एक पेड़ मां के नाम से अशोक वाटिका में गूंजा हरियाली का संदेश, वनमंत्री कश्यप ने किया साल पौधे का रोपण
वन एवं प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा हम सभी की जिम्मेदारी: वनमंत्री कश्यप
वाटिका के सुव्यवस्थित संचालन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन को दी बधाई
किंग कोबरा और रसेल वाइपर के संरक्षण के लिए बनेगी विस्तृत कार्ययोजना
सतरेंगा-बुका को पर्यटन के नए आकर्षण के रूप में विकसित करने बनेगी विशेष कार्ययोजना
कोरबा 20 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने अपने दो दिवसीय कोरबा प्रवास के दौरान आज कोरबा नगर के अशोक वाटिका में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत साल पौधे का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जंगल और प्राकृतिक स्थल हम सभी की साझा धरोहर हैं। इनका संरक्षण, संवर्धन और आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखना हम सभी का दायित्व है।
इस अवसर पर महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, अपर मुख्य सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक व वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय, प्रभारी कलेक्टर एवं निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय, जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन, अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल, गोपाल मोदी, जोगेश लाम्बा, हितानंद अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। वनमंत्री श्री कश्यप ने अशोक वाटिका का भ्रमण कर वहां की व्यवस्थाओं और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने वाटिका के सुव्यवस्थित संचालन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अशोक वाटिका में विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे लगाए जाएं और उनके संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि विद्यार्थी यहां आकर विभिन्न प्रजातियों का अध्ययन कर सकें और प्रकृति एवं पर्यावरण के प्रति उनमें जागरूकता विकसित हो।
उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए श्री कश्यप ने कहा कि पेड़-पौधों का हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। वन पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ ही लोगों की आजीविका और आय के महत्वपूर्ण स्रोत भी हैं। उन्होंने कहा कि कोरबा जिले में अनेक दर्शनीय और प्राकृतिक स्थल हैं, जिन्हें संजोने और सहेजने की जरूरत है। इन प्राकृतिक स्थलों की जानकारी आमजन तक पहुंचाना और उन्हें पर्यटन की दृष्टि से विकसित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जिले के सतरेंगा और बुका जैसे प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से और अधिक विकसित करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने की बात कही। पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हाउस बोट जैसी सुविधाओं की संभावनाओं पर भी कार्य करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक स्थलों का विकास इस तरह किया जाना चाहिए कि पर्यटकों को आकर्षित करने के साथ ही पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। वनमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप प्रदेश में वनों की रक्षा और वन क्षेत्र में वृद्धि के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें वनों के विस्तार के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने के साथ ही उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। आने वाली पीढ़ी को एक खूबसूरत और समृद्ध प्राकृतिक धरोहर सौंपने के लिए वनों के विनाश पर रोक लगाना आवश्यक है।
श्री कश्यप ने जिले में पाए जाने वाले दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने दुर्लभ किंग कोबरा एवं रसेल वाइपर के संरक्षण के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने की बात कही। उन्होंने अशोक वाटिका में अधोसंरचना विकास के साथ-साथ पुरानी बस्ती कोरबा में वन विभाग के पुराने डिपो को सुंदर उद्यान के रूप में विकसित करने की संभावनाओं की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत ने कहा कि नगर निगम एवं शासन-प्रशासन द्वारा हरित पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए निरंतर पौधरोपण किया जा रहा है। अशोक वाटिका में भी प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में पौधरोपण किया जाता है। उन्होंने बताया कि नगर में उद्यानों के विकास के साथ खेल सुविधाओं के विस्तार पर भी लगातार कार्य किया जा रहा है। लगभग 32 करोड़ रुपये की लागत से इनडोर स्टेडियम का निर्माण किया जा रहा है। प्रभारी कलेक्टर एवं निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय ने बताया कि नगर के हृदयस्थल में स्थित अशोक वाटिका लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में विस्तृत है। यहां विभिन्न प्रजातियों के 3 हजार से अधिक पौधे रोपित किए गए हैं। वाटिका के बेहतर प्रबंधन एवं पर्यावरणीय गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इको क्लब का गठन किया गया है। परिसर