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पटना में छात्रों पर लाठीचार्ज, दौड़ाकर पीटा:पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल, वाटर कैनन चली, CRPF से झड़प, TRE-4 एग्जाम में बदलाव की मांग

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पटना, एजेंसी। BPSC TRE-4 में PT-मेन, नेगेटिव मार्किंग हटाने और 100% डोमिसाइल की मांग को लेकर पटना के गर्दनीबाग में छात्रों का आंदोलन जारी है। मंगलवार को ऑल बिहार स्टूडेंट यूनियन (ABSU) के छात्र CM हाउस का घेराव करने निकले।

छात्रों को रोकने के लिए जेपी गोलंबर पर पुलिस के साथ-साथ CRPF जवानों को भी तैनात किया गया, लेकिन छात्र बैरिकेडिंग तोड़ते हुए डाकबंगला पहुंच गए। इस दौरान छात्रों की CRPF जवानों के साथ धक्का-मुक्की हुई।

प्रदर्शन के दौरान एक छात्र का सिर फट गया, जबकि एक छात्रा बेहोश हो गई। पुलिस ने छात्रों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पानी की बौछार के बीच प्रदर्शन कर रहे छात्र शैंपू लगाकर नहाते भी दिखे।

कुछ छात्रों ने पुलिस की ओर पत्थरबाजी भी की, जिसमें टाउन DSP कामाख्या नारायण सिंह घायल हो गए। कई पुलिसकर्मियों को भी चोट लगी है। हालात बिगड़ता देख पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। कुछ छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया।

पुलिस ने कुछ छात्रों को हिरासत में भी लिया है। छात्रों के प्रदर्शन के बीच बख्तरबंद गाड़ी भी बुलाई गई। इस गाड़ी का इस्तेमाल आमतौर पर नक्सल प्रभावित इलाकों में किया जाता है। पटना के गर्दनीबाग में छात्र 18 अगस्त से धरने पर बैठे हैं।

छात्रों के CM हाउस घेराव की तस्वीरें…

छात्र को घसीटकर ले जाती पुलिस।

छात्र को घसीटकर ले जाती पुलिस।

छात्रों के प्रदर्शन के बीच बंकर गाड़ी बुलाई गई है।

छात्रों के प्रदर्शन के बीच बंकर गाड़ी बुलाई गई है।

डाकबंगला चौराहे पर लोहे की शील्ड लगाकर छात्रों को रोका गया।

डाकबंगला चौराहे पर लोहे की शील्ड लगाकर छात्रों को रोका गया।

छात्रों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।

छात्रों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।

पानी की बैछार के दौरान छात्र शैंपू लगाकर नहाने लगे।

पानी की बैछार के दौरान छात्र शैंपू लगाकर नहाने लगे।

जेपी गोलंबर पर छात्र बैरिकेडिंग लेकर भागने लगे।

जेपी गोलंबर पर छात्र बैरिकेडिंग लेकर भागने लगे।

जेपी गोलंबर पर छात्र बैरिकेडिंग पर चढ़ गए।

जेपी गोलंबर पर छात्र बैरिकेडिंग पर चढ़ गए।

‘हाथी चले बाजार..कुत्ते भौंके हजार’, बयान पर BPSC ने माफी मांगी

सोमवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजेश कुमार सिंह से गर्दनीबाग में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर कहा था कि “एक कहावत आपने सुना होगा, हाथी चले बाजार तो कुत्ते भौंके हजार।”

उनके इस बयान के बाद प्रदर्शन कर रहे छात्र भड़क गए। एक बार कॉकरोच बोला गया था, तो प्रधान जी चले गए। अब सचिव की नौकरी जाएगी। विवाद बढ़ने के बाद BPSC एग्जाम कंट्रोलर ने वीडियो जारी कर माफी मांग ली है।

वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने BPSC के एग्जाम कंट्रोलर राजेश कुमार सिंह को सस्पेंड करने के निर्देश दिए हैं।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट बोला- स्कूल में हिजाब पहनने की इजाजत नहीं:सेक्युलरिज्म के लिए यूनिफॉर्म जरूरी, नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज

