शिक्षक नई पीढ़ी के निर्माता, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री साय
लोकभवन में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन
प्रदेश के 63 उत्कृष्ट शिक्षक राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित, चार शिक्षकों को मिला राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार
युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं, शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार पर सरकार का विशेष जोर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
कोरबा जिले के कामता प्रसाद जायसवाल को डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार
रायपुर 5 सितंबर 2026। राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। समारोह में वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश के 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। चार उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षकों के नामों की घोषणा भी की।
समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेन डेका ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा और शिक्षक की भूमिका भी व्यापक हो रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में शिक्षकों और विद्यार्थियों का नई तकनीकों से परिचित होना आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी तकनीक का विवेकपूर्ण, जिम्मेदार और मानवीय मूल्यों के अनुरूप उपयोग है। उन्होंने कहा कि AI हमारा सहायक बने, हमारा नियंत्रक नहीं। शिक्षक विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग ज्ञान अर्जित करने, नवाचार करने और अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए प्रेरित करें।
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि आज गूगल और डिजिटल तकनीक के माध्यम से हमारे पास सूचनाओं का विशाल संसार उपलब्ध है। इसके बावजूद हमें यह ध्यान रखना होगा कि तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता स्वतंत्र चिंतन और बौद्धिक विकास को प्रभावित न करे। दुनिया के अनेक देशों में विद्यार्थियों द्वारा स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर गंभीर विचार-विमर्श हो रहा है। तकनीक हमें जानकारी उपलब्ध करा सकती है, लेकिन संस्कार, संवेदना, अनुशासन, प्रेरणा और जीवन की सही दिशा गुरु से ही मिलती है। इसलिए बदलते समय में शिक्षक की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक, कौशल आधारित, बहुभाषी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है। आने वाले समय में शिक्षा के स्वरूप में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। ऐसे में शिक्षकों को निरंतर अपने ज्ञान और कौशल को अद्यतन करना होगा। साथ ही विद्यार्थियों की रुचि और प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही विषय और करियर चुनने में मार्गदर्शन देना होगा। विद्यार्थियों की काउंसलिंग भी शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका का हिस्सा है।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षण केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक महान और गरिमामय दायित्व है। शिक्षक अपने ज्ञान के साथ-साथ अपने आचरण से भी विद्यार्थियों को शिक्षित करते हैं। बच्चे अपने शिक्षकों को आदर्श के रूप में देखते हैं, इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निर्वहन करना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी कैसे आगे बढ़े, उसकी प्रतिभा कैसे निखरे और उसका भविष्य कैसे बेहतर बने, यह शिक्षक की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा करते हुए राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि शिक्षक दिवस उन्हें प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की अपनी यात्रा की याद दिलाता है। पहले शिक्षक और विद्यार्थी के बीच आदर, आत्मीयता और विश्वास का अत्यंत गहरा संबंध होता था। सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षक पूरी सेवा भावना और समर्पण के साथ विद्यार्थियों का भविष्य संवारते थे। यही समर्पण और आत्मीयता शिक्षक-विद्यार्थी संबंध की वास्तविक शक्ति है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता। शिक्षक विद्यार्थी के व्यक्तित्व, सोच और भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता और विशेष प्रतिभा को पहचानें तथा उन्हें जीवन में सही दिशा चुनने के लिए प्रेरित करें।
राज्यपाल श्री डेका ने शासकीय सेवा में स्थानांतरण को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि जहां भी दायित्व मिले, उसे सहजता से स्वीकार कर पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने सम्मानित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और समर्पण से छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।