में तालाब भी है तथा प्रतिदिन सुबह-शाम बड़ी संख्या में नागरिक मॉर्निंग वॉक और भ्रमण के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में अशोक वाटिका के रखरखाव में लगभग 25 लाख रुपये वार्षिक व्यय होता था, जबकि वर्तमान में वाटिका से लगभग 1.5 लाख रुपये प्रतिमाह आय प्राप्त हो रही है। जिससे आमजनों को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त हुए है। इस दौरान सभी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने भी पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र के विस्तार और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज लगाए गए पौधे केवल हरियाली का विस्तार नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की नींव हैं। सामूहिक सहभागिता और सतत प्रयासों से ही कोरबा की प्राकृतिक संपदा को संरक्षित रखते हुए जिले को पर्यावरण और पर्यटन की दृष्टि से और अधिक समृद्ध बनाया जा सकता है।
कोरबा। कोरबा में लगातार बारिश के बीच खारुन नदी में बहा 45 वर्षीय ग्रामीण दूसरे दिन मृत मिला। बुधवार सुबह नदी किनारे गुड़ाखू करने गए गेंदलाल का पैर फिसल गया था, जिसके बाद वह तेज बहाव में बह गए।
पुलिस और गोताखोरों ने बुधवार को तलाश की, लेकिन तेज बहाव और भंवर के कारण उनका पता नहीं चल सका। गुरुवार सुबह घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर झाड़ियों में उनका शव मिला। घटना पाली थाना क्षेत्र की है।
वहीं, जिले में पिछले सात दिनों से बारिश हो रही है, जिससे नदी-नाले उफान पर हैं और कई निचले इलाकों में पानी भर गया है।
खारुन नदी में बहे ग्रामीण का शव निकालते नगर सेना की गोताखोर टीम।
मृतक की पहचान ग्राम बिजराभवनारा, बतरा पंचायत निवासी गेंदलाल (45) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह गेंदलाल नदी किनारे गुड़ाखू करने गए थे। इसी दौरान पैर फिसलने से वे नदी में गिर गए और तेज बहाव में बह गए।
नदी के भंवर में फंसा ग्रामीण
घटना की जानकारी मिलते ही पाली पुलिस और नगर सेना की गोताखोर टीम मौके पर पहुंची। टीम ने तलाश शुरू की, लेकिन तेज बहाव और नदी में बने भंवर के कारण बुधवार देर शाम तक गेंदलाल का पता नहीं चल सका। इसके बाद तलाश अभियान रोक दिया गया।
झाड़ियों में गेंदलाल का शव फंसा मिला
झाड़ियों में मिला शव
गुरुवार सुबह परिजन और ग्रामीण फिर से नदी किनारे पहुंचे और तलाश शुरू की। करीब 500 मीटर दूर झाड़ियों में गेंदलाल का शव फंसा मिला। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, नदी में पानी का बहाव काफी तेज था। आशंका है कि गेंदलाल भंवर में फंस गए थे। तेज बहाव के कारण बचाव दल को भी तलाश के दौरान काफी परेशानी हुई।
बताया गया है कि गेंदलाल का नदी के दोनों किनारों पर आना-जाना था। नदी के ऊपर एक बांध बना हुआ है, जबकि नीचे की ओर लोगों के आने-जाने के लिए रास्ता है।
कोरबा 20 अगस्त 2026। कोरबा जिले में एक जून से आज तक कुल 839.2 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई। अधीक्षक भू-अभिलेख से मिली जानकारी के अनुसार उक्त अवधि में जिले की तहसील अजगरबहार में 738.4, कोरबा 1057.1 मिलीमीटर, भैंसमा, 820.2, करतला 821.3, बरपाली 783, कटघोरा 839.7 दीपका 915.6, दर्री 963, पाली 892.1, हरदीबाजार 636.8, पोंड़ी-उपरोड़ा 857.4, और पसान तहसील में 745.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इसी तरह पिछले 24 घंटे में जिले में 21.1 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है।
हर माह की उपस्थिति भी पोर्टल पर होगी प्रदर्शित, पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
कोरबा 20 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग द्वारा संचालित आश्रम-छात्रावासों में निवासरत छात्र-छात्राओं की जानकारी को सार्वजनिक किया जाएगा। विभाग द्वारा छात्रावास-आश्रम प्रबंधन प्रणाली पोर्टल पर पंजीकृत समस्त विद्यार्थियों की जानकारी पोर्टल के होम पेज पर प्रदर्शित करने का निर्णय लिया गया है। कार्यालय आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, नवा रायपुर द्वारा यह पहल आश्रम-छात्रावासों के संचालन में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है। विभागीय पोर्टल hmstribal.cg.nic.in के माध्यम से “विद्यार्थी उपस्थिति रिपोर्ट” मेन्यू पर क्लिक कर संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त संस्थाओं तथा विशिष्ट संस्थाओं सहित सभी संबंधित संस्थाओं में प्रवेशित छात्र-छात्राओं की जानकारी पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएगी। साथ ही प्रत्येक माह की विद्यार्थियों की उपस्थिति भी आगामी माह की 10 तारीख तक पोर्टल पर अपडेट एवं प्रदर्शित की जाएगी। इसी पोर्टल के “नया क्या है” टैब के माध्यम से शासन की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति तथा जनजाति विद्यार्थी उत्कर्ष योजना (पूर्व में जवाहर उत्कर्ष योजना) के अंतर्गत लाभान्वित छात्र-छात्राओं की जानकारी भी प्राप्त की जा सकेगी। विभाग की इस पहल से विद्यार्थियों से संबंधित जानकारी आमजन के लिए सहज रूप से उपलब्ध होगी तथा आश्रम-छात्रावासों के संचालन एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।