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प्रयागराज, एजेंसी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूलों में हिजाब पहनने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने सोमवार को कहा स्कूल में यूनिफॉर्म के नियम का पालन करना जरूरी है। इससे बच्चों में बराबरी की भावना रहती है। स्कूल की अपनी पहचान भी बनती है।

हाईकोर्ट ने कहा, यूनिफॉर्म की बदौलत बिना किसी धार्मिक भेदभाव वाला माहौल बना रहता है। इसलिए कोई भी छात्र या छात्रा स्कूल के तय किए गए ड्रेस कोड को बदलने की जिद नहीं कर सकती।

कोर्ट ने कहा-

स्कूल में व्यक्तिगत आधार पर हिजाब पहनने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। यह यूनिफॉर्म के विचार के खिलाफ होगा। इससे स्कूल के अनुशासन को तय करने का अधिकार संस्थान के बजाय अलग-अलग छात्रों के हाथ में चला जाएगा।

जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिविजन बेंच ने इसके साथ ही नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज कर दी। इसमें स्कूल के तय ड्रेस कोड के साथ हिजाब पहनकर कक्षा में बैठने की अनुमति मांगी गई थी।

स्कूलों में हिजाब विवाद कर्नाटक से शुरू हुआ

कर्नाटक में हिजाब विवाद जनवरी 2022 में उडुपी के एक सरकारी कॉलेज से शुरू हुआ। कुछ मुस्लिम छात्राओं ने हिजाब पहनकर कक्षा में बैठने की मांग की, जबकि कॉलेज प्रशासन ने इसे यूनिफॉर्म नियम के खिलाफ बताया। इसके बाद विरोध दूसरे कॉलेजों तक पहुंचा और कुछ जगह भगवा शॉल पहनकर जवाबी प्रदर्शन हुए।

15 मार्च 2022 को कर्नाटक हाईकोर्ट ने छात्राओं की याचिका खारिज करते हुए कहा कि हिजाब इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है और स्कूल के तय ड्रेस कोड का पालन कराया जा सकता है।

हिजाब पर सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी पेंडिंग

हिजाब विवाद पर 13 अक्टूबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच का फैसला एकमत नहीं था। दोनों जजों की राय अलग रही।

जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा। उनके मुताबिक स्कूल का ड्रेस कोड सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होता है और हिजाब को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा साबित नहीं किया गया।

वहीं जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कहा कि इस मामले में यह तय करना जरूरी ही नहीं है कि हिजाब अनिवार्य धार्मिक प्रथा है या नहीं। उनके मुताबिक छात्रा की आस्था और पसंद को अनुच्छेद 19 और 25 के तहत देखा जाना चाहिए।

अनुच्छेद 19: अभिव्यक्ति की आजादी देता है। पहनावे को भी अभिव्यक्ति से जोड़कर अधिकार का दावा किया जा सकता है, लेकिन इस पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

अनुच्छेद 25: धर्म मानने और उसका पालन करने की आजादी देता है, लेकिन यह अधिकार पूरी तरह असीमित नहीं है।

इसके बाद मामले को CJI की बैंच में भेजा गया था। हालांकि, 4 साल से सुनवाई नहीं हुई है।

इस्लाम में हिजाब की बात कहां से आई?

कुरान में महिलाओं के पहनावे और पर्दे से जुड़ी सबसे अहम बातें सूरह अन-नूर की आयत 31 और सूरह अल-अहजाब की आयत 59 में मिलती हैं।

सूरह अन-नूर 24:31: महिलाओं से निगाहें नीची रखने, पाकदामनी की हिफाजत करने और अपनी सजावट न दिखाने को कहा गया है। इसी आयत में ‘खुमुर’ यानी सिर ढंकने वाले कपड़े को सीने पर डालने की बात कही गई है।

कुरान में इसके पीछे की वजह क्या थी?