शिक्षा का उद्देश्य सक्षम नागरिक और श्रेष्ठ समाज का निर्माण : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को शुभकामनाएं दीं और राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान शिक्षकों के समर्पण, कठिन परिश्रम, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान है। शिक्षक वास्तव में राष्ट्र और नई पीढ़ी के निर्माता हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रही है। हमारे यहां शिक्षा का उद्देश्य कभी केवल डिग्री या नौकरी प्राप्त करना नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति को ज्ञानवान, संस्कारवान, सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बनाना रहा है। ऐसी शिक्षा ही व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और प्रत्येक बच्चे तक बेहतर शैक्षणिक अवसर पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करते हुए शिक्षा को संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, सामाजिक और भाषायी विविधता को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में स्थानीय आवश्यकताओं को भी महत्व दिया जा रहा है। बस्तर अंचल में बच्चों को उनकी स्थानीय बोली के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा देने की पहल की गई है। इससे बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज और प्रभावी बन रही है। शासकीय विद्यालयों में पैरेंट्स-टीचर मीट को बढ़ावा देकर अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा और विद्यालय की गतिविधियों से सक्रिय रूप से जोड़ा जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के 341 विद्यालयों का चयन पीएम श्री योजना के अंतर्गत किया गया है। इन विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद के नाम पर 150 विद्यालय प्रारंभ किए जा रहे हैं। शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को भी सरकार ने प्राथमिकता के साथ पूरा किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर जैसे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं। इन प्रयासों से दूरस्थ अंचलों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का हमारा लक्ष्य है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा विभाग तथा हमारे शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। आज जिन बच्चों को शिक्षक ज्ञान, संस्कार और कौशल दे रहे हैं, वही आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ और देश के विकास का नेतृत्व करेंगे। इसलिए एक शिक्षक का योगदान केवल एक विद्यार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों और पूरे समाज पर पड़ता है।
AI आधारित स्मार्ट स्कूलों के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा : स्कूल शिक्षा मंत्री
समारोह के विशिष्ट अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार शिक्षा में आधुनिक तकनीक और नवाचार के उपयोग को निरंतर बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में AI आधारित स्मार्ट स्कूल विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए विविध गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में नवाचार के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
स्कूल शिक्षा मंत्री श्री यादव ने इस अवसर पर आगामी वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षक-शिक्षिकाओं के नामों की घोषणा की और उन्हें शुभकामनाएं दीं।
चार शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार
राज्य स्तरीय समारोह में चार उत्कृष्ट शिक्षकों को विशिष्ट राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के राजेश कुमार प्रजापति को डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार, कोरबा जिले के कामता प्रसाद जायसवाल को डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार, दुर्ग जिले की श्रीमती प्रज्ञा सिंह को डॉ. मुकुटधर पाण्डेय स्मृति पुरस्कार तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की श्रीमती प्रियंका गोस्वामी को श्री गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया।
इसके साथ ही प्रधान पाठक, व्याख्याता, व्याख्याता एल.बी., शिक्षक एल.बी., सहायक शिक्षक तथा सहायक शिक्षक एल.बी. संवर्ग के कुल 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सम्मानित शिक्षकों के योगदान और नवाचारी प्रयासों की सराहना करते हुए अतिथियों ने उनसे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने में निरंतर योगदान देने का आह्वान किया।
समारोह में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। संचालक लोक शिक्षण श्री ऋतुराज रघुवंशी ने आभार प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, स्कूल शिक्षा विभाग के विशेष सचिव संतोष देवांगन सहित विभागीय अधिकारी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के डिजिटल संगठन चुनाव में युवाओं की भागीदारी के आंकड़ों ने संगठन के सामने एक अलग तस्वीर रखी है। प्रदेश की सभी 90 विधानसभा सीटों में 4 सितंबर तक 3.95 लाख से ज्यादा युवाओं ने WithIYC ऐप पर पंजीकरण कराया, लेकिन इनमें से 1.86 लाख और 799 ने ही 75 रुपए सदस्यता शुल्क का भुगतान किया।
यानी कुल पंजीकरण में से 47.29% ही भुगतान वाले सदस्य बन सके। 52.71% पंजीकरण ऐसे रहे, जिनमें फीस जमा नहीं हुई। चुनाव में मान्य सदस्यता के लिए भुगतान जरूरी होने के कारण ये पंजीकरण सक्रिय सदस्यता में परिवर्तित नहीं हो सके। आंकड़ों के विधानसभा और जिला स्तर पर विश्लेषण से क्षेत्रवार दिलचस्प अंतर सामने आया है।
अंबिकापुर विधानसभा पूरे प्रदेश में सदस्यता पंजीकरण और भुगतान दोनों में सबसे आगे रही। यहां 16,438 पंजीकरण हुए, जिनमें 8,928 ने फीस जमा की। यानी 54.31% पंजीकरण भुगतान वाले सदस्यों में बदले।
सरगुजा में सबसे ज्यादा सदस्य
जिलों में सरगुजा 26,821 पंजीकरण के साथ पहले नंबर पर रहा। यहां 12,701 युवाओं ने फीस जमा की। जांजगीर-चांपा 25,403 पंजीकरण के साथ दूसरे और महासमुंद 22,611 के साथ तीसरे स्थान पर रहा। हालांकि फीस भुगतान के मामले में महासमुंद का प्रदर्शन ज्यादा मजबूत रहा। यहां 12,287 सदस्यों ने भुगतान किया, जो कुल पंजीकरण का 54.34% है।
शहरों में फीस जमा कराने की क्षमता ज्यादा
