आंदोलन की रूपरेखा
11 सितंबर 2026:- SECL मुख्यालय बिलासपुर (CMD कार्यालय) का महाघेराव एवं विशाल धरना-प्रदर्शन । 2 अक्टूबर 2026:- दीपका-गेवरा क्षेत्र में इंसानियत सभा का आयोजन ।
प्रमुख उपस्थिति
आंदोलन में भारतीय जनाधिकार पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी कमल किशोर साव, कृष्ण टंडन, हेमंत पैगवार, संजय रत्नाकर, संतोष अनंत, अमर खांडे, बजरंग रत्नाकर, शिव चौरसिया, जय सेवायक, शैलेन्द्र, गोपाल, राकेश कुर्रे, करण लहरे, देव प्रसाद, प्रमोद यादव, राजेंद्र, अनिल कश्यप, तरुण कश्यप, किशन, शुक्रिता कुर्रे, लाल चौहान, लकी दिवाकर, आशीष तिवारी, नीरज, रामचंद्र कवर, गणेश कश्यप, नकुल सूर्यवंशी, यशवंत सूर्यवंशी, शिवचरण, योगेश सहित सैकड़ों कार्यकर्ता एवं प्रभावित गांवों के ग्रामीण उपस्थित रहे ।