1. पहचान और सुरक्षा

सूरह अल-अहजाब 33:59 में बाहरी कपड़ा डालने की वजह यह बताई गई है कि महिलाओं को पहचाना जाए और उन्हें परेशान न किया जाए। कुरान 33:59

2. निजी जीवन की मर्यादा

सूरह अल-अहजाब 33:53 में पैगंबर की पत्नियों से बात या कुछ मांगने के लिए पर्दे की आड़ रखने की बात कही गई है। इसी आयत में इसे दिलों की पवित्रता के लिए बेहतर बताया गया है। कुरान 33:53

3. सिर्फ महिलाओं के लिए नियम नहीं

कुरान की सूरह अन-नूर 24:30 में पहले पुरुषों को निगाहें नीची रखने और अपनी पाकदामनी की हिफाजत करने का निर्देश दिया गया है।

अब सिलसिलेवार पूरा मामला

  • याचिका लगाने वाली छात्रा ने प्रयागराज के एक निजी स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ती है। उसने अपनी मां के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। छात्रा का तर्क था कि वह कक्षा 6 से 10 तक हिजाब पहनकर ही स्कूल में पढ़ाई करती रही है। कभी कोई आपत्ति नहीं जताई गई। छात्रा ने याचिका के साथ पुराने पहचान पत्र और स्कूल की ग्रुप फोटो भी लगाई थी।
  • छात्रा ने कहा- वह 11वीं कक्षा में भी हिजाब पहनकर ही स्कूल जाना चाहती है, लेकिन परमिशन नहीं मिल रही। हमने डीएम से भी शिकायत की, जिस पर जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ने रिपोर्ट मांगी। स्कूल प्रिंसिपल ने साफ किया कि यह शिक्षा संस्थान है, जहां सभी छात्रों के लिए एक समान ड्रेस कोड है। किसी एक छात्रा को अलग छूट देने से स्कूल की व्यवस्था प्रभावित होगी।
  • याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि हिजाब पहनना उसकी धार्मिक मान्यता से जुड़ा है। इसे पहनने से उसे निजता, व्यक्तिगत आजादी और बोलने की आजादी जैसे मौलिक अधिकार प्राप्त होते हैं। ऐसे में स्कूल को निर्देश दिया जाए कि उसे हिजाब पहनने से न रोके।
  • कोर्ट बोला- ड्रेस तय करने का हक सिर्फ स्कूल प्रशासन के पास
  • कोर्ट ने कहा- जब तक स्कूल का ड्रेस कोड सभी बच्चों के लिए एक जैसा है, सही मंशा से बनाया गया है और किसी के साथ भेदभाव नहीं करता, तब तक ड्रेस क्या होगी यह तय करने का पूरा हक सिर्फ स्कूल प्रशासन के पास है। अगर स्कूल ने पहले कभी हेडस्कार्फ (हिजाब) पहनने की छूट दी भी थी, तो इसका मतलब यह नहीं है कि यह छात्राओं का हमेशा के लिए पक्का अधिकार बन गया। स्कूल प्रशासन अपने नियमों में बदलाव करने के लिए स्वतंत्र है। वह पुरानी छूट को जारी रखने के लिए मजबूर नहीं है।
  • कोर्ट ने कहा- हिजाब पहनना इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं
  • कोर्ट ने कहा- जहां भी यह मुद्दा उठा है, हाईकोर्ट की राय एक रही है कि महिलाओं के लिए हिजाब पहनना इस्लाम का कोई जरूरी हिस्सा नहीं है। ऐसा नहीं है कि इसके बिना धर्म खतरे में पड़ जाएगा या इसे न पहनने पर महिला धर्म से बाहर हो जाएगी। इसे साबित करने के लिए कोई तथ्य या सबूत भी पेश नहीं किए गए हैं।
  • कोर्ट ने कहा- आस्था पर रोक नहीं, नियमों के पालन की उम्मीद कर रहे
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केरल, बॉम्बे और कर्नाटक हाईकोर्ट के पुराने फैसले का जिक्र किया। ‘फातिमा तस्नीम बनाम केरल राज्य’ के मामले में कोर्ट ने कहा था कि एक तरफ छात्र या छात्रा का अपनी पसंद के कपड़े पहनने का अधिकार है, तो दूसरी तरफ स्कूल या संस्था का अपना नियम-कानून चलाने का अधिकार है। जब इन दोनों अधिकारों के बीच टकराव या विवाद होता है, तो व्यक्तिगत पसंद के बजाय संस्था के बड़े हित और अनुशासन को ज्यादा महत्व दिया जाएगा।
  • सुप्रीम कोर्ट में ‘आयशा शिफा बनाम कर्नाटक राज्य’ मामले में दो जजों की राय बंटी हुई थी, इसलिए इस मुद्दे पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। कोर्ट ने कहा कि स्कूल छात्रा की आस्था पर कोई रोक नहीं लगा रहा, बल्कि केवल संस्थागत अनुशासन और यूनिफॉर्म के पालन की अपेक्षा कर रहा है। इसके बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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दिल्ली-NCR में लगातार दूसरे दिन तेज बारिश, गुरुग्राम में वर्क-फ्रॉम-होम:यूपी में 4 की मौत, एमपी समेत 15 राज्यों में ऑरेंज अलर्ट