डेटा का एक और अहम संकेत यह है कि शहरी क्षेत्रों में पंजीकरण को भुगतान वाली सदस्यता में बदलने की दर अपेक्षाकृत बेहतर रही। कोरबा सिटी में 6466 पंजीकरण में से 4492 ने भुगतान किया। यह 69.47% है। भिलाई सिटी में 15960 में से 10862 यानी 68.06%, जबकि रायपुर सिटी में 16659 में से 10112 यानी 60.70% ने फीस जमा की।
धरमजयगढ़ में 665 पंजीकरण, फीस सिर्फ 28 ने दी
सबसे बड़ा अंतर धरमजयगढ़ विधानसभा में दिखाई देता है। यहां 665 युवाओं ने पंजीकरण कराया, लेकिन सिर्फ 28 ने 75 रुपए का भुगतान किया। भुगतान का अनुपात महज 4.21% रहा, जो प्रदेश में सबसे कम है। दूसरी ओर सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा में कुल पंजीकरण सिर्फ 78 रहे और इनमें 34 ने भुगतान किया। जिलों में बलरामपुर सबसे कमजोर रहा। यहां 6,504 पंजीकरण के बावजूद सिर्फ 1,172 सदस्यों ने फीस जमा की।
आंकड़े संगठन के लिए भी संकेत
युवा कांग्रेस का यह चुनाव पहली बार बड़े पैमाने पर डिजिटल प्रक्रिया से हो रहा है। इसलिए पंजीकरण और वास्तविक भुगतान वाले सदस्यों के बीच इतना बड़ा अंतर संगठन के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत है। सिर्फ पंजीकरण को युवाओं की सक्रिय भागीदारी मानना सही नहीं होगा।
चुनाव में वास्तविक प्रभाव उन सदस्यों का होगा, जिन्होंने प्रक्रिया पूरी कर फीस जमा की है। यही वजह है कि अब उम्मीदवारों की ताकत आंकने के लिए कुल रजिस्ट्रेशन से ज्यादा पैड मेंबर महत्वपूर्ण होंगे।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई तेज कर दी है। एजेंसी ने कथित कैश सिंडिकेट की पड़ताल के लिए करीब 30 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है।
इनमें विवादित अभ्यर्थियों के साथ एनजीओ, एक बड़ी कंपनी और रिसार्ट संचालकों से जुड़े लोग भी शामिल हैं। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों से वसूली गई रकम कहां से आई और किन लोगों तक पहुंचाई गई।
ईडी के अधिकारियों ने 30 लोगों को नोटिस जारी किया है।
जमानत पर बाहर आए आरोपियों से फिर पूछताछ
ईडी ने मामले में जमानत पर बाहर चल रहे आरोपियों को भी दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया है। इनमें तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर, टामन सोनवानी के भतीजे साहिल सोनवानी, नितेश सोनवानी, शशांक गोयल और उनकी पत्नी भूमिका कटियार समेत अन्य नाम शामिल हैं।
एजेंसी पूछताछ के जरिए भर्ती प्रक्रिया में कथित लेनदेन और संपर्कों की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है।
सीजीपीएससी के तत्कालीन अधिकारियों पर पेपर बेचने का आरोप है।
नौकरी दिलाने का दावा, 3 करोड़ से ज्यादा वसूली
जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर ने मेडिकल ऑफिसर डॉ. विकास चंद्राकर के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने का कथित नेटवर्क तैयार किया था।
अभ्यर्थियों को परीक्षा के अलग-अलग चरणों में मदद और प्री परीक्षा से इंटरव्यू तक सफलता की गारंटी देने का दावा किए जाने की बात सामने आई है। इसके बदले अभ्यर्थियों से तीन करोड़ रुपए से अधिक रकम वसूले जाने का दावा किया गया है। अब ईडी इस रकम के स्रोत और उसके इस्तेमाल की जांच कर रही है।
CSR फंड के इस्तेमाल की भी आशंका
जांच एजेंसी को आशंका है कि, एक बड़ी कंपनी के CSR फंड का इस्तेमाल कथित रिश्वत की रकम के भुगतान में किया गया। इसी वजह से एनजीओ और रिसार्ट संचालकों से जुड़े वित्तीय लेनदेन भी जांच के दायरे में हैं। फिलहाल ईडी कथित कैश सिंडिकेट में रकम के स्रोत, वितरण और संभावित लाभार्थियों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है।
बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के आरंग तहसील के निस्दा गांव में अवैध खनन और महानदी में मलबा डंप करने के मामले में राज्य शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जनहित याचिका पर राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि मामले में दोषी पाए गए सभी पट्टेदारों की माइनिंग लीज रद्द कर दी गई है।
दरअसल, रायपुर जिले के निस्दा निवासी ओम प्रकाश सेन ने जनहित याचिका लगाई थी, इसमें बताया कि कुछ लोगों द्वारा स्वीकृत लीज क्षेत्र से बाहर जाकर फर्शी पत्थर का अवैध खनन किया जा रहा है।
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण, महानदी में डाला रहा मलबा
याचिका में बताया गया कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया गया है और खनन का मलबा महानदी में फेंका जा रहा है। इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए सक्षम अधिकारियों ने जांच की और पर्यावरण संरक्षण मंडल ने भी हस्तक्षेप करते हुए खनन गतिविधियों को रोकने के निर्देश जारी किए।
सभी लीज रद्द, हाईकोर्ट की निगरानी में है पूरा मामला
राज्य शासन ने कोर्ट को बताया कि, वर्तमान में संबंधित क्षेत्र में कोई भी माइनिंग लीज कार्यरत नहीं है। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि चूंकि राज्य सरकार और पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा पहले ही उचित कदम उठाए जा चुके हैं और पट्टे रद्द हो चुके हैं, इसलिए इस जनहित याचिका में आगे की कार्रवाई की फिलहाल आवश्यकता नहीं है।
इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका को निराकृत कर दिया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने राज्य के अधिकारियों और पर्यावरण संरक्षण मंडल को कड़ी निगरानी रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में लीज क्षेत्र के बाहर कोई भी अवैध खनन या नदी में मलबा डंप करने की घटना पाई जाती है, तो कानून के अनुसार तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।