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भोपाल/पटना/जयपुर/लखनऊ, एजेंसी। दिल्ली-NCR में मंगलवार सुबह लगातार दूसरे दिन तेज बारिश हुई है। एम्स फ्लाईओवर, कनॉट प्लेस, ITO और आरके पुरम समेत कई इलाकों में 3-4 फीट तक पानी भर गया। मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है।

दिल्ली-गुरुग्राम को जोड़ने वाले NH-48 पर महिपालपुर के पास ट्रैफिक जाम लगा। दिल्ली एयरपोर्ट ने यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की। सोमवार को करीब 390 फ्लाइट्स लेट हुईं, 15 डायवर्ट और 26 कैंसिल की गईं।

गुरुग्राम में कई जगह 3 फीट तक पानी भरने के बाद मंगलवार को सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में वर्क फ्रॉम होम लागू किया गया। सोमवार को कई स्कूल बसें 3-6 घंटों तक पानी में फंसी रहीं।

यूपी के अयोध्या समेत 15 शहरों में बारिश हो रही है। वाराणसी में सोमवार रात 8 बजे से बारिश जारी है और स्कूल बंद कर दिए गए हैं। बारिश से जुड़ी घटनाओं में 4 लोगों की मौत हुई। मथुरा में सड़कें और रिहायशी इलाके जलमग्न हैं।

मध्य प्रदेश के भोपाल समेत कई जिलों में भी तेज बारिश हुई। विदिशा के बाजार में पानी भर गया और भोपाल में ट्रैफिक प्रभावित हुआ। प्रदेश में अब तक 28.75 इंच बारिश हुई है।

मौसम विभाग ने 27 अगस्त तक एमपी, यूपी, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, उत्तराखंड और केरल समेत 15 राज्यों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति

देशभर से मौसम की तस्वीरें

दिल्ली के संगम विहार इलाके में सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया। स्कूली बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

दिल्ली के संगम विहार इलाके में सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया। स्कूली बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

हरियाणा के गुरुग्राम में मूसलाधार बारिश में सुभाष चौक पर फंसी स्कूल बस में मौजूद बच्चे।

हरियाणा के गुरुग्राम में मूसलाधार बारिश में सुभाष चौक पर फंसी स्कूल बस में मौजूद बच्चे।

उत्तरकाशी में खरादी झूला पुल के पास यमुना नदी के तेज बहाव में फंसे व्यक्ति का रेस्क्यू किया गया।

उत्तरकाशी में खरादी झूला पुल के पास यमुना नदी के तेज बहाव में फंसे व्यक्ति का रेस्क्यू किया गया।

राजस्थान के करौली में पानी भरने से व्यापारियों ने दुकानें बंद कर दी थीं।

राजस्थान के करौली में पानी भरने से व्यापारियों ने दुकानें बंद कर दी थीं।

बिहार में भागलपुर में राघोपुर-नरकटिया तटबंध टूट गया है। इससे करीब 10 हजार की आबादी प्रभावित हुई है।

बिहार में भागलपुर में राघोपुर-नरकटिया तटबंध टूट गया है। इससे करीब 10 हजार की आबादी प्रभावित हुई है।

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राहुल-खड़गे की मोदी को चिट्ठी- जाति जनगणना के सवाल बदलें:कहा- इसमें पिछड़ा वर्ग शब्द नहीं, बिहार-तेलंगाना जैसी प्रक्रिया अपनाने की मांग

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नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने जाति जनगणना में जातियों के नाम दर्ज करने और डेटा जुटाने के तरीके का विरोध किया है।

उन्होंने पीएम मोदी को लेटर लिखकर जनगणना में पूछे जाने वाले सवाल बदलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसे बनाने से पहले राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से सलाह ली जानी चाहिए।

जनगणना के सवालों में पिछड़ा वर्ग शब्द नहीं होने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इससे देश में ओबीसी आबादी का सही आंकड़ा सामने आने में परेशानी हो सकती है। तेलंगाना और बिहार जैसी प्रक्रिया अपनाने की मांग की है।

गलत आंकड़ों का असर नीतियों पर पड़ेगा, लेटर की प्रमुख बातें…

  1. जाति का नाम पूछने के लिए सवाल रखने से एक ही जाति अलग-अलग नामों या उपजातियों के नाम से दर्ज हो सकती है। इससे जातियों की सही संख्या पता करना और आंकड़ों की तुलना करना मुश्किल होगा।
  2. अगर एक ही जाति कई नामों से दर्ज हुई तो उसकी आबादी का आंकड़ा गलत हो सकता है। इसका असर पिछड़े, अति पिछड़े और अन्य वंचित समुदायों के लिए बनाई जाने वाली योजनाओं पर पड़ेगा।
  3. जातियों की पहचान और संख्या दर्ज करने की प्रक्रिया एक जैसी होनी चाहिए, ताकि देश में सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आंकड़ा मिल सके। जातियों के नाम दर्ज करने के लिए तय सूची या ड्रॉप-डाउन विकल्प देने की मांग की है।
  4. इसमें सरकारी जाति सूचियों और भारतीय मानवशास्त्र सर्वेक्षण के आधार पर नाम शामिल किए जा सकते हैं। तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षणों में भी ऐसी सूचियों का इस्तेमाल किया गया था।

जनगणना में पूछे जाएंगे 40 सवाल

14 अगस्त को जनगणना-2027 में पूछे जाने वाले 40 सवालों की लिस्ट जारी की गई थी। लोगों से SC, ST या अन्य जाति के बारे में पूछा जाएगा।

आजादी के बाद यह पहली बार होगा जब सभी समुदायों की जाति की जानकारी जनगणना में दर्ज की जाएगी।

इससे पहले 2011 की जनगणना के फॉर्म में 29 सवाल थे। इसमें जाति से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ SC/ST का विकल्प था।

जनगणना-2027 के सवालों की लिस्ट में जाति से जुड़ा सवाल नंबर 10 पर है, जिसमें SC/ST के साथ जाति शब्द भी जोड़ा गया है।

खास बात यह है कि लोगों से कोविड वैक्सीन कहां लगवाई थी, यह सवाल भी पूछा जाएगा। इसके साथ मोबाइल नंबर, आधार, वोटर ID और बैंक अकाउंट से जुड़े सवाल भी होंगे।

देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी

जनगणना 2027 देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। डेटा डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाएगा और लोगों को खुद अपनी जानकारी देने यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी मिलेगा। जनगणना की कानूनी प्रक्रिया सेंसस एक्ट, 1948 और सेंसस रूल्स, 1990 के तहत होगी।

केंद्र के मुताबिक, लोगों की दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सेंसस एक्ट की धारा 15 के तहत इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, RTI के तहत नहीं दिया जा सकता और किसी कोर्ट में सबूत के तौर पर भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जनगणना पहले 2021 में होने वाली थी। इसे कोरोना महामारी के कारण टाल दिया गया था।

जनगणना के लिए 11,718 करोड़ का बजट मंजूर

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11,718.24 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी है। जनगणना पूरे देश में केंद्र के समन्वय से होगी। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें इसके क्रियान्वयन में मदद करेंगी।

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